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हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया नीति

  • 21 Feb 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

हरित हाइड्रोजन, हाइड्रोजन के रूप, राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन।

मेन्स के लिये:

ग्रीन हाइड्रोजन और वर्ष 2070 तक भारत के कार्बन तठस्थ बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में इसका महत्त्व, सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, संरक्षण।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ऊर्जा मंत्रालय ने ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करके हरित हाइड्रोजन या हरित अमोनिया के उत्पादन हेतु ‘हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया नीति’ को अधिसूचित किया है।

  • वर्ष 2021 में शुरू किये गए ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन’ का उद्देश्य जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और भारत को हरित हाइड्रोजन हब बनाने में सरकार की सहायता करना है।

हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया नीति के प्रमुख प्रावधान:

  • नीति के तहत सरकार उत्पादन हेतु विशिष्ट विनिर्माण क्षेत्र स्थापित करने की पेशकश कर रही है, प्राथमिकता के आधार पर ISTS (इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम) से कनेक्टिविटी और जून 2025 से पहले उत्पादन सुविधा चालू होने पर 25 वर्ष के लिये मुफ्त ट्रांसमिशन की पेशकश की गई है।
    • इसका मतलब यह है कि हरित हाइड्रोजन उत्पादक असम में एक हरित हाइड्रोजन संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति करने हेतु राजस्थान में एक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में सक्षम होंगे और उसे किसी भी ‘अंतर-राज्यीय संचरण शुल्क’ का भुगतान नहीं करना होगा।
    • इसके अलावा उत्पादकों को शिपिंग द्वारा निर्यात के लिये हरित अमोनिया के भंडारण हेतु बंदरगाहों के पास बंकर स्थापित करने की अनुमति होगी।
  • उत्पादन लक्ष्य भी वर्ष 2030 तक 10 लाख टन से 5 मिलियन टन तक पाँच गुना बढ़ा दिया गया है।
    • अक्तूबर, 2021 में यह घोषणा की गई थी कि भारत प्रारंभ में वर्ष 2030 तक लगभग 1 मिलियन टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य बना रहा है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया के विनिर्माताओं को पावर एक्सचेंज से नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने या स्वयं या किसी अन्य डेवलपर के माध्यम से कहीं भी नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षमता स्थापित करने की अनुमति है।
  • इसके अलावा यह उत्पादकों को डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) द्वारा उत्पन्न किसी भी अधिशेष नवीकरणीय ऊर्जा को 30 दिनों तक के लिये भंडारित करने और आवश्यकतानुसार इसका उपयोग करने की सुविधा प्रदान करती  है।
  • डिस्कॉम हरित हाइड्रोजन उत्पादकों को आपूर्ति के लिये अक्षय ऊर्जा की खरीद भी कर सकता है, लेकिन वह रियायती दर पर ही ऐसा कर सकता है, जिसमें नई नीति के तहत राज्य आयोग द्वारा निर्धारित केवल खरीद की लागत, व्हीलिंग शुल्क और एक छोटा सा मार्जिन शामिल होगा।
    • इस तरह की खरीद की गणना राज्य के नवीनीकरण खरीद दायित्व (RPO) में की जाएगी, जिसके तहत नवीनीकरण ऊर्जा स्रोतों से अपनी आवश्यकताओं का एक निश्चित अनुपात प्राप्त करना आवश्यक है।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा व्यापार सुगमता के लिये समयबद्ध वैधानिक मंज़ूरी सहित सभी गतिविधियों हेतु एक एकल पोर्टल स्थापित किया जाएगा।

हरित हाइड्रोजन

  • परिचय:
    • यह पवन तथा सौर ऊर्जा जैसे नवीनीकरण ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके पानी के विद्युत अपघटन द्वारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पृथक करके उत्पादित की जाती है।
    • ईंधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिये एक गेम-चेंजर हो सकता है, जो अपने तेल का 85% और गैस आवश्यकताओं का 53% आयात करता है।
    • स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिये भारत उर्वरक संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों के लिये हरित हाइड्रोजन को अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है।
  • महत्त्व:
    • भारत के लिये अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (INDC) लक्ष्यों को पूरा करने तथा क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, पहुँच व उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु हरित हाइड्रोजन ऊर्जा महत्त्वपूर्ण है।
    • हरित हाइड्रोजन एक ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में (नवीकरणीय ऊर्जा के) अंतराल को भरने के लिये आवश्यक होगा।
    • गतिशीलता के संदर्भ में शहरों और राज्यों के भीतर शहरी वस्तुओं की ढुलाई या यात्रियों की लंबी दूरी की यात्रा के लिये रेलवे, बड़े जहाज़ो, बसों या ट्रकों आदि में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है।
    • बुनियादी ढाँचे के समर्थन में हाइड्रोजन में प्रमुख नवीकरणीय लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता है।

हरित अमोनिया:

  • परिचय:
    • अमोनिया एक ऐसा रसायन है जिसका उपयोग मुख्य रूप से यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के निर्माण में किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग अन्य उपयोगों जैसे कि इंजन संचालन के लिये भी किया जा सकता है। 
    • हरित अमोनिया का उत्पादन वहाँ होता है जहांँ अमोनिया बनाने की प्रक्रिया 100% नवीकरणीय और कार्बन मुक्त होती है।
    • हरित अमोनिया बनाने की एक विधि जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन को वायु द्वारा अलग करना है। फिर धारणीय/सतत् ऊर्जा का उपयोग करते हुए इन्हें हैबर प्रक्रिया (जिसे हैबर-बॉश के नाम से भी जाना जाता है) से गुज़ारा जाता है।
      • हैबर प्रक्रिया में अमोनिया (NH3) का उत्पादन करने हेतु उच्च ताप एवं दाव पर हाइड्रोजन और नाइट्रोजन की एक साथ क्रिया कराई जाती है। 
  • महत्त्व:
    • ग्रीन अमोनिया का उपयोग कार्बन-तटस्थ उर्वरक के उत्पादन, खाद्य मूल्य शृंखला को डीकार्बोनाइज़ करने और भविष्य के जलवायु-तटस्थ शिपिंग ईंधन (Climate-Neutral Shipping Fuel) के रूप में किया जा सकता हैl 
    • ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में अक्षय ऊर्जा स्रोतों जैसे- हाइड्रो-इलेक्ट्रिक, सौर ऊर्जा या पवन टरबाइन का उपयोग किया जाता है।
    • बढ़ती वैश्विक आबादी के लिये खाद्यान्न उपलब्ध कराने, CO2 मुक्त ऊर्जा उत्पादन तथा पर्याप्त भोजन का उत्पादन करने की मौजूदा चुनौतियों से निपटने में हरित अमोनिया महत्त्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • भारत के पास कम लागत वाले नवीकरणीय उत्पादन संयंत्रों और लागत में कटौती कर हरित हाइड्रोजन की लागत को कम करने की क्षमता है।
    • युवा जनसांख्यिकी और संपन्न अर्थव्यवस्था के परिणामस्वरूप एक विशाल बाज़ार की संभावना तथा हाइड्रोजन आधारित प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को बढ़ाने से सरकार को एक दीर्घकालिक लाभ होगा।
  • हाइड्रोजन को अंतिम और एकमात्र समाधान के रूप में मानने की बजाय विकल्प के रूप में माना जाना चाहिये क्योंकि इसकी अपनी सीमाएँ  हैं।
    • वर्ष 2030 तक वर्तमान भंडारण और परिवहन प्रौद्योगिकियों के परिपक्व एवं लागत प्रभावी होने की उम्मीद है।
    • अत: एक ही स्थान पर हाइड्रोजन के उत्पादन और उसके वास्तविक समय पर उपयोग को अवांछित लागतों के विपरीत निवेश की सुरक्षा हेतु बढ़ावा दिया जा सकता है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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