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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-बांग्लादेश संबंधों का रणनीतिक पुनर्संतुलन

  • 12 Jan 2026
  • 157 min read

यह लेख 04/01/2026 को हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित “Undermining India, Bangladesh relations” शीर्षक वाले लेख पर आधारित है। इस लेख में भारत–बांग्लादेश संबंधों में उत्पन्न हालिया तनावों को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि जल, व्यापार, संपर्क, सुरक्षा और जन-जन संबंध के क्षेत्रों में सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता तथा साझा विकास को सुदृढ़ कर सकता है।

प्रिलिम्स के लिये: तीस्ता नदी विवाद, भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन, मैत्री सेतु 

मेन्स के लिये: भारत-बांग्लादेश संबंध, प्रमुख मुद्दे, मुद्दों के समाधान के उपाय। 

भारत और बांग्लादेश के बीच मुक्ति युद्ध 1971 से उत्पन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा रणनीतिक संबंध हैं, जो व्यापार, कनेक्टिविटी तथा सुरक्षा में निरंतर सहयोग के माध्यम से प्रबल हैं। हाल के वर्षों में, बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है, जो बढ़ती आर्थिक सहभागिता को दर्शाता है। हालाँकि, बांग्लादेश में हाल ही में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध लक्षित हिंसा की घटनाओं और विधि-व्यवस्था की चुनौतियों ने सार्वजनिक एवं कूटनीतिक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, जिससे लोगों के बीच संपर्क व परस्पर धारणाओं पर प्रभाव पड़ा है। खेल कूटनीति में भी कुछ प्रतीकात्मक मतभेद सामने आए हैं, जैसे कि जनवरी 2026 में BCCI द्वारा IPL टीम को बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ को रिहा करने का निर्देश और ढाका द्वारा ICC से बांग्लादेश के T20 विश्व कप मैचों को भारत से कहीं तथा स्थानांतरित करने का अनुरोध।

समयानुसार भारत-बांग्लादेश संबंधों में किस प्रकार परिवर्तन आया है?

  • स्थापना और ‘मुजीब-इंदिरा’ युग (1971-1975): यह संबंध मुक्ति युद्ध 1971 के दौरान भारत के निर्णायक सैन्य तथा राजनयिक समर्थन के साथ शुरू हुए, जिसने साझा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित एक बंधन को मज़बूती दी। 
    • इस अवधि में वर्ष 1972 की मैत्री संधि और वर्ष 1974 के भूमि सीमा समझौते (LBA) पर हस्ताक्षर किये गए, जिन्होंने नए राज्य के लिये प्रारंभिक कानूनी ढाँचा स्थापित किया।
    • इसके अतिरिक्त भारत ने लगभग 1 करोड़ शरणार्थियों को आश्रय दिया, जो प्रारंभिक जन-केंद्रित सहयोग और भारत के साथ सांस्कृतिक बंधन को दर्शाता है।
  • रणनीतिक विचलन और सैन्य शासन (1975-1996): वर्ष 1975 में शेख मजीबुर्रहमान की हत्या के बाद, सैन्य नेतृत्व वाली सरकारों ने भारत के प्रभाव को संतुलित करने के लिये बांग्लादेश की विदेश नीति को चीन/पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंधों की ओर मोड़ दिया।
    • इस युग में भारत-विरोधी रुख, फरक्का बैराज पर विवाद, और पूर्वोत्तर उग्रवादी समूहों की बांग्लादेशी धरती से गतिविधियाँ प्रमुख चिन्ताएँ बनीं।
  • लोकतांत्रिक संक्रमण और "स्वर्ण युग" (1996-2024): वर्ष 1996 में तथा फिर वर्ष 2009–2024 तक लगातार आवामी लीग की सरकार के दौरान संबंधों को "सोनाली अध्याय" (Golden Chapter) के रूप में पुनः परिभाषित किया गया। प्रमुख उपलब्धियों में वर्ष 2015 का भूमि सीमा समझौता (162 एन्क्लेव का आदान-प्रदान) और वर्ष 2014 का समुद्री सीमा समझौते शामिल हैं, जिसने दशकों पुराने क्षेत्रीय मतभेदों को समाप्त किया।
  • नवीन संक्रमण और 2026 का पुनर्संतुलन (2024–वर्तमान): अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने तथा मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के उदय ने "व्यावहारिक पुनर्संतुलन "  के एक चरण की शुरुआत की है। 
    • इसके चलते सांप्रदायिक अस्थिरता में अत्यधिक वृद्धि हुई है। भारत ने हिंदुओं के विरुद्ध लक्षित हिंसा के "बार-बार घटित होने" पर लगातार चिंता व्यक्त की है और उनकी सुरक्षा को एक अप्रतिबंधित मानदंड के रूप में देखा है।
    • इस तनाव ने अल्पसंख्यक अधिकारों को एक केंद्रीय राजनयिक मुद्दा बना दिया है, जिसमें नई दिल्ली त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग करती है, जबकि ढाका इसे अक्सर धार्मिक उत्पीड़न के बजाय "राजनीतिक प्रतिशोध" या "प्रचार" का परिणाम बताता है।

भारत और बांग्लादेश के मध्य प्रमुख समानता के क्षेत्र कौन-से हैं?

  • आर्थिक एवं व्यापारिक सुदृढ़ीकरण : द्विपक्षीय व्यापार और विकास वित्तपोषण एक केंद्रीय स्तंभ बने हुए हैं। भारत-बांग्लादेश व्यापार अत्यधिक मज़बूत रहा है तथा दोनों देशों द्वारा इसे प्राथमिकता दी जाती रही है।
    • वित्तीय वर्ष 2023–24 में द्विपक्षीय व्यापार 14.01 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 12.05 अरब और बांग्लादेश का 1.97 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
      • इसके अतिरिक्त, भारत ने बांग्लादेश को 7–8 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की कई विकास क्रेडिट लाइनें प्रदान की हैं, जो सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और अन्य बुनियादी ढाँचे के निर्माण में सहायक हैं तथा भारत की विकास साझेदारी की दिशा को दर्शाती हैं।
  • संपर्क और परिवहन: भारत-बांग्लादेश भौतिक संपर्क को मज़बूत करने के लिये कई परियोजनाएँ निर्माण और संचालन की अवस्था में पहुँच चुकी हैं।
    • प्रमुख परियोजनाओं में अगरतला–अखौरा रेल लिंक, चिट्टागोंग और मोंगला बंदरगाह का भारतीय कार्गो हेतु उपयोग, हल्दिबारी-चिलाहाटी तथा पेट्रापोल–बेनापोल जैसे पुराने रेल मार्गों का पुनरुद्धार, अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार प्रोटोकॉल के तहत अंतर्देशीय जलमार्ग व्यापार का विस्तार तथा फेनी नदी पर मैत्री सेतु (जो भारत के त्रिपुरा राज्य में सब्रूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है) शामिल हैं।
  • ऊर्जा एवं संसाधन सहयोग: ऊर्जा सहयोग भारत–बांग्लादेश संबंधों का सबसे सफल स्तंभ बनकर उभरा है। इसमें इंडिया–बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के माध्यम से डीज़ल और पेट्रोलियम उत्पादों की प्रत्यक्ष आपूर्ति शामिल है, जिससे परिवहन लागत कम होती है तथा उत्तरी बांग्लादेश के लिये ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
    • बांग्लादेश ने भारत की सरकारी स्वामित्व वाली नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) से 1,80,000 टन डीजल आयात करने की प्रतिबद्धता जताई है।
    • सीमा पार विद्युत व्यापार में लगातार विस्तार हुआ है, जिसमें भारत कई ग्रिड अंतर्संबंधों के माध्यम से विद्युत का निर्यात कर रहा है और उप-क्षेत्रीय विद्युत प्रवाह को सुविधाजनक बना रहा है, जिसमें हाल ही में हुई त्रिपक्षीय व्यवस्था भी शामिल है जिसके तहत नेपाल भारतीय पारेषण नेटवर्क के माध्यम से बांग्लादेश को पनबिजली की आपूर्ति करता है। 
      • यह दीर्घकालिक सहयोग मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट जैसी परियोजनाओं में भी परिलक्षित होता है, जिसे भारतीय सहायता से विकसित किया गया है और पूर्वी भारत एवं बांग्लादेश के बीच ग्रिड संपर्क को भी मज़बूत किया गया है।
  • जन-जन संपर्क, संस्कृति और शिक्षा: सांस्कृतिक कूटनीति तथा जन-जन संपर्क जैसी पहलें भारत-बांग्लादेश संबंधों को गहराई प्रदान करती हैं।
    • बांग्लादेशी छात्रों के लिये भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की छात्रवृत्ति जैसे कार्यक्रम रोजमर्रा की सद्भावना को बनाए रखते हैं।
    • विश्वभारती विश्वविद्यालय और बांग्लादेशी संस्थानों के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम तथा उदारीकृत वीज़ा व्यवस्थाओं (जब लागू हों) के तहत सीमा पार यात्रा, साझा भाषायी और सांस्कृतिक विरासत को मज़बूत करती है।
      • इसके अलावा, ढाका में स्थित इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र प्रदर्शनियों, उत्सवों और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय कला, संस्कृति, भाषा तथा साझा विरासत को बढ़ावा देकर लोगों के बीच संबंधों के लिये एक महत्त्वपूर्ण सेतु का काम करता है।
    • चिकित्सा पर्यटन भारत और बांग्लादेश के बीच लोगों के आपसी संबंधों का एक प्रमुख चालक बन गया है, जिसमें हर साल हज़ारों बांग्लादेशी मरीज भारतीय शहरों में सुलभ तथा उच्च गुणवत्ता वाले उपचार की खोज में आते हैं।
  • सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग: भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा सहयोग औपचारिक गठबंधनों के बजाए विश्वास तथा साझा हितों पर आधारित हैं।
    • भारत विरोधी उग्रवादी समूहों के विरुद्ध बांग्लादेश की ऐतिहासिक कार्रवाई ने भारत के पूर्वोत्तर में सुरक्षा और स्थिरता में काफी सुधार किया है, जिससे त्रिपुरा, असम तथा मिज़ोरम जैसे राज्यों के विकास में मदद मिली है। 
    • सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच समन्वित सीमा प्रबंधन ने तस्करी, मानव तस्करी तथा सीमा तनाव को कम किया है।
    • क्रेडिट लाइनों, प्रशिक्षण और उपकरण सहायता के माध्यम से रक्षा सहयोग का विस्तार हुआ है, जबकि सम्प्रीति जैसे संयुक्त अभ्यास अंतरसंचालनीयता, आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता तथा पारस्परिक विश्वास को मज़बूत करते हैं।
  • राजनीतिक और राजनयिक संबंध : भारत और बांग्लादेश सामयिक संघर्ष के बजाय साझेदारी पर केंद्रित सक्रिय उच्च स्तरीय कूटनीति जारी रखे हुए हैं। 
    • "मैत्री सैटेलाइट " सहयोग का अनावरण और हरित/डिजिटल/नीली अर्थव्यवस्था साझेदारी के लिये एक साझा दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि कूटनीति का उपयोग क्षेत्रीय सहयोग (अंतरिक्ष, जलवायु, डिजिटल) को बढ़ावा देने के लिये किया जा रहा है। 
      • हालाँकि हालिया राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों ने इस सहयोग पर दबाव डाला है, जिससे साझेदारी में विश्वास बनाए रखने तथा गति को बरकरार रखने के लिये समय पर पुनर्संतुलन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में संघर्ष के क्षेत्र कौन-कौन से हैं?

  • नदी जल बँटवारा विवाद: भारत-बांग्लादेश संबंधों में जल बँटवारा सबसे स्थायी संरचनात्मक समस्या बना हुआ है।
    • संयुक्त नदी आयोग के तहत 50 से अधिक साझा नदियों पर कार्यात्मक सहयोग होने के बावजूद, तीस्ता नदी का जल-बँटवारा समझौता अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
      • इस विलंब से बांग्लादेश में असमान लाभ-साझाकरण की धारणाएँ और गहरी हो जाती हैं, विशेषकर शुष्क मौसम के दौरान जब उत्तरी ज़िलों को सिंचाई के गंभीर संकट, फसल के नुकसान और आजीविका की असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।
    • दिसंबर 2026 में गंगा जल बँटवारा संधि 1996 की समाप्ति ने कम राजनयिक विश्वास के माहौल में जल संसाधन प्रबंधन को एक संवेदनशील और समयबद्ध चुनौती बना दिया है।
  • राजनीतिक संवेदनशीलताएँ: द्विपक्षीय संबंध समय-समय पर घरेलू राजनीतिक आख्यानों के माध्यम से प्रभावित होते हैं, विशेष रूप से दोनों देशों में चुनाव चक्र के दौरान। 
    • बांग्लादेश में, विपक्षी ताकतें कभी-कभी भारत को एक दबंग या असमान साझेदार के रूप में प्रस्तुत करती हैं और संप्रभुता एवं जल-बँटवारे के मुद्दों का उपयोग जनमत निर्माण के लिये करते हैं। 
    • भारत में विशेषकर सीमावर्ती राज्यों में, चुनावी राजनीति प्रवासन, सीमा प्रबंधन और नदी-जल बँटवारे जैसे मुद्दों पर रुख को तथा कठोर बना सकती है, जिससे केंद्र स्तर पर राजनयिक अनुकूलन सीमित हो जाता है। 
    • इसके अलावा, भारत में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की उपस्थिति एक गंभीर राजनयिक समस्या बन गई है, क्योंकि ढाका की अंतरिम सरकार उनकी उपस्थिति को घरेलू न्याय में बाधा के रूप में देखती है।
  • सीमा प्रबंधन चुनौतियाँ: हालाँकि सहयोग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, फिर भी 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा जटिल और बाधारहित बनी हुई है तथा अब भी तस्करी, मानव तस्करी, मवेशी व्यापार विवाद ववन कभी-कभार बल प्रयोग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
    • ये मुद्दे सामाजिक–आर्थिक असमानताओं, घनी आबादी, नदी क्षेत्रों और असुरक्षित खंडों, तथा अनौपचारिक सीमा अर्थव्यवस्थाओं के कारण उत्पन्न होते हैं।
    • भारत में NRC और CAA पर घरेलू बहसों ने अप्रवासी या अनियमित प्रवासियों के विस्थापन की आशंकाएँ बढ़ाई हैं। हाल की बांग्लादेशी दंगे घटनाओं ने भारत को सीमा सतर्कता और शरणार्थी संबंधी प्रतिक्रिया में पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया है। 
  • "चीन-पाकिस्तान" झुकाव और रणनीतिक घेराबंदी: भारत एक "रणनीतिक शून्य" का सामना कर रहा है क्योंकि अंतरिम सरकार अपनी विदेश नीति को "बहु-संरेखित" दृष्टिकोण की ओर पुनर्गठित कर रही है जो स्पष्ट रूप से बीजिंग और इस्लामाबाद के पक्ष में है।
  • नई दिल्ली सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास चीन के नेतृत्व वाली बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की संभावना और पाकिस्तान के साथ नए सिरे से शुरू हुई रक्षा वार्ता को अपनी क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिये गंभीर खतरे के रूप में देखती है।
    • हाल ही में, बांग्लादेश ने चीन से 2.1 अरब डॉलर का नया निवेश किया, और पाकिस्तान से JF-17 थंडर लड़ाकू जेट खरीदने के संबंध में बातचीत की खबरें सामने आईं, जो भारत की रक्षा निर्भरता से एक महत्त्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती हैं।
  • व्यापार असंतुलन और गैर-टैरिफ बाधाएँ: द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि के बावजूद, बांग्लादेश को भारत के साथ व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है, जिससे समान रूप से बाज़ार तक पहुँच को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
    • बांग्लादेशी निर्यातक प्रायः खाद्य और प्लास्टिक उत्पादों पर कठोर BIS मानकों, भूमि बंदरगाहों पर सीमित परीक्षण तथा प्रमाणन सुविधाओं के कारण होने वाली देरी जैसे गैर-टैरिफ बाधाओं को इंगित करते हैं ।
    • अप्रैल 2025 में, बांग्लादेश ने भूमि बंदरगाहों के माध्यम से भारतीय धागे और चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया , जिसके जवाब में भारत ने अपने बंदरगाहों के माध्यम से बांग्लादेश से निर्मित वस्त्रों (RMG) पर प्रतिबंध लगा दिया।
  • परियोजना कार्यान्वयन में विलंब: यद्यपि बांग्लादेश को भारत द्वारा दी गई लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) और अवसंरचना सहायता व्यापक हैं, फिर भी भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियों, अंतर-एजेंसी समन्वय की कमियों के साथ-साथ दोनों पक्षों की ओर से प्रक्रियात्मक व्यवधानों के कारण कई परियोजनाओं में देरी हुई है । उदाहरण के लिये खुलना-मोंगला पोर्ट रेलवे लाइन को निविदा प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण और अनुमोदन संबंधी कार्यवाही में देरी का सामना करना पड़ा है।
  • सॉफ्ट पावर का पतन: बांग्लादेश में हाल ही में उत्पन्न मानवीय संकट, जिसमें सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाएँ शामिल हैं, जिनमें दिसंबर 2025 में कम से कम 51 मामले दर्ज़ किये गए, ने सॉफ्ट पावर के पतन में योगदान दिया है।
    • बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक अविश्वास, छिटपुट हिंसा और नकारात्मक घरेलू धारणाओं के कारण लोगों के बीच सद्भावना कमज़ोर हुई है, जिससे सांस्कृतिक, शैक्षणिक तथा ऐतिहासिक बंधन कमज़ोर हो गए हैं जो कभी द्विपक्षीय संबंधों का आधार थे।
    • इसका प्रभाव क्रिकेट कूटनीति पर भी पड़ा है। BCCI ने ‘बाह्य घटनाक्रमों’ का हवाला देते हुए एक IPL टीम को बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज को रिहा करने का निर्देश दिया, जिसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए औपचारिक रूप से ICC से बांग्लादेश के T20 विश्व कप मैचों को भारत से श्रीलंका में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया।

भारत-बांग्लादेश संबंधों को मज़बूत करने के लिये किन उपायों की आवश्यकता है?

  • संतुलित कूटनीतिक पुनर्संतुलन: भारत द्वारा बांग्लादेश को मानवीय और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं, विशेष रूप से सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के लिये दृढ़ लेकिन विवेकपूर्ण संकेत देते हुए, संतुलित कूटनीतिक पुनर्संतुलन का अनुसरण करना चाहिये, साथ ही संवाद, विकास सहयोग एवं जन-जन संपर्क का लाभ उठाते हुए तथा हस्तक्षेपवादी प्रतीत हुए बिना आदर्शवादी प्रभाव डालना चाहिये।
    • भारत को सक्रिय राजनयिक संचार, रणनीतिक मीडिया सहभागिता के माध्यम से बांग्लादेश में भ्रामक जानकारी तथा भारत विरोधी प्रचार का स्पष्ट और निरंतर रूप से मुकाबला करना चाहिये, साथ ही तनाव को बढ़ने से रोकना चाहिये तथा एक विश्वसनीय एवं सम्मानजनक भागीदार के रूप में अपनी छवि को सुदृढ़ करना चाहिये।
  • सहकारी संघवाद के माध्यम से नदी जल बँटवारे का समाधान: जल सहयोग को छिटपुट बातचीत से आगे बढ़कर संस्थागत बेसिन-स्तरीय प्रबंधन की ओर बढ़ना चाहिये। भारतीय राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल के साथ आम सहमति बनाकर तीस्ता जल बँटवारे समझौते का शीघ्र समाधान विश्वास को अत्यधिक मज़बूत करेगा।
    • संयुक्त जलविज्ञान संबंधी डेटा साझाकरण, वास्तविक समय में बाढ़ का पूर्वानुमान और नदी पुनर्जीवन परियोजनाएँ जल को विवाद के स्रोत से सहयोग के स्रोत में परिवर्तित कर सकती हैं।
  • व्यापार की मात्रा से परे आर्थिक एकीकरण को गहन करना: द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव को व्यापार विस्तार से मूल्य-शृंखला एकीकरण की ओर विकसित होना चाहिये।
    • गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, मानकों में सामंजस्य स्थापित करने और भूमि बंदरगाहों को एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) में अपग्रेड करने से सीमापार वाणिज्य आसान हो जाएगा।
    • दवाइयों और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने से बांग्लादेश को मूल्य शृंखला में ऊपर उठने में सहायता प्राप्त हो सकती है, साथ ही भारतीय निर्माताओं को भी लाभ होगा।
  • कनेक्टिविटी एवं परियोजना कार्यान्वयन में तीव्रता लाना: कनेक्टिविटी परियोजनाओं में समयबद्ध क्रियान्वयन और परिणाम निगरानी को प्राथमिकता दी जानी चाहिये। बांग्लादेश में क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय को मज़बूत करना, विवादों का तीव्रता से समाधान करना तथा साथ ही परियोजना प्रबंधन के लिये क्षमता संबंधी समर्थन प्रदान करना विश्वसनीयता को बढ़ाएगा।
    • भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को बांग्लादेश और उससे आगे के क्षेत्रों से एकीकृत करने के लिये अंतर्देशीय जलमार्गों, तटीय जहाज़रानी एवं बहुविध रसद का विस्तार किया जाना चाहिये।
  • सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देना: खुफिया जानकारी साझा करने के प्रोटोकॉल, समन्वित सीमा गश्त और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण के माध्यम से सुरक्षा सहयोग को तथा अधिक मज़बूत किया जाना चाहिये।
    • संयुक्त अभ्यासों का विस्तार समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों और आपदा प्रतिक्रिया तक किया जाना चाहिये। एक मज़बूत आपदा जोखिम प्रबंधन (HADR) ढाँचा जलवायु एवं आपदा संबंधी सामान्य कमज़ोरियों का समाधान करेगा।
  • प्रवासन एवं सीमा संबंधी मुद्दों का मानवीय तरीके से प्रबंधन: सीमा प्रबंधन में सुरक्षा और मानवीय चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी, ​​गैर-घातक सीमा प्रबंधन पद्धतियों और BSF तथा BGB के बीच बेहतर समन्वय से नागरिक हताहतों की संख्या कम की जा सकती है।
    • सीमावर्ती समुदायों के साथ नियमित वार्ता से तनाव कम हो सकता है और विश्वास बढ़ सकता है।
  • ऊर्जा एवं हरित सहयोग का विस्तार: भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य परस्पर ऊर्जा निर्भरता को बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है। सीमापार विद्युत व्यापार का विस्तार, क्षेत्रीय ऊर्जा साझेदारी और विश्वसनीय गैस आपूर्ति संपर्क दोनों पक्षों की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकते हैं।
    • सौर पार्क, ग्रिड-स्तरीय भंडारण एवं हरित हाइड्रोजन तथा बंगाल की खाड़ी में अपतटीय पवन ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों सहित नवीकरणीय ऊर्जा में संयुक्त सहयोग, द्विपक्षीय विकास को जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप स्थापित कर सकता है। इस प्रकार की साझेदारियाँ न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करेंगी बल्कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में दोनों देशों को प्रमुख योगदानकर्त्ता के रूप में स्थापित करेंगी ।
  • जन-संपर्क एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना: लोगों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिये सरल और अधिक पूर्वानुमानित वीज़ा व्यवस्था की आवश्यकता है, विशेष रूप से छात्रों, रोगियों और व्यावसायिक यात्रियों के लिये।
    • चिकित्सा पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग से नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है, साथ ही सद्भावना एवं सेवा क्षेत्र का विकास भी होता है। कौशल विकास तथा युवा कार्यक्षमता के आदान-प्रदान में सहयोग के साथ, ये पहलें स्थायी सामाजिक आधार निर्मित करती हैं जो द्विपक्षीय संबंधों को राजनीति से परे ले जाती हैं।

निष्कर्ष: 

भारत-बांग्लादेश संबंधों को मज़बूत करने के लिये ऐतिहासिक सद्भावना को संस्थागत, जन-केंद्रित सहयोग में परिवर्तित करना आवश्यक है। संवाद, सहकारी संघवाद और समय पर परियोजना कार्यान्वयन के माध्यम से मुद्दों का समाधान करने से विश्वास तथा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। कनेक्टिविटी, ऊर्जा, सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से साझा समृद्धि एवं क्षेत्रीय स्थिरता प्राप्त हो सकती है। अंततः, पारस्परिक संवेदनशीलता, रणनीतिक स्वायत्तता और सामाजिक संबंधों पर आधारित एक परिपक्व साझेदारी ही द्विपक्षीय संबंधों की भावी दिशा निर्धारित करेगी।

दृष्टि मेन्स प्रश्न

मज़बूत ऐतिहासिक और आर्थिक संबंधों के बावजूद, भारत–बांग्लादेश संबंध विभिन्न संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। बदलते क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिये प्रमुख बाधाओं का परीक्षण कीजिये तथा उपयुक्त उपायों का सुझाव दीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. भारत के लिये भारत-बांग्लादेश संबंध क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
ये क्षेत्रीय स्थिरता, पूर्वोत्तर से संपर्क और दक्षिण एशिया में आर्थिक एकीकरण के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 2. द्विपक्षीय संबंधों में सबसे बड़ा अनसुलझा मुद्दा क्या है?
तीस्ता नदी के जल बँटवारे का समझौता।

प्रश्न 3. कनेक्टिविटी से दोनों देशों को क्या लाभ होता है?
इससे लॉजिस्टिक लागत कम होती है, व्यापार को बढ़ावा मिलता है और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का बांग्लादेश के साथ एकीकरण होता है।

प्रश्न 4. सुरक्षा सहयोग की क्या भूमिका है?
यह उग्रवाद पर अंकुश लगाता है, सीमा स्थिरता में सुधार करता है तथा रणनीतिक विश्वास को मज़बूत करता है।

प्रश्न 5. लोगों के बीच संबंधों को किस प्रकार मज़बूत किया जा सकता है?
आसान वीज़ा व्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा और चिकित्सा पर्यटन के माध्यम से।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न:(PYQ) 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. तीस्ता नदी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)

  1. तीस्ता नदी का उद्गम वही है जो ब्रह्मपुत्र का है, लेकिन यह सिक्किम से होकर बहती है।
  2. रंगीत नदी की उत्पत्ति सिक्किम में होती है और यह तीस्ता नदी की एक सहायक नदी है।
  3. तीस्ता नदी, भारत एवं बांग्लादेश की सीमा पर बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


मेन्स:

प्रश्न. आंतरिक सुरक्षा खतरों तथा नियंत्रण रेखा सहित म्याँमार, बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमाओं पर सीमा पार अपराधों का विश्लेषण कीजिये। विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा इस संदर्भ में निभाई गई भूमिका की विवेचना भी कीजिये। (2018)

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