अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-कनाडा संबंध
- 02 Feb 2026
- 91 min read
प्रिलिम्स के लिये: कनाडा, कार्बन कैप्चर, म्यूरेट ऑफ पोटाश, एंट्रिक्स, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल
मेन्स के लिये: भारत-कनाडा संबंध:अवसर और चुनौतियाँ, भारत की विदेश नीति में ऊर्जा कूटनीति और महत्त्वपूर्ण खनिज, प्रवासी राजनीति और द्विपक्षीय संबंधों पर इसका प्रभाव
चर्चा में क्यों?
भारत और कनाडा ने जनवरी 2026 में उच्च-स्तरीय वार्त्ताओं के माध्यम से अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'रीसेट' और पुनरुज्जीवित किया है, जो सहयोग के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
- भारत-कनाडा संबंधों को अब परमाणु ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और संबद्ध क्षेत्रों जैसे चार रणनीतिक आधारों पर पुनर्गठित किया गया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य कनाडा के प्राकृतिक संसाधनों तथा भारत के विस्तृत औद्योगिक एवं कृषि आधार के बीच एक मज़बूत तालमेल स्थापित करना है।
भारत और कनाडा के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत की मुख्य बातें क्या हैं?
- ऊर्जा: इंडिया एनर्जी वीक (IEW), 2026 के इतर दोनों देशों ने कनाडा-भारत मंत्रिस्तरीय ऊर्जा वार्त्ता (CIMED) को फिर से शुरू किया, जिसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये LNG, LPG और कच्चे तेल जैसे संसाधनों की आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना है।
- दोनों देश हाइड्रोजन उत्पादन, कार्बन कैप्चर (कार्बन सोखने की तकनीक) और टिकाऊ विमानन ईंधन पर सहयोग करने के लिये सहमत हुए हैं।
- खाद्य सुरक्षा: कनाडा, जो पहले से ही भारत की 'मुरिएट ऑफ पोटाश' (MOP) की 25% आवश्यकता को पूरा करता है, ने एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्त्ता के रूप में अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।
- एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत कदम के रूप में कनाडा ने अपने प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में भारतीय भागीदारों द्वारा किये गए किसी भी निवेश के बराबर निवेश करने का संकल्प लिया है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज और स्वच्छ गतिशीलता: दोनों पक्ष 'एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल' (ACC) निर्माण, अगली पीढ़ी की बैटरी अनुसंधान और विकास (R&D) के लिये समन्वय तंत्र बनाने पर सहमत हुए हैं।
- कनाडा ने भारत के EV मिशनों (जैसे– PM E-DRIVE) के लिये अनिवार्य लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्त्वों (REEs) की ज़रूरतों को पूरा करने में सहयोग देने की अपनी तत्परता दोहराई है।
- पारदर्शी और लचीली आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मार्च 2026 में टोरंटो में पहले 'कनाडा-भारत महत्त्वपूर्ण खनिज वार्षिक संवाद' के आयोजन की घोषणा की गई है।
- व्यापार: दोनों देश 'व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते' (CEPA) के लिये वार्त्ताओं में तेज़ी लाने पर सहमत हुए हैं, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना है।
- कनाडा के प्रधानमंत्री की मार्च 2026 में प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान 2.8 बिलियन कनाडाई डॉलर मूल्य के 10-वर्षीय यूरेनियम आपूर्ति समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की उम्मीद है।
भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख बिंदु क्या हैं?
- पृष्ठभूमि: भारत और कनाडा एक लंबे समय से चले आ रहे संबंध साझा करते हैं, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुसांस्कृतिक समाजों पर आधारित हैं। भारतीयों का कनाडा की ओर प्रवासन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू हुआ, जब वैंकूवर में स्वदेश सेवक होम जैसे संस्थानों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ समर्थन जुटाया था।
- राजनयिक संबंध 1947 में स्थापित किये गए और भारतीय संविधान ने कनाडा के संघीय मॉडल से प्रेरणा ली, जिसमें एक सशक्त केंद्र और केंद्र में निहित अवशिष्ट शक्तियाँ शामिल हैं।
- 1990 के बाद के दौर में भारत के आर्थिक उदारीकरण के साथ दोनों देशों के संबंधों में पुनः सुधार हुआ, अंततः वर्ष 2015 में द्विपक्षीय संबंध सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत हुए।
- सामरिक महत्त्व: भारत कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत एक प्रमुख भागीदार है, जो बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक एकरूपता को दर्शाता है।
- व्यापार: वर्ष 2024 में भारत कनाडा का 7वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार 30.9 अरब अमेरिकी डॉलर का था और वस्तु व्यापार (गुड्स ट्रेड) में भारत का व्यापार अधिशेष बनाए रखा।
- कनाडा से भारत को शीर्ष निर्यात: सब्ज़ियाँ, खनिज ईंधन और तेल, लकड़ी लुगदी, उर्वरक, कागज़ और पेपरबोर्ड।
- भारत से कनाडा को शीर्ष निर्यात: फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कीमती पत्थर और धातुएँ, लौह और इस्पात उत्पाद।
- प्रवासी समुदाय: कनाडा दुनिया में सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक है, जहाँ 1.8 मिलियन से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग कनाडा-भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (2005) में निहित है। यह संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी समन्वय समिति (JSTCC) द्वारा समर्थित है।
- इसरो और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के बीच समझौता ज्ञापन है और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स ने कई कनाडाई नैनोसैटेलाइट लॉन्च किये हैं।
- सुरक्षा सहयोग: यह आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यदल (1997) और फ्रेमवर्क फॉर कोऑपरेशन ऑन काउंटरिंग टेररिज़्म (2018) में निहित है, जबकि प्रत्यर्पण संधि (1987) और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (1994) के माध्यम से कानूनी सहयोग और मज़बूत होता है।
भारत-कनाडा संबंधों में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
- खालिस्तान मुद्दा: कनाडा की भूमि से संचालित गैंगस्टर–आतंकी नेक्सस, जहाँ खालिस्तानी अलगाववादी कथित रूप से संगठित आपराधिक गिरोहों के साथ मिलकर भारत में रंगदारी, धमकियाँ और लक्षित हत्याओं को अंजाम देते हैं।
- नई दिल्ली कनाडा के रुख को “पर्मिसिव वोट-बैंक पॉलिटिक्स” के रूप में देखती है और आरोप लगाती है कि वह उन आतंकियों के लिये सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है जो असाइलम जैसे लूपहोल्स का लाभ उठाते हैं, जिससे विशेषतः पंजाब में भारत की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा खतरा उत्पन्न होता है।
- दोनों देश इस बात पर सामंजस्य बिठाने में कठिनाई महसूस करते हैं कि वैध राजनीतिक सक्रियता और हिंसक उग्रवाद के बीच रेखा कहाँ खींची जाए, मूलतः उन गैंगों के संदर्भ में जो सीमा-पार सक्रिय हैं।
- व्यापार एवं आर्थिक बाधाएँ: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की प्रगति पर अभी भी कनाडाई कृषि निर्यात और भारतीय वस्त्र व औषधियों पर उच्च शुल्कों के साथ-साथ गैर-शुल्क अवरोधों की वजह से रोक लगी हुई है; इनमें भारत के जटिल स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) मानदंड और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व रासायनिक उत्पादों के लिये कनाडा के कठोर नियामकीय मानक शामिल हैं।
- डिजिटल व्यापार एवं गोपनीयता: भारत में डेटा गवर्नेंस के भिन्न मॉडल और डेटा स्थानीयकरण संबंधी कानून, भारतीय बाज़ार से जुड़ने के लिये तैयार कनाडाई प्रौद्योगिकी एवं एआई कंपनियों के लिये चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।
- भूराजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) विचलन: यद्यपि दोनों देश “इंडो-पैसिफिक” दृष्टि का हिस्सा हैं, फिर भी उनकी रणनीतिक प्राथमिकताएँ भिन्न हैं।
- कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति मुख्यतः जोखिम कम करने और मानवाधिकारों पर केंद्रित है, जबकि भारत का ज़ोर पड़ोस में समुद्री सुरक्षा और चीनी प्रभाव के संतुलन पर अधिक है।
- वर्तमान स्थिति यह है कि दोनों देश आंशिक रूप से अमेरिका से जुड़े व्यापारिक उतार–चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिये भी एक-दूसरे की ओर रणनीतिक झुकाव बढ़ा रहे हैं।
भारत–कनाडा संबंधों को सुदृढ़ करने हेतु क्या उपाय किये जा सकते हैं?
- कूटनीतिक पुनर्संतुलन: खालिस्तानी आतंकवाद से निपटने के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर पर द्विपक्षीय “सुरक्षा एवं संप्रभुता संवाद” स्थापित किया जाए, जिसमें खुफिया साझेदारी और कानूनी सहयोग के लिये स्पष्ट प्रोटोकॉल हों।
- इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और समुद्री साझेदारी पर रणनीतिक असहमति कम करने के लिये 2+2 संवाद तंत्र शुरू किया जाए, जिसमें दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री/समकक्ष शामिल हों।
- मानवीय पूंजी सुदृढ़ करना: दोनों देशों को प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर ट्रैक–II कूटनीति को बढ़ावा देना चाहिये, ताकि लोगों के बीच संपर्क गहरा हो, सांस्कृतिक आदान–प्रदान बढ़े और संवाद व विवाद-निवारण के प्रयासों को समर्थन मिले।
- फिल्मों और कला के क्षेत्र में द्विपक्षीय को-प्रोडक्शन का विस्तार कर “जीवंत सेतु” (डायस्पोरा) को प्रोत्साहित किया जाए और नकारात्मक राजनीतिक आख्यानों का संतुलन प्रस्तुत किया जाए।
- खुफिया समन्वय: आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यसमूह को पुनरुज्जीवित कर संगठित अपराध और उग्रवादी फंडिंग पर साझा डाटाबेस तैयार किया जाए।
- मौजूदा व्यवस्थापित प्रत्यर्पण संधि (1987) और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (1994) का उपयोग बढ़ाना ताकि अपराधी तत्त्व किसी भी देश का उपयोग ‘सुरक्षित आश्रय’ (Safe Haven) के रूप में न कर सकें।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) निर्यात: कनाडा G7 अर्थव्यवस्था में भारत की DPI के लिये एक परीक्षण-स्थल के रूप में कार्य कर सकता है, जिससे निर्बाध सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।
- व्यावसायिक प्रत्यायन: पेशेवर योग्यताओं (डॉक्टरों, इंजीनियरों और नर्सों) की पारस्परिक मान्यता। इससे ‘छात्र प्रवासन’ के मुद्दे को ‘स्किल टैलेंट पार्टनरशिप’ में बदला जा सकेगा और वीज़ा कैप को लेकर होने वाले घर्षण में कमी आएगी।
- GIFT सिटी ईकोसिस्टम: कनाडाई ‘रिसर्च क्लस्टर’ को भारत में स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करना, जिसका फोकस कोल्ड-चेन प्रौद्योगिकी और सतत खनन पर होगा, जो भारत के विकसित भारत@2047 लक्ष्यों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।
कनाडा
- यह उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में स्थित है और क्षेत्रफल के आधार पर रूस के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है।
- यह उत्तर-पश्चिम में अलास्का तथा दक्षिण में संयुक्त राज्य अमेरिका के राज्यों के साथ सीमा साझा करता है; कनाडा-अमेरिका सीमा विश्व की सबसे लंबी द्वि-राष्ट्रीय स्थलीय सीमा है। कनाडा के उत्तर में आर्कटिक महासागर, पूर्व में अटलांटिक महासागर और पश्चिम में प्रशांत महासागर हैं, साथ ही यह ग्रीनलैंड तथा फ्राँस के द्वीप सेंट पियरे और मिकेलॉन के साथ समुद्री सीमाएँ भी साझा करता है।
- इसकी राजधानी ओटावा है और देश में आर्कटिक, सब-आर्कटिक, प्रेयरी, ग्रेट लेक्स, कॉर्डिलेरन तथा पूर्वी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों सहित सात जलवायु क्षेत्र पाए जाते हैं।
- प्रमुख भौतिक विशेषताओं में रॉकी, सेंट एलियास और लॉरेंटियन पर्वत श्रेणियाँ; मैकेंज़ी, युकोन और सेंट लॉरेंस जैसी नदियाँ तथा ग्रेट लेक्स शामिल हैं, जो अमेरिका के साथ एक प्राकृतिक सीमा बनाती हैं।
- कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जिनमें लौह अयस्क, निकल, तांबा, सोना, यूरेनियम, दुर्लभ मृदा तत्त्व, पोटाश और हीरे शामिल हैं।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: भारत और कनाडा के बीच एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) संपन्न करने की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत-कनाडा सहयोग को कौन-से सुरक्षा ढाँचे संचालित करते हैं?
सुरक्षा सहयोग 1997 के आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यसमूह और वर्ष 2018 के आतंकवाद-निरोध सहयोग ढाँचे पर आधारित है, जिसे 1987 की प्रत्यर्पण संधि और 1994 की पारस्परिक कानूनी सहायता संधि का समर्थन प्राप्त है।
2. द्विपक्षीय संबंधों में खालिस्तान मुद्दा क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत कनाडा द्वारा pro‑खालिस्तान तत्त्वों के प्रबंधन को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये एक गंभीर चिंता के रूप में देखता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच विश्वास में एक प्रमुख दरार उत्पन्न हो गई है।
3. भारत और कनाडा के बीच व्यापार कितना महत्त्वपूर्ण है?
वर्ष 2024 में भारत कनाडा का सातवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार लगभग 30.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा और वस्तुओं के व्यापार में भारत को व्यापार अधिशेष प्राप्त था।
4. कनाडा भारत के लिये रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
कनाडा के पास प्रचुर ऊर्जा संसाधन, महत्त्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल्स, उन्नत प्रौद्योगिकी आधार तथा भारत की इंडो‑पैसिफिक रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थित होने के कारण वह भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा के लिये एक प्रमुख भागीदार बन जाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से किस एक समूह के चारों देश G20 के सदस्य हैं? (2020)
(a) अर्जेंटीना, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की
(b) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड
(c) ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम
(d) इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया
उत्तर: (a)
