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प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB)

  • 16 Mar 2026
  • 14 min read

स्रोत: पीआईबी

राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में दो नए चूज़ों के जन्म के साथ प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) ने अपने कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम के चौथे वर्ष में प्रवेश कर लिया है, जिससे कैप्टिव अवस्था में कुल पक्षियों की संख्या 70 हो गई है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

  • परिचय: यह भारत का सबसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी है और राजस्थान का राजकीय पक्षी है, जिसे घास के मैदानों के पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रमुख प्रजाति माना जाता है।
    • GIB भारत में पाई जाने वाली चार बस्टर्ड प्रजातियों में से एक है, अन्य प्रजातियों में लेसर फ्लोरिकन, बंगाल फ्लोरिकन और मैक्वीन बस्टर्ड शामिल हैं।
    • यह सर्वाहारी है और सामने की दृष्टि की कमी के कारण बिजली के तारों से टकराने का खतरा रहता है।

वितरण: यह विश्व के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है, जो मुख्य रूप से राजस्थान के थार रेगिस्तान में पाया जाता है, इसके अतिरिक्त गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी देखने को मिलते हैं।

  • संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट (गंभीर रूप से संकटग्रस्त), CITES (परिशिष्ट I), प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय (CMS) (परिशिष्ट I) और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (अनुसूची I)।
  • संरक्षण प्रयास: प्रोजेक्ट GIB (वर्ष 2018 में शुरू किया गया) पर्यावरण मंत्रालय, भारतीय वन्यजीव संस्थान और राजस्थान वन विभाग की एक संयुक्त पहल है।
    • इस प्रजाति को वन्यजीव संरक्षण और पुनर्स्थापन उपायों का समर्थन करने के लिये MoEFCC की एकीकृत वन्यजीव आवास विकास योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है।
    • वन्यजीव संरक्षण और विकास आयोग (MoEFCC), राजस्थान सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा जैसलमेर के डेज़र्ट नेशनल पार्क में वर्ष 2019 में एक प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया था, ताकि एक 'कैप्टिव' (बंधक) आबादी तैयार की जा सके और पक्षियों को वापस जंगलों में छोड़ा जा सके।

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