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बिहार स्टेट पी.सी.एस.

  • 05 Feb 2026
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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26

चर्चा में क्यों?

वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 2 फरवरी, 2026 को बिहार विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था।

मुख्य बिंदु

  • यह बिहार का 20वाँ आर्थिक सर्वेक्षण है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति, संरचनात्मक प्रवृत्तियों, क्षेत्रीय असमानताओं, सार्वजनिक वित्त की स्थिति तथा विकास प्राथमिकताओं का समग्र और विश्लेषणात्मक आकलन प्रस्तुत करता है।
  • आर्थिक वृद्धि दर: बिहार देश के सर्वाधिक तीव्र गति से विकास करने वाले राज्यों में सम्मिलित है।
    • वर्तमान मूल्यों पर वित्त वर्ष 2024-25 के लिये राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹9,91,997 करोड़ तथा वित्त वर्ष 2011-12 की स्थिर कीमतों पर ₹5,31,372 करोड़ अनुमानित है।
    • राज्य की आर्थिक वृद्धि दर वर्तमान मूल्यों पर 13.1% तथा स्थिर मूल्यों पर 8.6% दर्ज की गई है।
    • वर्तमान मूल्यों पर वर्ष 2024-25 के लिये शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP) ₹8,99,020 करोड़ तथा स्थिर मूल्यों पर ₹4,71,322 करोड़ अनुमानित है।
    • प्रति व्यक्ति आय बढ़कर वर्तमान मूल्यों पर ₹76,490 और स्थिर मूल्यों पर ₹40,973 हो गई है।
    • ज़िला-स्तरीय विश्लेषण के अनुसार, पटना सर्वाधिक समृद्ध ज़िला बना हुआ है, जबकि शिवहर सबसे गरीब ज़िला है।
    • सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में तृतीयक क्षेत्र का योगदान 54.8%, द्वितीयक क्षेत्र का 26.8% और प्राथमिक क्षेत्र का 18.3% है।
  • रोज़गार: 
    • रोज़गार संरचना में प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा 54%, द्वितीयक क्षेत्र का 24% और तृतीयक क्षेत्र का 22% है, जो रोज़गार और उत्पादन के बीच संरचनात्मक असंतुलन को दर्शाता है।
    • राज्य में सकल स्थिर पूंजी निर्माण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पाँच वर्षों में लगभग दोगुना होकर 2024-25 में ₹17,416 करोड़ से बढ़कर ₹34,905 करोड़ हो गई है।
  • राज्य वित्त 2024-25:
    • कुल व्यय ₹2,81,939 करोड़ (GSDP का 28.4%) रहा।
    • पूंजीगत व्यय ₹62,924 करोड़ (GSDP का 6.3%) दर्ज किया गया।
    • कुल उधार ₹66,049 करोड़ (GSDP का 6.7%) रहा।
    • बकाया ऋण ₹3,74,134 करोड़, जो GSDP का 37.7% है।
    • सकल राजकोषीय घाटा ₹41,223 करोड़ (GSDP का 4.2%) तथा
    • प्राथमिक घाटा ₹21,544 करोड़ (GSDP का 2.2%) रहा।
  • कृषि और औद्योगिक क्षेत्र:
    • राज्य में खाद्यान्न उत्पादन संरचना में चावल का योगदान 40.7%, गेहूँ का 32.1% तथा मक्का का 27.1% रहा।
    • मत्स्य पालन क्षेत्र में कुल 960 हज़ार टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, जिसमें मधुबनी ज़िला अग्रणी उत्पादक रहा।
    • मखाना, फल, सब्ज़ियाँ, मक्का, औषधीय पौधे, शहद और चाय के लिये कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति लागू की गई है।
  • सड़कें और अवसंरचना:
    • भारत के कुल सड़क नेटवर्क में बिहार की हिस्सेदारी 5.5% है।
    • एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से लगभग ₹4,988 करोड़ की अनुमानित लागत से 6-लेन वाले ‘बिहार न्यू गंगा पुल’ का निर्माण किया जा रहा है।
    • इसके अतिरिक्त, एक्सप्रेसवे तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास संबंधी परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।
    • सड़क परिवहन क्षेत्र ने पिछले एक दशक में औसतन 13.4% की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है
  • डिजिटल शासन और ऊर्जा:
    • ई-शासन पहलों का विस्तार किया गया है, जिनमें CCTNS, CFMS, साइबर सेल, ई-चालान तथा बिहार AI मिशन शामिल हैं।
    • टेली-घनत्व कवरेज 57.23% तथा इंटरनेट-घनत्व कवरेज 43.10% रहा।
    • प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग बढ़कर 374 किलोवाट-घंटा हो गया है।
  • महिला सशक्तीकरण:
    • वर्ष 2018-19 से 2023-24 के मध्य महिलाओं पर किये गये कुल व्यय में 3.45 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
    • मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की उन लड़कियों को  ₹5,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिनका विवाह 18 वर्ष या उससे अधिक आयु में होता है।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र:
    • बिहार में 2019-23 के दौरान जन्म के समय जीवन प्रत्याशा पुरुषों के लिये 68.9 वर्ष और महिलाओं के लिये 69.7 वर्ष रही है।
    • बिहार में वर्ष 2001-11 के दौरान साक्षरता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया, जो 47% से बढ़कर 61.8% हो गई, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है।
  • पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन:
    • वन क्षेत्र ने वर्ष 2011-12 और 2024-25 के बीच औसतन 10.6% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की।
    • विगत 12 वर्षों में वन क्षेत्र में 689 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई।

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दलाई लामा ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित

चर्चा में क्यों?

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कार समारोह (2026) में अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता।

मुख्य बिंदु 

  • पुरस्कार और श्रेणी: दलाई लामा ने अपने एल्बम ‘मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ के लिये सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथन और कहानी कहने की रिकॉर्डिंग श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार जीता।
    • यह उनका पहला ग्रैमी पुरस्कार था, जो उन्होंने 90 वर्ष की आयु में प्राप्त किया, जिससे संगीत के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में एक आध्यात्मिक गुरु के लिये यह अद्वितीय पहचान बन गई।
    • समारोह में संगीतकार रूफस वेनराइट ने उनकी ओर से पुरस्कार स्वीकार किया
  • एल्बम की विषयवस्तु: यह एल्बम दलाई लामा की शांति, करुणा, जागरूकता और सार्वभौमिक ज़िम्मेदारी संबंधी शिक्षाओं को संगीत रचनाओं और कथन के साथ मिश्रित करता है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक सद्भाव का संदेश फैलाना है।
    • सहयोग: इस एल्बम में भारतीय शास्त्रीय संगीत के उस्ताद उस्ताद अमज़द अली खान और उनके बेटों अमान अली बंगश और अयान अली बंगश का योगदान शामिल है, जबकि इसका निर्माण ग्रैमी पुरस्कार विजेता कबीर सहगल ने किया है।
  • वैश्विक मान्यता: यह उपलब्धि दलाई लामा की आवाज़ और शिक्षाओं की वैश्विक पहुँच को रेखांकित करती है, जो सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कलात्मक सीमाओं से परे जाती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: इस उपलब्धि की व्यापक रूप से सराहना की गई, हालाँकि चीनी सरकार ने इसकी आलोचना भी की, जिसने दलाई लामा की स्थिति के संदर्भ में इसे राजनीतिक हस्तक्षेप बताया।

और पढ़ें: ग्रैमी पुरस्कार, दलाई लामा 


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वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को क्रैफ़ोर्ड पुरस्कार 2026 मिला

चर्चा में क्यों? 

भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा भूविज्ञान में वर्ष 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान किया गया है, जिसे प्रायः ‘भूविज्ञान का नोबेल’ कहा जाता है, क्योंकि इसका महत्त्व उन क्षेत्रों में भी है जो नोबेल पुरस्कारों के अंतर्गत नहीं आते।

मुख्य बिंदु:

  • प्रमुख योगदान: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने रामनाथन को “अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (SLCP) और ग्रीनहाउस प्रभाव की भूमिका की वैज्ञानिक समझ को विस्तारित करने में उनके अग्रणी योगदान” के लिये चयनित किया।
  • नॉन-CO₂ ग्रीनहाउस गैसों की खोज (1975): उन्होंने प्रथम बार यह प्रमाणित किया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), जो पूर्व में केवल ओज़ोन परत के क्षरण से सबंधित माने जाते थे, प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैसों के रूप में भी कार्य करते हैं।
  • वायुमंडलीय ब्राउन मेघ (ABC): उनके शोध में दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के ऊपर बने कालिख और धूल के विशाल ब्राउन मेघ की उपस्थिति को रेखांकित किया गया।
  • उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि ये कण (ब्लैक कार्बन) सूर्य विकिरण को अवशोषित कर वायुमंडल को गर्म करते हैं तथा साथ-ही-साथ पृथ्वी की सतह को ठंडा करते हैं, जिससे मानसूनी प्रवृत्तियाँ प्रभावित होती हैं।
  • क्रैफोर्ड पुरस्कार: 
    • इसकी स्थापना वर्ष 1980 में उद्योगपति होल्गर क्रैफोर्ड और उनकी पत्नी अन्ना-ग्रेटा द्वारा की गई थी।
  • पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (यही संस्था नोबेल पुरस्कार भी प्रदान करती है)।
  • क्षेत्र : यह सम्मान उन क्षेत्रों में दिया जाता है जो नोबेल पुरस्कार की परिधि में सम्मिलित नहीं हैं, जैसे- गणित, खगोल विज्ञान, भूविज्ञान तथा जीव विज्ञान।

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पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0: त्रिपुरा की ग्राम पंचायत प्रथम

चर्चा में क्यों?

त्रिपुरा ने पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्थानीय शासन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है।

मुख्य बिंदु:

  • PAI 2.0 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: त्रिपुरा के सेपाहिजाला ज़िले के जम्पुइजाला आरडी ब्लॉक में स्थित जुगल किशोर नगर ग्राम समिति ने लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों के मूल्यांकन में 88.44 स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • त्रिपुरा पंचायतों का प्रदर्शन: राज्य का असाधारण प्रदर्शन यहीं सीमित नहीं रहा:
    • दक्षिण नलचर ग्राम पंचायत (नलचर आरडी ब्लॉक, सेपाहिजाला) ने 88.14 अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया
    • चेश्रीमाई ग्राम पंचायत (चारिलम आरडी ब्लॉक, सेपाहिजाला) ने 87.85 अंकों के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया
  • पूर्ण भागीदारी: त्रिपुरा ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिये अपनी सभी 1,176 ग्राम पंचायतों और ग्राम समितियों के डेटा को 100% जमा और सत्यापित करने का गौरव हासिल किया।
  • पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0: यह भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की एक पहल है जो देश भर में 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।
    • सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप 9 विषयों में फैले 435 स्थानीय संकेतकों के आधार पर स्थानीय निकायों का मूल्यांकन करता है।
    • प्रमुख संकेतक: इनमें पारदर्शिता, सेवा वितरण, विकेंद्रीकृत योजना, सामुदायिक भागीदारी और शासन के परिणाम शामिल हैं।
  • उद्देश्य: इस सूचकांक का लक्ष्य राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप ज़मीनी स्तर पर लोकतंत्र और स्थानीय स्वशासन को मज़बूत करना है।

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