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बिहार स्टेट पी.सी.एस.

  • 14 Jan 2026
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बिहार में क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने भारत के पूर्वी राज्यों के लिये बिहार के पटना में उपभोक्ता संरक्षण पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

मुख्य बिंदु:

  • पटना क्षेत्रीय केंद्र के रूप में: बिहार के पटना में आयोजित इस कार्यशाला में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के उपभोक्ता संरक्षण मामलों पर चर्चा की गई तथा बिहार की क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण सुधारों में उभरती भूमिका को रेखांकित किया गया।
  • कार्यशाला का उद्देश्य: कार्यशाला का मुख्य फोकस उपभोक्ता मामलों का त्वरित निपटान, आयोग के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रौद्योगिकी-संचालित शिकायत निवारण को अपनाने पर था।
  • आयोजक: इसका आयोजन उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा किया गया है।
  • राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन:
    • शिकायत दर्ज करने के लिये टोल-फ्री नंबर 1915 और ऑनलाइन पोर्टल।
    • बहुभाषी समर्थन ताकि अधिक लोगों को पहुँच सुनिश्चित हो सके।
    • डिजिटल ट्रैकिंग, त्वरित प्रतिक्रिया और विश्लेषण आधारित निगरानी सक्षम करना।
  • ई-जागृति: ई-जागृति में ई-दाखिल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड और AI टूल्स शामिल हैं, जो मामला प्रबंधन को सरल तथा प्रक्रियागत विलंब को कम करने में सहायता करते हैं।
  • डिजिटल बाज़ारों में संरक्षण: कार्यशाला में डार्क पैटर्न और भ्रामक ऑनलाइन प्रथाओं की चुनौतियों पर चर्चा की गई तथा ई-कॉमर्स में मज़बूत उपभोक्ता सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
  • परिणाम: कार्यशाला पूर्वी भारत के लिये पारदर्शी, प्रभावी और प्रौद्योगिकी-सक्षम उपभोक्ता संरक्षण ढाँचे के निर्माण पर सहमति के साथ समाप्त हुई।

और पढ़ें: ई-दाखिल, डार्क पैटर्न, AI, ई-कॉमर्स, उपभोक्ता संरक्षण


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अरलम तितली अभयारण्य

चर्चा में क्यों?

केरल सरकार ने कन्नूर ज़िले के अरलम वन्यजीव अभयारण्य का आधिकारिक रूप से नाम बदलकर अरलम तितली अभयारण्य कर दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • सूचना: इस नाम परिवर्तन की आधिकारिक सूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जारी की गई।
  • कारण: क्षेत्र में तितली प्रजातियों की समृद्ध विविधता और संख्या के कारण तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा एवं संवर्द्धन की आवश्यकता के चलते।
    • तितली विविधता: अरलम में लगभग 266 तितली प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो केरल की कुल तितली विविधता का 80% से अधिक हैं।
    • स्थानीय प्रजातियाँ: अरलम में 27 प्रजातियाँ केवल पश्चिमी घाटों में ही पाई जाती हैं।
  • WP अधिनियम के तहत सुरक्षा: अरालम में दर्ज 6 तितली प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध हैं।
  • ऐतिहासिक स्थिति: अरलम क्षेत्र को मूल रूप से वर्ष 1984 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
  • वैश्विक महत्त्व: यह अभयारण्य पश्चिमी घाटों का हिस्सा होने के नाते वैश्विक पारिस्थितिक महत्त्व  रखता है, जिसे UNESCO ने विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है।
  • सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव: नाम परिवर्तन से जैव विविधता संरक्षण को मज़बूत करने, पर्यावरणीय शिक्षा, इकोटूरिज़्म को बढ़ावा देने और तितलियों की संख्या की सुरक्षा में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

और पढ़ें: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, IUCN रेड लिस्ट, UNESCO


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वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026 में MSME के लिये PFRDA NPS आउटरीच

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने राजकोट, गुजरात में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के दौरान MSME क्षेत्र के लिये एक विशेष NPS आउटरीच सत्र आयोजित किया।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: MSME मालिकों और उनके कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अपनाने के लिये  प्रोत्साहित करके सामाजिक सुरक्षा जाल का विस्तार करना।
  • कॉर्पोरेट मॉडल पर ध्यान: PFRDA ने ‘NPS कॉर्पोरेट सेक्टर मॉडल’ को उजागर किया, जो MSME को कर्मचारियों को न्यूनतम प्रशासनिक बोझ के साथ संरचित सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने की अनुमति देता है।
  • वित्तीय साक्षरता: यह सत्र गुजरात के औद्योगिक केंद्रों में असंगठित और अर्द्ध-संगठित श्रमिक वर्ग के लिये पेंशन कवरेज के अंतर को कम करने का लक्ष्य रखता है।
  • सम्मानजनक वृद्धावस्था: MSME भारत की अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और व्यवसाय मालिकों तथा कर्मचारियों के बीच सेवानिवृत्ति बचत की संस्कृति को बढ़ावा देना भविष्य की वित्तीय असुरक्षा को कम करने और सम्मानजनक वृद्धावस्था को सुनिश्चित करने में सहायता कर सकता है।
  • MSME का योगदान: MSME क्षेत्र भारत के GDP में लगभग 30% का योगदान देता है और ‘पेंशन वाले भारत’ लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये यह एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है।
  • PFRDA: यह एक सांविधिक नियामक निकाय है, जिसे वर्ष 2013 के PFRDA अधिनियम के तहत स्थापित किया गया, ताकि भारत में पेंशन क्षेत्र को बढ़ाया और नियंत्रित किया जा सके।
  • NPS संरचना: यह एक स्वैच्छिक, परिभाषित योगदान वाली सेवानिवृत्ति बचत योजना है। इसे PRAN ((परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) के आधार पर नियंत्रित किया जाता है।

और पढ़ें: MSME, PFRDA, NPS


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न्यायमूर्ति इंदिरा शाह को मेघालय उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया

चर्चा में क्यों?

न्यायमूर्ति इंदिरा शाह ने इतिहास रचा जब उन्हें मेघालय उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई, जो उत्तर-पूर्वी न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्य बिंदु:

  • नियुक्ति: यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा की गई, जो सर्वोच्च न्यायालय कोलेजियम की सिफारिश के बाद हुई।
  • महत्त्व: उत्तर-पूर्व में कई महिला न्यायाधीशों का अनुभव रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब मेघालय उच्च न्यायालय की अध्यक्षता एक महिला ने की।
  • मेघालय उच्च न्यायालय: यह 23 मार्च, 2013 को स्थापित किया गया, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 में संशोधन के बाद संभव हुआ।
  • नियुक्ति प्रक्रिया: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद।
  • लैंगिक समानता: वर्ष 2026 में भारत उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के प्रयास में है, जहाँ वर्तमान में महिलाएँ कुल न्यायाधीशों की संख्या का 15% से कम है।

और पढ़ें: भारत के राष्ट्रपति, CJI, अनुच्छेद 217


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'नशा मुक्त परिसर' अभियान का उद्घाटन

चर्चा में क्यों?

उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 11 जनवरी, 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में ‘नशा मुक्त परिसर अभियान’ का उद्घाटन किया।

मुख्य बिंदु:

  • विज़न: यह अभियान नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य शिक्षा संस्थानों में युवाओं के बीच मादक पदार्थों के सेवन को रोकना है।
  • रणनीति: इसमें छात्र-नेतृत्व वाले ‘एंटी-ड्रग क्लब’ का गठन और विश्वविद्यालय स्वास्थ्य प्रणाली में काउंसलिंग सेवाओं का समावेश शामिल है।
  • उप-राष्ट्रपति का संबोधन: उन्होंने ज़ोर दिया कि विकसित भारत @2047 तभी संभव है जब युवा स्वस्थ, अनुशासित और नशे से मुक्त हों।
  • शुरू किये गए प्लेटफॉर्म: इस अभियान के तहत एक समर्पित ई-प्रतिज्ञा प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया, ताकि पूरे देश के छात्र नशा मुक्त परिसर के लिये प्रतिज्ञा ले सकें।
  • नशा मुक्त भारत अभियान: इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने लॉन्च किया तथा  यह भारत के 272 सबसे संवेदनशील ज़िलों पर केंद्रित है।
  • अनुच्छेद 47: भारत का संविधान (राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत) राज्य को निर्देश देता है कि मादक पेय और ड्रग्स के सेवन पर रोक लगाने का प्रयास करे।
  • NCB की भूमिका: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) इन कैंपस अभियानों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है ताकि शैक्षणिक क्षेत्रों के आसपास स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं का पता लगाकर उन्हें समाप्त किया जा सके।

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MoEFCC ने लॉन्च किया संस्थागत समन्वय हेतु 'NIRANTAR' प्लेटफॉर्म

चर्चा में क्यों?

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री (MoEFCC) ने जनवरी 2026 में NIRANTAR प्लेटफॉर्म को क्रियान्वित करने के लिये एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

मुख्य बिंदु:

  • NIRANTAR डैशबोर्ड: यह एक डिजिटल एकीकृत डैशबोर्ड है, जिसे MoEFCC के तहत आने वाले संस्थानों जैसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB/SPCBs), भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के बीच समन्वय मज़बूत करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: यह प्लेटफॉर्म पर्यावरण मंज़ूरी, वनाग्नि अलर्ट और वन्यजीव तस्करी डेटा को रीयल-टाइम में ट्रैक करने में सक्षम बनाता है।
  • डेटा इंटीग्रेशन: इसका उद्देश्य ‘सिलो-आधारित’ कार्यप्रणाली को समाप्त करना है, जिससे विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के जलवायु डेटा को एक ही विंडो के तहत नीति निर्माण के लिये उपलब्ध कराया जा सके।
  • MoEFCC: यह केंद्र सरकार में पर्यावरण और वनों की नीतियों की निगरानी करने वाली प्रमुख एजेंसी है।
  • डिजिटल इंडिया और पर्यावरण: NIRANTAR, PARIVESH जैसी पूर्व पहलों पर आधारित है, लेकिन यह एजेंसियों के बीच समन्वय को सुनिश्चित करने के लिये व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है।
  • सतत विकास: यह मंच डेटा-आधारित संरक्षण सुनिश्चित करके SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) और SDG 15 (भूमि पर जीवन) को प्राप्त करने का एक साधन है।

और पढ़ें: CPCB, SDG, MoEFCC


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