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ईरान परमाणु अप्रसार संधि से बाहर हो सकता है

  • 31 Mar 2026
  • 22 min read

स्रोत: द हिंदू 

ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर होने की संभावना व्यक्त की है और कहा है कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा इस्फहान जैसे उसके परमाणु स्थलों पर हमले, इस संधि का उल्लंघन करते हैं और शांतिपूर्ण परमाणु संवर्द्धन के उसके अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

  • यदि ईरान NPT से बाहर हो जाता है, तो यह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षण के दायरे से बाहर आ जाएगा, संभावित रूप से वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को कमज़ोर करेगा और अन्य देशों के लिये इसी प्रकार की कार्रवाई करने का एक उदाहरण स्थापित करेगा।

परमाणु अप्रसार संधि (NPT)

  • परिचय: NPT का उद्देश्य परमाणु हथियारों और वेपन टेक्नोलॉजी के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देना और परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
    • वर्ष 1968 में हस्ताक्षर के लिये खोला गया और वर्ष 1970 में लागू हुआ, यह परमाणु-शस्त्र संपन्न देशों द्वारा निरस्त्रीकरण के लक्ष्य के लिये एक बहुपक्षीय संधि में एकमात्र बाध्यकारी प्रतिबद्धता है। वर्ष 2026 तक 191 देश NPT के पक्षकार हैं (जिनमें अमेरिका, रूस, यूके, फ्राँस और चीन शामिल हैं)।
  • NPT के मूल स्तंभ:
    • अप्रसार (नॉन-प्रॉलिफरेशन): परमाणु-शस्त्र संपन्न देश (NWS) - जिन्हें 1 जनवरी, 1967 से पहले परमाणु शस्त्रों का परीक्षण करने वाले देशों के रूप में परिभाषित किया गया है (USA, रूस, UK, फ्राँस और चीन) - किसी भी गैर-परमाणु शस्त्र संपन्न देश (NNWS) को परमाणु हथियार अंतरित नहीं करने के लिये सहमत होते हैं। NNWS उन्हें प्राप्त नहीं करने या उनका निर्माण नहीं करने के लिये सहमत होते हैं।
    • निरस्त्रीकरण: सभी पक्ष परमाणु हथियारों की दौड़ को समाप्त करने और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिये वार्त्ता जारी रखने के लिये सहमत हैं।
    • परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग (पीसफुल यूज़ ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी): यह संधि सभी पक्षों के परमाणु ऊर्जा को शांतिपूर्ण उद्देश्यों (जैसे– ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा) के लिये विकसित करने के "अनुदेय अधिकार" को मान्यता देती है, बशर्ते वे अपने अप्रसार दायित्वों का पालन करते हों।
  • सत्यापन: IAEA विश्व के परमाणु चौकीदार के रूप में कार्य करता है, यह सुनिश्चित करने के लिये NNWS में निरीक्षण करता है कि परमाणु सामग्री शस्त्रों के लिये डायवर्ट न हो।
  • वापसी: अनुच्छेद X के तहत एक देश 3 महीने का नोटिस देकर संधि से अपना नाम वापस ले सकता है यदि वह निर्णय लेता है कि असाधारण घटनाओं ने उसके "सर्वोच्च हितों" को खतरे में डाल दिया है।
  • भारत का रुख: भारत NPT का हस्ताक्षरकर्त्ता नहीं है। भारत का तर्क है कि संधि भेदभावपूर्ण है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों के शस्त्रागार को कानूनी रूप से मान्यता देते हुए दूसरों को प्रतिबंधित करके "परमाणु-संपन्न" और "परमाणु-विहीन" का विभाजन करती है।
    • भारत के साथ पाकिस्तान, इज़रायल और दक्षिण सूडान ने कभी हस्ताक्षर नहीं किये। उत्तर कोरिया भी इस संधि का हिस्सा बना, हालाँकि वर्ष 2003 में अपनी वापसी की घोषणा की।

NPT MTCR_&_CTBT

और पढ़ें: NPT की 55वीं वर्षगाँठ

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