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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026

  • 24 Mar 2026
  • 25 min read

चर्चा में क्यों?

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हाल ही में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पारित किया है, जिसमें अवैध धार्मिक धर्मांतरण के विरुद्ध कड़े प्रावधान किये गए हैं, जिनमें सामूहिक धर्मांतरण के लिये आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: यह कानून बल, धोखाधड़ी, दबाव या प्रलोभन के माध्यम से होने वाले धार्मिक धर्मांतरण को रोकने तथा स्वैच्छिक धर्मांतरण को विनियमित करने का उद्देश्य रखता है।
    • यह नया विधेयक छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 का स्थान लेता है।
  • दंड प्रावधान: कानून ‘सामूहिक धर्मांतरण’ के लिये 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा न्यूनतम ₹25 लाख के जुर्माने का प्रावधान करता है।
    • यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या OBC/SC/ST समुदाय से संबंधित हो, तो दंड 10 से 20 वर्ष के कारावास के साथ न्यूनतम ₹10 लाख के जुर्माने तक निर्धारित किया गया है।
    • अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों को ₹10 लाख तक का मुआवज़ा भी दिया जा सकता है।
  • घोषणा: धर्म परिवर्तन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों को सक्षम प्राधिकारी [ज़िला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा अधिकृत (अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट स्तर से नीचे नहीं) अधिकारी] के समक्ष घोषणा प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद अधिकारी सत्यापन कर सकते हैं और आपत्तियाँ आमंत्रित कर सकते हैं।
  • विवाह से संबंधित प्रावधान: केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन तब तक अवैध माना जाएगा, जब तक कि निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं और घोषणाओं का पालन न किया जाए।
  • अपराध की प्रकृति: इस कानून के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं, जिससे संदिग्ध अवैध धर्मांतरण मामलों में तुरंत कानूनी कार्रवाई संभव है।
  • जाँच एवं विचारण: मामलों की जाँच पुलिस अधिकारी (जैसे उप-निरीक्षक स्तर) द्वारा की जा सकती है और इनका विचारण विशेष न्यायालय में होगा; यदि ऐसा न्यायालय निर्धारित न हो तो सत्र न्यायालय में किया जाएगा। आरोपपत्र दाखिल होने के छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का प्रावधान है।
  • अतिरिक्त प्रमुख प्रावधान:
    • सामूहिक धर्मांतरण: विधेयक के अनुसार, एक ही कार्यक्रम में दो या अधिक व्यक्तियों का धर्म परिवर्तन ‘सामूहिक धर्मांतरण’ माना जाएगा।
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म का समावेश: यह विधेयक बल, दबाव, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, गलत प्रस्तुति, धोखाधड़ी या विवाह के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है, जिसमें सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।
    • पूर्वजों के धर्म में पुनःपरिवर्तन: अपने पैतृक धर्म में पुनःपरिवर्तन को इस विधेयक के तहत धर्मांतरण नहीं माना गया है, इसलिये इसे घोषणा की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
    • धर्मांतरण विवरण का सार्वजनिक प्रदर्शन: प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करना होगा कि धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों का विवरण सरकारी प्लेटफॉर्म (जैसे वेबसाइट या नोटिस बोर्ड) पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि जन निगरानी और आपत्तियाँ संभव हो सकें।
    • प्रलोभन और दबाव: विधेयक में ‘प्रलोभन’ की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें धन लाभ, उपहार, रोज़गार, निशुल्क शिक्षा या चिकित्सा सुविधा, बेहतर जीवनशैली के वादे या विवाह को शामिल किया गया है।
      • वहीं ‘दबाव’ में मनोवैज्ञानिक दबाव, शारीरिक बल या धमकी, जिसमें सामाजिक बहिष्कार भी शामिल है, को सम्मिलित किया गया है।

और पढ़ें: धार्मिक धर्मांतरण

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