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दूनागिरि प्रोजेक्ट 17A का पाँचवा जहाज़

  • 01 Apr 2026
  • 16 min read

स्रोत: पीआईबी 

भारतीय नौसेना को ‘दूनागिरि’ (यार्ड 3023) की प्राप्ति हुई है, जो उन्नत युद्धपोत डिज़ाइन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (स्व-निर्भरता) की दिशा में भारत की एक महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

  • ऐतिहासिक विरासत: यह पोत मूल INS दूनागिरि (लींडर-श्रेणी फ्रिगेट) का पुनर्जन्म है, जिसने 1977 से 2010 तक 33 वर्षों तक भारतीय नौसेना में सेवा दी।
  • स्वदेशी डिज़ाइन एवं प्रोत्साहन: यह परियोजना पूरी तरह से युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिज़ाइन की गई है और इसमें 75% स्वदेशी सामग्री का समावेश है।
    • इससे 200 से अधिक MSMEs की भागीदारी के माध्यम से घरेलू रक्षा पारिस्थितिक तंत्र को उल्लेखनीय प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है और बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हुए हैं।
  • उन्नत प्रणोदन रणनीति: यह फ्रिगेट युद्धपोत संयुक्त डीज़ल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली पर कार्य करता है, जिसमें प्रत्येक शाफ्ट पर कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (CPP) लगा है, जिसे अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (IPMS) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • रणनीतिक युद्धक क्षमताएँ: यह अत्यंत शक्तिशाली हथियार एवं सेंसर प्रणाली से सुसज्जित है, जिसमें ब्रह्मोस सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें (SSM), MFSTAR रडार, MRSAM कॉम्प्लेक्स तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) के लिये विशेष रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं।
  • प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरि श्रेणी): ‘दूनागिरि’ प्रोजेक्ट 17A के फ्रिगेट्स का पाँचवा पोत है तथा कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा निर्मित दूसरा पोत है।
    • प्रोजेक्ट 17A भारत का कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत शिवालिक श्रेणी के उन्नत उत्तराधिकारी के रूप में सात नीलगिरि-श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट्स का निर्माण किया जा रहा है।
    • इन सात फ्रिगेट्स में से चार (नीलगिरि, उदयगिरि, तारागिरि, महेंद्रगिरि) का निर्माण मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया जा रहा है, जबकि तीन (हिमगिरि, दूनागिरि, विंध्यगिरि) का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा किया जा रहा है।

और पढ़ें: प्रोजेक्ट 17A: INS हिमगिरि और INS उदयगिरि

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