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प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022

  • 21 Feb 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सिंगल यूज़ प्लास्टिक और इसके उपयोग, एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR), पेरिस एग्रीमेंट, नेट ज़ीरो, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट (संशोधन) नियम, 2022।

मेन्स के लिये:

सिंगल यूज़ प्लास्टिक और संबंधित चिंताएँ, सिंगल यूज़ प्लास्टिक के विकल्प की आवश्यकता, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 और इसका महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 की घोषणा की, जिसने प्लास्टिक पैकेजिंग के लिये विस्तारित उत्पादक ज़िम्मेदारी (EPR) पर निर्देशों को अधिसूचित किया।

  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 में एकल-उपयोग प्लास्टिक (SUP) के उन्मूलन और विकल्पों को बढ़ावा देने के लिये संशोधन किया गया है।
  • विस्तारित उत्पादक ज़िम्मेदारी शब्द का अर्थ उत्पाद के जीवन के अंत तक पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के लिये एक निर्माता की ज़िम्मेदारी से है।

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016

  • यह प्लास्टिक कचरे के उत्पादन को कम करने, प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोकने और अन्य उपायों के बीच स्रोत पर कचरे का अलग भंडारण सुनिश्चित करने के लिये कदम उठाने पर ज़ोर देता है।
  • नियम प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन हेतु स्थानीय निकायों, ग्राम पंचायतों, अपशिष्ट उत्पादक, खुदरा विक्रेताओं और पुटपाथ विक्रेताओं के लिये भी ज़िम्मेदारियों को अनिवार्य करते हैं।

नए नियमों के तहत प्रावधान:

  • प्लास्टिक का वर्गीकरण:
    • श्रेणी 1: कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग।
    • श्रेणी 2: सिंगल लेयर या मल्टीलेयर की लचीली प्लास्टिक पैकेजिंग (विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक के साथ एक से अधिक परत), प्लास्टिक शीट और प्लास्टिक शीट से बने कवर, कैरी बैग, प्लास्टिक पाउच या पाउच आदि ।
    • श्रेणी 3: बहु-स्तरीय प्लास्टिक पैकेजिंग (प्लास्टिक की कम-स-कम एक परत और प्लास्टिक के अलावा अन्य सामग्री की कम-से-कम एक परत) को इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
    • श्रेणी 4: पैकेजिंग के लिये उपयोग की जाने वाली प्लास्टिक शीट या कंपोस्टेबल प्लास्टिक से बने कैरी बैग इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
  • प्लास्टिक की पैकेजिंग:
    • पैकेजिंग हेतु प्लास्टिक सामग्री के उपयोग को कम करने के दिशा-निर्देशों में कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री का पुन: उपयोग अनिवार्य किया गया है।
      • EPR के तहत एकत्रित प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे के पुनर्चक्रण की प्रवर्तनीय विधि के साथ-साथ पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक सामग्री के उपयोग से प्लास्टिक की खपत में कमी आएगी और प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे के पुनर्चक्रण में मदद मिलेगी।
  • विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व प्रमाणपत्र:
    • ये दिशानिर्देश अधिशेष विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व प्रमाणपत्रों की बिक्री एवं खरीद की अनुमति देते हैं।
      • इससे प्लास्टिक कचरा प्रबंधन हेतु एक बाजार तंत्र विकसित होगा।
  • केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल:
    • सरकार ने 31 मार्च, 2022 तक प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे के उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड-मालिकों, प्लास्टिक कचरा प्रसंस्करणकर्त्ताओं हेतु वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के साथ-साथ पंजीकरण के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करने का भी आह्वान किया है।
      • यह प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के तहत प्लास्टिक पैकेजिंग के लिये EPR के कार्यान्वयन से संबंधित आदेशों एवं दिशा-निर्देशों के संबंध में एकल डेटा भंडार के रूप में कार्य करेगा।
  • पर्यावरण मुआवज़ा:
    • पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा एवं सुधार तथा पर्यावरण प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने एवं कम करने के उद्देश्य से उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों से लक्ष्यों को पूरा न करने के संबंध में प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के आधार पर पर्यावरणीय मुआवज़ा लिया जाएगा।
      • ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ भुगतान का दायित्त्व एक ऐसे व्यक्ति पर डालता है, जो पर्यावरण को प्रदूषित करता है, इससे पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकेगी। 
  • उपायों की सिफारिश करने हेतु समिति:
    • CPCB अध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित एक समिति EPR के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु पर्यावरण मंत्रालय को उपायों की सिफारिश करेगी, जिसमें विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (EPR) दिशा-निर्देशों में संशोधन भी शामिल हैं।
  • EPR पोर्टल पर वार्षिक रिपोर्ट:
    • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) या प्रदूषण नियंत्रण समितियों (PCCs) को राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड-मालिकों एवं प्लास्टिक कचरा प्रसंस्करणकर्त्ताओं द्वारा इसकी पूर्ति के संबंध में ईपीआर पोर्टल पर एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम सौंपा गया है। 

दिशा-निर्देशों का महत्त्व:

  • यह प्लास्टिक के नए विकल्पों के विकास को बढ़ावा देगा और व्यवसायों को सतत् प्लास्टिक पैकेजिंग की ओर बढ़ने हेतु एक रोडमैप प्रदान करेगा।
  • दिशा-निर्देश प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे की चक्रीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिये एक ढांँचा प्रदान करते हैं
    • एक चक्रीय अर्थव्यवस्था क्लोज़्ड-लूप सिस्टम निर्मित करने, संसाधनों के उपयोग को कम करने, अपशिष्ट उत्पादन, प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को कम करने हेतु संसाधनों के पुन: उपयोग, साझाकरण, नवीनीकरण, पुन: निर्माण और पुनर्चक्रण पर निर्भर करती है।
  • यह देश में फैले प्लास्टिक कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण  कदम है।
    • भारत में सालाना लगभग 3.4 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2024 तक भारत के 100 शहरों में उनके प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को लगभग तिगुना करना है।
    • प्लास्टिक कचरे का संचय पर्यावरण के लिये हानिकारक है और जब यह कचरा समुद्र में जाता है तो जलीय पारिस्थितिक तंत्र को भी बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचाता है।

प्लास्टिक कचरे पर अंकुश लगाने हेतु अन्य पहलें: 

आगे की राह: 

  • पूर्ण प्रतिबंध निर्माताओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक उत्पादों के उत्पादन से नहीं रोकेगा।
  • यूज़-एंड-थ्रो प्लास्टिक के विकल्प तलाशने, उत्पादकों, कचरा बीनने वालों और प्लास्टिक व्यवसाय में शामिल अन्य समूहों के लिये वैकल्पिक आजीविका सुनिश्चित करने से समस्या का समाधान करने में काफी मदद मिलेगी।
  • सरकार को न केवल दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाना चाहिये बल्कि उत्पादकों को अधिक टिकाऊ उत्पादों बनाने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये। उचित निगरानी के साथ-साथ ज़िम्मेदार उपभोक्तावाद संस्कृति को बढ़ावा देना बहुत ज़रूरी है।
  • नागरिकों को भी व्यवहार में बदलाव लाना होगा तथा कचरा न फैलाकर अपशिष्ट पृथक्करण और अपशिष्ट प्रबंधन में मदद कर योगदान देना होगा।

स्रोत: द हिंदू

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