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भारत की शुद्ध अंतर्राष्ट्रीय देनदारी कम हुई

  • 01 Apr 2026
  • 15 min read

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स 

वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के दौरान शेष विश्व के प्रति भारत की शुद्ध वित्तीय देनदारियों में उल्लेखनीय रूप से 10.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट देखी गई।

  • शुद्ध दावों में कमी: भारत में अनिवासियों के शुद्ध दावे घटकर 260.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गए, क्योंकि भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय संपत्तियों में वृद्धि (12.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) भारत में विदेशी स्वामित्व वाली संपत्तियों में वृद्धि (1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से काफी अधिक थी।
    • शुद्ध दावा भारत में कुल विदेशी-स्वामित्व वाली संपत्तियों और भारत के स्वामित्व वाली विदेशी संपत्तियों के बीच का अंतर है।
  • संपत्ति-से-देनदारी अनुपात: भारत की अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियों का देनदारियों से अनुपात वर्ष 2024-25 में 74.6% से सुधरकर 82.1% हो गया, जो मज़बूत होती एक्सटर्नल बैलेंस शीट का संकेत देता है।
    • संपत्ति-से-देनदारी अनुपात एक वित्तीय मीट्रिक है, जिसका उपयोग किसी इकाई (कंपनी, देश, या यहाँ तक कि व्यक्ति) की सॉल्वेंसी और वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करने के लिये किया जाता है। यह स्वामित्व वाली संपत्तियों (संपत्ति) और देय राशियों (देनदारियों) के बीच संबंध को मापता है।
  • बाह्य निवेश के कारक: विदेशी संपत्तियों में उछाल बाह्य प्रत्यक्ष निवेशों में 7.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि और मुद्रा एवं जमाओं में 9.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि से प्रेरित था।
  • आरक्षित संपत्तियों के रुझान: आरक्षित संपत्तियाँ (कुल विदेशी संपत्तियों का 57.4% हिस्सा) तिमाही के दौरान 12.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 687.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुँच गईं, उन्होंने 8.2% की वार्षिक वृद्धि बनाए रखी।
  • देनदारियों में बदलाव: आवक के प्रत्यक्ष और पोर्टफोलियो निवेशों में कमी आई, लेकिन इसे व्यापार ऋण में 11.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि से संतुलित किया गया; परिणामस्वरूप कुल बाह्य देनदारियों में ऋण देनदारियों का हिस्सा बढ़कर 55.3% हो गया।

और पढ़ें: भारतीय परिवारों की शुद्ध वित्तीय संपत्ति

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