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भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बना
- 26 Mar 2026
- 16 min read
चर्चा में क्यों?
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क बनकर उभरा है, जो देश में शहरी सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के तीव्र विस्तार को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु:
- नेटवर्क का आकार: भारत में अब 29 शहरों में फैली 1,143 किमी से अधिक परिचालन मेट्रो लाइनों का नेटवर्क है, जो इसे विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बनाता है।
- चीन विश्व में सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क रखता है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है।
- निर्माणाधीन परियोजनाएँ: लगभग 936 किमी मेट्रो लाइनें निर्माणाधीन हैं, जो शहरी संपर्क को और सुदृढ़ करेंगी।
- प्रमुख शहर: दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर आदि प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवाएँ संचालित हो रही हैं।
- सरकारी पहल: यह विस्तार स्मार्ट सिटीज़ मिशन और शहरी परिवहन नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहरी गतिशीलता में सुधार, यात्रा समय में कमी तथा यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाना है।
- मेट्रो रेल नीति 2017 के तहत शहरों को व्यापक गतिशीलता योजना (CMPs) तैयार करना और शहरी महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (UMTAs) स्थापित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि मेट्रो प्रणाली के विकास को सततता, आर्थिक व्यवहार्यता एवं एकीकृत शहरी परिवहन के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
- प्रौद्योगिकी: आधुनिक मेट्रो प्रणालियों में चालक रहित ट्रेनें, स्वचालित सिग्नलिंग, ऊर्जा-कुशल संचालन और एकीकृत टिकटिंग प्रणाली शामिल हैं।
- पर्यावरणीय प्रभाव: मेट्रो प्रणाली कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़क यातायात में कमी लाने और सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा देने में सहायक है।
- ऐतिहासिक तथ्य:
- भारत की पहली मेट्रो रेलवे कोलकाता मेट्रो है, जिसने 24 अक्तूबर, 1984 को संचालन शुरू किया।
- दिल्ली मेट्रो 24 दिसंबर, 2002 को शुरू हुई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की स्थापना 1995 में हुई थी।
- भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो सुरंग वर्ष 2024 में कोलकाता में शुरू की गई।
- केरल का कोच्चि शहर भारत का पहला शहर बना, जहाँ वाटर मेट्रो सेवा शुरू की गई।
- परिवहन गतिशीलता के लिये ‘वन नेशन, वन कार्ड’ भी शुरू किया गया है।
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