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बिहार सरकार खोलेगी 213 ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज
चर्चा में क्यों?
बिहार सरकार ने राज्य के 213 ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज खोलने की एक प्रमुख पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा तक पहुँच में सुधार करना है।
मुख्य बिंदु:
- असमानता का समाधान: बिहार के 534 ब्लॉकों में से 213 में वर्तमान में डिग्री कॉलेज की सुविधा नहीं है। उच्च शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिये विस्तार के पहले चरण में इस अंतर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
- कार्यक्रम ढाँचा: यह पहल ‘सात निश्चय–3’ के अंतर्गत ‘उन्नत शिक्षा – उज्ज्वल भविष्य (Unnat Shiksha – Ujjwal Bhavishya)’ थीम पर आधारित है।
- इस पहल की घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की।
- फोकस: इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और ग्रामीण छात्रों के लिये उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना है, जिन्हें प्राय: कॉलेज तक लंबी दूरी तय करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- यह शिक्षा में लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा और व्यापक सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान करेगा।
- उत्कृष्टता केंद्र: नए कॉलेजों के साथ-साथ सरकार 55 मौजूदा प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों को ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में विकसित करेगी, ताकि गुणवत्तापूर्ण और रोज़गारोन्मुख उच्च शिक्षा प्रदान की जा सके।
- मानव पूंजी: उच्च शिक्षा अवसंरचना का विस्तार कर बिहार का लक्ष्य एक कुशल कार्यबल तैयार करना है, जो रोज़गार के अवसरों और आर्थिक विकास को गति दे सके।
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और पढ़ें: लैंगिक समानता, उत्कृष्टता केंद्र |
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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26
चर्चा में क्यों?
वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 2 फरवरी, 2026 को बिहार विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था।
मुख्य बिंदु:
- यह बिहार का 20वाँ आर्थिक सर्वेक्षण है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति, संरचनात्मक प्रवृत्तियों, क्षेत्रीय असमानताओं, सार्वजनिक वित्त की स्थिति तथा विकास प्राथमिकताओं का समग्र और विश्लेषणात्मक आकलन प्रस्तुत करता है।
- बिहार अर्थव्यवस्था का परिदृश्य (आउटलुक):
- बिहार की आर्थिक विकास दर ने राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ दिया है जहाँ भारत की वृद्धि दर 12.0% रही, वहीं बिहार ने 14.9% की प्रभावशाली दर दर्ज की।
- वर्ष 2024–25 के लिये सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का अनुमान चालू कीमतों पर ₹9,91,997 करोड़ और वर्ष 2011–12 के स्थिर मूल्यों पर ₹5,31,372 करोड़ है।
- वृद्धि दर चालू कीमतों पर 13.1% तथा स्थिर कीमतों पर 8.6% दर्ज की गई।
- वर्ष 2024–25 के लिये शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP) का अनुमान चालू कीमतों पर ₹8,99,020 करोड़ और वर्ष 2011–12 के स्थिर मूल्यों पर ₹4,71,322 करोड़ है।
- वर्ष 2011–12 के स्थिर मूल्यों पर बिहार की प्रति व्यक्ति NSDP ₹36,342 आँकी गई है, जो सभी राज्यों के अखिल भारतीय औसत का 31.7% है।
- प्रति व्यक्ति आय बढ़कर चालू कीमतों पर ₹76,490 और स्थिर कीमतों पर ₹40,973 हो गई है।
- शीर्ष 3 ज़िले: पटना, बेगूसराय, मुंगेर
- न्यूनतम 3 ज़िले: शिवहर, अररिया और सीतामढ़ी
- पटना में पेट्रोल, डीज़ल और LPG की खपत सबसे अधिक रही।
- तृतीयक क्षेत्र GSDP का 54.8% योगदान देता है, द्वितीयक क्षेत्र 26.8% और प्राथमिक क्षेत्र 18.3%।
- क्षेत्रवार वृद्धि: वर्ष 2024–25 में चालू कीमतों पर राज्य में प्राथमिक क्षेत्र 9.6%, द्वितीयक क्षेत्र 15.5% तथा तृतीयक क्षेत्र 13.5% की दर से पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा।
- रोज़गार: तृतीयक क्षेत्र में 22%, द्वितीयक क्षेत्र में 24% और प्राथमिक क्षेत्र में 54% रोज़गार सृजित होता है।
- हाल के पाँच वर्षों में सकल स्थिर पूंजी निर्माण लगभग दोगुना होकर ₹17,416 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024–25 में ₹34,905 करोड़ हो गया है।
- राज्य वित्त 2024-25:
- राजस्व प्राप्तियाँ: ₹2,18,658 करोड़ (GSDP का 22%)
- पूंजी प्राप्तियाँ: ₹66,165 करोड़ (GSDP का 6.7%)
- कुल व्यय: ₹2,81,939 करोड़ (GSDP का 28.4%)
- राजस्व व्यय: ₹2,19,015 करोड़ (GSDP का 22.1%)
- कुल व्यय का 77.7%
- पूंजी व्यय: ₹62,924 करोड़ (GSDP का 6.3%)
- कुल व्यय का 22.3%
- कुल उधारी: ₹66,049 करोड़ (GSDP का 6.7%)
- बकाया ऋण: ₹3,74,134 करोड़ (GSDP का 37.7%)
- सकल राजकोषीय घाटा: ₹41,223 करोड़ (GSDP का 4.2%)
- प्राथमिक घाटा: ₹21,544 करोड़ (GSDP का 2.2%)
- राजस्व घाटा: ₹357 करोड़
- कृषि:
- कुल बुआई योग्य क्षेत्र: 8,207.27 हज़ार हेक्टेयर
- शुद्ध बुआई क्षेत्र: 5,411.96 हज़ार हेक्टेयर
- फसल घनत्व (Cropping Intensity): 1.52 हज़ार हेक्टेयर
- बिहार में फसल पैटर्न (2020-21 से 2024-25): खाद्यान्न (95.2), अनाज (89.2), दलहन (6.0)।
- दुग्ध उत्पादन में 4.2 प्रतिशत, अंडा उत्पादन में 10.0 प्रतिशत और मछली उत्पादन में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- मत्स्य पालन क्षेत्र में कुल 960 हजार टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, जिसमें मधुबनी अग्रणी उत्पादक रहा।
- योजना: मुख्यमंत्री समग्र चौर विकास योजना, नदी पशुपालन कार्यक्रम, जलाशय मत्स्यिकी विकास योजना।
- सरकारी पहल: जैविक कृषि प्रोत्साहन योजना, जैविक कॉरिडोर योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)।
- उद्यम/उद्योग क्षेत्र (Enterprises Sector):
- चीनी उद्योग: रिगा शुगर मिल को वर्ष 2024-25 में पुनः खोला गया।
- डेयरी उद्योग: वर्ष 2024-25 में कुल दैनिक औसत दुग्ध संग्रह 2,252.28 हज़ार किलोग्राम रहा।
- वस्त्र उद्योग: राज्य सरकार ने बिहार औद्योगिक निवेश संवर्द्धन नीति (वस्त्र और चमड़ा नीति, 2022) को बिहार औद्योगिक निवेश संवर्द्धन नीति, 2016 के व्यापक ढाँचे के तहत लागू किया।
- पर्यटन विकास: तख्त श्री हरिमंदिर जी, सहरसा ज़िले में मत्स्यगंधा झील, वाल्मिकीनगर में लव-कुश इको टूरिज़्म पार्क।
- इको-टूरिज़्म: वर्ष 2024-25 में इको-टूरिज़्म और पार्क विकास के लिये कुल व्यय ₹100.00 करोड़ रखा गया। बिहार का तीसरा जैविक उद्यान अररिया के रानीगंज में बनाया गया।
- पहल: बिहार राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (KVIB), बिहार में औद्योगिक प्रोत्साहन, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA)।
- श्रम, रोज़गार और कौशल:
- बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 76.8% और शहरी क्षेत्रों में 67.8% थी।
- बिहार की महिला LFPR, पूरे भारत के औसत से 11.2% कम है।
- ग्रामीण बिहार में पुरुषों में बेरोज़गारी दर 3.3% थी, जबकि महिलाओं में केवल 0.9% रही।
- शहरी क्षेत्रों में लगभग 6.9% पुरुष और 9.1% महिला श्रमिक बेरोज़गार हैं।
- भौतिक अवसंरचना:
- बिहार, भारत के कुल सड़क नेटवर्क का 5.5% हिस्सा है।
- ADB के सहयोग से 6-लेन वाला बिहार न्यू गंगा ब्रिज का निर्माण ₹4,988 करोड़ के अनुमानित लागत पर किया जा रहा है।
- एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण जारी है।
- सड़क परिवहन क्षेत्र ने पिछले दशक में वार्षिक 13.4% की उच्च वृद्धि दर्ज की।
- बिहार, देश के रेल नेटवर्क का 5.4% हिस्सा बनाता है।
- हवाई परिवहन क्षेत्र में बिहार ने 20% की उच्च वृद्धि दर दर्ज की है।
- पहल: प्रधानमंत्री ई-बस सेवा, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना (MMGPY)।
- ई-गवर्नेंस:
- ई-शासन पहलों का विस्तार किया गया है, जिनमें CCTNS, CFMS, साइबर सेल, ई-चालान तथा बिहार AI मिशन शामिल हैं।
- टेली-घनत्व कवरेज 57.23% तथा इंटरनेट-घनत्व कवरेज 43.10% रहा।
- पहल: बिहार राज्य डेटा सेंटर (BSDC 2.0), बिहार स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (BSWAN 3.0), बिहार आधार प्रमाणीकरण ढाँचा (BAAF), आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS)।
- ऊर्जा क्षेत्र:
- प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत बढ़कर 374 किलोवाट-घंटा हो गया है।
- 19वें इंडिया एनर्जी समिट में DISCOMs 2025 के लिये 13 इनोवेशन और इम्पैक्ट पुरस्कार – NBPDCL तथा SBPDCL ने अलग-अलग श्रेणी में इसे जीता।
- BSPTCL को वर्ष 2020 से वर्ष 2025 तक लगातार 5 वर्षों के लिये PFC से A+ प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
- पहल: फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट, सोलर वॉटर पंप, मुख्यमंत्री सोलर स्ट्रीट लाइट योजना, स्मार्ट मीटरिंग।
- ग्रामीण विकास:
- ग्रामीण विकास बिहार की समावेशी वृद्धि के लिये मूलभूत है, क्योंकि लगभग 90% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
- जीविका (JEEVIKA): बिहार में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) को लागू करती है। जीविका ने 1.40 करोड़ परिवारों को 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित किया है, जिनका समर्थन ग्राम संगठन और क्लस्टर-स्तरीय महासंघ करते हैं।
- पहल: दीदी-की-रसोई पहल, पशु सखी मॉडल, वन स्टॉप फैसिलिटी सेंटर, सतत जीविकोपार्जन योजना, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान।
- शहरी विकास:
- बिहार में कुल जनसंख्या वृद्धि दर वर्ष 2021–25 के दौरान 14.4% तक घट गई।
- बिहार में कुल प्रजनन दर (TFR) वर्ष 2039 तक प्रतिस्थापन स्तर 2.1 तक पहुँच जाएगी।
- पहल: मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना, मुख्यमंत्री शहरी नाली-गली पक्कीकरण निश्चय योजना, वर्षा जल संचयन और भूजल का कृत्रिम पुनर्भरण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्मार्ट सिटी मिशन, पटना मेट्रो रेल परियोजना।
- वित्तीय संस्थाएँ:
- पहल: बिहार में ATM अवसंरचना, सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ (MFI), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)।
- मानव विकास:
- महिला सशक्तीकरण: वर्ष 2018-19 से 2023-24 के मध्य महिलाओं पर किये गए कुल व्यय में 3.45 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की उन लड़कियों को ₹5,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिनका विवाह 18 वर्ष या उससे अधिक आयु में होता है।
- पहल: वन-स्टॉप सेंटर, पालना घर, महिला थाना, पिंक बस पहल, नायिका अपने जीवन की।
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र: बिहार में 2019-23 के दौरान जन्म के समय जीवन प्रत्याशा पुरुषों के लिये 68.9 वर्ष और महिलाओं के लिये 69.7 वर्ष रही है।
- बिहार में वर्ष 2001-11 के दौरान साक्षरता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया, जो 47% से बढ़कर 61.8% हो गई, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है।
- पहल: ई-शिक्षाकोष, पीएम पोषण योजना, भव्या पहल, जननी सुरक्षा योजना (JSY), टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, समग्र शिक्षा अभियान (SSA), बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना (BSCCY)।
- महिला सशक्तीकरण: वर्ष 2018-19 से 2023-24 के मध्य महिलाओं पर किये गए कुल व्यय में 3.45 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
- बाल विकास
- NFHS-5 (2019-21): 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे जो नाटेपन (42.9%), दुबलेपन (22.9%) और कम वजन (41%) के शिकार हैं।
- पहल: आँगनवाड़ी सेवाएँ (AS), पोषण पखवाड़ा, पोषण ट्रैकर, मिशन वात्सल्य, बाल संरक्षण इकाई की स्थापना, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015।
- पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन:
- वानिकी क्षेत्र ने वर्ष 2011-12 से वर्ष 2024-25 के बीच औसत वार्षिक वृद्धि दर 10.6% दर्ज की।
- 12 वर्षों में वन आवरण में 689 वर्ग किमी की वृद्धि हुई।
- पहल: पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वन प्रबंधन सूचना प्रणाली (FMIS), बिहार-वनमित्र ऐप, ई-परिवेश पोर्टल, हरियाली मिशन, बाँस मिशन, बिहार में वेटलैंड संरक्षण और विकास, विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य।
- आपदा प्रबंधन पहलें: राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), 2010, बिहार डिजास्टर रिस्क रिडक्शन रोड मैप (2015-2030), स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) का आधुनिकीकरण।
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कलपेट्टा भारत का पहला पूर्णतः पेपरलेस ज़िला न्यायालय बना
चर्चा में क्यों?
केरल के वायनाड स्थित कलपेट्टा न्यायिक ज़िला भारत का पहला पूर्णतः पेपरलेस ज़िला न्यायालय बन गया है।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: कलपेट्टा भारत का पहला ज़िला न्यायालय बन गया है जो पूर्णतः पेपरलेस और एक पूर्ण डिजिटल न्यायिक प्रणाली में परिवर्तित हो चुका है।
- उद्घाटन: इस पेपरलेस न्यायालय प्रणाली का वर्चुअल उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने किया।
- कार्यप्रणाली: न्यायालय की सभी प्रक्रियाएँ पूर्व-विचारण कार्यवाहियाँ, साक्ष्य का अभिलेखन, अंतरिम आदेश और अंतिम निर्णय—अब बिना किसी भौतिक फाइल के इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित की जा रही हैं।
- ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम’ (DCMS) नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म केरल उच्च न्यायालय के IT विभाग द्वारा सुरक्षित और दक्ष संचालन सुनिश्चित करने हेतु आंतरिक रूप से विकसित किया गया है।
- प्रौद्योगिकी: इस प्रणाली में AI-आधारित न्यायिक सहायता उपकरणों का समावेश है, जो संरचित वाद-सार तैयार करने, टिप्पणियाँ जोड़ने, मामलों का विवरण खोजने और न्यायाधीशों को डिजिटल अभिलेखों तक शीघ्र पहुँच प्रदान करने में सहायक हैं।
- लाभ: पेपरलेस प्रणाली से मुकदमेबाज़ी की लागत घटने, दस्तावेज़ों के आवागमन में होने वाली देरी घटने, न्याय तक पहुँच में सुधार होने तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करके ‘हरित न्यायशास्त्र’ को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- अन्य ज़िलों के लिये मॉडल: यह पहल पूरे देश के अन्य न्यायिक ज़िलों के लिये एक आदर्श के रूप में देखी जा रही है, जिससे पारंपरिक न्यायालय संचालन को कुशल डिजिटल प्रणालियों में बदलने की संभावना है।
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और पढ़ें: ज़िला न्यायालय, AI, भारत के मुख्य न्यायाधीश |
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तमिलनाडु ने भारत की पहली डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी लॉन्च की
चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु ने चेन्नई में आयोजित UmagineTN 2026 प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन में भारत की पहली समर्पित डीप टेक स्टार्टअप नीति का अनावरण किया।
मुख्य बिंदु:
- नीति लॉन्च: डीप टेक स्टार्टअप नीति 2025–26 की शुरुआत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने चेन्नई में आयोजित UmagineTN 2026 शिखर सम्मेलन में किया।
- तमिलनाडु ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने डीप टेक स्टार्टअप के लिये समर्पित नीति प्रस्तुत की है।
- कार्यान्वयन: इस नीति के समन्वय और क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की नोडल एजेंसी, तमिलनाडु टेक्नोलॉजी (iTNT) हब को सौंपी गई है।
- निवेश एवं स्टार्टअप समर्थन: यह नीति 100 डीप टेक स्टार्टअप को सहायता प्रदान करने तथा आगामी पाँच वर्षों में सार्वजनिक व निजी निवेश से ₹100 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती है, ताकि अनुसंधान और बाज़ार में उपयोग के बीच अंतर को कम किया जा सके।
- इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष तकनीक एवं स्वच्छ ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों पर विशेष ज़ोर दिया गया है, जिनमें उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और दीर्घकालिक विकास-अवधि शामिल होती है।
- इकोसिस्टम विकास: इसका उद्देश्य शैक्षणिक और शोध संस्थानों से स्टार्टअप तक तकनीक हस्तांतरण को सुगम बनाना, पेटेंट निर्माण को प्रोत्साहित करना तथा नवाचार के लिये अवसंरचना एवं पूंजी समर्थन को मज़बूत करना है।
- सरकारी सहयोग: इस नीति में 'प्रथम उपयोगकर्त्ता के रूप में सरकार' (गवर्नमेंट एज अर्ली एडॉप्टर) जैसे कार्यक्रम के प्रावधान शामिल हैं, जिसके तहत चयनित सरकारी विभागों में डीप टेक समाधानों का परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा, ताकि स्टार्टअप अपनी तकनीकों को प्रमाणित कर सकें।
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और पढ़ें: स्टार्टअप, AI, सेमीकंडक्टर, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी |
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विश्व कैंसर दिवस 2026
चर्चा में क्यों?
कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र पहचान को प्रोत्साहित करने और पूरे विश्व में कैंसर उपचार तक समान पहुँच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 4 फरवरी, 2026 को विश्व कैंसर दिवस मनाया गया।
मुख्य बिंदु:
- थीम: वर्ष 2026 की आधिकारिक थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनिक (United by Unique)’ है, जो वर्ष 2025–27 की तीन वर्षीय वैश्विक अभियान शृंखला का हिस्सा है। यह इस तर्क को रेखांकित करती है कि प्रत्येक व्यक्ति का कैंसर अनुभव भिन्न होता है, फिर भी सभी को समान देखभाल और सम्मान मिलना चाहिये।
- यह थीम व्यक्ति-केंद्रित उपचार पर बल देती है तथा उपचार और उत्तरजीविता की योजना में व्यक्तिगत अनुभवों, आवश्यकताओं एवं सम्मान के महत्त्व को रेखांकित करती है।
- उद्देश्य: कैंसर की रोकथाम, शीघ्र पहचान और उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- समय पर जाँच (स्क्रीनिंग) और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना।
- कैंसर से जुड़े मिथकों, कलंक और भय को तोड़ना।
- रोगियों, उत्तरजीवियों और देखभालकर्त्ताओं को समर्थन देना।
- पूरे विश्व में समान और गुणवत्तापूर्ण कैंसर देखभाल तक पहुँच में सुधार करना।
- भागीदारी: व्यक्ति, समुदाय, स्वास्थ्य संस्थान और सरकारें जागरूकता अभियानों, शैक्षिक कार्यक्रमों एवं जाँच गतिविधियों के माध्यम से कैंसर के विरुद्ध कार्रवाई को बढ़ावा देने में भाग लेते हैं।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तर्क पर ज़ोर देते हैं कि शीघ्र पहचान से जीवन बचते हैं और समय पर जाँच व जीवनशैली में बदलाव से अनेक कैंसर मामलों को रोका या बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
- रोकथाम योग्य कारण: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विश्लेषण के अनुसार, लगभग 10 में से 4 नए कैंसर मामलों को जोखिम कम करने वाले उपायों जैसे तंबाकू से बचाव, अस्वस्थ आहार और शराब के सेवन में कमी तथा शारीरिक गतिविधि बढ़ाने से रोका जा सकता है।
- समानता और पहुँच: विश्व कैंसर दिवस विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में उच्च-गुणवत्ता वाली देखभाल तक समान पहुँच की आवश्यकता पर बल देता है, जहाँ संसाधनों तथा जागरूकता की कमी के कारण देर से निदान एवं खराब परिणाम देखने को मिलते हैं।
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और पढ़ें: विश्व कैंसर दिवस, WHO |
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ओलंपिक शीतकालीन खेल मिलानो कॉर्टिना 2026
चर्चा में क्यों?
शीतकालीन ओलंपिक खेलों का 25वाँ संस्करण 6 फरवरी से आधिकारिक रूप से शुरू होगा। मिलानो कॉर्टिना 2026 वह पहला अवसर होगा जब दो शहर संयुक्त रूप से शीतकालीन ओलंपिक की मेज़बानी करेंगे और यह चौथी बार है जब इटली शीतकालीन खेलों की मेज़बानी करेगा।
मुख्य बिंदु:
- उद्घाटन समारोह: 6 फरवरी, 2026 को मिलानो के प्रतिष्ठित सैन सिरो स्टेडियम में आयोजित किया गया।
- समापन समारोह: यह 22 फरवरी, 2026 को प्राचीन वेरोना एरिना में होने वाला है।
- मास्कॉट्स: टीना और माइलो, दो स्टोट्स जिनके नाम मेज़बान शहरों से प्रेरित हैं (टीना – कॉर्टिना के लिये, माइलो – मिलानो के लिये)।
- थीम: ‘आर्मोनिया’ (संगति) नाम का यह शो बालिच वंडर स्टूडियो ने प्रोड्यूस किया है और इसमें मारिया कैरी, एंड्रिया बोसेली एवं लौरा पौसिनी ने परफॉर्म किया है।
- भारत की भागीदारी: भारत 2026 खेलों में एक छोटा लेकिन महत्त्वपूर्ण दल लेकर गया है, जो वैश्विक शीतकालीन खेलों में भारत की उपस्थिति को जारी रखता है।
- एथलीट्स: अरिफ मोहम्मद खान, एक अनुभवी अल्पाइन स्कीयर, जिन्होंने पहले बीजिंग 2022 शीतकालीन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, अब अल्पाइन स्कीइंग श्रेणी में क्वालीफाई कर चुके हैं।
- स्टैनज़िन लुंडुप: क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में प्रतिस्पर्द्धा करेंगे। उनकी भागीदारी एक चयन प्रक्रिया के बाद सुनिश्चित हुई, जिसमें राष्ट्रीय कोटा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय अहम रहा।
- भारत की शीतकालीन ओलंपिक में भागीदारी: जबकि शीतकालीन ओलंपिक खेल वर्ष 1924 में शुरू हुए, भारत ने वर्ष 1964 में अपनी शुरुआत की।
- आगामी मिलानो कॉर्टिना ओलंपिक्स सहित, भारत 12 शीतकालीन ओलंपिक संस्करणों में भाग ले चुका है, जिसमें अब तक 17 अलग-अलग एथलीटों ने देश का प्रतिनिधित्व किया।
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और पढ़ें: शीतकालीन ओलंपिक |

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