प्रारंभिक परीक्षा
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती
- 14 Apr 2026
- 47 min read
चर्चा में क्यों?
14 अप्रैल, 2026 को राष्ट्र डॉ. भीमराव रावजी अंबेडकर की 135वीं जयंती मना रहा है, जो भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार, एक अग्रणी सामाजिक सुधारक, प्रतिष्ठित विधिवेत्ता और महान बुद्धिजीवी थे, जिन्होंने भारत में सामाजिक असमानता को समाप्त करने के लिये अपना जीवन समर्पित किया।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर कौन थे?
- प्रारंभिक जीवन: भीमराव रावजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रांत के महू (अब मध्य प्रदेश) में महार जाति में हुआ था। उन्होंने कम उम्र से ही गंभीर सामाजिक और आर्थिक भेदभाव का सामना किया।
- शिक्षा: भीमराव रावजी अंबेडकर एक प्रतिभाशाली विद्वान थे, जिन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय (अमेरिका) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (ब्रिटेन) से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
- राजनीतिक जीवन: भीमराव रावजी अंबेडकर स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री के रूप में कार्यरत रहे और संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के पद पर भी रहे।
- संगठन और साहित्यिक कार्य: भीमराव रावजी अंबेडकर ने वंचित वर्गों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिये बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924), श्रमिकों के अधिकारों के लिये इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी (1936) और दलितों के अधिकारों के समर्थन के लिये शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन (1942) जैसे महत्त्वपूर्ण संगठनों की स्थापना की।
- उन्होंने सामाजिक जागरूकता फैलाने के लिये ‘मूकनायक’ (1920), ‘बहिष्कृत भारत’ (1927), ‘समता’ (1929) और ‘जनता’ (1930) जैसे पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से प्रिंट मीडिया का भी उपयोग किया।
- उनकी प्रमुख रचनाएँ, जैसे– ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ (1936), ‘द अनटचेबल’ (1948), ‘बुद्ध और कार्ल मार्क्स’ (1956) और ‘बुद्ध एंड हिज़ धम्म’ (1957) सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित महत्त्वपूर्ण आधारभूत ग्रंथ हैं।
- मरणोपरांत सम्मान: उन्हें वर्ष 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।
क्या आप जानते हैं?
- भारत सरकार ने भीमराव रावजी अंबेडकर की विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये उनसे जुड़े पाँच प्रमुख स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया है:
- जन्म-भूमि: महू, मध्य प्रदेश (जन्म-स्थान)।
- शिक्षा-भूमि: लंदन, UK (जहाँ उन्होंने अध्ययन के दौरान निवास किया)।
- दीक्षा-भूमि: नागपुर, महाराष्ट्र (जहाँ उन्होंने 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया)।
- महापरिनिर्वाण-भूमि: दिल्ली (जहाँ 6 दिसंबर, 1956 को उनका निधन हुआ)।
- चैत्य-भूमि: मुंबई, महाराष्ट्र (अंतिम संस्कार स्थल)।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर के प्रमुख योगदान क्या हैं?
- सामाजिक सुधार एवं जाति प्रथा के विरुद्ध संघर्ष:
- महाड़ सत्याग्रह (1927): उन्होंने महाराष्ट्र के महाड़ में सार्वजनिक चावदार तालाब से अछूतों को पानी लेने के अधिकार के लिये महाड़ सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
- मंदिर प्रवेश आंदोलन: उन्होंने वंचित जातियों को हिंदू मंदिरों में प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिये सक्रिय रूप से आंदोलन चलाए (जैसे– कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन, 1930)।
- पूना पैक्ट (1932): महात्मा गांधी द्वारा सांप्रदायिक पुरस्कार (जिसमें दलित वर्गों के लिये पृथक् निर्वाचक मंडल का प्रावधान था) के विरोध में आमरण अनशन के बाद अंबेडकर ने पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किये, जिसके तहत दलित वर्गों के लिये सामान्य हिंदू निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षित सीटें सुनिश्चित की गईं।
- संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक योगदान:
- संविधान का निर्माण: प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संविधान में अल्पसंख्यकों, वंचित वर्गों और महिलाओं के लिये सशक्त संरक्षण प्रावधान शामिल हों।
- अंबेडकर का मानना था कि भारत की नींव स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व पर आधारित होनी चाहिये, जो फ्राँसीसी क्रांति (1789-1799) से प्रेरित थी।
- अनुच्छेद 32: उन्होंने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार का अधिकार) को भारतीय संविधान की ‘हृदय और आत्मा’ कहा था।
- संविधान का निर्माण: प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संविधान में अल्पसंख्यकों, वंचित वर्गों और महिलाओं के लिये सशक्त संरक्षण प्रावधान शामिल हों।
- आर्थिक एवं श्रम सुधार:
- भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वैचारिक रूपरेखा उनके द्वारा हिल्टन यंग आयोग के समक्ष प्रस्तुत दिशा-निर्देशों पर आधारित थी, जो उनकी पुस्तक ‘द प्रॉब्लम ऑफ द रूपी: इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन’ से प्रेरित थे।
- श्रम अधिकार: वायसरॉय की कार्यकारी परिषद में श्रम सदस्य के रूप में उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण सुधार लागू किये, जिनमें कारखानों में कार्य के घंटे 14 से घटाकर 8 घंटे करना, लैंगिक भेदभाव के बिना समान कार्य के लिये समान वेतन तथा मातृत्व लाभ की व्यवस्था शामिल है।
- महिला सशक्तीकरण: उन्होंने महिलाओं को उत्तराधिकार, विवाह और तलाक में समान अधिकार प्रदान करने के लिये संसद में हिंदू कोड बिल प्रस्तुत किया।
- जब इस विधेयक को रूढ़िवादी विरोध के कारण स्थगित कर दिया गया, तो उन्होंने 1951 में विधि मंत्री के पद से त्याग-पत्र दे दिया।
- धर्म: नवयान (New Vehicle) बौद्ध धर्म, जिसकी स्थापना डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने 1956 में की, बौद्ध धर्म की एक पुनर्व्याख्या है, जो पारंपरिक आध्यात्मिक सिद्धांतों की अपेक्षा सामाजिक समानता और वर्ग संघर्ष पर अधिक बल देती है।
- यह चार आर्य सत्य, कर्म, पुनर्जन्म, निर्वाण और संन्यास जैसी मूल बौद्ध शिक्षाओं को अस्वीकार करता है, क्योंकि इन्हें निराशावादी और सामाजिक न्याय के संदर्भ में अप्रासंगिक माना गया।
- धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस प्रतिवर्ष 14 अक्तूबर को मनाया जाता है, जो 1956 में नागपुर के दीक्षा-भूमि पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर और उनके अनुयायियों के ऐतिहासिक सामूहिक बौद्ध धर्म ग्रहण की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
|
पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: डॉ. बी.आर. अंबेडकर के दार्शनिक दृष्टिकोण |
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से किस पार्टी की स्थापना डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने की थी? (2012)
- पीज़ेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया
- ऑल इंडिया शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन
- द इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. अलग-अलग दृष्टिकोण और रणनीतियों के बावजूद महात्मा गांधी तथा डॉ. बी.आर. अंबेडकर का दलितों के उत्थान का एक सामान्य लक्ष्य था। स्पष्ट कीजिये। (2015)
