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भारत-कनाडा संबंध

प्रिलिम्स के लिये: कनाडा, कार्बन कैप्चर, म्यूरेट ऑफ पोटाश, एंट्रिक्स, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल

मेन्स के लिये: भारत-कनाडा संबंध:अवसर और चुनौतियाँ, भारत की विदेश नीति में ऊर्जा कूटनीति और महत्त्वपूर्ण खनिज, प्रवासी राजनीति और द्विपक्षीय संबंधों पर इसका प्रभाव

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

भारत और कनाडा ने जनवरी 2026 में उच्च-स्तरीय वार्त्ताओं के माध्यम से अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'रीसेट' और पुनरुज्जीवित किया है, जो सहयोग के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है।

  • भारत-कनाडा संबंधों को अब परमाणु ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और संबद्ध क्षेत्रों जैसे चार रणनीतिक आधारों पर पुनर्गठित किया गया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य कनाडा के प्राकृतिक संसाधनों तथा भारत के विस्तृत औद्योगिक एवं कृषि आधार के बीच एक मज़बूत तालमेल स्थापित करना है।

भारत और कनाडा के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत की मुख्य बातें क्या हैं?

  • ऊर्जा: इंडिया एनर्जी वीक (IEW), 2026 के इतर दोनों देशों ने कनाडा-भारत मंत्रिस्तरीय ऊर्जा वार्त्ता (CIMED) को फिर से शुरू किया, जिसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये LNG, LPG और कच्चे तेल जैसे संसाधनों की आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना है।
    • दोनों देश हाइड्रोजन उत्पादन, कार्बन कैप्चर (कार्बन सोखने की तकनीक) और टिकाऊ विमानन ईंधन पर सहयोग करने के लिये सहमत हुए हैं।
  • खाद्य सुरक्षा: कनाडा, जो पहले से ही भारत की 'मुरिएट ऑफ पोटाश' (MOP) की 25% आवश्यकता को पूरा करता है, ने एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्त्ता के रूप में अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।
    • एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत कदम के रूप में कनाडा ने अपने प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में भारतीय भागीदारों द्वारा किये गए किसी भी निवेश के बराबर निवेश करने का संकल्प लिया है।
  • महत्त्वपूर्ण खनिज और स्वच्छ गतिशीलता: दोनों पक्ष 'एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल' (ACC) निर्माण, अगली पीढ़ी की बैटरी अनुसंधान और विकास (R&D) के लिये समन्वय तंत्र बनाने पर सहमत हुए हैं।
    • कनाडा ने भारत के EV मिशनों (जैसे– PM E-DRIVE) के लिये अनिवार्य लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्त्वों (REEs) की ज़रूरतों को पूरा करने में सहयोग देने की अपनी तत्परता दोहराई है।
    • पारदर्शी और लचीली आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मार्च 2026 में टोरंटो में पहले 'कनाडा-भारत महत्त्वपूर्ण खनिज वार्षिक संवाद' के आयोजन की घोषणा की गई है।
  • व्यापार: दोनों देश 'व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते' (CEPA) के लिये वार्त्ताओं में तेज़ी लाने पर सहमत हुए हैं, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना है।
    • कनाडा के प्रधानमंत्री की मार्च 2026 में प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान 2.8 बिलियन कनाडाई डॉलर मूल्य के 10-वर्षीय यूरेनियम आपूर्ति समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की उम्मीद है।

भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख बिंदु क्या हैं?

  • पृष्ठभूमि: भारत और कनाडा एक लंबे समय से चले आ रहे संबंध साझा करते हैं, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुसांस्कृतिक समाजों पर आधारित हैं। भारतीयों का कनाडा की ओर प्रवासन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू हुआ, जब वैंकूवर में स्वदेश सेवक होम जैसे संस्थानों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ समर्थन जुटाया था।
    • राजनयिक संबंध 1947 में स्थापित किये गए और भारतीय संविधान ने कनाडा के संघीय मॉडल से प्रेरणा ली, जिसमें एक सशक्त केंद्र और केंद्र में निहित अवशिष्ट शक्तियाँ शामिल हैं।
    • 1990 के बाद के दौर में भारत के आर्थिक उदारीकरण के साथ दोनों देशों के संबंधों में पुनः सुधार हुआ, अंततः वर्ष 2015 में द्विपक्षीय संबंध सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत हुए।
  • सामरिक महत्त्व: भारत कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत एक प्रमुख भागीदार है, जो बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक एकरूपता को दर्शाता है।
  • व्यापार: वर्ष 2024 में भारत कनाडा का 7वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार 30.9 अरब अमेरिकी डॉलर का था और वस्तु व्यापार (गुड्स ट्रेड) में भारत का व्यापार अधिशेष बनाए रखा।
    • कनाडा से भारत को शीर्ष निर्यात: सब्ज़ियाँ, खनिज ईंधन और तेल, लकड़ी लुगदी, उर्वरक, कागज़ और पेपरबोर्ड।
    • भारत से कनाडा को शीर्ष निर्यात: फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कीमती पत्थर और धातुएँ, लौह और इस्पात उत्पाद।
  • प्रवासी समुदाय: कनाडा दुनिया में सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक है, जहाँ 1.8 मिलियन से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं।
  • प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग कनाडा-भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (2005) में निहित है। यह संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी समन्वय समिति (JSTCC) द्वारा समर्थित है।
    • इसरो और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के बीच समझौता ज्ञापन है और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स ने कई कनाडाई नैनोसैटेलाइट लॉन्च किये हैं।
  • सुरक्षा सहयोग: यह आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यदल (1997) और फ्रेमवर्क फॉर कोऑपरेशन ऑन काउंटरिंग टेररिज़्म (2018) में निहित है, जबकि प्रत्यर्पण संधि (1987) और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (1994) के माध्यम से कानूनी सहयोग और मज़बूत होता है।

भारत-कनाडा संबंधों में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

  • खालिस्तान मुद्दा: कनाडा की भूमि से संचालित गैंगस्टर–आतंकी नेक्सस, जहाँ खालिस्तानी अलगाववादी कथित रूप से संगठित आपराधिक गिरोहों के साथ मिलकर भारत में रंगदारी, धमकियाँ और लक्षित हत्याओं को अंजाम देते हैं।
    • नई दिल्ली कनाडा के रुख को “पर्मिसिव वोट-बैंक पॉलिटिक्स” के रूप में देखती है और आरोप लगाती है कि वह उन आतंकियों के लिये सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है जो असाइलम जैसे लूपहोल्स का लाभ उठाते हैं, जिससे विशेषतः पंजाब में भारत की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा खतरा उत्पन्न होता है।
    • दोनों देश इस बात पर सामंजस्य बिठाने में कठिनाई महसूस करते हैं कि वैध राजनीतिक सक्रियता और हिंसक उग्रवाद के बीच रेखा कहाँ खींची जाए, मूलतः उन गैंगों के संदर्भ में जो सीमा-पार सक्रिय हैं।
  • व्यापार एवं आर्थिक बाधाएँ: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की प्रगति पर अभी भी कनाडाई कृषि निर्यात और भारतीय वस्त्र व औषधियों पर उच्च शुल्कों के साथ-साथ गैर-शुल्क अवरोधों की वजह से रोक लगी हुई है; इनमें भारत के जटिल स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) मानदंड और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व रासायनिक उत्पादों के लिये कनाडा के कठोर नियामकीय मानक शामिल हैं।
  • डिजिटल व्यापार एवं गोपनीयता: भारत में डेटा गवर्नेंस के भिन्न मॉडल और डेटा स्थानीयकरण संबंधी कानून, भारतीय बाज़ार से जुड़ने के लिये तैयार कनाडाई प्रौद्योगिकी एवं एआई कंपनियों के लिये चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।
  • भूराजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) विचलन: यद्यपि दोनों देश “इंडो-पैसिफिक” दृष्टि का हिस्सा हैं, फिर भी उनकी रणनीतिक प्राथमिकताएँ भिन्न हैं। 
    • कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति मुख्यतः जोखिम कम करने और मानवाधिकारों पर केंद्रित है, जबकि भारत का ज़ोर पड़ोस में समुद्री सुरक्षा और चीनी प्रभाव के संतुलन पर अधिक है।
    • वर्तमान स्थिति यह है कि दोनों देश आंशिक रूप से अमेरिका से जुड़े व्यापारिक उतार–चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिये भी एक-दूसरे की ओर रणनीतिक झुकाव बढ़ा रहे हैं।

भारत–कनाडा संबंधों को सुदृढ़ करने हेतु क्या उपाय किये जा सकते हैं?

  • कूटनीतिक पुनर्संतुलन: खालिस्तानी आतंकवाद से निपटने के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर पर द्विपक्षीय “सुरक्षा एवं संप्रभुता संवाद” स्थापित किया जाए, जिसमें खुफिया साझेदारी और कानूनी सहयोग के लिये स्पष्ट प्रोटोकॉल हों।
    • इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और समुद्री साझेदारी पर रणनीतिक असहमति कम करने के लिये 2+2 संवाद तंत्र शुरू किया जाए, जिसमें दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री/समकक्ष शामिल हों।
  • मानवीय पूंजी सुदृढ़ करना: दोनों देशों को प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर ट्रैक–II कूटनीति को बढ़ावा देना चाहिये, ताकि लोगों के बीच संपर्क गहरा हो, सांस्कृतिक आदान–प्रदान बढ़े और संवाद व विवाद-निवारण के प्रयासों को समर्थन मिले।
    • फिल्मों और कला के क्षेत्र में द्विपक्षीय को-प्रोडक्शन का विस्तार कर “जीवंत सेतु” (डायस्पोरा) को प्रोत्साहित किया जाए और नकारात्मक राजनीतिक आख्यानों का संतुलन प्रस्तुत किया जाए।
  • खुफिया समन्वय: आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यसमूह को पुनरुज्जीवित कर संगठित अपराध और उग्रवादी फंडिंग पर साझा डाटाबेस तैयार किया जाए।
    • मौजूदा व्यवस्थापित प्रत्यर्पण संधि (1987) और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (1994) का उपयोग बढ़ाना ताकि अपराधी तत्त्व किसी भी देश का उपयोग ‘सुरक्षित आश्रय’  (Safe Haven) के रूप में न कर सकें।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) निर्यात: कनाडा G7 अर्थव्यवस्था में भारत की DPI के लिये एक परीक्षण-स्थल के रूप में कार्य कर सकता है, जिससे निर्बाध सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।
  • व्यावसायिक प्रत्यायन: पेशेवर योग्यताओं (डॉक्टरों, इंजीनियरों और नर्सों) की पारस्परिक मान्यता। इससे ‘छात्र प्रवासन’ के मुद्दे को ‘स्किल टैलेंट पार्टनरशिप’ में बदला जा सकेगा और वीज़ा कैप को लेकर होने वाले घर्षण में कमी आएगी।
  • GIFT सिटी ईकोसिस्टम: कनाडाई ‘रिसर्च क्लस्टर’ को भारत में स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करना, जिसका फोकस कोल्ड-चेन प्रौद्योगिकी और सतत खनन पर होगा, जो भारत के विकसित भारत@2047 लक्ष्यों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।

कनाडा

  • यह उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में स्थित है और क्षेत्रफल के आधार पर रूस के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है।
    • यह उत्तर-पश्चिम में अलास्का तथा दक्षिण में संयुक्त राज्य अमेरिका के राज्यों के साथ सीमा साझा करता है; कनाडा-अमेरिका सीमा विश्व की सबसे लंबी द्वि-राष्ट्रीय स्थलीय सीमा है। कनाडा के उत्तर में आर्कटिक महासागर, पूर्व में अटलांटिक महासागर और पश्चिम में प्रशांत महासागर हैं, साथ ही यह ग्रीनलैंड तथा फ्राँस के द्वीप सेंट पियरे और मिकेलॉन के साथ समुद्री सीमाएँ भी साझा करता है।
  • इसकी राजधानी ओटावा है और देश में आर्कटिक, सब-आर्कटिक, प्रेयरी, ग्रेट लेक्स, कॉर्डिलेरन तथा पूर्वी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों सहित सात जलवायु क्षेत्र पाए जाते हैं।
  • प्रमुख भौतिक विशेषताओं में रॉकी, सेंट एलियास और लॉरेंटियन पर्वत श्रेणियाँ; मैकेंज़ी, युकोन और सेंट लॉरेंस जैसी नदियाँ तथा ग्रेट लेक्स शामिल हैं, जो अमेरिका के साथ एक प्राकृतिक सीमा बनाती हैं।
  • कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जिनमें लौह अयस्क, निकल, तांबा, सोना, यूरेनियम, दुर्लभ मृदा तत्त्व, पोटाश और हीरे शामिल हैं।

Canada

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: भारत और कनाडा के बीच एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) संपन्न करने की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. भारत-कनाडा सहयोग को कौन-से सुरक्षा ढाँचे संचालित करते हैं?
सुरक्षा सहयोग 1997 के आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यसमूह और वर्ष 2018 के आतंकवाद-निरोध सहयोग ढाँचे पर आधारित है, जिसे 1987 की प्रत्यर्पण संधि और 1994 की पारस्परिक कानूनी सहायता संधि का समर्थन प्राप्त है।

2. द्विपक्षीय संबंधों में खालिस्तान मुद्दा क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत कनाडा द्वारा pro‑खालिस्तान तत्त्वों के प्रबंधन को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये एक गंभीर  चिंता के रूप में देखता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच विश्वास में एक प्रमुख दरार उत्पन्न हो गई है।

3. भारत और कनाडा के बीच व्यापार कितना महत्त्वपूर्ण है?
वर्ष 2024 में भारत कनाडा का सातवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार लगभग 30.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा और वस्तुओं के व्यापार में भारत को व्यापार अधिशेष प्राप्त था।

4. कनाडा भारत के लिये रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
कनाडा के पास प्रचुर ऊर्जा संसाधन, महत्त्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल्स, उन्नत प्रौद्योगिकी आधार तथा भारत की इंडो‑पैसिफिक रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थित होने के कारण वह भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा के लिये एक प्रमुख भागीदार बन जाता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स 

प्रश्न. निम्नलिखित में से किस एक समूह के चारों देश G20 के सदस्य हैं? (2020)

(a) अर्जेंटीना, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की

(b) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड

(c) ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम

(d) इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया

उत्तर: (a)


भारतीय अर्थव्यवस्था

केंद्रीय बजट 2026-27

प्रिलिम्स के लिये: केंद्रीय बजट, बायोसिमिलर, इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना, दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण, ऑरेंज इकोनॉमी, प्रतिभूति लेनदेन कर (STT)

मेन्स के लिये: आर्थिक विकास और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण में बजट की भूमिका, विनिर्माण-आधारित विकास और आत्मनिर्भर भारत, पूंजीगत व्यय-आधारित विकास बनाम रोज़गार सृजन, महत्त्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक स्वायत्तता

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जो नवनिर्मित कर्त्तव्य भवन में पेश किया गया पहला बजट है।

  • युवा शक्ति को केंद्र में रखकर प्रस्तुत यह बजट ‘विकसित भारत’ की दृष्टि पर आधारित है और ‘दुविधा के बजाय कार्रवाई’, ‘नारेबाज़ी के बजाय सुधार’ तथा ‘लोकलुभावन के बजाय जनकल्याण’ जैसे मार्गदर्शक सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करता है।
  • यह बजट तीन कर्त्तव्यों द्वारा निर्देशित है, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, लोगों की क्षमताओं का निर्माण करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

तीन कर्त्तव्य

  • आर्थिक विकास को गति प्रदान करना और उसे धारणीय रखना: उत्पादकता और प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के साथ-साथ अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ एवं आघात-सह बनाना है।
  • आकांक्षाओं को पूरा करना: नागरिकों विशेषकर भारत की युवा आबादी में क्षमता का विकास करना, ताकि वे भारत की समृद्धि के मज़बूत सहभागी बन सकें।
  • सबका साथ, सबका विकास: प्रत्येक परिवार, समुदाय, प्रदेश और विभिन्न क्षेत्रों तक संसाधनों एवं अवसरों की न्यायोचित पहुँच, विशेष रूप से “सभी वर्गों तक पहुँच” पर विशेष ध्यान।

केंद्रीय बजट 2026-27 की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

प्रथम कर्त्तव्य: आर्थिक विकास को गति प्रदान करना और उसे धारणीय रखना

  • विनिर्माण और उद्योग (रणनीतिक क्षेत्र): भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिये बजट को 7 रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों पर केंद्रित किया गया है:
    • बायोफार्मा शक्ति: भारत को वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिये सरकार ने "बायोफार्मा शक्ति" (ज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल उन्नति की रणनीति) मिशन प्रस्तावित किया है, जिसके तहत पाँच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है ताकि भारत को एक वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।
    • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: ISM 1.0 पर आधारित, केंद्रीय बजट 2026–27 तकनीकी संप्रभुता को आगे बढ़ाने के लिये इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की घोषणा करता है।
      • यह सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और संबंधित सामग्री के विनिर्माण और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को मज़बूत करने पर केंद्रित है, जिसमें उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं विकास और प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं, ताकि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये आवश्यक कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके।
    • इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण: घरेलू मूल्य शृंखला को गहरा करने और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना का आवंटन 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
    • रेयर अर्थ कॉरिडोर और केमिकल पार्क: बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक (REPM) के खनन, प्रसंस्करण और निर्माण के लिये रेयर अर्थ कॉरिडोर प्रस्तावित किये गए हैं, साथ ही आयात निर्भरता को कम करने के लिये क्लस्टर-आधारित, प्लग-एंड-प्ले मॉडल के तहत तीन केमिकल पार्क प्रस्तावित हैं।
    • कैपिटल गुड्स और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग: बजट में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) द्वारा हाई-टेक टूल रूम, एक निर्माण और बुनियादी ढाँचा उपकरण (CIE) योजना और घरेलू पूंजीगत वस्तुओं एवं रसद निर्माण को मज़बूत करने के लिये 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की घोषणा की गई है।
    • वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा: राष्ट्रीय फाइबर योजना, समर्थ 2.0, टेक्स-ईको पहल और क्लस्टर आधुनिकीकरण को शामिल करते हुए एक एकीकृत वस्त्र कार्यक्रम शुरू किया गया है, साथ ही तकनीकी वस्त्रों और मूल्यवर्द्धन को बढ़ावा देने के लिये मेगा टेक्सटाइल पार्क शुरू करने की घोषणा की गई।
    • ग्राम स्वराज और खेल संबंधी वस्तुएँ: महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का उद्देश्य खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को सशक्त बनाना है, जबकि खेल सामग्री निर्माण से जुड़ी पहल भारत को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले खेल उपकरणों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
  • पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों का पुनरुद्धार: 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार के लिये एक योजना की घोषणा की गई, जिससे बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से उनकी लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता और दक्षता में सुधार किया जा सके।
  • चैंपियन MSME: उच्च क्षमता वाली फर्मों को प्रोत्साहित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धा करने वाले "चैंपियन MSME" के निर्माण हेतु 10,000 करोड़ रुपये का डेडिकेटेड "SME ग्रोथ फंड" लॉन्च किया जाएगा।
    • आत्मनिर्भर भारत कोष को अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये दिये जाएंगे ताकि सूक्ष्म उद्यमों को निरंतर सहायता जारी रखने के साथ-साथ जोखिम पूंजी तक स्थिर पहुँच सुनिश्चित की जा सके, जिसमें 'कॉर्पोरेट मित्र' को इन उद्यमों को मार्गदर्शन, परामर्श और बड़ी मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत करने के लिये प्रमुख सहायक के रूप में परिकल्पित किया गया है।
  • "ग्रोथ कनेक्टर" के रूप में बुनियादी ढाँचा:
    • हाई-स्पीड रेल: शहरों के बीच 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर–मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बंगलूरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बंगलूरु, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी को "ग्रोथ कनेक्टर" के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि आर्थिक गतिविधि को प्रोत्साहित किया जा सके।
    • माल का सतत परिवहन: पर्यावरणीय रूप से सतत माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिये नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर डानकुनी को सूरत से जोड़ेंगे, साथ ही अगले पाँच वर्षों में 20 राष्ट्रीय जलमार्गों को शुरू करने का लक्ष्य है।
      • एक कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम सड़क और रेल से जलमार्ग तथा कोस्टल शिपिंग में बदलाव को प्रोत्साहित करेगी ताकि उनके हिस्से को वर्ष 2047 तक 6% से बढ़ाकर 12% किया जा सके।
      • सीप्लेन VGF स्कीम: स्वदेशी जलविमान विनिर्माण और संचालन का समर्थन करेगी, जिससे अंतिम छोर तक संपर्क बेहतर होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
    • इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड: बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड प्रस्तावित किया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और विनिर्माण चरण के दौरान ऋणदाताओं को विवेकपूर्ण रूप से अंशकालीन क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगा।
  • सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER): सरकार ने विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर शहरों का मानचित्रण करने हेतुसिटी इकोनॉमिक रीजन” (CER) नामक एक नवीन पहल का प्रस्ताव रखा है।
    • प्रत्येक CER के लिये 5 वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित है, जिसे "चैलेंज मोड" के माध्यम से लागू किया जाएगा।
  • कार्बन कैप्चर (CCUS): कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) के लिये एक योजना, जिसका उद्देश्य इस्पात और सीमेंट जैसे कठिन-उत्सर्जन वाले क्षेत्रों के डीकार्बनाइज़ेशन को प्रोत्साहित करना है।

Strategic_Sectors

द्वितीय कर्त्तव्य: आकांक्षाओं की पूर्ति एवं क्षमता निर्माण

  • AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स: ऑरेंज इकोनॉमीकी क्षमता को पहचानते हुए सरकार मुंबई स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ के माध्यम से 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में ‘एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित करने हेतु समर्थन प्रदान करेगी।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी: मौजूदा राष्ट्रीय परिषद होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग टेक्नोलॉजी को उन्नत करके इस संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है, ताकि शिक्षा जगत और पर्यटन उद्योग के बीच की कमी को दूर किया जा सके।
  • खेलो इंडिया मिशन: खेलो इंडिया कार्यक्रम के आधार पर बजट में खेलो इंडिया मिशन की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य एकीकृत प्रतिभा विकास, कोचों की क्षमता निर्माण, खेल विज्ञान के समावेशन, प्रतिस्पर्द्धी लीगों के विकास तथा खेल अवसंरचना के विस्तार के माध्यम से खेल क्षेत्र का रूपांतरण करना है।
  • मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म: सरकार ने निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने का प्रस्ताव किया है, ताकि भारत को वेलनेस और चिकित्सा पर्यटन के गंतव्य के रूप में सशक्त बनाया जा सके। इन हबों में आयुष केंद्र, निदान सुविधाएँ, उपचारोत्तर देखभाल तथा पुनर्वास सेवाएँ एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी।
  • STEM में महिलाएँ: STEM क्षेत्रों में बालिकाओं को प्रोत्साहन देने के लिये व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) या पूंजी सहायता के माध्यम से प्रत्येक ज़िले में एक बालिका छात्रावास स्थापित किया जाएगा।

तीसरा कर्त्तव्य: सबका साथ, सबका विकास

  • भारत‑VISTAAR: कृषि में रूपांतरणकारी परिवर्तन लाने के लिये ‘भारत‑VISTAAR’ (वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज़) नामक साधन प्रारंभ किया जाएगा। 
    • यह बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मंच होगा, जो AgriStack तथा ICAR के आँकड़ों का एकीकरण कर किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप वैयक्तीकृत परामर्श उपलब्ध कराएगा।
  • SHE Marts: ‘लखपति दीदी पहल की सफलता को आगे बढ़ाते हुए क्लस्टर संघों के भीतर समुदाय-स्वामित्व वाले खुदरा केंद्र ‘SHE Marts’ (Self-Help Entrepreneur Marts) स्थापित किये जाएंगे।
  • मानसिक स्वास्थ्य अवसंरचना: अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सरकार ने ‘NIMHANS-2’ की स्थापना की घोषणा की है तथा राँची और तेज़पुर स्थित संस्थानों को ‘क्षेत्रीय शीर्ष संस्थान’ (Regional Apex Institutions) के रूप में उन्नत करने का प्रस्ताव रखा है।
  • पूर्वोदय एवं उत्तर-पूर्व:
    • बौद्ध सर्किट: उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (जैसे– अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा) में ‘बौद्ध सर्किट’ के विकास हेतु एक विशिष्ट योजना शुरू की जाएगी।
    • पूर्वी तट औद्योगिक गलियारा: दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में सुव्यवस्थित रूप से जुड़ा हुआ एक प्रमुख नोड विकसित करते हुए पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास का प्रस्ताव किया गया है, साथ ही पाँच पूर्वोदय राज्यों में पाँच पर्यटन स्थलों के निर्माण की भी परिकल्पना की गई है।
  • दिव्यांगजन सहायता: ‘दिव्यांग सहारा योजना’ जैसी योजनाओं (कल्याण पर केंद्रित प्रयासों के तहत) के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाने हेतु लक्षित पहलें की जाएँगी।

केंद्रीय बजट 2026-27 के अंतर्गत कर सुधारों की प्रमुख हाइलाइट्स क्या हैं?

  • नया आयकर अधिनियम, 2025: सरकार ने वर्तमान आयकर अधिनियम, 1961 को समाप्त कर एक नए सरलीकृत आयकर अधिनियम, 2025 से प्रतिस्थापित किया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा।
  • कर दरें: वित्त वर्ष 2026-27 के लिये कर‑स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है; कर‑संरचना में स्थिरता को बरकरार रखा गया है।
  • TCS तर्कसंगतीकरण: टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दरों की पुनर्संरचना करते हुए विदेश यात्रा पैकेजों तथा LRS के अंतर्गत शिक्षा एवं चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिये की जाने वाली विदेश प्रेषण (Remittances) पर, किसी भी सीमा (Threshold) के बिना, एक समान 2% TCS लगाया जाएगा।
  • TDS का युक्तीकरण: अस्पष्टता दूर करने के लिये जनशक्ति सेवाओं की आपूर्ति पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) को हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिये 1% तथा अन्य के लिये 2% निर्धारित किया गया है।
    • लेखा-पुस्तकों को प्रस्तुत न करना तथा स्रोत पर कर कटौती (TDS) का भुगतान न करना (जहाँ भुगतान वस्तु के रूप में किया गया हो) अब अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाएगा।
  • शुल्क दरों का युक्तीकरण (Customs Duty Rationalization): व्यक्तिगत उपयोग के लिये आयात की जाने वाली वस्तुओं पर शुल्क दर 20% से घटाकर 10% कर दी गई है।
    • 17 कैंसर दवाओं और 7 दुर्लभ रोगों से संबंधित दवाओं/आहार पर शुल्‍क पूरी तरह से माफ किया गया है।
  • सिक्योरिटीज़ लेन-देन कर (STT): कुछ सेगमेंट में 0.1% से 0.15% तक मामूली वृद्धि की गई है, ताकि शेयर बाज़ार में अत्यधिक सट्टेबाज़ी को रोका जा सके।
  • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT): केंद्रीय बजट सभी गैर-निवासियों को, जो अनुमानित आधार पर कर का भुगतान करते हैं, न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) से छूट देने का प्रस्ताव करता है।
  • कर प्रशासन: बजट में प्रस्ताव है कि कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की संयुक्त समिति बनाई जाए, ताकि आय गणना और प्रकटीकरण मानक (ICDS) की आवश्यकताओं को भारतीय लेखांकन मानक (IndAS) में सम्मिलित किया जा सके। इससे वर्ष 2027-28 कर वर्ष से ICDS-आधारित अलग लेखांकन समाप्त होगा और सेफ हार्बर नियमों के तहत ‘लेखाकार’ की परिभाषा को सरल बनाकर अनुपालन को आसान किया जाएगा।
  • अभियोजन से सुरक्षा: 20 लाख रुपये से कम मूल्य की विदेशी संपत्ति का खुलासा न करने पर अभियोजन से सुरक्षा दी जाएगी (1 अक्तूबर, 2024 से पूर्वव्यापी प्रभाव)।
  • शेयर बायबैक पर कर में बदलाव: अब शेयर बायबैक पर कर लाभांश के बजाय शेयरधारक के हाथ में पूंजीगत लाभ के रूप में लगाया जाएगा, जिससे कर का भार कंपनी से प्राप्तकर्त्ता पर स्थानांतरित हो जाएगा।
  • निवेश और उद्योग के लिये रणनीतिक प्रोत्साहन:
    • डेटा सेंटर कर अवकाश: भारतीय डेटा सेंटर के माध्यम से वैश्विक क्लाउड सेवाएँ प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर अवकाश मिलेगा।
    • IFSC (GIFT सिटी): ऑफशोर बैंकिंग यूनिट्स के लिये कर अवकाश 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया गया है।
    • महत्त्वपूर्ण खनिज: महत्त्वपूर्ण खनिजों (जैसे- लिथियम, कोबाल्ट आदि) के प्रसंस्करण और लिथियम-आयन सेल के निर्माण के लिये आवश्यक पूंजीगत सामान पर कस्टम्स ड्यूटी में छूट प्रदान की गई है।
    • आईटी सेक्टर सेफ हार्बर: आईटी सेवाओं के लिये ‘सेफ हार्बर’ नियमों का लाभ प्राप्त करने की सीमा 2,000 करोड़ रुपये तक बढ़ा दी गई है और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एवं KPO सेवाओं के लिये एकीकृत श्रेणी बनाई गई है।
  • शुल्क आधुनिकीकरण और निर्यात संवर्द्धन 
    • क्षेत्रीय राहत: समुद्री, चमड़ा और वस्त्र क्षेत्रों में इनपुट्स के लिये शुल्‍क-मुक्त आयात सीमाएँ बढ़ाई गई हैं, ताकि निर्यात प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहन प्राप्त हो।
    • वायुयान और रक्षा: विमानों के निर्माण और MRO (रख-रखाव, मरम्मत, ओवरहाल) में उपयोग होने वाले पुर्ज़ों/घटक पर शुल्क छूट प्रदान की गई है।
  • ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस: बजट ने व्यापार को सुगम बनाने के लिये एकल डिजिटल विंडो के माध्यम से माल की क्लीयरेंस, गैर-अनुपालन वाले माल के लिये त्वरित कस्टम क्लीयरेंस, कस्टम इंटीग्रेटेड सिस्टम (CIS) का कार्यान्वयन और एआई-आधारित कंटेनर स्कैनिंग का विस्तार सुनिश्चित किया है।
    • इसके अतिरिक्त, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) या हाई सीज़ में मत्स्यपालन पर शुल्‍क-मुक्त व्यवस्था, शुल्‍क-मुक्त सामान की भत्ता सीमा में संशोधन और ईमानदार करदाताओं के लिये विवाद समाधान की सुविधा, जिसमें दंड में कमी की सुविधा है, प्रदान की गई है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रदर्शित मौद्रिक और आर्थिक मूलभूत तत्त्व 

  • राजकोषीय घाटा: बजट अनुमान (BE) 2026-27 के लिये लक्ष्य GDP का 4.3% निर्धारित किया गया है, जो इसे 4.5% से नीचे घटाने की लक्ष्य-रेखा (Glide Path) के अनुरूप है। यह वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान (RE) में 4.4% से बेहतर स्थिति दर्शाता है।

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  • ऋण-से-GDP अनुपात: बजट 2026–27 में इसे 55.6% तक कम करने का अनुमान है, जो संशोधित अनुमान 2025–26 में 56.1% था।
    • सरकार का लक्ष्य है कि यह अनुपात 2030–31 तक 50% तक कम किया जाए, ताकि विकास के लिये संसाधन मुक्त किये जा सकें।
  • पूंजीगत व्यय: सरकार आर्थिक वृद्धि के प्रमुख चालक के रूप में सार्वजनिक निवेश का उपयोग जारी रखती है।
    • वित्त वर्ष 2026–27 के लिये पूंजीगत व्यय आवंटन बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है (जो GDP का लगभग 3.1% है), जो कि पहले ₹11.2 लाख करोड़ था।
    • राज्यों को पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिये दी जाने वाली अनुदान सहायता को शामिल करने पर, प्रभावी पूंजीगत व्यय ₹17.1 लाख करोड़ (GDP का लगभग 4.4%) हो जाता है।
  • GDP वृद्धि: बजट में वित्त वर्ष 2026–27 के लिये नाममात्र GDP वृद्धि 10.5% और वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7% अनुमानित की गई है।
  • संशोधित अनुमान 2025–26: गैर-ऋण आय का अनुमान ₹34 लाख करोड़ है, जबकि कुल व्यय ₹49.6 लाख करोड़ निर्धारित किया गया है, जिसमें पूंजीगत व्यय लगभग ₹11 लाख करोड़ है।
  • बजट अनुमान 2026–27: गैर-ऋण आय का अनुमान ₹36.5 लाख करोड़ है, जिसमें शुद्ध कर आय ₹28.7 लाख करोड़ शामिल है, जबकि कुल व्यय ₹53.5 लाख करोड़ अनुमानित है।
    • राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करने के लिये नेट मार्केट उधारी का अनुमान ₹11.7 लाख करोड़ है, जबकि सकल उधारी ₹17.2 लाख करोड़ है और शेष राशि लघु बचत तथा अन्य स्रोतों के माध्यम से पूरी की जाएगी।

Rupee_In_Out

केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर क्या चिंताएँ हैं?

  • वैश्विक चुनौतियाँ: बजट में वित्त वर्ष 2025–26 के लिये 10.0% नाममात्र GDP वृद्धि (FY 2025-26 के पहले एडवांस अनुमान) का अनुमान लगाया गया है,  जिसे वैश्विक आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक संघर्ष और व्यापार में व्यवधान जैसी परिस्थितियाँ चुनौती दे सकती हैं।
  • राजस्व उछाल: आयकर और GST संग्रह में बड़े घाटे ने राजकोषीय क्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर दिया, जिससे पूंजीगत व्यय और मुख्य सामाजिक  क्षेत्रों सहित सभी प्रकार के व्यय में व्यापक कटौती करनी पड़ी।
    • बजट ने आपूर्ति-पक्षीय अर्थशास्त्र (सड़क, कारखाने और रेलवे का निर्माण) पर आधारित विकास पर भारी दाँव लगाया है। हालाँकि निजी उपभोग (जो GDP का लगभग 60% है) सीमित रहा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • क्रियान्वयन में देरी: भारत-VISTAAR और बायोफार्मा SHAKTI जैसी उच्च-प्रौद्योगिकी योजनाएँ उन्नत संस्थागत क्षमता की आवश्यकता रखती हैं और अक्सर प्रशासनिक और निष्पादन संबंधी बाधाओं का सामना करती हैं, जबकि अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ भी ज़मीन अधिग्रहण जैसी समस्याओं से जूझती रहती हैं।
  • रोज़गार सृजन में अंतर: सेमीकंडक्टर और बायोफार्मा जैसे पूंजी-गहन क्षेत्रों पर केंद्रित रणनीति के कारण रोज़गारहीन या के-शेप्ड की वृद्धि का खतरा रहता है, क्योंकि शिक्षा और रोज़गार कौशल के बीच बढ़ते अंतर के चलते श्रम शक्ति का सीमित अवशोषण होता है।
  • हरित संक्रमण और संसाधन सीमाएँ: हरित तकनीकों की ओर बदलाव से जल, ऊर्जा और महत्त्वपूर्ण खनिजों की मांग बढ़ जाती है, जिससे आयात निर्भरता बढ़ती है और ग्रीनफ्लेशन का खतरा उत्पन्न होता है, जो लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और विनिर्माण की लागत को बढ़ा सकता है।
  • अनिश्चित पूंजी प्रवाह: लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का बहिर्वाह और स्पष्ट न होने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) परिदृश्य बाहरी वित्तपोषण की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को लेकर चिंताएँ बढ़ा देता है।
  • विदेशी सहायता प्राथमिकता की चुनौती: केंद्रीय बजट 2026–27 में विदेशी देशों को अनुदान सहायता आवंटित की गई है, जिसमें भूटान सबसे बड़ा लाभार्थी है, जबकि ईरान में रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण चाबहार पोर्ट परियोजना के लिये कोई धनराशि नहीं दी गई है, जिससे भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक पहुँच को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।

बजट 2026-27 के अलावा भारत की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने हेतु क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

    • मांग के दो इंजन को पुनरुज्जीवित करना: भारत की वृद्धि के लिये निवेश और उपभोग दोनों का साथ में चलना आवश्यक है। SHE मार्ट और भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) की तेज़ी से शुरुआत ग्रामीण आय बढ़ा सकती है और उच्च सीमांत उपभोग प्रवृत्ति के कारण मांग को प्रोत्साहित कर सकती है।
    • महत्त्वपूर्ण संसाधनों में रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करना (CNIED): जैसे-जैसे महत्त्वपूर्ण खनिज हरित अर्थव्यवस्था का “न्यू ऑयल” बनते जा रहे हैं, भारत को दुर्लभ मृदा गलियारे जैसी घरेलू पहलों के साथ विदेशी खनिज सुरक्षा साझेदारियों को भी जोड़ना आवश्यक है।
      • साथ ही, सेमीकंडक्टर और बायोफार्मा ईकोसिस्टम का समर्थन करने के लिये वर्तमान में GDP में कम हिस्से से अधिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च बढ़ाना आवश्यक है।
    • नए क्षेत्रों के लिये कौशल विकास: AVGC और सेमीकंडक्टर पहल के साथ आक्रामक कौशल विकास को जोड़ना आवश्यक है, ताकि प्रतिभा की कमी से बचा जा सके।
    • व्यय की गुणवत्ता: बजट को “आवंटन” से “परिणाम” की ओर ले जाना चाहिये। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज जैसी योजनाओं पर खर्च की गई हर रुपये की समीक्षा होनी चाहिये कि वह मूर्त संपत्ति निर्माण और आय सृजन में कितना योगदान दे रही है, न कि केवल फंड के उपयोग तक सीमित रहे।
    • “उलटे कर ढाँचे” को सुधारना: कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में उलटे कर ढाँचे (जहाँ कच्चे माल पर आयातित तैयार उत्पादों की तुलना में अधिक कर लगाया जाता है) घरेलू उत्पादन के लिये हानिकारक हैं।
      • क्षेत्र-विशेष कर सुधार आवश्यक है ताकि “मेड इन इंडिया” उत्पाद कर के दृष्टिकोण से आयातित वस्तुओं की तुलना में वहनीय हों।

    Union_Budget

    निष्कर्ष

    केंद्रीय बजट 2026–27 रणनीतिक रूप से राजकोषीय अनुशासन और उच्च-प्रौद्योगिकी औद्योगिकीकरण व समावेशी कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करता है, जिससे ‘विकसित भारत’ की मज़बूत नींव रखी जाती है।

    हालाँकि इसकी वास्तविक सफलता इस पर निर्भर करेगी कि ‘रोज़गारहीन संवृद्धि’ की समस्या को दूर करने के लिये योजनाओं का कितना प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है तथा निजी उपभोग को कितनी सफलता से पुनरुज्जीवित किया जाता है, ताकि आर्थिक गति ‘लास्ट माइल’ तक पहुँच सके।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    1. केंद्रीय बजट 2026–27 में उल्लिखित तीन कर्त्तव्य क्या हैं?
    इनका उद्देश्य आर्थिक वृद्धि को बनाए रखना, लोगों की क्षमताओं का निर्माण करना और लास्ट-माइल समावेशन के माध्यम से सबका साथ, सबका विकास  सुनिश्चित करना है।

    2. बायोफार्मा SHAKTI क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
    बायोफार्मा SHAKTI ₹10,000 करोड़ का एक मिशन है, जिसका उद्देश्य भारत को जैविक दवाओं (बायोलॉजिक्स) और बायोसिमिलर्स का वैश्विक केंद्र बनाना है, जिसे NIPER तथा नियामकीय ढाँचे के सुदृढ़ीकरण का समर्थन प्राप्त है।

    3. विशेष आर्थिक क्षेत्र (CERs) क्या हैं?
    CERs शहर-क्लस्टर आधारित विकास क्षेत्र हैं, जिनमें प्रत्येक क्षेत्र के लिये ₹5,000 करोड़ का प्रावधान है, ताकि चैलेंज-मोड कार्यान्वयन के माध्यम से समूहन अर्थव्यवस्थाओं (एग्लोमरेशन इकॉनमीज़) का लाभ उठाया जा सके।

    4. बजट की जॉबलेस ग्रोथ (रोज़गारहीन वृद्धि) के लिये आलोचना क्यों की जाती है?
    सेमीकंडक्टर और बायोफार्मा जैसे पूंजी-गहन क्षेत्रों पर फोकस के कारण शिक्षा और रोज़गार कौशल के बीच बढ़ते अंतर के बीच व्यापक रोज़गार सृजन सीमित हो सकता है।

    5. बजट 2026–27 के प्रमुख राजकोषीय लक्ष्य क्या हैं?
    राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% पर लक्षित है, ऋण-से-GDP अनुपात 55.6% रखा गया है और विकास को गति देने के लिये पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है।

    दृष्टि मेन्स प्रश्न:

    प्रश्न. केंद्रीय बजट 2026–27 अग्रणी (फ्रंटियर) क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता और ‘लास्ट माइल’ तक समावेशी विकास—इन दोहरे उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। बजट में उल्लिखित ‘तीन कर्त्तव्यों’ के संदर्भ में इस कथन पर चर्चा कीजिये।

    UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

    प्रिलिम्स:

    प्रश्न 1. "लेखानुमोदन" और "अंतरिम बजट" में क्या अंतर है? (2011)  

    1. स्थायी सरकार लेखानुमोदन के प्रावधान उपयोग करती है, जबकि कार्यवाहक सरकार "अंतरिम बजट" के प्रावधान का प्रयोग करती है।
    2. लेखानुमोदन सरकार के बजट के व्यय पक्ष मात्र से संबद्ध होता है, जबकि अंतरिम बजट में व्यय तथा अवती दोनों सम्मिलित होते हैं।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

    (a) केवल 1

    (b) केवल 2 

    (c) 1 और 2 दोनों

    (d) न तो 1 और न ही 2  

    उत्तर: (b) 


    प्रश्न. वित्त मंत्री संसद में बजट प्रस्तुत करते हुए उसके साथ अन्य प्रलेख भी प्रस्तुत करते हैं जिनमें वृहद् आर्थिक रूपरेखा विवरण (The Macro Economic Framework Statement) भी सम्मिलित रहता है। यह पूर्वोक्त प्रलेख निम्न आदेशन के कारण प्रस्तुत किया जाता है: (2020)

    (a) चिरकालिक संसदीय परंपरा के कारण

    (b) भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 तथा अनुच्छेद 110 (1) के कारण

    (c) भारत के संविधान के अनुच्छेद 113 के कारण

    (d) राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के कारण

    उत्तर : (d)


    मेन्स:

    प्रश्न 1. पूंजी बजट और राजस्व बजट के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिये। इन दोनों बजटों के संघटकों को समझाइये। (2021)

    प्रश्न 2. उदारीकरण के बाद की अवधि के दौरान बजट बनाने के संदर्भ में सार्वजनिक व्यय प्रबंधन भारत सरकार के लिये एक चुनौती है। स्पष्ट कीजिये। (2019)


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