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श्री गुरु रविदास महाराज जी की जयंती
- 02 Feb 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरु रविदास महाराज जी की 649वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जो माघ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है (जिसे 1 फरवरी 2026 को मनाया गया)।
- जन्म और मूल: 15वीं शताब्दी (लगभग 1450–1520) में सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी) में उनका जन्म हुआ। वे चमार समुदाय (चमड़ा कर्मी/अछूत माने जाने वाले वर्ग) से संबंध रखते थे।
- निम्न सामाजिक स्थिति के बावजूद, उनकी आध्यात्मिक महानता ने सभी जातियों के अनुयायियों को आकर्षित किया।
- आध्यात्मिक परंपरा: परंपरागत रूप से उन्हें भक्तिकालीन कवि रामानंद के शिष्य और कबीर के समकालीन माना जाता है। उन्हें मीरा बाई के आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी श्रद्धा से स्मरण किया जाता है।
- दर्शन (निर्गुण भक्ति): उन्होंने निर्गुण भक्तिधारा (निराकार) स्वरूप पर बल दिया और कर्मकांड तथा सगुण भक्तिधारा (साकार, गुणयुक्त) का खंडन किया।
- उन्होंने ‘बेगमपुरा’ की कल्पना की—एक ऐसा समतामूलक समाज जहाँ दुःख, भय और भेदभाव न हो।
- उन्होंने ‘सहज’ की अवस्था पर बल दिया, जो अनेकता में एकता रहस्यमयी मिलन की स्थिति को दर्शाता है।
- उनकी शिक्षाओं का केंद्र कठोर ब्राह्मणवादी रूढ़िवाद और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध सामाजिक प्रतिरोध रहा।
- साहित्यिक योगदान: उनके पद और भजन जनभाषा में रचे गए थे।
- उनके भक्ति गीत आदि ग्रंथ (गुरु ग्रंथ साहिब), जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है, में शामिल किये गए हैं। उनकी काव्य और रचनाएँ दादुपंथी परंपरा के पंचवाणी में भी संरक्षित हैं।
- विरासत: उनकी शिक्षाएँ रविदासिया धर्म की आधार–शिला हैं, जो ‘अमृत बाणी गुरु रविदास’ को अपना पवित्र ग्रंथ मानती है।
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