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आंध्र प्रदेश में भारत का पहला स्वदेशी हरित यूरिया संयंत्र
- 07 Feb 2026
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चर्चा में क्यों?
भारत का पहला बड़े पैमाने पर स्वदेशी हरित यूरिया संयंत्र आंध्र प्रदेश के पुडीमडका ग्रीन हाइड्रोजन हब में विकसित किया जाएगा और चालू किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU): NTPC ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL), जो NTPC लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है और असागो इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किये गए हैं।
- समझौते के तहत, NGEL असागो को हरित अमोनिया, नवीकरणीय विद्युत, CO₂ तथा अन्य उपयोगिताएँ उपलब्ध कराएगा।
- उद्देश्य: हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके हरित यूरिया का उत्पादन करना, जिससे जीवाश्म ईंधन आधारित अमोनिया पर निर्भरता कम होगी।
- यह पहल घरेलू हरित यूरिया मूल्य शृंखला के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जिससे आयातित उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
- इसका लक्ष्य रोज़गार सृजन करना, हरित ऊर्जा क्षेत्र को मज़बूत करना और आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विकास में योगदान देना है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: पारंपरिक यूरिया संयंत्रों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
- यह भारत के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य और राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को समर्थन देता है।
- नवाचार: भारत में पहली बार विकसित की जा रही स्वदेशी हरित यूरिया तकनीक, जो उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी।
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