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नमामि गंगे के तहत जलीय जैव विविधता पहल शुरू की
- 15 Jan 2026
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चर्चा में क्यों?
14 जनवरी, 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने नमामि गंगे के अंतर्गत जल जैव विविधता संरक्षण परियोजनाओं की एक शृंखला का उद्घाटन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून में किया।
मुख्य बिंदु:
- नया केंद्र: गंगा और अन्य नदियों के लिये एक्वा लाइफ कंज़र्वेशन मॉनिटरिंग सेंटर नामक एक समर्पित राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किया गया है, जो स्वच्छ जल की जैव विविधता के वैज्ञानिक मॉनिटरिंग, अनुसंधान और नीतिगत मार्गदर्शन को समर्थन देगा।
- नई सुविधाएँ: केंद्र में इकोटॉक्सिकोलॉजी, एक्वाटिक इकोलॉजी, स्पैशियल इकोलॉजी और माइक्रोप्लास्टिक विश्लेषण के लिये उन्नत प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
- डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस: TSAFI द्वारा संचालित विशेष रूप से सुसज्जित डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस शुरू की गई, जो संकटग्रस्त गंगा डॉल्फिन के लिये तीव्र और वैज्ञानिक आपातकालीन सहायता प्रदान करेगी।
- इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना: बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के सहयोग से इस दुर्लभ पक्षी प्रजाति इंडियन स्किमर के लिये एक संरचित संरक्षण योजना औपचारिक रूप से शुरू की गई, जो गंगा बेसिन में इसके आवास संरक्षण पर केंद्रित है।
- प्रजाति संरक्षण: गंगा डॉल्फिन और हिल्सा मछली के लिये नई संरक्षण योजनाएँ शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य इनके प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन है।
- जैवविविधता: गंगा बेसिन में 2,500 से अधिक जीव और वनस्पति प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- नमामि गंगे चरण II: अब ध्यान केवल ‘अविरल’ (निरंतर प्रवाह) और ‘निर्मल’ (स्वच्छ प्रवाह) से आगे बढ़कर ज्ञान गंगा (अनुसंधान) तथा अर्थ गंगा (आर्थिक स्थिरता) पर भी केंद्रित है।
- महत्त्व: यह केंद्र दीर्घकालिक प्रजाति निगरानी, स्वच्छ जल की पारिस्थितिकी पर अनुसंधान, नीतिगत समर्थन तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णय-निर्माण के लिये एक प्रमुख वैज्ञानिक हब के रूप में कार्य करेगा।
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