प्रारंभिक परीक्षा
ECMS के लिये सिक्स सिग्मा मानक
- 31 Mar 2026
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चर्चा में क्यों?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उद्योग को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने सिक्स सिग्मा मानकों को अपनाने जैसे महत्त्वपूर्ण सुधारों की मांग की है और अनुपालन न करने की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता रोक दी जा सकती है।
सिक्स सिग्मा मानक क्या हैं?
- परिचय: सिक्स सिग्मा प्रबंधन के उन उपकरणों और तकनीकों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं में सुधार करना और त्रुटि या दोष होने की संभावना को अत्यधिक कम करना होता है।
- लक्ष्य: यह एक डेटा-आधारित पद्धति है, जिसका उद्देश्य लगभग पूर्णता प्राप्त करना है, विशेष रूप से दोषों को प्रति दस लाख अवसरों में अधिकतम 3.4 (DPMO) तक सीमित करना।
- प्रासंगिकता: अत्यधिक सटीकता वाले इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में वैश्विक ब्रांड विक्रेताओं और साझेदारों का चयन करते समय सिक्स सिग्मा प्रमाणन को एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत आवश्यकता के रूप में स्वीकार करते हैं।
- सरकार सिक्स सिग्मा के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उद्योग केवल सब्सिडी के सहारे आगे न बढ़े। जो लाभार्थी डिज़ाइन में निवेश नहीं करेंगे, उन्हें ‘छाँट दिया’ जाएगा ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग रणनीतिक आत्मनिर्भरता के निर्माण में किया जा सके।
- सिक्स सिग्मा गुणवत्ता प्राप्त किये बिना और मज़बूत इन-हाउस इंजीनियरिंग डिज़ाइन क्षमता के अभाव में भारतीय निर्माता शीर्ष वैश्विक तकनीकी ब्रांडों से दीर्घकालिक अनुबंध हासिल करने में कठिनाई का सामना करेंगे।
इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) क्या है?
- ECMS: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू की गई यह योजना घरेलू और वैश्विक निवेश को आकर्षित करके एक आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट ईकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखती है। इसका उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVC) के साथ एकीकृत करना है।
- इस योजना को 2025 में आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया था, जिसकी प्रारंभिक वित्तीय आवंटन राशि ₹22,919 करोड़ थी।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के लिये बजटीय आवंटन को तेज़ी से बढ़ते विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने हेतु शुरुआती राशि से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है।
- प्रोत्साहन संरचना: ECMS के तहत व्यवसाय के टर्नओवर, पूंजीगत व्यय (Capex) या दोनों पर आधारित हाइब्रिड वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जाते हैं, जिसमें टर्नओवर और कैपेक्स प्रोत्साहनों का एक हिस्सा रोज़गार सृजन से जोड़ा जाता है।
- प्रोत्साहन उन कंपनियों को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (first-come, first-served) के आधार पर दिये जाएंगे, जो प्रारंभिक उत्पादन के लिये तैयार हैं।
- अवधि: ECMS की कुल अवधि छह वर्ष है जिसमें टर्नओवर-लिंक्ड प्रोत्साहन (Turnover Linked Incentive) के लिये एक वर्ष का गेस्टेशन पीरियड शामिल है, जबकि कैपेक्स प्रोत्साहन (Capex Incentive) पाँच वर्ष की अवधि के लिये उपलब्ध है।
- लक्षित क्षेत्र: यह योजना कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले यूनिट जैसी सब-असेंबली, मल्टी-लेयर PCB, कैपेसिटर और रेसिस्टर जैसे बेस कंपोनेंट्स तथा इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाले कैपिटल उपकरणों पर केंद्रित है, जो मोबाइल फोन के बिल ऑफ मटीरियल्स (BoM) का लगभग 90% हिस्सा बनाते हैं।
- अतिरिक्त निवेश ब्याज: वर्ष 2026 तक ECMS कार्यक्रम के तहत 61,000 करोड़ रुपए मूल्य की कुल 75 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है।
- ECMS से आशा की जाती है कि यह छह वर्षों में ₹10.34 लाख करोड़ का उत्पादन करेगा और 1.41 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार तथा कई लाख अप्रत्यक्ष अवसर सृजित करेगा।
- ECMS का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत का संभावित दूसरा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनाना है, जो पिछले दशक में उत्पादन में छह गुना वृद्धि के बाद संभव हो सके।
- अन्य मिशनों के साथ तालमेल: ECMS, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं और संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0) के साथ मिलकर एक समग्र ‘प्लग-एंड-प्ले’ तकनीकी ईकोसिस्टम तैयार करने का कार्य करता है।
- भारत की आर्थिक रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है — जो "असेंबली इन इंडिया" से वास्तविक "मेक एंड डिज़ाइन इन इंडिया" मॉडल में संक्रमण है।
- इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिये एक मज़बूत घरेलू आपूर्ति शृंखला का निर्माण करके भारत वर्ष 2030–31 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिक तंत्र के अपने महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की नींव रख रहा है।
सरकार ने किन प्रमुख सुधारों की मांग की है?
- गुणवत्ता में उन्नयन: वैश्विक स्तर की विनिर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये सिक्स सिग्मा मानकों को अपनाना।
- डिज़ाइन क्षमता: मूल्य शृंखला में ऊपर जाने के लिये घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन का विकास करना।
- घरेलू आपूर्ति शृंखला: आयात निर्भरता कम करने के लिये "स्वदेशी" पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देना।
- कौशल विकास: उद्योग के लिये तत्परता हेतु संरचित कार्यबल प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- जवाबदेही: ऐसी समयबद्ध कार्यान्वयन योजनाएँ, जिनका पूर्ण न होने का जोखिम हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) क्या है?
यह MeitY की एक योजना है, जो घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVC) में एकीकृत करने के लिये टर्नओवर और पूंजीगत व्यय से संबंधित प्रोत्साहन प्रदान करती है।
2. विनिर्माण में सिक्स सिग्मा क्या है?
यह एक डेटा-आधारित गुणवत्ता नियंत्रण पद्धति है जिसका उद्देश्य दोषों को प्रति दस लाख अवसरों पर 3.4 तक कम करना है, जिससे लगभग परिपूर्ण उत्पादन मानक सुनिश्चित होता है।
3. सरकार ECMS के तहत डिज़ाइन क्षमताओं पर बल क्यों दे रही है?
निम्न-मूल्य वाली असेंबली से उच्च-मूल्य वाले डिज़ाइन और नवाचार की ओर बढ़ने के लिये जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़े।
4. ECMS रोज़गार सृजन में कैसे सहायक है?
प्रोत्साहन आंशिक रूप से रोज़गार सृजन से संबंधित हैं तथा इस योजना से 1.4 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है।
5. ECMS अन्य पहलों से किस प्रकार संबंधित है?
यह PLI, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और EMC 2.0 की पूरक है जिससे एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण होता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित में से किसके अंगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिये ''R2 'व्यवहार संहिता (R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज) साधन उपलब्ध कराती है? (2020)
(a) इलेक्ट्राॅनिक पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरणीय दृष्टि से विश्वसनीय व्यवहार
(b) रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत 'अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्र भूमि' का पारिस्थितिक प्रबंधन
(c) निम्नीकृत भूमि पर कृषि फसलों की खेती का संधारणीय व्यवहार
(d) प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में 'पर्यावरणीय प्रभाव आकलन'
उत्तर: (a)
