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झारखंड की विधायक कल्पना सोरेन को BRICS CCI पुरस्कार से सम्मानित किया गया
चर्चा में क्यों?
झारखंड की विधायक कल्पना सोरेन को नई दिल्ली में आयोजित BRICS CCI WE वार्षिक महिला शिखर सम्मेलन एवं सम्मान समारोह 2026 के 6वें संस्करण में प्रतिष्ठित महिला सशक्तीकरण ट्रेलब्लेज़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: कल्पना सोरेन झारखंड विधानसभा की सदस्य हैं, जो गांडेय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- वे सामाजिक और सामुदायिक विकास कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं, विशेष रूप से महिला सशक्तीकरण तथा सामाजिक-आर्थिक प्रक्रियाओं में समावेशन पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
- आयोजक: यह तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महिला सशक्तीकरण प्रकोष्ठ (BRICS CCI WE) द्वारा 21 से 23 मार्च, 2026 तक आयोजित किया गया।
- थीम: यह “नवाचार, विज्ञान नेतृत्व, नवाचार और उद्यमिता में महिलाएँ (WISE) – बदलाव की प्रेरणा, कल का निर्माण” थीम के तहत आयोजित किया गया था।
- WISE पहल, जिसे पहली बार वर्ष 2025 में रियो डी जनेरियो में आयोजित BRICS वुमन बिज़नेस एलायंस की वार्षिक पूर्ण बैठक के दौरान शुरू किया गया था, अब एक वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो चुकी है, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिला-नेतृत्व वाले नवाचार को बढ़ावा देना और पारिस्थितिकी तंत्र साझेदारी को सशक्त करना है।
- अन्य पुरस्कार:
- वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी को ‘ट्रेलब्लेज़र: लिविंग लीजेंड’ अवार्ड से सम्मानित किया गया।
- देबजानी घोष को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया।
- BRICS:
- पहला BRIC शिखर सम्मेलन वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित हुआ था।
- BRIC मूलतः ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन के लिये प्रयुक्त था; 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद यह BRICS कहलाने लगा।
- वर्ष 2014 में ब्राज़ील के फोर्टालेज़ा में आयोजित 6वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान अभिकर्त्ताओं ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना के समझौते पर हस्ताक्षर किये।
- वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE के शामिल होने से इस समूह का विस्तार हुआ।
- वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इसका सदस्य बना।
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लद्दाख में इंडस रिवर (सिंधु नदी) ग्रीन कॉरिडोर पहल
चर्चा में क्यों?
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख के लेह में स्पितुक फर्खा पर इंडस रिवर ग्रीन कॉरिडोर इको-रिस्टोरेशन प्लांटेशन परियोजना शुरू की।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: इंडस रिवर ग्रीन कॉरिडोर भारत की एक अनूठी शीत मरुस्थलीय नदी-तट पुनर्स्थापन परियोजना है, जिसका उद्देश्य लद्दाख के लेह क्षेत्र के नाजुक उच्च-ऊँचाई वाले परिदृश्य में सिंधु नदी के किनारे हरित पट्टी (ग्रीन बफर) विकसित करना है।
- नागरिक प्रशासन, सेना, पुलिस तथा स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से नदी तट पर ओलियास्टर और सी-बकथॉर्न जैसी स्वदेशी प्रजातियों के लगभग 1000 पौधे लगाए गए।
- इसके अतिरिक्त, लेह शहर में सड़कों के किनारे चेरी ब्लॉसम और खुबानी के 1000 पौधे भी लगाए गए, जिससे शहर की हरित सुंदरता बढ़ाने का लक्ष्य है।
- उद्देश्य:
- सिंधु नदी के तटों की पारिस्थितिक अखंडता को पुनर्स्थापित करना और लद्दाख के शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में जैव विविधता को बढ़ाना।
- मृदा अपरदन, मरुस्थलीकरण और कम हरित आवरण जैसी प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करना।
- लद्दाख को एक सतत और अनुकूल पर्यावरण के रूप में विकसित करना तथा क्षेत्र के सौंदर्यात्मक आकर्षण को बढ़ाना।
- सिंचाई तकनीकें: रोपण और वनीकरण गतिविधियों में जल उपयोग को अनुकूलित करने के लिये गुरुत्वाकर्षण-आधारित सौर सबमर्सिबल स्ट्रिप सिंचाई तथा ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाया जा रहा है।
- पारिस्थितिक लाभ: रणनीतिक वृक्षारोपण प्रयासों से शेल्टर बेल्ट के माध्यम से हवा की गति को कम करने, नदी के किनारों पर मृदा के कटाव को रोकने, सूक्ष्म-जलवायु स्थिरता में सुधार करने, ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने और एक चुनौतीपूर्ण वातावरण में जैव विविधता संरक्षण में सहायता मिलेगी।
- महत्त्व: वर्तमान में लद्दाख का वन आवरण 1% से भी कम है। उपराज्यपाल ने अगले दो वर्षों में इसे 5% तक बढ़ाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
- यह वर्ष 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्स्थापन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।
- सिंधु नदी:
- सिंधु (तिब्बती में सेंगे छू या ‘लायन रिवर’) दक्षिण एशिया की एक प्रमुख नदी है, जिसका उद्गम ट्रांस-हिमालय में मानसरोवर झील के पास तिब्बत में होता है।
- यह नदी तिब्बत, भारत और पाकिस्तान से होकर बहती है तथा इसके जलग्रहण क्षेत्र में लगभग 200 मिलियन लोग निवास करते हैं।
- सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक के सहयोग से हस्ताक्षरित की गई थी।
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INS नीलगिरि ने ऑस्ट्रेलिया में सैन्य अभ्यास काकाडू 2026 में भाग लिया
चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत INS नीलगिरी ऑस्ट्रेलिया में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास काकाडू 2026 में शामिल हुआ है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच सहयोग और पारस्परिक संचालन क्षमता को सुदृढ़ किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु:
- सैन्य अभ्यास काकाडू: अभ्यास काकाडू रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी का प्रमुख बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है, जो हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, पारस्परिक संचालन क्षमता में सुधार करना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी को सुदृढ़ करना है।
- इसकी शुरुआत वर्ष 1993 में हुई थी।
- INS नीलगिरी: INS नीलगिरी भारतीय नौसेना का एक उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो स्वदेशी प्रोजेक्ट 17A श्रेणी का हिस्सा है। इसे बहु-भूमिका संचालन के लिये डिज़ाइन किया गया है, जिसमें सतह युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध और वायु रक्षा शामिल हैं।
- इस पोत का जलावतरण सितंबर 2019 में हुआ था और इसे वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
- प्रोजेक्ट 17A:
- भारतीय नौसेना ने वर्ष 2019 में प्रोजेक्ट 17 अल्फा (P-17A) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स की एक शृंखला का निर्माण करना है।
- INS नीलगिरी इस परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे सात फ्रिगेट्स में पहला है।
- अन्य छह फ्रिगेट्स हैं—हिमगिरि, उदयगिरि, तारागिरि, दुनागिरि, विंध्यगिरि और महेंद्रगिरि।
- इनका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया जा रहा है।
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भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बना
चर्चा में क्यों?
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क बनकर उभरा है, जो देश में शहरी सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के तीव्र विस्तार को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु:
- नेटवर्क का आकार: भारत में अब 29 शहरों में फैली 1,143 किमी से अधिक परिचालन मेट्रो लाइनों का नेटवर्क है, जो इसे विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बनाता है।
- चीन विश्व में सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क रखता है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है।
- निर्माणाधीन परियोजनाएँ: लगभग 936 किमी मेट्रो लाइनें निर्माणाधीन हैं, जो शहरी संपर्क को और सुदृढ़ करेंगी।
- प्रमुख शहर: दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर आदि प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवाएँ संचालित हो रही हैं।
- सरकारी पहल: यह विस्तार स्मार्ट सिटीज़ मिशन और शहरी परिवहन नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहरी गतिशीलता में सुधार, यात्रा समय में कमी तथा यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाना है।
- मेट्रो रेल नीति 2017 के तहत शहरों को व्यापक गतिशीलता योजना (CMPs) तैयार करना और शहरी महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (UMTAs) स्थापित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि मेट्रो प्रणाली के विकास को सततता, आर्थिक व्यवहार्यता एवं एकीकृत शहरी परिवहन के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
- प्रौद्योगिकी: आधुनिक मेट्रो प्रणालियों में चालक रहित ट्रेनें, स्वचालित सिग्नलिंग, ऊर्जा-कुशल संचालन और एकीकृत टिकटिंग प्रणाली शामिल हैं।
- पर्यावरणीय प्रभाव: मेट्रो प्रणाली कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़क यातायात में कमी लाने और सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा देने में सहायक है।
- ऐतिहासिक तथ्य:
- भारत की पहली मेट्रो रेलवे कोलकाता मेट्रो है, जिसने 24 अक्तूबर, 1984 को संचालन शुरू किया।
- दिल्ली मेट्रो 24 दिसंबर, 2002 को शुरू हुई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की स्थापना 1995 में हुई थी।
- भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो सुरंग वर्ष 2024 में कोलकाता में शुरू की गई।
- केरल का कोच्चि शहर भारत का पहला शहर बना, जहाँ वाटर मेट्रो सेवा शुरू की गई।
- परिवहन गतिशीलता के लिये ‘वन नेशन, वन कार्ड’ भी शुरू किया गया है।
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बैंक ऑफ बड़ौदा ने महिला स्वयं सहायता समूहों के लिये UPI-आधारित क्रेडिट लाइन लॉन्च की
चर्चा में क्यों?
बैंक ऑफ बड़ौदा ने महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों के लिये UPI के माध्यम से क्रेडिट लाइन पर ओवरड्राफ्ट सुविधा शुरू की है, जिससे डिजिटल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने हेतु ऐसा फीचर शुरू करने वाला यह भारत का पहला बैंक बन गया है।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: यह पहल पात्र लाभार्थियों (महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों) को, जिनके पास प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) खाते हैं, डिजिटल माध्यम से ₹5,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
- यह पहल राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), भारतीय बैंक संघ (IBA) और दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के सहयोग से शुरू की गई है।
- उद्देश्य: इस सुविधा का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं के लिये औपचारिक ऋण तक पहुँच बढ़ाना, वित्तीय समावेशन को मज़बूत करना और महिला नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तीकरण को सहायता प्रदान करना है।
- लाभ: यह महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के सदस्यों को तत्काल डिजिटल ऋण तक पहुँच प्रदान करता है, जिससे वित्तीय समावेशन, UPI के माध्यम से आसान लेन-देन और छोटी वित्तीय ज़रूरतों के लिये सहायता सुनिश्चित होती है।
- नीति के साथ सामंजस्य: यह पहल डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और DAY-NRLM जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अनुरूप है।


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