अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-बांग्लादेश संबंध
- 17 Feb 2026
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प्रिलिम्स के लिये: 1971 का मुक्ति युद्ध, अगरतला-अखौरा रेलवे लिंक, भारत-बांग्लादेश मित्रता पाइपलाइन, मैत्री सेतु
मेन्स के लिये: भारत-बांग्लादेश संबंध, प्रमुख मुद्दे, इन मुद्दों के समाधान हेतु उपाय।
चर्चा में क्यों?
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जिसका नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं, ने फरवरी 2026 में हुए आम चुनावों में भारी जीत हासिल की है। यह बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का द्योतक है और अगस्त 2024 में शेख हसीना शासन (अवामी लीग) के हटाए जाने के बाद की अंतरिम अवधि
को समाप्त करता है।
- भारत के प्रधानमंत्री ने तारिक रहमान को बधाई दी, जो यह संकेत है कि भारत पुराने मतभेदों के बावजूद नई सरकार के साथ संवाद करने के लिये तैयार है।
सारांश
- बांग्लादेश में वर्ष 2026 में हुए आम चुनावों में BNP की जीत बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है, इससे भारत के लिये सुरक्षा संबंधी चिंताएँ जैसे- विद्रोहियों का खतरा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, चीन का बढ़ता प्रभाव और भारत-विरोधी रुझान आदि और बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी हेतु भी एक चुनौती प्रस्तुत करती है।
- चुनौतियों के बावजूद, गहरी आर्थिक, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परस्पर निर्भरता के कारण संवाद आवश्यक है। इसके लिये भारत को व्यावहारिक कूटनीति अपनानी होगी, जनता-से-जनता संबंध मज़बूत करने होंगे तथा द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के लिये सुरक्षा संबंधी स्पष्ट सीमाएँ निर्धारित करनी होंगी।
BNP का शासन और भारत-बांग्लादेश संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?
- BNP: इसकी स्थापना जनरल ज़ियाउर रहमान ने की थी, जिन्होंने बांग्लादेश को उसके प्रारंभिक धर्मनिरपेक्ष स्वरूप से हटाकर अपेक्षाकृत अधिक इस्लामी पहचान की ओर उन्मुख किया तथा पाकिस्तान के साथ संबंधों के सामान्यीकरण में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
- वर्ष 2001-2006 का दौर (तनावपूर्ण संबंध): पिछली BNP-जमात गठबंधन सरकार को अक्सर द्विपक्षीय संबंधों में “सबसे निचले स्तर” के रूप में देखा जाता है।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: भारत ने इस शासन पर आरोप लगाया कि वह पूर्वोत्तर विद्रोही समूहों [असम का यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (ULFA), बोडोलैंड का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (NDFB)] को शरण दे रहा था।
- सांप्रदायिकता और आतंकवाद: बढ़ती कट्टरता और सीमा-पार आतंकवादी खतरे।
- चीन की भूमिका: रक्षा और अवसंरचना विकास के क्षेत्र में चीन की ओर स्पष्ट झुकाव।
- ‘गोल्डन चैप्टर’ (2009-2024): शेख हसीना के कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंध मज़बूत हुए, जिसमें भूमि सीमा समझौते (2015) का निष्पादन, संपर्क परियोजनाओं का विकास और भारत-विरोधी समूहों के विरुद्ध कड़े कदम शामिल थे।
- भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय व्यापार वित्तीय वर्ष 2023–24 में 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिससे बांग्लादेश उपमहाद्वीप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया।
- हसीना के प्रशासन के दौरान दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौते के तहत अधिकांश शुल्क-लाइनों पर शुल्क-मुक्त प्रवेश प्रदान किया गया।
- अंतरिम अवधि (2024-2026): छात्र-आंदोलन और हसीना के भारत आगमन के पश्चात, बांग्लादेश में भारत-विरोधी रुझान बढ़ गए, क्योंकि यह धारणा बन गई कि भारत ने बिना शर्त एक “तानाशाही” शासन का समर्थन किया था।
भारत-बांग्लादेश संबंध
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत–बांग्लादेश संबंध 1971 मुक्ति युद्ध के दौरान मज़बूत आधार पर स्थापित हुए, जब भारत ने निर्णायक सैन्य और कूटनीतिक समर्थन प्रदान किया, जिससे विश्वास तथा साझा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बढ़ावा मिला।
- इस साझेदारी को वर्ष 1972 की मित्रता संधि और 1974 के भूमि सीमा समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया, जिसने द्विपक्षीय संबंधों के लिये प्रारंभिक कानूनी ढाँचा तैयार किया।
- व्यापार: वित्तीय वर्ष 2025 में कुल व्यापार 13.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें भारत का निर्यात 11.46 बिलियन डॉलर और आयात 2.05 बिलियन डॉलर था।
- भारत मुख्यतः ईंधन, पेट्रोलियम उत्पाद और कपास सामग्री का निर्यात करता है, जबकि परिधान, जूते और वस्त्र उत्पाद का आयात करता है, जो मज़बूत आर्थिक संबंधो को दर्शाता है।
- विद्युत एवं ऊर्जा सहयोग: बांग्लादेश भारत से 1160 मेगावाट बिजली आयात करता है। इस हेतु भारतीय सहयोग से निर्मित मैत्री सुपर थर्मल पॉवर प्लांट (1320 मेगावाट) एक प्रमुख परियोजना है।
- हाई-स्पीड डीज़ल आपूर्ति हेतु भारत–बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन स्थापित की गई है; तेल अन्वेषण और आपूर्ति में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) की भागीदारी महत्त्वपूर्ण है।
- विकास में साझेदारी: भारत ने सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों जैसी अवसंरचना परियोजनाओं के लिये लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर के तीन लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) प्रदान किये हैं, साथ ही रक्षा क्षेत्र के लिये विशेष रूप से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की 'डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट' भी प्रदान की है।
- अखौरा–अगरतला रेल लिंक तथा ड्रेजिंग जैसी विशिष्ट परियोजनाओं के लिये अनुदान सहायता भी प्रदान की गई है।
- कनेक्टिविटी एवं परिवहन: अगरतला–अखौरा जैसी सीमापार रेल कनेक्टिविटी परियोजनाएँ, भारतीय माल के लिये चिटगाँव और मोंगला बंदरगाहों का उपयोग, हल्दीबाड़ी–चिलाहाटी और पेट्रापोल–बेनापोल जैसे पुराने रेल मार्गों का पुनरुद्धार, अंतर्देशीय जल पारगमन एवं व्यापार प्रोटोकॉल के अंतर्गत विस्तारित अंतर्देशीय जलमार्ग व्यापार तथा फेनी नदी पर निर्मित मैत्री सेतु (जो भारत के त्रिपुरा राज्य के सबरूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है) — इन सभी ने मिलकर संपर्क और परिवहन को सुदृढ़ किया है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में उभरती चुनौतियाँ क्या हैं?
- "हसीना" कारक और प्रत्यर्पण: शेख हसीना वर्ष 2024 से भारत की शरण में हैं।
- नवीन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार, अपने सामाजिक-राजनीतिक आधार तथा गठबंधन सहयोगियों के दबाव में, वर्ष 2024 के विद्रोह के दौरान कथित रूप से किये गये “मानवता के विरुद्ध अपराधों” के अभियोजन हेतु उनके प्रत्यर्पण की मांग कर सकती है।
- सुरक्षा और उग्रवाद: भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों में यह आशंका है कि यदि नवीन शासन पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी समूहों पर निगरानी एवं दमनात्मक सतर्कता शिथिल करता है अथवा पाकिस्तान को अपना सामरिक प्रभाव विस्तार करने की अनुमति देता है, तो तथाकथित "चिकन नेक" कॉरिडोर (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) पुनः अत्यंत संवेदनशील एवं रणनीतिक दृष्टि से अस्थिर क्षेत्र के रूप में उभर सकता है।
- एक शत्रुतापूर्ण शासन (BNP-जमात) की वापसी पूर्वोत्तर उग्रवादियों (जैसे- ULFA आदि) के लिये "सुरक्षित पनाहगाह" के भय को पुनर्जीवित करती है।
- सीमा नियंत्रण: उल्लेखनीय है कि जमात-ए-इस्लामी ने पश्चिम बंगाल, असम और सिलिगुड़ी कॉरिडोर के सीमावर्ती ज़िलों में महत्त्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल की है। यह घुसपैठ और तस्करी के संबंध में एक सीधा सामरिक सुरक्षा खतरा उत्पन्न करता है।
- इस्लामी राजनीति का उदय: ऐतिहासिक रूप से, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन (2001, 2024) धार्मिक अल्पसंख्यकों (जिन्हें अवामी लीग के वोट बैंक के रूप में देखा जाता है) के खिलाफ व्यापक हिंसा का कारण बना है।
- बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदुओं) की सुरक्षा और कट्टरपंथ के संभावित उदय को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, जिसका प्रभाव सीमावर्ती भारतीय राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम) पर पड़ सकता है।
- वर्ष 1971 की तरह शरणार्थियों की आमद असम और पश्चिम बंगाल की संवेदनशील जनसांख्यिकी को अस्थिर कर सकती है।
- भू-राजनीतिक संतुलन: BNP ने ऐतिहासिक रूप से भारत के प्रभाव को संतुलित करने के लिये "लुक ईस्ट" (चीन की ओर) नीति और इस्लामी दुनिया (पाकिस्तान सहित) के साथ घनिष्ठ संबंधों का समर्थन किया है।
- बीजिंग इस बदलाव का लाभ उठाकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा सकता है।
- "इंडिया आउट" की भावना: विश्वविद्यालयों और छात्र आंदोलनों में भारत विरोधी बयानबाजी अभी भी प्रबल है।
- भले ही BNP के घोषणापत्र में इसे स्पष्ट रूप से न कहा गया हो, लेकिन यह भावना नई सरकार की भारत के प्रति "मैत्रीपूर्ण" दिखने की क्षमता को सीमित करती है।
भारत और बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्स्थापित करने हेतु कौन-से कदम उठाए जा सकते हैं?
- अवामी लीग से धारणा-निर्वियोजन: भारत को स्वयं को केवल अवामी लीग-समर्थक सहयोगी के रूप में देखे जाने की धारणा से निर्णायक रूप से परे स्थापित करना होगा, ताकि उसकी बांग्लादेश नीति को किसी एक राजनीतिक दल से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई न माना जाए।
- व्यापक राजनीतिक व सामाजिक संवाद: जनसद्भावना की पुनर्स्थापना हेतु BNP तथा बांग्लादेश के व्यापक नागरिक समाज के साथ सक्रिय संवाद आवश्यक है।
- भारत को शासन-से-शासन आधारित समझौतों से आगे बढ़कर जन-से-जन संपर्क को प्राथमिकता देनी चाहिये। चिकित्सा पर्यटन एवं शिक्षा हेतु वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाना सॉफ्ट पावर के प्रभावी सेतु के रूप में कार्य कर सकता है।
- व्यावहारिक सहभागिता: BNP के साथ संवाद स्थापित करना एक सामरिक आवश्यकता है। नई सरकार को अंतर्राष्ट्रीय वैधता प्रदान करने के लिये उच्च-स्तरीय यात्राएँ (संभवतः प्रधानमंत्री स्तर पर) की जा सकती है, किंतु यह ठोस सुरक्षा आश्वासनों के बदले ही होनी चाहिये।
- स्थिरता हेतु आर्थिक पारस्परिकता: भारत अपने व्यापार अधिशेष का उपयोग सहयोगात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करने हेतु कर सकता है, साथ ही भारत को बांग्लादेशी वस्तुओं के लिये न्यायसंगत बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिये।
- कपास सूत, विद्युत तथा आवश्यक वस्तुओं की भारत द्वारा निरंतर आपूर्ति बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर सकती है तथा पारस्परिक निर्भरता को और सुदृढ़ बना सकती है।
- CEPA एवं LDC श्रेणी से उन्नयन: वर्ष 2026 में अल्प विकसित देश (LDC) के दर्जे से बाहर होने के बाद बांग्लादेश को पश्चिमी बाज़ारों में मिलने वाली शुल्क-मुक्त पहुँच समाप्त हो जाएगी।
- भारत, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को शीघ्रता से अग्रसर करते हुए, राजनीतिक स्थिरता की पूर्वशर्त के साथ अपने विशाल घरेलू बाज़ार में शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान कर सकता है, जो एक प्रभावी आर्थिक सुरक्षा-कवच के रूप में कार्य करेगा।
- स्पष्ट ‘रेड लाइंस’ की स्थापना: भारत को नई सरकार के समक्ष अपने अपरिवर्तनीय हितों को स्पष्ट और निर्विवाद रूप से व्यक्त करना चाहिये:
- बांग्लादेश की भूमि पर भारतीय उग्रवादी तत्त्वों के लिये शून्य सहिष्णुता।
- सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिये अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अनिवार्य शर्त हो।
- मोंगला बंदरगाह और पायरा बंदरगाह पर किसी भी चीनी परियोजना को ऐसे द्वैध-उपयोग सैन्य ढाँचे (जैसे पनडुब्बी ठहराव सुविधा) में विकसित न होने दिया जाए, जो पूर्वी नौसैनिक कमान की सुरक्षा के लिये चुनौती बनें।
- घरेलू समन्वय: केंद्र को सीमा से सटे राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम) के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर एकीकृत राजनीतिक सहमति विकसित करनी चाहिये।
- सीमा सुरक्षा का राजनीतिकरण समाप्त कर उसे राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा और संचालित किया जाना चाहिये।
निष्कर्ष
BNP की वर्ष 2026 की विजय भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के लिये एक संरचनात्मक परीक्षा है और यह सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रबल करती है। भारत को अपने सुरक्षा हितों की रक्षा हेतु आर्थिक एवं भौगोलिक लाभों का उपयोग करते हुए एक व्यावहारिक एवं हित-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिये।
एक स्थिर, तटस्थ और समृद्ध बांग्लादेश भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति तथा उसके पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के लिये बांग्लादेश किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?
बांग्लादेश अपनी भौगोलिक स्थिति, पूर्वोत्तर भारत से संपर्क (कनेक्टिविटी) तथा क्षेत्रीय स्थिरता एवं ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में अपनी भूमिका के कारण भारत के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
2. BNP शासन के तहत भारत की प्रमुख सुरक्षा चिंताएँ क्या हैं?
चिंताओं में विद्रोही सुरक्षित ठिकाने, आईएसआई का प्रभाव, अल्पसंख्यकों की असुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को खतरे शामिल हैं।
3. भारत-बांग्लादेश व्यापार कितना महत्त्वपूर्ण है?
लगभग 13-14 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक व्यापार के साथ बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो सुदृढ़ आर्थिक पारस्परिक निर्भरता को दर्शाता है।
4. द्विपक्षीय संबंधों में ऊर्जा सहयोग की क्या भूमिका है?
भारत बांग्लादेश को विद्युत निर्यात करता है, फ्रेंडशिप पाइपलाइन के माध्यम से डीज़ल की आपूर्ति करता है तथा मैत्री तापीय विद्युत परियोजना जैसे उपक्रमों में सहयोग देकर पारस्परिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
5. वर्ष 2026 में बांग्लादेश के LDC श्रेणी से उन्नयन का संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
पश्चिमी बाज़ारों में शुल्क-मुक्त पहुँच समाप्त होने से बांग्लादेश भारत के साथ CEPA की ओर अग्रसर हो सकता है, जिससे आर्थिक एकीकरण और अधिक गहरा होगा।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. तीस्ता नदी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)
- तीस्ता नदी का उद्गम वही है जो ब्रह्मपुत्र का है, लेकिन यह सिक्किम से होकर बहती है।
- रंगीत नदी की उत्पत्ति सिक्किम में होती है और यह तीस्ता नदी की एक सहायक नदी है।
- तीस्ता नदी भारत एवं बांग्लादेश की सीमा पर बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. आतंरिक सुरक्षा खतरों तथा नियंत्रण रेखा सहित म्याँमार, बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमाओं पर सीमा-पार अपराधों का विश्लेषण कीजिये। विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा इस संदर्भ में निभाई गई भूमिका की विवेचना कीजिये। (2020)
