राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स
भारत की रामसर सूची में दो नई आर्द्रभूमियाँ शामिल की
- 02 Feb 2026
- 14 min read
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 से पहले भारत की रामसर सूची में दो नई आर्द्रभूमियों को जोड़े जाने की घोषणा की।
मुख्य बिंदु:
- नई रामसर स्थल: उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ ज़िले में स्थित छारी–ढांड को भारत की रामसर सूची में अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आर्द्रभूमियों के रूप में शामिल किया गया है।
- भारत का रामसर नेटवर्क वर्ष 2014 में 26 स्थलों से बढ़कर वर्ष 2026 में 98 स्थलों तक पहुँच गया है।
- पटना पक्षी अभयारण्य: यह सबसे छोटे संरक्षित पक्षी अभयारण्यों में से एक है और एक महत्त्वपूर्ण पक्षी एवं जैव-विविधता क्षेत्र (IBA) भी है।
- छारी–ढांड आर्द्रभूमि: कच्छ के रण क्षेत्र में स्थित एक मौसमी लवणीय आर्द्रभूमि, जो प्रवासी जलपक्षियों और मरुस्थलीय जैव-विविधता के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- यह नलसरोवर, थोल, खिजड़िया और वधवाना के बाद गुजरात का पाँचवाँ रामसर स्थल है।
- महत्त्व: नए जोड़े गए स्थल सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियों का समर्थन करते हैं तथा संकटग्रस्त पक्षियों के अतिरिक्त चिंकारा, भेड़िये, कैराकल, मरु बिल्ली एवं मरु लोमड़ी जैसे वन्यजीवों का भी आवास हैं।
- प्रासंगिकता: रामसर सूची में शामिल होना वैश्विक रूप से स्वीकृत ढाँचों के अंतर्गत आर्द्रभूमि संरक्षण और सतत प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दर्शाता है।
- रामसर कन्वेंशन: यह आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिस पर वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किये गए थे।
- भारत 1 फरवरी, 1982 को इसका पक्षकार बना।
- विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: यह 2 फरवरी को मनाया जाता है।
- थीम: आर्द्रभूमियाँ और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव।
|
और पढ़ें: विश्व आर्द्रभूमि दिवस, रामसर स्थल, रामसर कन्वेंशन, प्रवासी पक्षी |