रैपिड फायर
भारत में व्यक्तित्व अधिकार
हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सलमान खान के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े एक मामले में नोटिस जारी किया, जब एक विदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉइस-जनरेशन प्लेटफॉर्म ने उनके नाम, छवि और आवाज़ के अवैध उपयोग से बचाने वाले अंतरिम निषेधाज्ञा को हटाने का अनुरोध किया।
व्यक्तित्व अधिकार
- परिचय: व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति के सार्वजनिक व्यक्तित्व, जैसे– नाम, आवाज़, छवि और व्यवहार को उनके व्यापक गोपनीयता या संपत्ति अधिकार के हिस्से के रूप में सुरक्षित करते हैं। यह किसी के नाम, छवि या स्वरूप के वाणिज्यिक उपयोग पर नियंत्रण प्रदान करता है।
- प्रकार:
- प्रचार का अधिकार: किसी व्यक्ति की छवि और स्वरूप को अवैध वाणिज्यिक उपयोग से बचाना, जो ट्रेडमार्क अधिकारों के समान है।
- गोपनीयता का अधिकार: किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके व्यक्तित्व की सार्वजनिक प्रस्तुति से सुरक्षा करना।
- संवैधानिक और कानूनी आधार:
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, जिसमें गोपनीयता शामिल है (के.एस. पुट्टस्वामी मामला, 2017)।
- कॉपीराइट अधिनियम, 1957: यह लेखकों और कलाकारों को उनके कार्यों के विकृतीकरण या दुरुपयोग को रोकने के लिये नैतिक अधिकार प्रदान करता है।
- ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999: धारा 14 जीवित व्यक्ति या पिछले 20 वर्षों के भीतर दिवंगत व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का झूठा संबंध दर्शाने वाले ट्रेडमार्क को, बिना उसकी सहमति के, प्रतिबंधित करती है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 66C में किसी अन्य व्यक्ति की इलेक्ट्रॉनिक पहचान या प्रत्यय पत्र के दुरुपयोग से जुड़ी पहचान की चोरी के लिये दंड का प्रावधान है।
- प्रमुख निर्णय: ऐश्वर्या राय बच्चन मामले (2025) में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी बिना अनुमति की गई नकल, उनके नाम या छवि के दुरुपयोग तथा AI जनरेटेड मैनीपुलेटेड कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाई।
- न्यायालय व्यक्तित्व अधिकारों और व्यापार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाते हैं, और किसी भी कलात्मक या व्यावसायिक उपयोग को केवल तब अनुमति देते हैं जब वह जनता को गुमराह न करे या किसी अनुमोदन का संकेत न दे। इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थाएँ भारत में अनुच्छेद 19 के अधिकारों का हवाला नहीं दे सकते।
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RBI-ESMA समझौता ज्ञापन
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष के भारत दौरे के दौरान यूरोपीय प्रतिभूतियाँ और बाज़ार प्राधिकरण (ESMA) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।
- परिचय: यह समझौता ज्ञापन (MoU) क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) और अन्य RBI-नियंत्रित केंद्रीय कंट्रापार्टीज़ (CCP) को ESMA द्वारा औपचारिक मान्यता प्रदान करने में सक्षम बनाएगा, जिससे वे यूरोपीय बाज़ार प्रतिभागियों के साथ सहज रूप से कार्य कर सकें।
- यह यूरोपीय बैंकों और निवेशकों के लिये भारत के वित्तीय बाज़ारों तक पहुँच को सुगम बनाएगा, क्योंकि यह नियामक और संचालन संबंधी बाधाओं को कम करेगा।
- प्रावधान: दोनों प्राधिकरण परामर्श, सहयोग और सूचना का आदान-प्रदान करेंगे ताकि शामिल केंद्रीय कंट्रापार्टीज़ (CCP) के ESMA की मान्यता शर्तों के पालन की निगरानी की जा सके।
- ESMA RBI के नियामक और पर्यवेक्षकीय ढाँचे पर निर्भर करेगा, जबकि RBI भारत में CCP की सुदृढ़ता के लिये ज़िम्मेदार रहेगा।
- संधि का स्वरूप: यह समझौता ज्ञापन (MoU) एक गैर-बाध्यकारी अभिप्राय विवरण है, जो कोई कानूनी दायित्व उत्पन्न नहीं करता, लागू करने योग्य अधिकार प्रदान नहीं करता और घरेलू कानूनों को प्रतिस्थापित नहीं करता।
- महत्त्व: यह समझौता हस्ताक्षर की तिथि से प्रभावी होता है और अनिश्चित काल के लिये लागू रहेगा, जिससे भारत-यूरोपीय यूनियन वित्तीय बाज़ार सहयोग के लिये एक स्थायी आधार तैयार होता है।
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एक्सोमाइनर++
हाल ही में नासा ने एक्सोमाइनर++ (ExoMiner++) का ओपन-सोर्स संस्करण जारी किया, जो हमारे सौरमंडल से बाहर के ग्रहों की खोज को आगे बढ़ाने में सहायक है।
- परिचय: एक्सोमाइनर++ नासा द्वारा विकसित एक डीप-लर्निंग AI मॉडल है, जिसका उपयोग अंतरिक्ष दूरबीन के डेटा से बाह्यग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की पहचान करने के लिये किया जाता है और यह पुराने एक्सोमाइनर सिस्टम का उन्नत संस्करण है।
- कार्यप्रणाली: यह समय के साथ तारों की चमक का विश्लेषण करता है और उन विशेष प्रकार की कमी की पहचान करता है, जो तब होती है जब कोई ग्रह अपने होस्ट तारे के सामने से गुज़रता है।
- मुख्य विशेषता: यह एक महत्त्वपूर्ण चुनौती का समाधान करता है, जो वास्तविक ग्रहों के संकेतों और 'गलत सकारात्मक संकेतों' के बीच अंतर करता है, जैसे कि द्विआधारी तारे या पृष्ठभूमि की वस्तुएँ जो ग्रहों के पारगमन जैसा प्रभाव दिखा सकती हैं।
- ब्लैक-बॉक्स AI मॉडल के विपरीत एक्सोमाइनर++ व्याख्यात्मक (Explainable) है, जो खगोलविदों को प्रत्येक वर्गीकरण के पीछे एक 'कॉन्फिडेंस स्कोर' (विश्वास स्कोर) के साथ-साथ स्पष्ट तर्क भी प्रदान करता है।
- उपयोग किये गए डेटा स्रोत: एक्सोमाइनर++ को केप्लर स्पेस टेलीस्कोप तथा ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) दोनों के डेटासेट पर प्रशिक्षित किया गया है, जो इसे एक साथ कई और तारों का विश्लेषण करने एवं खोज क्षमता को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की अनुमति देता है।
- महत्त्व: अब तक इसने TESS डेटा में लगभग 7,000 संभावित बाह्यग्रह (एक्सोप्लैनेट) की पहचान की है और इसे ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किया गया है जिससे वैश्विक स्तर पर शोधकर्त्ता परिणामों की पुष्टि कर सकते हैं और नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप जैसी आगामी अंतरिक्ष अभियानों के लिये इस मॉडल को और विकसित कर सकते हैं।
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कोकिंग कोल एक महत्त्वपूर्ण खनिज के रूप में अधिसूचित
भारत सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के विज़न को समर्थन देने के उद्देश्य से खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR) के तहत कोकिंग कोल को एक महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया है।
- MMDR अधिनियम, 1957 की धारा 11C का उपयोग करते हुए सरकार ने प्रथम अनुसूची में संशोधन किया है। इसके तहत भाग A में “कोयला” की परिभाषा के अंतर्गत “कोकिंग कोयला” को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है तथा भाग D में इसे अलग से एक महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में सूचीबद्ध किया गया
कोकिंग कोल
- परिचय: कोकिंग कोयला (धातुकर्म कोयला) बिटुमिनस कोयले का एक विशिष्ट प्रकार है, जिसे कार्बनीकरण प्रक्रिया के माध्यम से कोक में बदला जाता है। यह कोक पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस आधारित इस्पात उत्पादन में लौह अयस्क को पिग आयरन में बदलने के लिये अनिवार्य होता है।
- गुण: इसका महत्त्व इसकी विशिष्ट कोकिंग विशेषताओं (गर्म करने पर नरम होना और फूलना) तथा कम अशुद्धियों (कम राख, सल्फर और फॉस्फोरस) के कारण है।
- इस्पात उत्पादन से संबंध: लगभग 1 टन इस्पात उत्पादन के लिये करीब 780 किग्रा. कोकिंग कोयले की आवश्यकता होती है, जो इस्पात उद्योग हेतु इसके प्रत्यक्ष रणनीतिक महत्त्व को दर्शाता है।
- वैश्विक उत्पादन: कोकिंग कोयले के प्रमुख उत्पादक देशों में चीन, ऑस्ट्रेलिया, रूस, अमेरिका और कनाडा शामिल हैं।
- भारतीय परिदृश्य: विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक होने के बावजूद भारत कोकिंग कोयले के लिये आयात पर अत्यधिक निर्भर है। इस्पात क्षेत्र की लगभग 95% आवश्यकता आयात से पूरी होती है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी प्रमुख है।
- कोकिंग कोयले के आयात में लगातार वृद्धि हुई है और वर्ष 2024–25 में यह 57.58 मिलियन टन तक पहुँच गया, जो पर्याप्त घरेलू संसाधनों के बावजूद भारत की बढ़ती आयात निर्भरता को दर्शाता है।
- भारत के पास लगभग 37.37 अरब टन कोकिंग कोयले का अनुमानित भंडार है, जिसका मुख्य भंडार झारखंड में स्थित है, जबकि मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी इसके भंडार पाए जाते हैं।
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राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस
राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस (जनवरी का अंतिम रविवार) पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुष्ठ रोग से संबंधित जागरूकता, प्रारंभिक पहचान और कलंक में कमी को बढ़ावा देने के लिये एक सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) दृष्टिकोण कार्यक्रम आयोजित किया।
कुष्ठ रोग
- परिचय: यह माइकोबैक्टीरियम लेप्री (जीवाणु) के कारण होने वाला एक पुराना संक्रामक रोग है, जो त्वचा और नसों को प्रभावित करता है, यह बिना उपचार वाले रोगियों के शरीर से निकलने वाली बूँदों के माध्यम से फैलता है, हालाँकि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निशुल्क प्रदान की जाने वाली बहु-औषधि चिकित्सा (MDT) से इसका पूर्ण उपचार संभव है।
- भारत ने वर्ष 2005 में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन स्थिति (प्रसार दर <1/10,000) हासिल की और इसे बनाए रखा। वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार दर 0.57 है।
- मुख्य लक्षण: संवेदी हानि के साथ लाल त्वचा के धब्बे, मोटी नसें और परिणामस्वरूप सुन्नता जो अल्सर, माँसपेशियों की कमज़ोरी और पक्षाघात (जैसे– क्लॉ-हैंड, फुट-ड्रॉप) का कारण बन सकती है।
- उन्नत मामलों में चेहरे पर गाँठ, नकसीर और भौंहों के झड़ने जैसी विकृतियाँ देखी जा सकती हैं।
- भारत के कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का विकास: भारत ने वर्ष 1983 में राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम (NLCP, 1954-55) से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) में संक्रमण किया, जो वर्ष 2005 में राष्ट्रीय उन्मूलन हासिल करने में महत्त्वपूर्ण था।
- वर्तमान रणनीति: राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (NSP) 2023-27 वैश्विक कुष्ठ रणनीति 2021-30 और WHO उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग रोडमैप के साथ समन्वित है।
- इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुष्ठ रोग संचरण को समाप्त करना और कोविड-19 महामारी से उबरना है, जिसमें वर्ष 2027 तक संचरण को रोकने के लिये विशिष्ट हस्तक्षेप और एक रोडमैप निर्धारित किया गया है।
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श्री गुरु रविदास महाराज जी की जयंती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरु रविदास महाराज जी की 649वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जो माघ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है (जिसे 1 फरवरी 2026 को मनाया गया)।
- जन्म और मूल: 15वीं शताब्दी (लगभग 1450–1520) में सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी) में उनका जन्म हुआ। वे चमार समुदाय (चमड़ा कर्मी/अछूत माने जाने वाले वर्ग) से संबंध रखते थे।
- निम्न सामाजिक स्थिति के बावजूद, उनकी आध्यात्मिक महानता ने सभी जातियों के अनुयायियों को आकर्षित किया।
- आध्यात्मिक परंपरा: परंपरागत रूप से उन्हें भक्तिकालीन कवि रामानंद के शिष्य और कबीर के समकालीन माना जाता है। उन्हें मीरा बाई के आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।
- दर्शन (निर्गुण भक्ति): उन्होंने निर्गुण भक्तिधारा (निराकार) स्वरूप पर बल दिया और कर्मकांड तथा सगुण भक्तिधारा (साकार, गुणयुक्त) का खंडन किया।
- उन्होंने ‘बेगमपुरा’ की कल्पना की—एक ऐसा समतामूलक समाज जहाँ दुःख, भय और भेदभाव न हो।
- उन्होंने ‘सहज’ की अवस्था पर बल दिया, जो अनेकता में एकता रहस्यमयी मिलन की स्थिति को दर्शाता है।
- उनकी शिक्षाओं का केंद्र कठोर ब्राह्मणवादी रूढ़िवाद और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध सामाजिक प्रतिरोध रहा।
- साहित्यिक योगदान: उनके पद और भजन जनभाषा में रचे गए थे।
- उनके भक्ति गीत आदि ग्रंथ (गुरु ग्रंथ साहिब), जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है, में शामिल किये गए हैं। उनकी काव्य और रचनाएँ दादुपंथी परंपरा के पंचवाणी में भी संरक्षित हैं।
- विरासत: उनकी शिक्षाएँ रविदासिया धर्म की आधार–शिला हैं, जो ‘अमृत बाणी गुरु रविदास’ को अपना पवित्र ग्रंथ मानती है।
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प्रारंभिक परीक्षा
भारत ने रामसर नेटवर्क को 98 स्थल तक बढ़ाया
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 से पहले, प्रधानमंत्री ने पटना बर्ड सेंचुरी (उत्तर प्रदेश) और छारी-ढाँड (गुजरात) को रामसर स्थल के रूप में शामिल किये जाने का स्वागत किया, जिससे भारत में रामसर स्थल की कुल संख्या 98 हो गई।
- विश्व आर्द्रभूमि दिवस हर साल 2 फरवरी को मनाया जाता है, ताकि आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्त्व को उजागर किया जा सके और 1971 में ईरान के रामसर में आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन के हस्ताक्षर की यादगार के रूप में इसे मनाया जाता है।
हाल ही में जोड़े गए रामसर स्थल कौन से हैं?
छारी-ढाँड (गुजरात)
- यह मौसमी खारे पानी वाली आर्द्रभूमि है, जो बन्नी घास के मैदानों और कच्छ के नमक के मैदानों के बीच स्थित है, और मानसून में लगभग 80 वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत हो जाती है।
- यह गुजरात का एकमात्र कंजर्वेशन रिज़र्व है और पश्चिमी प्रवासी मार्ग का एक प्रमुख पड़ाव है, जो जलपक्षियों के लिये महत्त्वपूर्ण शीतकालीन आवास प्रदान करता है।
- यह लगभग 30,000 'कॉमन क्रेन', 'ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो' की बड़ी आबादी और संकटग्रस्त प्रजातियों जैसे कि गंभीर रूप से लुप्तप्राय 'सोशिएबल लैपविंग' और सुभेद्य 'कॉमन पोचार्ड' को भी संरक्षण प्रदान करता है।
- मौसमी जल स्रोत भोजन और विश्राम के लिये आवश्यक आवास प्रदान करते हैं, आसपास के शुष्क क्षेत्र चिंकारा, काराकल और डेजर्ट फॉक्स का आवास हैं, और यह क्षेत्र सूर्यास्त के बाद दिखाई देने वाली 'चिर बत्ती' (Chir Batti) की घटना के लिये प्रसिद्ध है।
पटना पक्षी अभयारण्य (उत्तर प्रदेश)
- यह एटा ज़िले के जलसर उपखंड में स्थित है और लगभग 1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिससे यह उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है।
- अभयारण्य में मीठे पानी के दलदल, वुडलैंड और घास के मैदान शामिल हैं, जो कृषि प्रधान परिदृश्य के भीतर विविध आवासों का समर्थन करते हैं।
- सर्दियों के दौरान, यह दसियों हज़ार प्रवासी पक्षियों जैसे रोज़ी पेलिकन, यूरेशियन स्पूनबिल और नॉर्दर्न पिनटेल का आवास बनता है, जो सेंट्रल एशियन फ्लाईवे में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।
- यह 178 पक्षी प्रजातियों और 252 पौधों की प्रजातियों का रिकॉर्ड रखता है, प्रमुख जलपक्षी आबादियों का समर्थन करता है, तथा बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा इसे महत्त्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र के रूप में नामित किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. रामसर स्थल क्या है?
रामसर स्थल एक अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि है, जिसे रामसर अभिसमय के तहत संरक्षण और समझदारी से उपयोग के लिये नामित किया जाता है।
2. भारत कब रामसर अभिसमय का पक्षकार बना?
भारत 1 फरवरी, 1982 को रामसर अभिसमय का संविदान पक्षकार बना।
3. छारी-ढाँड कहाँ स्थित है?
छारी-ढाँड गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित है, बन्नी घास के मैदानों और कच्छ के रण के नमक के मैदानों के बीच।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)
- रामसर सम्मेलन के अनुसार, भारत के राज्यक्षेत्र में सभी आर्द्र भूमियों को बचाना और संरक्षित रखना भारत सरकार के लिए अधिदेशात्मक है।
- आर्द्र भूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2010, भारत सरकार ने रामसर सम्मेलन की संस्तुतियों के आधार पर बनाए थे।
- आर्द्र भूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2010, आर्द्र भूमियों के अपवाह क्षेत्र या जलग्रहण क्षेत्रों को भी सम्मिलित करते हैं, जैसा कि प्राधिकार द्वारा निर्धारित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
प्रश्न. 'वेटलैंड्स इंटरनेशनल' नामक संरक्षण संगठन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2014)
1. यह रामसर अभिसमय के हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा बनाया गया एक अन्तःसरकारी संगठन है।
2. यह ज्ञान के विकास और संग्रहण के लिये तथा व्यावहारिक अनुभव का बेहतर नीतियों हेतु पक्षसमर्थन करने के लिए क्षेत्र स्तर पर कार्य करता है।
नीचे दिये गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b)


