भारतीय अर्थव्यवस्था
सकल घरेलू उत्पाद एवं निवल घरेलू उत्पाद
- 08 Jan 2026
- 93 min read
प्रिलिम्स के लिये: सकल घरेलू उत्पाद, GDP डिफ्लेटर, प्रति व्यक्ति GDP, सकल स्थिर पूंजी निर्माण, निवल घरेलू उत्पाद (NDP)
मेन्स के लिये: GDP बनाम NDP: वैचारिक अंतर और नीतिगत प्रभाव; कल्याण एवं सततता के संकेतक के रूप में GDP की सीमाएँ
चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के माध्यम से वित्त वर्ष 2025–26 के लिये सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के प्रथम अग्रिम अनुमान (First Advance Estimates) जारी किये हैं, जिनमें वास्तविक GDP में 7.4% की सुदृढ़ वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है।
- इसके साथ ही, भारत आर्थिक गतिविधि के प्राथमिक मापदंड के रूप में GDP से निवल घरेलू उत्पाद (NDP) की ओर स्थानांतरण की योजना बना रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र की राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (SNA) 2025 के अनुरूप है। इसका कार्यान्वयन वर्ष 2029-30 से अपेक्षित है, ताकि उत्पादन की वास्तविक लागत को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित किया जा सके।
सारांश
- वित्त वर्ष 2025-26 के लिये प्रथम अग्रिम अनुमान में वास्तविक GDP में 7.4% की सुदृढ़ वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जो मुख्यतः सेवा क्षेत्र द्वारा संचालित है तथा इसमें निजी उपभोग और निवेश की गति प्रबल बनी हुई है।
- भारत SNA 2025 के अनुरूप GDP से निवल घरेलू उत्पाद (NDP) की ओर संक्रमण की योजना बना रहा है, ताकि निवल एवं सततता-समायोजित (Net and Continuity-Adjusted) आर्थिक वृद्धि को बेहतर ढंग से मापा जा सके और GDP की सीमाओं, जैसे– पूंजी अपक्षय, पर्यावरणीय लागत और असमानता को संबोधित किया जा सके।
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?
- परिचय: GDP किसी निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष या तिमाही) में देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
- GDP के प्रकार:
- मौद्रिक GDP (Nominal GDP): वर्तमान बाज़ार मूल्यों पर मापा जाता है, जिसमें मुद्रास्फीति का समायोजन नहीं किया जाता। यह एक ही वर्ष के भीतर तुलना हेतु उपयोगी है, लेकिन वर्षों के बीच तुलना के लिये विश्वसनीय नहीं होता।
- वास्तविक GDP (Real GDP): GDP डिफ्लेटर का उपयोग कर मुद्रास्फीति के प्रभाव को समायोजित किया जाता है। यह उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक मात्रा को प्रतिबिंबित करता है तथा समय के साथ आर्थिक वृद्धि की तुलना को संभव बनाता है।
- मौद्रिक GDP (Nominal GDP): वर्तमान बाज़ार मूल्यों पर मापा जाता है, जिसमें मुद्रास्फीति का समायोजन नहीं किया जाता। यह एक ही वर्ष के भीतर तुलना हेतु उपयोगी है, लेकिन वर्षों के बीच तुलना के लिये विश्वसनीय नहीं होता।
- भारत में GDP की गणना की पद्धति:
- वर्ष 2015 से पूर्व: भारत में GDP की गणना 2004-05 को आधार वर्ष मानकर की जाती थी और इसे कारक लागत (Factor Cost) पर मापा जाता था, जिसमें अप्रत्यक्ष कर और सब्सिडी शामिल नहीं होते थे।
- क्षेत्रीय कवरेज अपेक्षाकृत सीमित थी तथा श्रम आय का आकलन श्रमिकों के प्रकारों में भेद किये बिना समान रूप से किया जाता था।
- वर्ष 2015 के पश्चात: GDP की गणना में 2011-12 को आधार वर्ष अपनाया गया और इसे बाज़ार मूल्य (Market Prices) पर मापा जाने लगा, जिसमें कर और सब्सिडी शामिल हैं। प्रभावी श्रम आगत (Effective Labour Input) के माध्यम से श्रम आय के आकलन में सुधार किया गया तथा कृषि तथा वित्तीय सेवाओं में कवरेज का विस्तार किया गया।
- वर्ष 2015 से पूर्व: भारत में GDP की गणना 2004-05 को आधार वर्ष मानकर की जाती थी और इसे कारक लागत (Factor Cost) पर मापा जाता था, जिसमें अप्रत्यक्ष कर और सब्सिडी शामिल नहीं होते थे।
- संभावित GDP (Potential GDP): यह वह अधिकतम सतत उत्पादन है, जो एक अर्थव्यवस्था अपने सभी संसाधनों श्रम, पूंजी, प्रौद्योगिकी का कुशलतापूर्वक उपयोग करके उत्पन्न कर सकती है, बढ़ती मुद्रास्फीति को उत्पन्न किये बिना।
- महत्त्व: संभावित GDP अर्थव्यवस्था के आकार, उत्पादकता, वृद्धि और व्यापक आर्थिक प्रदर्शन का प्रमुख संकेतक है। GDP वृद्धि दर अर्थव्यवस्था के विस्तार या संकुचन की गति को दर्शाती है।
- आधार वर्ष संशोधन: भारत GDP आधार वर्ष को 2011-12 से 2022-23 में संशोधित कर रहा है, ताकि वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित किया जा सके। संशोधित GDP शृंखला फरवरी 2027 में जारी होने की योजना है।
- संशोधित GDP शृंखला SNA 2008 के अनुरूप जारी रहेगी, जबकि NDP की ओर परिवर्तन SNA 2025 के अनुरूप होगा।
GDP की सीमाएँ
- पूंजी अपक्षय के लिये समायोजन का अभाव: GDP सकल उत्पादन (Gross Output) को मापता है और भौतिक पूंजी, जैसे– मशीनरी, अवसंरचना और भवनों के अपक्षय को कम नहीं करता है, जिससे अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पन्न शुद्ध/निवल आय (Net Income) का आकलन अधिक दिखता है।
- पर्यावरणीय लागत का अपवर्जन: GDP संसाधनों के उत्खनन और प्रदूषण-प्रधान गतिविधियों को मूल्य संवर्द्धन के रूप में मानता है, लेकिन प्राकृतिक पूंजी के क्षरण या पर्यावरणीय क्षति को शामिल नहीं करता, जबकि इनका दीर्घकालीन आर्थिक कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- GDP केवल लघु-कालिक आर्थिक उत्पादन पर केंद्रित है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाली लागत (Intergenerational Costs) की अनदेखी करता है, जिससे यह सतत और समावेशी दीर्घकालिक विकास का मूल्यांकन करने के लिये अपर्याप्त मापदंड बन जाता है।
- अवैतनिक श्रम का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व: घरेलू श्रम, देखभाल कार्य (Care Work) और असंगठित अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से जैसी बाज़ार के बाहर की गतिविधियाँ या तो कम मूल्यांकित की जाती हैं या पूरी तरह से शामिल नहीं की जातीं, जिससे कुल आर्थिक गतिविधि का आकलन अधूरा रह जाता है।
- आय वितरण के प्रति असंवेदनशीलता: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) केवल देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य दर्शाता है, लेकिन यह नहीं दर्शाता कि यह आय समाज के विभिन्न वर्गों में कैसे वितरित की गई है। इसलिये GDP में वृद्धि के बावजूद समाज में आय तथा संपत्ति की असमानता बढ़ सकती है।
- विकास की गुणवत्ता के बजाय उत्पादन की मात्रा पर बल: GDP केवल उत्पादन की मात्रा को मापता है, लेकिन यह विकास के गुणात्मक आयामों जैसे कि स्वास्थ्य परिणाम, शैक्षिक उपलब्धि, सामाजिक कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता को मापने में असमर्थ रहता है।
- वर्ष 2025 में भारत 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की GDP के साथ जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हालाँकि प्रति व्यक्ति आय के मामले में जापान अब भी भारत से बहुत आगे है। वर्ष 2024 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP जहाँ 2,694 अमेरिकी डॉलर थी, वहीं जापान की 32,487 अमेरिकी डॉलर थी, जो औसत आय के स्तर में एक बड़े अंतर को दर्शाती है।
- रक्षा और सुधारात्मक खर्चों को शामिल करना: आपदा पुनर्प्राप्ति, प्रदूषण नियंत्रण, दुर्घटनाओं के कारण स्वास्थ्य देखभाल या अपराध रोकथाम पर होने वाले खर्च GDP को बढ़ा देते हैं, भले ही ये खर्च सामाजिक या पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिये किये गए हों और वास्तविक कल्याण में वृद्धि को दर्शाते न हों।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिये GDP के पहले एडवांस अनुमानों के मुख्य तथ्य क्या हैं?
- वास्तविक GDP वृद्धि दर: वित्त वर्ष 2025–26 में 7.4% अनुमानित है, जो वित्त वर्ष 2024–25 की 6.5% वृद्धि दर से अधिक है।
- मौद्रिक GDP वृद्धि दर: वित्त वर्ष 2025–26 में 8.0% अनुमानित है।
- वास्तविक GVA वृद्धि दर: 7.3% अनुमानित है, जो मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में तेज़ वृद्धि के कारण है।
- उच्च वृद्धि वाले तृतीयक (सेवा) क्षेत्र:
- वित्तीय, रियल एस्टेट एवं व्यावसायिक सेवाएँ तथा लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएँ: स्थिर कीमतों पर 9.9% की अनुमानित वृद्धि।
- व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण क्षेत्र: स्थिर कीमतों पर 7.5% की अनुमानित वृद्धि।
- द्वितीयक क्षेत्र का प्रदर्शन:
- विनिर्माण एवं निर्माण क्षेत्र: स्थिर कीमतों पर 7.0% की अनुमानित वृद्धि।
- प्राथमिक और उपयोगिता क्षेत्र:
- कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ: 3.1% की अनुमानित वृद्धि।
- विद्युत, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाएँ: 2.1% की अनुमानित वृद्धि, जो मध्यम स्तर के विस्तार को दर्शाती है।
- निजी उपभोग: निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.0% की अनुमानित वृद्धि, जो घरेलू मांग के निरंतर बने रहने को दर्शाती है।
- निवेश: वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान स्थिर कीमतों पर सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) में 7.8% की अनुमानित वृद्धि, जो पिछले वित्त वर्ष की 7.1% वृद्धि दर से अधिक है।
निवल घरेलू उत्पाद (NDP) क्या है?
- परिचय: निवल घरेलू उत्पाद (NDP) किसी देश की आर्थिक उत्पादन क्षमता का एक माप है। यह एक निश्चित अवधि में देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य से पूंजीगत परिसंपत्तियों के मूल्यह्रास (Depreciation) को घटाने के बाद प्राप्त होता है।
- SNA 2025 के अंतर्गत, NDP = GDP – (स्थिर पूंजी का मूल्यह्रास + प्राकृतिक संसाधनों का क्षय) माना गया है, जिससे यह एक अधिक सततता-संवेदनशील (Sustainability-Aware) आर्थिक संकेतक बन जाता है।
- महत्त्व: यह सकल उत्पादन के बजाय अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पन्न वास्तविक निवल आय को दर्शाता है।
- यह भौतिक पूंजी की क्षति और प्राकृतिक संसाधनों के क्षय को भी ध्यान में रखता है।
- यह आकलन करने में मदद करता है कि आर्थिक वृद्धि वास्तविक है या केवल संपत्तियों को घटाकर प्राप्त की गई है।
- यह दीर्घकालीन योजना, वित्तीय स्थिरता और पीढ़ियों के बीच समानता को सुनिश्चित करने में सहायक है।
- GDP की तुलना में NDP की श्रेष्ठता: NDP मूल्यह्रास को समायोजित करता है, जबकि GDP पूंजी की खपत को नज़रअंदाज़ करता है।
- SNA 2025 के तहत, NDP प्राकृतिक संसाधनों के क्षय को घटाकर पर्यावरणीय लागत को शामिल करता है।
- यह आर्थिक कल्याण और उत्पादन क्षमता का अधिक यथार्थपूर्ण माप प्रदान करता है।
- यह केवल उत्पादन के विस्तार के बजाय निवल मूल्य वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करके वृद्धि का अधिक अनुमान लगाने से रोकता है।
संयुक्त राष्ट्र की राष्ट्रीय लेखांकन प्रणाली (SNA) 2025
- SNA 2025 एक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय ढाँचा है, जो राष्ट्रीय खातों को संकलित करने के लिये बनाया गया है। यह SNA 2008 की जगह लेता है और GDP से आगे बढ़कर सततता, आय का वितरण और गैर-बाज़ार गतिविधियों को बेहतर तरीके से मापने की क्षमता प्रदान करता है।
- SNA 2025 के तहत, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का उत्पादन गैर-बाज़ार गतिविधि के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा और बैंकों द्वारा किये जाने वाले नियामक भुगतान को सेवा शुल्क नहीं बल्कि स्थानांतरण के रूप में माना जाएगा।
- यह प्राकृतिक पूंजी लेखांकन (Natural Capital Accounting) को शामिल करता है, जिसमें खनिज, कोयला, तेल और गैस के क्षय को उत्पादन लागत माना जाएगा, जबकि नवीकरणीय संसाधनों को संपत्ति के रूप में मान्यता दी जाएगी। इसके साथ ही यह वितरणीय खाते (Distributional Accounts) भी जोड़ता है, जो विभिन्न घरेलू समूहों में आय, संपत्ति, उपभोग और बचत को दर्शाते हैं।
- SNA 2025 अपने विस्तारित खातों (Extended Accounts) में अवैतनिक घरेलू और देखभाल कार्य को शामिल करके नीति प्रासंगिकता को बढ़ाता है, जिससे आर्थिक वृद्धि को समानता, पारिस्थितिक संतुलन और समावेशिता के साथ जोड़ा जा सके।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारतीय संदर्भ में आर्थिक कल्याण के माप के रूप में GDP की सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. निवल घरेलू उत्पाद (NDP) क्या है?
यह GDP में से पूंजीगत मूल्यह्रास और प्राकृतिक संसाधनों की कमी को घटाकर शुद्ध उत्पादन को मापता है, जो वास्तविक आय सृजन को दर्शाता है।
2. एडवांस अनुमानों के अनुसार, FY 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा रहा?
वास्तविक GDP में 7.4% की वृद्धि हुई, जिसका नेतृत्व सेवा क्षेत्र ने किया, वास्तविक GVA में 7.3% की वृद्धि हुई, जिसमें मज़बूत निजी उपभोग और निवेश योगदानकर्त्ता रहे।
3. GDP की मुख्य कमियाँ क्या हैं?
GDP मूल्यह्रास, पर्यावरणीय लागत, अवैतनिक काम, आय वितरण की असमानता को नज़रअंदाज़ करता है और सुधारात्मक खर्चों को भी वृद्धि के रूप में गिनता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स
प्रश्न 1. भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2015)
- पिछले दशक में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में लगातार वृद्धि हुई है।
- बाज़ार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (रुपए में) में पिछले एक दशक में लगातार वृद्धि हुई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b)
प्रश्न 2. किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में कर में कमी निम्नलिखित में से किसको दर्शाती है? (2015))
- धीमी आर्थिक विकास दर
- राष्ट्रीय आय का कम न्यायसंगत वितरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a)
मेन्स
प्रश्न 1. संभावित सकल घरेलू उत्पाद को परिभाषित करते हुए इसके निर्धारकों की व्याख्या कीजिये। वे कौन-से कारक हैं जो भारत को अपनी संभावित GDP को साकार करने से रोक रहे हैं? (2020)
प्रश्न 2. वर्ष 2015 से पहले और वर्ष 2015 के बाद भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की कंप्यूटिंग पद्धति के बीच अंतर को स्पष्ट कीजिये। (2021)
