प्रारंभिक परीक्षा
महावीर जयंती
चर्चा में क्यों?
भारत के राष्ट्रपति ने महावीर जयंती (महावीर जन्म कल्याणक) की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएँ दीं, जो भगवान वर्धमान महावीर के जन्म दिवस का प्रतीक है, जो जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर (सर्वोच्च उपदेशक एवं आध्यात्मिक गुरु) थे।
- वर्ष 2026 में यह 31 मार्च को मनाया जाएगा, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, यानी चंद्रमा के बढ़ते चरण के 13वें दिन, पर पड़ता है।
भगवान वर्धमान महावीर कौन थे?
- प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 599 ईसा पूर्व में वर्तमान बिहार के वैशाली के पास स्थित कुण्डग्राम में वर्धमान के रूप में हुआ था।
- वे इक्ष्वाकु वंश से संबंधित थे और उनका जन्म राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहाँ हुआ था।
- आध्यात्मिक खोज: 30 वर्ष की आयु में वर्धमान ने आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिये अपने राजसी विशेषाधिकार, परिवार और भौतिक संपत्ति का त्याग कर संन्यास धारण कर लिया।
- उन्होंने ऋजुपालिका नदी के तट पर एक साल वृक्ष के नीचे ‘केवल ज्ञान’ (सर्वज्ञता या परम अनंत ज्ञान) की प्राप्ति की।
- महावीर की उपाधि: अपने इंद्रियों और आंतरिक शत्रुओं (जैसे– क्रोध, लोभ, अहंकार तथा कपट) पर विजय प्राप्त करने के बाद वर्धमान को ‘जिन’ (विजेता) तथा ‘महावीर’ (महान वीर) की उपाधियाँ प्राप्त हुईं।
- निर्वाण: भगवान महावीर ने 72 वर्ष की आयु में बिहार के वर्तमान राजगीर के निकट स्थित पावापुरी में मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति) प्राप्त किया।
- महावीर के अनुसार, निर्वाण या मोक्ष सांसारिक इच्छाओं से मुक्ति प्राप्त करने से हासिल होता है, जिसकी शुरुआत त्याग से होती है और जिसे त्रिरत्न (तीन रत्न) सम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र (सही आचरण) के पालन द्वारा मार्गदर्शित किया जाता है।
- भगवान महावीर के मुख्य उपदेश: महावीर ने सार्थक जीवन के लिये पाँच मूल व्रत (महाव्रत) निर्धारित किये। इससे पहले 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने चार व्रत अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह का उपदेश दिया था, जबकि महावीर ने इसमें पाँचवा व्रत ‘ब्रह्मचर्य’ जोड़ा।
- अहिंसा: सर्वोच्च सिद्धांत (अहिंसा परमो धर्म:)। इसका अर्थ है किसी भी जीव को शारीरिक, मानसिक या वाचिक रूप से हानि नहीं पहुँचाना।
- सत्य (सत्यवादिता): सदैव सत्य बोलना और असत्य, अतिशयोक्ति या छल से बचना।
- अस्तेय (अचौर्य): किसी ऐसी वस्तु को न लेना जो स्वेच्छा से न दी गई हो या जिसे वैध माध्यमों से प्राप्त न किया गया हो।
- अपरिग्रह: भौतिक संपत्ति, धन और सांसारिक आसक्तियों से पूर्ण वैराग्य।
- ब्रह्मचर्य (आत्मसंयम): कामनाओं और भोग-विलास पर कठोर नियंत्रण रखना।
- अनुशासनात्मक परंपरा: उन्होंने अपने अनुयायियों को चार प्रकार के जैन संघ में संगठित किया—साधु (भिक्षु), साध्वी (भिक्षुणियाँ), श्रावक (गृहस्थ पुरुष) और श्राविका (गृहस्थ महिलाएँ)।
- महावीर के ग्यारह प्रमुख शिष्य (गणधर) थे, जिनमें इंद्रभूति गौतम और सुधर्मन ने प्रारंभिक मठ परंपरा की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उनकी शिक्षाएँ आगम सूत्रों में संरक्षित की गईं, जिन्हें प्रारंभ में मौखिक रूप से संप्रेषित किया गया और बाद में ताड़पत्रों पर लिपिबद्ध किया गया, हालाँकि समय के साथ इनमें से कई लुप्त हो गए।
- मुख्य दार्शनिक योगदान:
- अनेकांतवाद (बहुलवाद का सिद्धांत): वह दर्शन जो सत्य एवं वास्तविकता को जटिल मानता है तथा सदैव बहुआयामी होने का उपदेश देता है। यह दर्शाता है कि कोई भी एक दृष्टिकोण पूर्ण सत्य का स्वामी नहीं होता।
- स्याद्वाद (नियतकालिक प्रतिपादन सिद्धांत): वह आधारभूत सिद्धांत कि सभी निर्णय एवं सत्य नियतकालिक एवं सापेक्षिक होते हैं, जो केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही लागू होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. महावीर जयंती कब मनाई जाती है?
यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाती है।
2. जैन धर्म के त्रिरत्न क्या हैं?
सम्यक् दर्शन (सही आस्था), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् आचरण (सही आचरण) मुक्ति के मार्ग का मार्गदर्शन करते हैं।
3. महावीर द्वारा बताए गए पाँच महाव्रत क्या हैं?
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैन धर्म के मूल नैतिक सिद्धांत हैं।
4. अनेकांतवाद क्या है?
यह इस बात पर बल देता है कि सत्य के कई दृष्टिकोण होते हैं और कोई भी एकमात्र दृष्टिकोण पूर्ण रूप से अंतिम नहीं होता।
5. महावीर को निर्वाण कहाँ प्राप्त हुआ?
उन्होंने 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी में मोक्ष प्राप्त किया।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. भारत की धार्मिक प्रथाओं के संदर्भ में “स्थानकवासी” संप्रदाय का संबंध किससे है? (2018)
(a) बौद्ध मत
(b) जैन मत
(c) वैष्णव मत
(d) शैव मत
उत्तर: (b)
प्रश्न. भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)
- सौत्रांतिका और सम्मितीय जैन मत के संप्रदाय थे।
- सर्वास्तिवादियों की मान्यता थी कि दृग्विषय (फिनोमिना) के अवयव पूर्णतः क्षणिक नहीं हैं, अपितु अव्यक्त रूप में सदैव विद्यमान रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (b)
प्रश्न. प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों के लिये सामान्य था? (2012)
- तपस्या और भोग के अतिवाद से बचाव
- वेदों के अधिकार के प्रति उदासीन
- अनुष्ठानों की प्रभावकारिता से इनकार
नीचे दिये गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न. अनेकांतवाद निम्नलिखित में से किसका एक मूल सिद्धांत और दर्शन है? (2009)
(a) बौद्ध धर्म
(b) जैन धर्म
(c) सिख धर्म
(d) वैष्णव धर्म
उत्तर: (b)
प्रारंभिक परीक्षा
ECMS के लिये सिक्स सिग्मा मानक
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उद्योग को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने सिक्स सिग्मा मानकों को अपनाने जैसे महत्त्वपूर्ण सुधारों की मांग की है और अनुपालन न करने की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता रोक दी जा सकती है।
सिक्स सिग्मा मानक क्या हैं?
- परिचय: सिक्स सिग्मा प्रबंधन के उन उपकरणों और तकनीकों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं में सुधार करना और त्रुटि या दोष होने की संभावना को अत्यधिक कम करना होता है।
- लक्ष्य: यह एक डेटा-आधारित पद्धति है, जिसका उद्देश्य लगभग पूर्णता प्राप्त करना है, विशेष रूप से दोषों को प्रति दस लाख अवसरों में अधिकतम 3.4 (DPMO) तक सीमित करना।
- प्रासंगिकता: अत्यधिक सटीकता वाले इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में वैश्विक ब्रांड विक्रेताओं और साझेदारों का चयन करते समय सिक्स सिग्मा प्रमाणन को एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत आवश्यकता के रूप में स्वीकार करते हैं।
- सरकार सिक्स सिग्मा के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उद्योग केवल सब्सिडी के सहारे आगे न बढ़े। जो लाभार्थी डिज़ाइन में निवेश नहीं करेंगे, उन्हें ‘छाँट दिया’ जाएगा ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग रणनीतिक आत्मनिर्भरता के निर्माण में किया जा सके।
- सिक्स सिग्मा गुणवत्ता प्राप्त किये बिना और मज़बूत इन-हाउस इंजीनियरिंग डिज़ाइन क्षमता के अभाव में भारतीय निर्माता शीर्ष वैश्विक तकनीकी ब्रांडों से दीर्घकालिक अनुबंध हासिल करने में कठिनाई का सामना करेंगे।
इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) क्या है?
- ECMS: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू की गई यह योजना घरेलू और वैश्विक निवेश को आकर्षित करके एक आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट ईकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखती है। इसका उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVC) के साथ एकीकृत करना है।
- इस योजना को 2025 में आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया था, जिसकी प्रारंभिक वित्तीय आवंटन राशि ₹22,919 करोड़ थी।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के लिये बजटीय आवंटन को तेज़ी से बढ़ते विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने हेतु शुरुआती राशि से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है।
- प्रोत्साहन संरचना: ECMS के तहत व्यवसाय के टर्नओवर, पूंजीगत व्यय (Capex) या दोनों पर आधारित हाइब्रिड वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जाते हैं, जिसमें टर्नओवर और कैपेक्स प्रोत्साहनों का एक हिस्सा रोज़गार सृजन से जोड़ा जाता है।
- प्रोत्साहन उन कंपनियों को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (first-come, first-served) के आधार पर दिये जाएंगे, जो प्रारंभिक उत्पादन के लिये तैयार हैं।
- अवधि: ECMS की कुल अवधि छह वर्ष है जिसमें टर्नओवर-लिंक्ड प्रोत्साहन (Turnover Linked Incentive) के लिये एक वर्ष का गेस्टेशन पीरियड शामिल है, जबकि कैपेक्स प्रोत्साहन (Capex Incentive) पाँच वर्ष की अवधि के लिये उपलब्ध है।
- लक्षित क्षेत्र: यह योजना कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले यूनिट जैसी सब-असेंबली, मल्टी-लेयर PCB, कैपेसिटर और रेसिस्टर जैसे बेस कंपोनेंट्स तथा इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाले कैपिटल उपकरणों पर केंद्रित है, जो मोबाइल फोन के बिल ऑफ मटीरियल्स (BoM) का लगभग 90% हिस्सा बनाते हैं।
- अतिरिक्त निवेश ब्याज: वर्ष 2026 तक ECMS कार्यक्रम के तहत 61,000 करोड़ रुपए मूल्य की कुल 75 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है।
- ECMS से आशा की जाती है कि यह छह वर्षों में ₹10.34 लाख करोड़ का उत्पादन करेगा और 1.41 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार तथा कई लाख अप्रत्यक्ष अवसर सृजित करेगा।
- ECMS का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत का संभावित दूसरा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनाना है, जो पिछले दशक में उत्पादन में छह गुना वृद्धि के बाद संभव हो सके।
- अन्य मिशनों के साथ तालमेल: ECMS, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं और संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0) के साथ मिलकर एक समग्र ‘प्लग-एंड-प्ले’ तकनीकी ईकोसिस्टम तैयार करने का कार्य करता है।
- भारत की आर्थिक रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है — जो "असेंबली इन इंडिया" से वास्तविक "मेक एंड डिज़ाइन इन इंडिया" मॉडल में संक्रमण है।
- इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिये एक मज़बूत घरेलू आपूर्ति शृंखला का निर्माण करके भारत वर्ष 2030–31 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिक तंत्र के अपने महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की नींव रख रहा है।
सरकार ने किन प्रमुख सुधारों की मांग की है?
- गुणवत्ता में उन्नयन: वैश्विक स्तर की विनिर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये सिक्स सिग्मा मानकों को अपनाना।
- डिज़ाइन क्षमता: मूल्य शृंखला में ऊपर जाने के लिये घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन का विकास करना।
- घरेलू आपूर्ति शृंखला: आयात निर्भरता कम करने के लिये "स्वदेशी" पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देना।
- कौशल विकास: उद्योग के लिये तत्परता हेतु संरचित कार्यबल प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- जवाबदेही: ऐसी समयबद्ध कार्यान्वयन योजनाएँ, जिनका पूर्ण न होने का जोखिम हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) क्या है?
यह MeitY की एक योजना है, जो घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVC) में एकीकृत करने के लिये टर्नओवर और पूंजीगत व्यय से संबंधित प्रोत्साहन प्रदान करती है।
2. विनिर्माण में सिक्स सिग्मा क्या है?
यह एक डेटा-आधारित गुणवत्ता नियंत्रण पद्धति है जिसका उद्देश्य दोषों को प्रति दस लाख अवसरों पर 3.4 तक कम करना है, जिससे लगभग परिपूर्ण उत्पादन मानक सुनिश्चित होता है।
3. सरकार ECMS के तहत डिज़ाइन क्षमताओं पर बल क्यों दे रही है?
निम्न-मूल्य वाली असेंबली से उच्च-मूल्य वाले डिज़ाइन और नवाचार की ओर बढ़ने के लिये जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़े।
4. ECMS रोज़गार सृजन में कैसे सहायक है?
प्रोत्साहन आंशिक रूप से रोज़गार सृजन से संबंधित हैं तथा इस योजना से 1.4 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है।
5. ECMS अन्य पहलों से किस प्रकार संबंधित है?
यह PLI, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और EMC 2.0 की पूरक है जिससे एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण होता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित में से किसके अंगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिये ''R2 'व्यवहार संहिता (R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज) साधन उपलब्ध कराती है? (2020)
(a) इलेक्ट्राॅनिक पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरणीय दृष्टि से विश्वसनीय व्यवहार
(b) रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत 'अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्र भूमि' का पारिस्थितिक प्रबंधन
(c) निम्नीकृत भूमि पर कृषि फसलों की खेती का संधारणीय व्यवहार
(d) प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में 'पर्यावरणीय प्रभाव आकलन'
उत्तर: (a)
रैपिड फायर
श्यामजी कृष्ण वर्मा
भारत के प्रधानमंत्री ने श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि (30 मार्च) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित करने में उनकी भूमिका की सराहना की।
- प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा: 4 अक्तूबर, 1857 को गुजरात के कच्छ ज़िले के मांडवी में जन्म हुआ। वे संस्कृत के विद्वान थे और काशी के पंडितों द्वारा ‘पंडित’ की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले गैर-ब्राह्मण बने।
- आर्य समाज से संबंध: वे स्वामी दयानंद सरस्वती से गहराई से प्रभावित थे और 1877 में बॉम्बे आर्य समाज के प्रथम अध्यक्ष बने।
- व्यावसायिक उपलब्धियाँ: उन्होंने रतलाम, अजमेर और जूनागढ़ जैसी रियासतों में दीवान (मुख्यमंत्री) के रूप में कार्य किया।
- ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ का शुभारंभ: जनवरी 1905 में उन्होंने लंदन से अंग्रेज़ी मासिक पत्रिका ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ की शुरुआत की, जो ब्रिटिश शासन-विरोधी प्रचार और राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार का एक सशक्त वैचारिक माध्यम बनी।
- श्यामजी कृष्ण वर्मा को 1905 में उनके ब्रिटिश शासन-विरोधी लेखन के कारण लंदन में वकालत करने से इनर टेंपल (लंदन की चार ऐतिहासिक ‘इंस ऑफ कोर्ट’ में से एक, जो बैरिस्टर और न्यायाधीशों के लिये पेशेवर संस्था एवं प्रशिक्षण निकाय है) द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, किंतु उन्हें वर्ष 2015 में मरणोपरांत पुनः बहाल किया गया।
- इंडियन होम रूल सोसाइटी की स्थापना: फरवरी 1905 में उन्होंने लंदन में इंडियन होम रूल सोसाइटी की स्थापना की।
- वे उन प्रारंभिक भारतीय राजनीतिक नेताओं में से एक थे जिन्होंने ‘स्वराज’ (स्व-शासन) शब्द का प्रयोग किया और ब्रिटिश निरंकुश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की।
- ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना: इंग्लैंड में नस्लीय भेदभाव का सामना कर रहे भारतीय छात्रों को आश्रय देने के लिये उन्होंने वर्ष 1905 में लंदन में ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना की।
- यह छात्रावास शीघ्र ही क्रांतिकारी गतिविधियों का एक सशक्त केंद्र बन गया, जहाँ विनायक दामोदर सावरकर, मैडम भीकाजी कामा और वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय जैसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों का मार्गदर्शन एवं पोषण हुआ।
- अंतिम वर्ष: ब्रिटिश विरोध और दबाव के चलते वर्मा इंग्लैंड छोड़कर पेरिस चले गए और प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अंततः जिनेवा में स्थायी रूप से बस गए, जहाँ 30 मार्च, 1930 को उनके निधन तक उन्होंने निवास किया।
- उनकी स्मृति में ‘क्रांति तीर्थ’ नामक एक स्मारक का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन वर्ष 2010 में मांडवी के समीप किया गया।
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और पढ़ें: श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि |
रैपिड फायर
ईरान परमाणु अप्रसार संधि से बाहर हो सकता है
ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर होने की संभावना व्यक्त की है और कहा है कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा इस्फहान जैसे उसके परमाणु स्थलों पर हमले, इस संधि का उल्लंघन करते हैं और शांतिपूर्ण परमाणु संवर्द्धन के उसके अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
- यदि ईरान NPT से बाहर हो जाता है, तो यह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षण के दायरे से बाहर आ जाएगा, संभावित रूप से वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को कमज़ोर करेगा और अन्य देशों के लिये इसी प्रकार की कार्रवाई करने का एक उदाहरण स्थापित करेगा।
परमाणु अप्रसार संधि (NPT)
- परिचय: NPT का उद्देश्य परमाणु हथियारों और वेपन टेक्नोलॉजी के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देना और परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
- वर्ष 1968 में हस्ताक्षर के लिये खोला गया और वर्ष 1970 में लागू हुआ, यह परमाणु-शस्त्र संपन्न देशों द्वारा निरस्त्रीकरण के लक्ष्य के लिये एक बहुपक्षीय संधि में एकमात्र बाध्यकारी प्रतिबद्धता है। वर्ष 2026 तक 191 देश NPT के पक्षकार हैं (जिनमें अमेरिका, रूस, यूके, फ्राँस और चीन शामिल हैं)।
- NPT के मूल स्तंभ:
- अप्रसार (नॉन-प्रॉलिफरेशन): परमाणु-शस्त्र संपन्न देश (NWS) - जिन्हें 1 जनवरी, 1967 से पहले परमाणु शस्त्रों का परीक्षण करने वाले देशों के रूप में परिभाषित किया गया है (USA, रूस, UK, फ्राँस और चीन) - किसी भी गैर-परमाणु शस्त्र संपन्न देश (NNWS) को परमाणु हथियार अंतरित नहीं करने के लिये सहमत होते हैं। NNWS उन्हें प्राप्त नहीं करने या उनका निर्माण नहीं करने के लिये सहमत होते हैं।
- निरस्त्रीकरण: सभी पक्ष परमाणु हथियारों की दौड़ को समाप्त करने और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिये वार्त्ता जारी रखने के लिये सहमत हैं।
- परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग (पीसफुल यूज़ ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी): यह संधि सभी पक्षों के परमाणु ऊर्जा को शांतिपूर्ण उद्देश्यों (जैसे– ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा) के लिये विकसित करने के "अनुदेय अधिकार" को मान्यता देती है, बशर्ते वे अपने अप्रसार दायित्वों का पालन करते हों।
- सत्यापन: IAEA विश्व के परमाणु चौकीदार के रूप में कार्य करता है, यह सुनिश्चित करने के लिये NNWS में निरीक्षण करता है कि परमाणु सामग्री शस्त्रों के लिये डायवर्ट न हो।
- वापसी: अनुच्छेद X के तहत एक देश 3 महीने का नोटिस देकर संधि से अपना नाम वापस ले सकता है यदि वह निर्णय लेता है कि असाधारण घटनाओं ने उसके "सर्वोच्च हितों" को खतरे में डाल दिया है।
- भारत का रुख: भारत NPT का हस्ताक्षरकर्त्ता नहीं है। भारत का तर्क है कि संधि भेदभावपूर्ण है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों के शस्त्रागार को कानूनी रूप से मान्यता देते हुए दूसरों को प्रतिबंधित करके "परमाणु-संपन्न" और "परमाणु-विहीन" का विभाजन करती है।
- भारत के साथ पाकिस्तान, इज़रायल और दक्षिण सूडान ने कभी हस्ताक्षर नहीं किये। उत्तर कोरिया भी इस संधि का हिस्सा बना, हालाँकि वर्ष 2003 में अपनी वापसी की घोषणा की।
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रैपिड फायर
भारत का पहला गहरे समुद्री जीवों के लिये राष्ट्रीय भंडार
समुद्री जीवित संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE), कोच्चि ने समुद्री संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है, जहाँ इसके ‘भवसागर’ रेफरल केंद्र को आधिकारिक रूप से गहरे समुद्री जीवों के राष्ट्रीय भंडार (National Repository for Deep-Sea Fauna) के रूप में नामित किया गया है।
- नामांकन प्राधिकरण: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के अंतर्गत यह दर्जा प्रदान किया है।
- उद्देश्य: यह भारत की गहरे समुद्री जैविक धरोहर के संरक्षण, अध्ययन और प्रलेखन के लिये एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय सुविधा के रूप में कार्य करता है तथा देश की ब्लू इकोनॉमी लक्ष्यों को समर्थन देता है।
- वर्तमान संग्रह: इस केंद्र में 3,500 से अधिक वर्गीकृत (टैक्सोनॉमिक रूप से पहचाने गए) एवं भू-संदर्भित वाउचर नमूने संरक्षित हैं, जिनमें समुद्री अकशेरुकी (जैसे- स्निडेरिया, मोलस्क, आर्थ्रोपोड) से लेकर कशेरुकी जीव तक शामिल हैं।
- मुख्य दायित्व:
- जैविक नमूनों एवं उनसे संबंधित DNA अनुक्रमों का सुरक्षित संरक्षण एवं अभिरक्षण करना।
- भारतीय जलक्षेत्र में खोजी गई किसी भी नई गहरे समुद्री प्रजाति के आधिकारिक संरक्षक के रूप में कार्य करना।
- गहरे समुद्र का वर्गीकरण (Deep-Sea Taxonomy) में क्षमता निर्माण करना, जो सतत विकास के लिये संयुक्त राष्ट्र के महासागर विज्ञान दशक (2021-30) के अनुरूप है।
- संस्थागत ढाँचा: समुद्री जीवित संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अधीन कार्य करता है तथा भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और आसपास के गहरे समुद्री क्षेत्रों में समुद्री जीवित संसाधनों के अन्वेषण, प्रबंधन और संरक्षण पर केंद्रित है।
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रैपिड फायर
IONS समुद्री अभ्यास 2026
हाल ही में भारतीय नौसेना ने कोच्चि में IONS समुद्री अभ्यास (IMEX) टेबल टॉप अभ्यास (TTX) 2026 की मेज़बानी की, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में उभरते गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटा जा सके।
- इसमें बांग्लादेश, फ्राँस, केन्या, मालदीव, सिंगापुर, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते सहित 12 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- यह अभ्यास समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद और अवैध तस्करी जैसी गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित था, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा प्रवाह के लिये खतरा हैं।
- यह अभ्यास वर्ष 2026–28 चक्र के लिये हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) की अध्यक्षता सँभालने वाले भारत के साथ मेल खाता है, जो 16 वर्षों के अंतराल के बाद नेतृत्व की भूमिका में वापसी है।
हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी
- परिचय: भारतीय नौसेना द्वारा वर्ष 2008 में शुरू की गई एक स्वैच्छिक और सहयोगी पहल है, जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के तटवर्ती (तटीय) राज्यों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने का प्रयास करती है।
- उद्देश्य: यह समुद्री डकैती या समुद्री अपराध, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) तथा सूचना साझाकरण एवं अंतरसंचालनीयता पर केंद्रित है, ताकि समुद्री क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
- सदस्यता एवं संरचना: इसमें 25 देश शामिल हैं, जिन्हें चार उप-क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है — दक्षिण एशियाई, पश्चिम एशियाई, पूर्वी अफ्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशियाई एवं ऑस्ट्रेलियाई तटीय क्षेत्र।
- फिलीपींस 2026 में चीन, जर्मनी, इटली, जापान, रूस और स्पेन जैसे अन्य पर्यवेक्षक देशों के साथ नवीनतम पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुआ।
- भारत के लिये महत्त्व: भारत के लिये IONS इसके महासागर (MAHASAGAR – क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिये पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) दृष्टिकोण का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। यह भारत को हिंद महासागर में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने की अनुमति देता है।
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