राजस्थान Switch to English
जयपुर मेट्रो चरण-2 परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति
चर्चा में क्यों?
नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो फेज़-2 परियोजना को स्वीकृति दे दी है। यह राजस्थान के जयपुर में कनेक्टिविटी और गतिशीलता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक प्रमुख शहरी परिवहन पहल है।
मुख्य बिंदु:
- परियोजना: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो फेज़-2 को स्वीकृति दे दी है।
- इस परियोजना के तहत प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किमी लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें 36 स्टेशन होंगे।
- परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹13,037.66 करोड़ है।
- इस परियोजना को सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इस परियोजना को राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMRCL) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।
- यह भारत सरकार और राजस्थान सरकार के बीच 50:50 की हिस्सेदारी वाला एक संयुक्त उद्यम है।
- फेज़-1: वर्तमान में जयपुर मेट्रो फेज़-1 मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक 11.64 किमी लंबे पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर पर संचालित है, जिसमें 11 स्टेशन हैं।
- महत्त्व: इस परियोजना का उद्देश्य जयपुर में यातायात की भीड़ को कम करना, वाहनों के उत्सर्जन में कटौती करना और सतत शहरी गतिशीलता में सुधार करना है।
| और पढ़ें: जयपुर मेट्रो |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
मेनका गुरुस्वामी भारत की पहली खुले तौर पर क्वीर सांसद बनीं
चर्चा में क्यों?
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा में शपथ लेकर भारत की पहली घोषित क्वीर सांसद बनकर इतिहास रच दिया है, जो भारतीय राजनीति में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद भारत की पहली घोषित क्वीर सांसद बन गई हैं।
- उन्हें पश्चिम बंगाल राज्य से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिये चुना गया था।
- कानूनी पृष्ठभूमि: वह एक प्रसिद्ध संवैधानिक कानून विशेषज्ञ और भारत के सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
- वह भारत में नागरिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और LGBTQ+ समानता के लिये एक प्रमुख आवाज़ रही हैं।
- ऐतिहासिक मामला: वह ऐतिहासिक 'नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ' मामले में शामिल वकीलों में से एक थीं।
- इस मामले के परिणामस्वरूप वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था।
- महत्त्व: संसद में उनके प्रवेश को शासन में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व के लिये एक उपलब्धि माना जा रहा है और यह भारतीय राजनीति में क्वीर आवाज़ों की बढ़ती दृश्यता और स्वीकार्यता को दर्शाता है।
| और पढ़ें: राज्यसभा, सर्वोच्च न्यायालय, LGBTQ+, नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ |


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