उत्तर प्रदेश Switch to English
दुधवा टाइगर रिज़र्व में हिमालयी ग्रिफॉन गिद्धों की मृत्यु
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश में दुधवा टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में 25 से अधिक हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध मृत पाए गए।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: मृत गिद्ध लखीमपुर खीरी ज़िले में दुधवा टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन के एक कृषि क्षेत्र में पाए गए।
- संभावित कारण: अधिकारियों के अनुसार, इनकी मृत्यु द्वितीयक विषाक्तता के कारण हुई हो सकती है, जिसमें गिद्ध उन जानवरों के शव खाते हैं जिन्होंने पहले विषैले पदार्थ का सेवन किया होता है।
- स्थिति: हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध (Gyps himalayensis)
- IUCN स्थिति: निकट संकटग्रस्त
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 के अंतर्गत स्थिति: इन्हें अनुसूची IV के तहत संरक्षण प्राप्त है।
- आवास: हिमालय और तिब्बती पठार के उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्र।
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न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का इस्तीफा
चर्चा में क्यों?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 217(1)(a) के तहत भारत के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह घटनाक्रम एक चर्चित ‘कैश-एट-होम’ (घर पर नकदी) विवाद और संसद में औपचारिक महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सामने आया है।
मुख्य बिंदु:
- विवाद की पृष्ठभूमि: मार्च 2025 में, न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित आवास पर लगी आग के दौरान बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी का पता चला था।
- जाँच की शुरुआत: सर्वोच्च न्यायालय की एक आंतरिक समिति की प्रथम दृष्टया रिपोर्ट के बाद, 146 सांसदों ने न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 के तहत उन्हें हटाने के लिये एक प्रस्ताव पेश किया।
- संवैधानिक और कानूनी ढाँचा: अनुच्छेद 217(1)(b) के तहत, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को ‘सिद्ध कदाचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित संबोधन के बाद ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
- न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968: यह अधिनियम न्यायाधीश के कदाचार की जाँच और प्रमाणन की प्रक्रिया को विनियमित करता है।
- इस्तीफे के निहितार्थ: संसदीय मतदान से पहले इस्तीफा देने से, औपचारिक महाभियोग की प्रक्रिया प्रभावी रूप से निष्प्रभावी हो जाती है।
- सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ: औपचारिक निष्कासन के विपरीत, स्वैच्छिक इस्तीफा आमतौर पर एक न्यायाधीश को पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले अन्य लाभों को बनाए रखने की अनुमति देता है।
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उपराष्ट्रपति ने संविधान का सिंधी संस्करण दो लिपियों में जारी किया
चर्चा में क्यों?
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर सिंधी भाषा में भारत के संविधान के अद्यतन संस्करण का विमोचन किया।
मुख्य बिंदु:
- विमोचन: उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के संविधान के नवीनतम सिंधी अनुवाद का विमोचन किया।
- प्रयुक्त लिपियाँ: सिंधी भाषा में संविधान को दो लिपियों में प्रकाशित किया गया है—देवनागरी लिपि (पहला संस्करण) और फारसी लिपि (दूसरा संस्करण)।
- अवसर: यह विमोचन 10 अप्रैल, 2026 को सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर हुआ, जो सिंधी भाषा और संस्कृति के उत्सव तथा प्रचार-प्रसार के लिये मनाया जाता है।
- सिंधी भाषा:
- सिंधी भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक है।
- सिंधी भाषा को 21वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1967 के माध्यम से शामिल किया गया था।
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और पढ़ें: भारत का संविधान, आठवीं अनुसूची |
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भारतीय संगीत की दिग्गज हस्ती आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन
चर्चा में क्यों?
दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोंसले का 12 अप्रैल, 2026 को 92 वर्ष की आयु में निधन भारतीय संगीत के एक युग के निश्चित अंत का प्रतीक है। स्नेह से ‘आशा ताई’ के रूप में जानी जाने वाली, उनका निधन मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हृदय और श्वसन संबंधी जटिलताओं के कारण हुआ।
मुख्य बिंदु:
- जन्म: इनका जन्म 8 सितंबर, 1933, सांगली, महाराष्ट्र में हुआ था।
- परिवार: शास्त्रीय गायक पंडित दीनानाथ मंगेशकर की सुपुत्री और 'भारत कोकिला' लता मंगेशकर की छोटी बहन।
- करियर की अवधि: आठ दशकों से अधिक (1943-2026), जिसकी शुरुआत मराठी फिल्म ''माझं बाळ (Majha Bal)' से हुई थी।
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: वर्ष 2011 में आधिकारिक तौर पर संगीत इतिहास में सबसे अधिक रिकॉर्ड किये गए कलाकार के रूप में मान्यता प्राप्त, जिन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 11,000-12,000 से अधिक गाने गाए।
प्रमुख पुरस्कार और सम्मान:
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पुरस्कार |
वर्ष |
महत्त्व |
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दादा साहब फाल्के पुरस्कार |
2000 |
सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च पुरस्कार |
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पद्म विभूषण |
2008 |
भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान |
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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार |
कई बार |
'उमराव जान' (1981) और 'इजाज़त' (1986) सहित |
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ग्रैमी नामांकन |
1997 |
ग्रैमी के लिये नामांकित होने वाली पहली भारतीय गायिका |
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महाराष्ट्र भूषण |
2021 |
महाराष्ट्र राज्य का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार |
अंतिम संस्कार: उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया, यह वही स्थान है जहाँ उनकी बहन लता मंगेशकर को अंतिम विदाई दी गई थी।
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मुंद्रा बंदरगाह: ऑटोमोटिव निर्यात के लिये भारत का उभरता केंद्र
चर्चा में क्यों?
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) द्वारा प्रबंधित गुजरात का मुंद्रा पोर्ट, आधिकारिक तौर पर चेन्नई और एन्नोर जैसे पारंपरिक केंद्रों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्यात गेटवे बन गया है। यह बदलाव भारत के समुद्री लॉजिस्टिक्स और ‘मेक इन इंडिया’ पहल में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- विकास के प्रमुख कारक: उत्तरी और पश्चिमी ऑटोमोबाइल क्लस्टर (हरियाणा, राजस्थान और गुजरात) से इसकी निकटता अंतर्देशीय लॉजिस्टिक्स लागत को कम करती है।
- उत्कृष्ट बुनियादी ढाँचा: इस बंदरगाह में एक समर्पित रो-रो (Roll-on/Roll-off - Ro-Ro) टर्मिनल और एक विशाल पार्किंग यार्ड है, जो किसी भी समय 15,000 से अधिक वाहनों को संभालने में सक्षम है।
- डीप ड्राफ्ट क्षमता: मुंद्रा बंदरगाह विश्व के सबसे बड़े 'प्योर कार एंड ट्रक कैरियर्स' (PCTCs) को जगह दे सकता है, जिससे वैश्विक निर्माताओं के लिये बड़े पैमाने की बचत बढ़ जाती है।
- निर्यात में उछाल: मारुति सुजुकी, निसान और टोयोटा जैसे प्रमुख मूल उपकरण निर्माता (OEMs) ने अपने कम 'टर्नअराउंड समय' (जहाजों के आने-जाने में लगने वाला समय) के कारण अपने निर्यात वॉल्यूम को तेज़ी से मुंद्रा की ओर स्थानांतरित कर दिया है।
- वैश्विक पहुँच: यह बंदरगाह मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के बाज़ारों में जाने वाले भारतीय निर्मित वाहनों के लिये प्राथमिक निकास बिंदु के रूप में कार्य करता है।
- आर्थिक और नीतिगत प्रभाव: मुंद्रा के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के साथ एकीकरण ने विनिर्माण संयंत्रों से ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक संपर्क) में काफी सुधार किया है।
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और पढ़ें: समर्पित माल गलियारा |

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