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प्रारंभिक परीक्षा

महावीर जयंती

  • 31 Mar 2026
  • 43 min read

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों? 

भारत के राष्ट्रपति ने महावीर जयंती (महावीर जन्म कल्याणक) की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएँ दीं, जो भगवान वर्धमान महावीर के जन्म दिवस का प्रतीक है, जो जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर (सर्वोच्च उपदेशक एवं आध्यात्मिक गुरु) थे।

  • वर्ष 2026 में यह 31 मार्च को मनाया जाएगा, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, यानी चंद्रमा के बढ़ते चरण के 13वें दिन, पर पड़ता है।

भगवान वर्धमान महावीर कौन थे?

  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 599 ईसा पूर्व में वर्तमान बिहार के वैशाली के पास स्थित कुण्डग्राम में वर्धमान के रूप में हुआ था।
    • वे इक्ष्वाकु वंश से संबंधित थे और उनका जन्म राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहाँ हुआ था।
  • आध्यात्मिक खोज: 30 वर्ष की आयु में वर्धमान ने आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिये अपने राजसी विशेषाधिकार, परिवार और भौतिक संपत्ति का त्याग कर संन्यास धारण कर लिया।
    • उन्होंने ऋजुपालिका नदी के तट पर एक साल वृक्ष के नीचे ‘केवल ज्ञान’ (सर्वज्ञता या परम अनंत ज्ञान) की प्राप्ति की।
  • महावीर की उपाधि: अपने इंद्रियों और आंतरिक शत्रुओं (जैसे– क्रोध, लोभ, अहंकार तथा कपट) पर विजय प्राप्त करने के बाद वर्धमान को ‘जिन’ (विजेता) तथा ‘महावीर’ (महान वीर) की उपाधियाँ प्राप्त हुईं।
  • निर्वाण: भगवान महावीर ने 72 वर्ष की आयु में बिहार के वर्तमान राजगीर के निकट स्थित पावापुरी में मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति) प्राप्त किया।
    • महावीर के अनुसार, निर्वाण या मोक्ष सांसारिक इच्छाओं से मुक्ति प्राप्त करने से हासिल होता है, जिसकी शुरुआत त्याग से होती है और जिसे त्रिरत्न (तीन रत्न) सम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र (सही आचरण) के पालन द्वारा मार्गदर्शित किया जाता है।
  • भगवान महावीर के मुख्य उपदेश: महावीर ने सार्थक जीवन के लिये पाँच मूल व्रत (महाव्रत) निर्धारित किये। इससे पहले 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने चार व्रत अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह का उपदेश दिया था, जबकि महावीर ने इसमें पाँचवा व्रत ‘ब्रह्मचर्य’ जोड़ा।
    • अहिंसा: सर्वोच्च सिद्धांत (अहिंसा परमो धर्म:)। इसका अर्थ है किसी भी जीव को शारीरिक, मानसिक या वाचिक रूप से हानि नहीं पहुँचाना।
    • सत्य (सत्यवादिता): सदैव सत्य बोलना और असत्य, अतिशयोक्ति या छल से बचना।
    • अस्तेय (अचौर्य): किसी ऐसी वस्तु को न लेना जो स्वेच्छा से न दी गई हो या जिसे वैध माध्यमों से प्राप्त न किया गया हो।
    • अपरिग्रह: भौतिक संपत्ति, धन और सांसारिक आसक्तियों से पूर्ण वैराग्य।
    • ब्रह्मचर्य (आत्मसंयम): कामनाओं और भोग-विलास पर कठोर नियंत्रण रखना।
  • अनुशासनात्मक परंपरा: उन्होंने अपने अनुयायियों को चार प्रकार के जैन संघ में संगठित किया—साधु (भिक्षु), साध्वी (भिक्षुणियाँ), श्रावक (गृहस्थ पुरुष) और श्राविका (गृहस्थ महिलाएँ)।
    • महावीर के ग्यारह प्रमुख शिष्य (गणधर) थे, जिनमें इंद्रभूति गौतम और सुधर्मन ने प्रारंभिक मठ परंपरा की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • उनकी शिक्षाएँ आगम सूत्रों में संरक्षित की गईं, जिन्हें प्रारंभ में मौखिक रूप से संप्रेषित किया गया और बाद में ताड़पत्रों पर लिपिबद्ध किया गया, हालाँकि समय के साथ इनमें से कई लुप्त हो गए।
  • मुख्य दार्शनिक योगदान:
    • अनेकांतवाद (बहुलवाद का सिद्धांत): वह दर्शन जो सत्य एवं वास्तविकता को जटिल मानता है तथा सदैव बहुआयामी होने का उपदेश देता है। यह दर्शाता है कि कोई भी एक दृष्टिकोण पूर्ण सत्य का स्वामी नहीं होता।
    • स्याद्वाद (नियतकालिक प्रतिपादन सिद्धांत): वह आधारभूत सिद्धांत कि सभी निर्णय एवं सत्य नियतकालिक एवं सापेक्षिक होते हैं, जो केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही लागू होते हैं। 

Vardhamana_Mahavira Jainism

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. महावीर जयंती कब मनाई जाती है?
यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाती है।

2. जैन धर्म के त्रिरत्न क्या हैं?
सम्यक् दर्शन (सही आस्था), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् आचरण (सही आचरण) मुक्ति के मार्ग का मार्गदर्शन करते हैं।

3. महावीर द्वारा बताए गए पाँच महाव्रत क्या हैं?
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैन धर्म के मूल नैतिक सिद्धांत हैं।

4. अनेकांतवाद क्या है?
यह इस बात पर बल देता है कि सत्य के कई दृष्टिकोण होते हैं और कोई भी एकमात्र दृष्टिकोण पूर्ण रूप से अंतिम नहीं होता।

5. महावीर को निर्वाण कहाँ प्राप्त हुआ?
उन्होंने 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी में मोक्ष प्राप्त किया।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा,  विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत की धार्मिक प्रथाओं के संदर्भ में “स्थानकवासी” संप्रदाय का संबंध किससे है? (2018)

(a) बौद्ध मत
(b) जैन मत
(c) वैष्णव मत
(d) शैव मत  

उत्तर: (b) 


प्रश्न. भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)

  1. सौत्रांतिका और सम्मितीय जैन मत के संप्रदाय थे।
  2. सर्वास्तिवादियों की मान्यता थी कि दृग्विषय (फिनोमिना) के अवयव पूर्णतः क्षणिक नहीं हैं, अपितु अव्यक्त रूप में सदैव विद्यमान रहते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (b) 


प्रश्न. प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों के लिये सामान्य था? (2012)

  1. तपस्या और भोग के अतिवाद से बचाव
  2. वेदों के अधिकार के प्रति उदासीन
  3. अनुष्ठानों की प्रभावकारिता से इनकार

नीचे दिये गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) 


प्रश्न. अनेकांतवाद निम्नलिखित में से किसका एक मूल सिद्धांत और दर्शन है? (2009)

(a) बौद्ध धर्म

(b) जैन धर्म

(c) सिख धर्म

(d) वैष्णव धर्म

उत्तर: (b)

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