रैपिड फायर
भारत समुद्री बीमा पूल
- 20 Apr 2026
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भारत समुद्री बीमा पूल’ (BMI Pool) के गठन को मंज़ूरी दी है, जो एक घरेलू बीमा पूल होगा और इसमें ₹12,980 करोड़ की संप्रभु गारंटी दी जाएगी, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निरंतर और किफायती समुद्री बीमा कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
- उद्देश्य: विदेशी बीमाकर्त्ताओं जैसे इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब्स पर निर्भरता कम करना, समुद्री व्यापार की निरंतरता बनाए रखना और भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय प्रतिबंधों के प्रभाव से निपटने की क्षमता तथा संप्रभु नियंत्रण को मज़बूत करना।
- व्यापक जोखिम कवरेज: यह पूल मुख्य समुद्री जोखिमों को कवर करता है, जिनमें जहाज़ और मशीनरी, कार्गो, युद्ध जोखिम तथा सुरक्षा और क्षतिपूर्ति समूह (P&I) शामिल हैं। इसमें तृतीय-पक्ष देनदारियाँ भी शामिल हैं, जैसे– तेल प्रदूषण, जहाज़ का मलबा हटाना, माल की क्षति और चालक दल की चोटें।
- पोत प्रयोज्यता: यह कवरेज भारतीय ध्वज वाले या भारतीय नियंत्रण वाले जहाज़ों के साथ-साथ उन सभी जहाज़ों के लिये प्रदान किया जाता है जो अंतर्राष्ट्रीय मूल से भारतीय बंदरगाहों तक (और इसके विपरीत) माल ले जा रहे हैं। इसमें अस्थिर समुद्री गलियारों से होकर गुज़रने वाले पारगमन भी शामिल हैं।
- परिचालन क्षमता: बीमा पॉलिसियाँ पूल के सदस्य बीमाकर्त्ताओं द्वारा जारी की जाएँगी, जो लगभग ₹950 करोड़ की संयुक्त विशेष समुद्री बीमा क्षमता का उपयोग करेंगे।
- इस पहल का उद्देश्य देश में ही विशेषीकृत विशेष समुद्री बीमा , दावा प्रबंधन और कानूनी विशेषज्ञता विकसित करना है, जो आत्मनिर्भर भारत के विज़न के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
- महत्त्व: यह पहल आर्थिक सुरक्षा को मज़बूत करती है और समुद्री व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करती है, क्योंकि इससे विदेशी बीमाकर्त्ताओं पर निर्भरता घटती है। यह क्षेत्र भारत के 70% से अधिक व्यापार (मात्रा के आधार पर) और 95% (मूल्य के आधार पर) का संचालन करता है। साथ ही यह यूनाइटेड किंगडम, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप है।
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