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असम के जोहा चावल का पहला निर्यात

  • 16 Mar 2026
  • 12 min read

स्रोत: पीआईबी

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, ने असम के भू-स्थानिक पहचान (GI) वाले जोहा चावल की पहली निर्यात खेप यूनाइटेड किंगडम और इटली भेजी गई।

जोहा चावल

  • परिचय: असम और पूर्वोत्तर भारत की विशिष्टता, जोहा चावल एक सुगंधित और छोटे दानों वाली शीतकालीन धान की प्रजाति है। यह अपने विशिष्ट खुशबू, बारीक दाने की बनावट तथा समृद्ध स्वाद के लिये प्रसिद्ध है।
  • प्रकार: लगभग 22 पारंपरिक जोहा चावल की किस्में पाई जाती हैं, जिनमें कोला जोहा, कुङ्कुनी जोहा और केतेकी जोहा सबसे लोकप्रिय हैं।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • इसमें मधुमेहरोधी गुण हैं, क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है और मधुमेह के शुरुआती चरण को रोक सकता है।
    • इसमें आवश्यक असंतृप्त वसा अम्ल, जैसे– लिनोलेइक अम्ल (ओमेगा-6) और लिनोलेनिक अम्ल (ओमेगा-3) होते हैं, जो चयापचय और हृदय स्वास्थ्य का समर्थन करते हैं।
    • इसमें ओमेगा-6 और ओमेगा-3 वसा अम्ल का संतुलित अनुपात होता है, जिससे अपनी अनूठी पोषक संरचना के कारण, यह पारंपरिक चावल की अन्य किस्मों के मुकाबले स्वास्थ्य की दृष्टि से कहीं अधिक लाभकारी और श्रेष्ठ सिद्ध होता है।
    • एंटीऑक्सीडेंट, फ्लेवोनोइड्स और ओरिज़ानॉल, फेरुलिक एसिड और टोकोट्रिएनॉल जैसे फेनोलिक यौगिकों से भरपूर, जो एंटीऑक्सीडेंट, हाइपोग्लाइसेमिक और कार्डियो-सुरक्षात्मक लाभ प्रदान करते हैं।
  • चुनौतियाँ: अपनी गुणवत्ता के बावज़ूद जोहा चावल की उत्पादकता और उपज कम है, जिसके कारण इसकी कृषि में कमी आ रही है और कुछ पारंपरिक किस्मों के विलुप्त होने का खतरा है।

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