मध्य प्रदेश Switch to English
रातापानी टाइगर रिज़र्व का नाम अब विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर
चर्चा में क्यों?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की कि रातापानी टाइगर रिज़र्व का नाम प्रसिद्ध पुरातत्त्ववेत्ता और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित विष्णु श्रीधर वाकणकर के सम्मान में रखा जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- वी. एस. वाकणकर: वे एक प्रसिद्ध पुरातत्त्ववेत्ता थे, जिन्हें भीमबेटका रॉक शेल्टर्स की खोज के लिये सबसे अधिक जाना जाता है, जो UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं।
- मुख्य योगदान: शैल-चित्रकला अनुसंधान के माध्यम से उन्होंने प्रागैतिहासिक मानव इतिहास में भारत के महत्त्व को स्थापित किया।
- पुरस्कार: पद्मश्री (1975)।
- रातापानी टाइगर रिज़र्व: यह मध्य प्रदेश का आठवाँ टाइगर रिज़र्व है।
- भारत का 57वाँ टाइगर रिज़र्व है।
- जैव विविधता में समृद्ध, जिसमें बाघ, तेंदुए, स्लॉथ बियर और विविध वनस्पति शामिल हैं।
- अधिसूचित: इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अधिसूचित किया गया है।
- यह मध्य भारत में आवास संरक्षण और वन्यजीव गलियारों को मज़बूत करने में सहायक है।
- स्थान: यह भोपाल के निकट मध्य प्रदेश के रायसेन और सीहोर ज़िलों में स्थित है।
- इको-टूरिज़्म प्रभाव: रिज़र्व का नया नामांकन इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देगा, जन-जागरूकता बढ़ाएगा और रिज़र्व के साथ-साथ भारत की पुरातात्त्विक विरासत को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।
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और पढ़ें: रातापानी टाइगर रिज़र्व, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, UNESCO, भीमबेटका रॉक शेल्टर |

हरियाणा Switch to English
CAQM द्वारा धूल नियंत्रण मानकों के अनुपालन की जाँच हेतु फरीदाबाद की सड़कों का निरीक्षण
चर्चा में क्यों?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने हरियाणा के फरीदाबाद में 127 सड़क खंडों का उच्च-स्तरीय निरीक्षण किया, ताकि धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी की जा सके।
मुख्य बिंदु:
- प्रदूषण रोकथाम: यह ऑपरेशन क्लीन एयर का हिस्सा है, जो ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिये चलाया जा रहा है।
- उल्लंघन: निरीक्षण में उच्च दृश्य धूल, निर्माण अपशिष्ट का संचय, कच्ची सड़कें और मैकेनिकल स्वीपर या वाटर स्प्रिंकलर (पानी के छिड़काव यंत्रों) का उपयोग न करने का पता चला।
- सड़क पर धूल: यह PM2.5 और PM10 स्तरों में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है तथा GRAP उच्च प्रदूषण वाले महीनों में मैकेनिकल स्वीपिंग और वाटर स्प्रिंकलर करने का निर्देश देता है।
- निर्देश: CAQM ने स्थानीय वायु गुणवत्ता गिरावट को रोकने के लिये GRAP के तहत तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
- CAQM: यह वर्ष 2021 में स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जो NCR और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन का समन्वय करता है।
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और पढ़ें: ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान, CAQM |

राजस्थान Switch to English
जयपुर में क्षेत्रीय श्रम एवं रोज़गार सम्मेलन का उद्घाटन हुआ
चर्चा में क्यों?
राजस्थान के जयपुर में दो दिवसीय (14-15 जनवरी, 2026) क्षेत्रीय श्रम एवं रोज़गार सम्मेलन का उद्घाटन किया गया, जिसमें भारत के चार नए श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मुख्य बिंदु:
- जयपुर सम्मेलन: यह पूरे देश में नए श्रम नियामक ढाँचे को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये छह क्षेत्रीय परामर्श सत्रों की शृंखला का हिस्सा है।
- भागीदार: उत्तर-पश्चिमी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम और उद्योग सचिव सम्मेलन में शामिल हुए ताकि व्यवसाय करने में आसानी पर चर्चा की जा सके।
- सम्मेलन का उद्देश्य: मुख्य उद्देश्य चार नए श्रम संहिताओं के सुगम क्रियान्वयन, वेब-आधारित निरीक्षण प्रणाली में संक्रमण और सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमिकरण सुनिश्चित करना है।
- ये संहिताएँ भारत के श्रम और रोज़गार नियामक ढाँचे को आधुनिक बनाने तथा सुव्यवस्थित करने के लिये तैयार की गई हैं।
- श्रम सुधार: 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समेकित किया गया है ताकि अनुपालन सरल हो और श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।
- ई-श्रम पोर्टल: सम्मेलन में ई-श्रम पोर्टल को अन्य डेटाबेस के साथ एकीकृत करने और असंगठित श्रमिकों को बिना रुकावट लाभ उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
- महत्त्व: श्रम सुधारों में संघीय समन्वय को मज़बूत करना, नई संहिता के नियमों को त्वरित रूप से अंतिम रूप देना और विभिन्न राज्यों में श्रम प्रशासन तथा रोज़गार सेवाओं को सुधारना है।
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और पढ़ें: श्रम संहिता, ई-श्रम पोर्टल |

बिहार Switch to English
सोन नदी जल-बंटवारे समझौते को स्वीकृति मिली
चर्चा में क्यों?
बिहार कैबिनेट ने इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण को स्वीकृति दी है, जो झारखंड के साथ सोन नदी जल साझा करने के विवाद को दोनों राज्यों के बीच एक मसौदा समझौता पत्र (MoU) के माध्यम से सुलझाने के बाद संभव हुआ।
मुख्य बिंदु:
- CWC की स्वीकृति: केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने जल साझा करने के मसौदा समझौते को स्वीकृति दी।
- कैबिनेट की स्वीकृति: बिहार कैबिनेट ने झारखंड के साथ मसौदा MoU पर हस्ताक्षर करने के लिये जल संसाधन विभाग के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी।
- रोहतास ज़िले (बिहार) में इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण को सक्षम बनाना है।
- विवाद की पृष्ठभूमि: वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को सोन नदी का 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था।
- विभाजन के बाद: झारखंड ने अपने लिये स्पष्ट हिस्से की मांग की, जिससे लंबी बातचीत हुई।
- जल आवंटन सूत्र: अनुमोदित व्यवस्था के अनुसार, अविभाजित बिहार को पहले आवंटित हिस्से में से बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.0 MAF मिलेगा।
- सिंचाई लाभ: इस परियोजना से बिहार के आठ ज़िलों में सिंचाई की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।
- भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना कृषि एवं ग्रामीण आजीविका का समर्थन कर रहे हैं।
- संघीय समन्वय: यह समझौता पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में चर्चाओं के माध्यम से सुलझाया गया, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत कार्य करती है।
- आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: जल उपलब्धता में सुधार से कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और बिहार के जल-संकट प्रभावित क्षेत्रों में क्षेत्रीय विकास को सहारा मिलेगा।
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और पढ़ें: सोन नदी, केंद्रीय जल आयोग (CWC), बाणसागर बाँध, पूर्वी क्षेत्रीय परिषद, भारतीय संविधान। |

उत्तराखंड Switch to English
उत्तराखंड छोटे राज्यों में नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स में पहले स्थान पर
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड ने नीति आयोग द्वारा जारी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) 2024 में छोटे राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक पहल: उत्तराखंड ने यह स्थिति निर्यात एवं लॉजिस्टिक्स नीति जैसी नई पहलों को लागू करके और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत प्रत्येक ज़िले से दो उत्पादों को प्रचारित करने के चयन के माध्यम से हासिल की।
- शीर्ष छोटे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: उत्तराखंड के बाद जम्मू-कश्मीर और नागालैंड शीर्ष रैंक वाले क्षेत्र हैं, इसके बाद दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव तथा गोवा आते हैं।
- शीर्ष बड़े राज्य: महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात निर्यात तैयारी के मामले में अग्रणी बड़े राज्य हैं।
- महत्त्व: EPI राज्यों में निर्यात तंत्र की ताकत और कमियों की पहचान करने में सहायता करता है, जिससे नीति निर्धारक लक्षित रणनीतियाँ तैयार कर सकते हैं, निर्यात बढ़ा सकते हैं, वैश्विक समाकलन को बढ़ावा दे सकते हैं तथा आर्थिक विकास को तेज़ कर सकते हैं।
- EPI: एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) एक व्यापक मूल्यांकन उपकरण है, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके निर्यात तैयारियों के आधार पर विभिन्न स्तंभों जैसे कि निर्यात नीतियाँ, व्यावसायिक वातावरण, निर्यात तंत्र, अवसंरचना और निर्यात परिणामों में मापता है।

छत्तीसगढ़ Switch to English
छत्तीसगढ़ ने बस्तर विकास हेतु तीन वर्षीय कार्ययोजना को आगे बढ़ाया
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ ने बस्तर क्षेत्र के विकास के लिये तीन वर्षीय कार्ययोजना बनाई है, जिसका उद्देश्य अवसंरचना, आजीविका और सार्वजनिक सेवाओं को सुदृढ़ करना तथा माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु:
- केंद्रित क्षेत्र: योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, रोज़गार, सड़क, पेयजल, विद्युत और संचार जैसी आवश्यक सेवाओं का तेज़ी से विस्तार करने पर ज़ोर दिया गया है, ताकि यह सबसे दूरदराज़ बस्तियों तक पहुँच सके।
- सार्वजनिक सहभागिता: बस्तर ओलंपिक्स और बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय समुदायों की मज़बूत भागीदारी यह दर्शाती है कि वे हिंसा के बजाय शांति एवं विकास का समर्थन करते हैं।
- पर्यटन विकास: होमस्टे का प्रचार, स्वदेश दर्शन योजना के तहत स्थलों का विकास और बस्तर टूरिज़्म कॉरिडोर का निर्माण स्थानीय युवाओं के लिये आजीविका बढ़ाने के प्रयास हैं।
- वन धन केंद्र: लघु वनोत्पादों के बेहतर संग्रह और प्रसंस्करण के लिये।
- जनजातीय समुदायों को बाज़ार के अवसरों से जोड़ना।
- शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना: नवोदय और पीएम श्री स्कूलों का विस्तार करना।
- आँगनवाड़ी और रोज़गार पहल: PM‑ABHIM, बाइक एम्बुलेंस सेवा, ग्रामीण बस योजना और अन्य रोज़गार एवं आजीविका संबंधित योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी ज़ोर दिया गया।
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और पढ़ें: बस्तर ओलंपिक्स, बस्तर टूरिज़्म कॉरिडोर, स्वदेश दर्शन योजना, लघु वनोत्पाद, पीएम श्री स्कूल, PM‑ABHIM। |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
विशाखापत्तनम में भारतीय प्रकाशस्तंभ महोत्सव का उद्घाटन
चर्चा में क्यों?
तीसरा भारतीय प्रकाशस्तंभ महोत्सव 9 जनवरी, 2026 को विशाखापत्तनम में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा उद्घाटित किया गया।
मुख्य बिंदु:
- पर्यटन प्रोत्साहन: यह महोत्सव ऐतिहासिक प्रकाशस्तंभ को जीवंत पर्यटन केंद्रों में बदलने का लक्ष्य रखता है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिले।
- नई परियोजनाएँ: विशाखापत्तनम में आंध्र प्रदेश का पहला प्रकाशस्तंभ म्यूज़ियम और असम के नदी क्षेत्र में चार नए प्रकाशस्तंभ बनाने की योजनाएँ प्रस्तुत की गईं।
- MGM पार्क: कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जो ‘सिटी ऑफ डेस्टिनी’ की समुद्री विरासत को उजागर करती हैं।
- मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: यह महोत्सव मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और पर्यटन-आधारित तटीय विकास के लिये सरकार की रणनीति के अनुरूप है।
- सागरमाला कार्यक्रम: प्रकाशस्तंभ का कायाकल्प, बंदरगाह-आधारित विकास और तटीय समुदाय के सशक्तीकरण का एक उप-घटक है।
- महत्त्व: यह प्रकाशस्तंभ पर्यटन की अवधारणा को एक अद्वितीय क्षेत्रीय पर्यटन विकल्प के रूप में मज़बूत करता है, जिससे स्थानीय आजीविका, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत की विस्तृत तटीय रेखा के आसपास सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
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और पढ़ें: सागरमाला कार्यक्रम, मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030, प्रकाशस्तंभ म्यूज़ियम |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
नमामि गंगे के तहत जलीय जैव विविधता पहल शुरू की
चर्चा में क्यों?
14 जनवरी, 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने नमामि गंगे के अंतर्गत जल जैव विविधता संरक्षण परियोजनाओं की एक शृंखला का उद्घाटन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून में किया।
मुख्य बिंदु:
- नया केंद्र: गंगा और अन्य नदियों के लिये एक्वा लाइफ कंज़र्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर नामक एक समर्पित राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किया गया है, जो स्वच्छ जल की जैव विविधता के वैज्ञानिक मॉनिटरिंग, अनुसंधान और नीतिगत मार्गदर्शन को समर्थन देगा।
- नई सुविधाएँ: केंद्र में इकोटॉक्सिकोलॉजी, एक्वाटिक इकोलॉजी, स्पैशियल इकोलॉजी और माइक्रोप्लास्टिक विश्लेषण के लिये उन्नत प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
- डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस: TSAFI द्वारा संचालित विशेष रूप से सुसज्जित डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस शुरू की गई, जो संकटग्रस्त गंगा डॉल्फिन के लिये तीव्र और वैज्ञानिक आपातकालीन सहायता प्रदान करेगी।
- इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना: बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के सहयोग से इस दुर्लभ पक्षी प्रजाति इंडियन स्किमर के लिये एक संरचित संरक्षण योजना औपचारिक रूप से शुरू की गई, जो गंगा बेसिन में इसके आवास संरक्षण पर केंद्रित है।
- प्रजाति संरक्षण: गंगा डॉल्फिन और हिल्सा मछली के लिये नई संरक्षण योजनाएँ शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य इनके प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन है।
- जैवविविधता: गंगा बेसिन में 2,500 से अधिक जीव और वनस्पति प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- नमामि गंगे चरण II: अब ध्यान केवल ‘अविरल’ (निरंतर प्रवाह) और ‘निर्मल’ (स्वच्छ प्रवाह) से आगे बढ़कर ज्ञान गंगा (अनुसंधान) तथा अर्थ गंगा (आर्थिक स्थिरता) पर भी केंद्रित है।
- महत्त्व: यह केंद्र दीर्घकालिक प्रजाति निगरानी, स्वच्छ जल की पारिस्थितिकी पर अनुसंधान, नीतिगत समर्थन तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णय-निर्माण के लिये एक प्रमुख वैज्ञानिक हब के रूप में कार्य करेगा।
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और पढ़ें: नमामि गंगे, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, गंगा डॉल्फिन, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) |


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