अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंधों की भागीदारी
- 21 Jan 2026
- 109 min read
प्रिलिम्स के लिये: राष्ट्रपति, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF), स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), सुपरकंप्यूटिंग, FATF, डिजिलॉकर, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, I2U2, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), नॉन-टैरिफ बैरियर्स (NTB), ग्रीन हाइड्रोजन, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC), GIFT सिटी।
मेन्स के लिये: भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंधों का अवलोकन और हाल के घटनाक्रम, संबंधित चुनौतियाँ और आगे की राह।
चर्चा में क्यों?
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय उथल‑पुथल के बीच भारत की आधिकारिक यात्रा की, जिसके दौरान दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष सहयोग तथा LNG सहित व्यापक द्विपक्षीय समझौतों और परिणामों पर सहमति व्यक्त की।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति द्वारा भारत की यात्रा के मुख्य बिंदु क्या हैं?
- व्यापार लक्ष्य: CEPA, 2022 के आधार पर वित्तवर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया; नेताओं ने वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया।
- आर्थिक और निवेश संबंधी पहल: इसके अंतर्गत अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को जोड़ें और भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर तथा भारत-आफ्रीका सेतु पहल को तीव्र गति से लागू करें।
- भारत ने UAE के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया।
- दोनों पक्षों ने गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में UAE की साझेदारी के लिये चर्चा का स्वागत किया, जिसमें एक हवाई अड्डा, बंदरगाह, टाउनशिप और MRO (मरम्मत, रखरखाव और संचालन) सुविधा जैसी अवसंरचना का विज़न शामिल है।
- ऊर्जा और परमाणु सहयोग: 10-वर्षीय LNG आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किये गए (वर्ष 2028 से प्रारंभ)। भारत के शांति अधिनियम, 2025 के अनुसार, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) सहित उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी तलाशने पर सहमति हुई।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार: सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर और भारत में डेटा सेंटर तलाशने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने पर सहमति हुई। आपसी संप्रभुता व्यवस्थाओं के तहत 'डेटा एंबैसी' स्थापित करने की संभावना तलाशने के लिये टीमों को निर्देशित किया गया।
- आतंक-रोधी: सीमा-पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की स्पष्ट और दोटूक निंदा दोहराई गई तथा आतंक के वित्तपोषण के विरुद्ध FATF के अंतर्गत सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की गई।
- खाद्य सुरक्षा और संस्कृति: खाद्य सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता को पुष्ट किया और मैत्री के प्रतीक के रूप में अबू धाबी में 'हाउस ऑफ इंडिया' स्थापित करने का निर्णय लिया।
- शिक्षा और संपर्क: विश्वविद्यालय संबंधों और छात्र विनिमय को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहित किया गया; शैक्षणिक दस्तावेज़ प्रमाणीकरण के लिये भारत के डिजिलॉकर को UAE प्लेटफॉर्मों से एकीकृत करने के कार्य का स्वागत किया गया। सीमा-पार भुगतान के लिये नेशनल पेमेंट प्लेटफॉर्मों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य रखा गया।
- रक्षा और सुरक्षा: रक्षा सहयोग को एक मूल स्तंभ के रूप में स्वीकार किया, हाल के सैन्य विनिमय और अभ्यासों (जैसे– जायद तलवार नौसैनिक अभ्यास) का स्वागत किया, साथ ही एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिये एक पत्राशय पर हस्ताक्षर किये गए।
डेटा एंबैसी
- परिचय: "डेटा एंबैसी" एक ऑफशोर डेटा सेंटर होता है जहाँ एक राष्ट्र अपना महत्त्वपूर्ण डिजिटल डेटा (जैसे– वित्तीय अभिलेख, सार्वजनिक डेटाबेस) संगृहीत करता है ताकि डिजिटल निरंतरता और संप्रभुता सुनिश्चित की जा सके।
- यह घरेलू व्यवधानों, जैसे– साइबर हमलों या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिये एक बैकअप के रूप में कार्य करता है। संयुक्त अरब अमीरात में भारत का डेटा एंबैसी देश का पहला डेटा एंबैसी होगा।
- कानूनी स्थिति: यह राजनयिक सिद्धांतों के तहत कार्य करता है:
- मेज़बान देश के कानून और अधिकार क्षेत्र फिजिकल फैसिलिटी (पारंपरिक एंबैसी की तरह) पर लागू होते हैं।
- डेटा जिस देश का है, उसी को उस पर पूर्ण और विशिष्ट पहुँच, नियंत्रण तथा विधिक अधिकार क्षेत्र प्राप्त रहता है; यह डेटा अभेद्य होता है और स्थानीय तलाशी या ज़ब्ती की कार्रवाई से संरक्षित रहता है।
- वैश्विक उदाहरण: वर्ष 2017 में एस्टोनिया ने लक्ज़मबर्ग में विश्व का पहला डेटा एंबैसी स्थापित किया। मोनाको ने इसका अनुसरण करते हुए वर्ष 2021 में लक्ज़मबर्ग में अपना डेटा एंबैसी स्थापित किया।
भारत-UAE बैठक के लिये प्रेरित करने वाला बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य
- UAE-सऊदी तनाव: यमन (UAE समर्थित सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल बनाम सऊदी समर्थित सरकार), सूडान और सोमालिया में खुले संघर्षों के बीच यह दौरा महत्त्वपूर्ण बन गया है, जो खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक मतभेद की दृढ़ता को उजागर करता है।
- सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की धुरी: सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया है, कुछ विश्लेषणों में तुर्की की संभावित भागीदारी का भी उल्लेख है, जबकि भारत UAE और इज़रायल के साथ मिनीलैटरल साझेदारी को I2U2, IMEC और व्यापक रणनीतिक संवाद के माध्यम से सुदृढ़ कर रहा है।
- ईरान संकट: अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ते जोखिम ने भारत-UAE साझेदारी के रणनीतिक महत्त्व को और बढ़ा दिया है। यह साझेदारी भारत को ऊर्जा आयात में विविधता लाने और क्षेत्रीय संवाद के चैनलों को बनाए रखने में सहायता करती है, जिससे अस्थिर खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम होती है।
- बोर्ड ऑफ पीस पहल: गाज़ा के लिये अमेरिका के नेतृत्व वाला बोर्ड ऑफ पीस ने भारत-UAE साझेदारी को नया महत्त्व दिया है, क्योंकि दोनों देशों को इसमें शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया है। उनकी भागीदारी संघर्षोत्तर गाज़ा के पुनर्निर्माण और शासन में समन्वित प्रभाव स्थापित करने में सहायक होगी।
भारत-UAE द्विपक्षीय संबंध कैसे हैं?
- आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध: द्विपक्षीय व्यापार 1970 के दशक में 180 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जिससे UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार (अमेरिका और चीन के बाद) तथा दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन गया है। भारत में UAE का निवेश 20-21 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, साथ ही 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अवसंरचना निवेश प्रतिबद्धता भी शामिल है।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत के लिये कच्चे तेल के चौथे सबसे बड़े स्रोत तथा LNG और LPG के प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता के रूप में UAE भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह इस तथ्य से भी स्पष्ट होता है कि पेट्रोलियम उत्पाद कुल द्विपक्षीय व्यापार का 41.4% हिस्सा रखते हैं, जिनका मूल्य वित्तवर्ष 2021-22 तक 35.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
- वित्तीय एकीकरण: UAE में भारत के रुपे कार्ड और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत बढ़ते वित्तीय सहयोग को रेखांकित करती है। इसे वर्ष 2023 में स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (Local Currency Settlement- LCS) पर हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया, जिसका उद्देश्य सीमा-पार लेन-देन में भारतीय रुपये और AED (UAE दिरहम) के उपयोग को बढ़ावा देना है। यह व्यवस्था पहले ही सोना, कच्चा तेल और खाद्य उत्पादों के व्यापार में लागू की जा चुकी है।
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत के बीच रक्षा सहयोग आतंकवाद- रोधी उपायों, खुफिया जानकारी साझा करने एवं संयुक्त सैन्य अभ्यासों, जैसे– अभ्यास डेज़र्ट साइक्लोन के माध्यम से सुदृढ़ हुआ है। इस अवधि में UAE की भारतीय रक्षा उत्पादों में बढ़ती रुचि भी देखने को मिली, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और तेजस फाइटर जेट शामिल हैं।
- सांस्कृतिक और जनता स्तर पर संपर्क: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय प्रवासी संख्या लगभग 35 लाख है (UAE की कुल जनसंख्या का लगभग 35%), जो भारत को भेजे जाने वाले प्रेषणों (Remittances) के माध्यम से महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं (भारत के कुल प्रेषण का 18%)। अबू धाबी में स्थित BAPS मंदिर UAE का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है और यह दृढ़ सहयोग और संबंधों के विस्तार का प्रतीक है।
- क्षेत्रीय स्थिरता: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का क्षेत्रीय स्थिरता में महत्त्व जो अब्राहम संधियों (Abraham Accords) में इसकी भूमिका और इज़रायल के साथ संबंधों के सामान्यीकरण से उजागर होता है, भारत के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि भारत गल्फ ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर है। यह रणनीतिक भूमिका I2U2 समूह और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसे बहुपक्षीय ढाँचों में भी परिलक्षित होती है।
भारत-UAE संबंधों में चुनौतियाँ क्या हैं?
- क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विताएँ: भारत को यमन को लेकर सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव में तीव्र वृद्धि का ध्यान रखना चाहिये। UAE सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल का समर्थन करता है, जबकि सऊदी अरब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल का समर्थन करता है।
- भारत की कूटनीतिक रणनीति को मौजूदा ईरान-अरब तनाव के बीच ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को संतुलित करते हुए UAE के साथ संबंधों का भी सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना चाहिये।
- रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा और बाहरी प्रभाव: चीन के साथ UAE के गहराते रणनीतिक और आर्थिक संबंध, जिनमें चीनी L-15 विमानों की खरीद जैसे रक्षा सहयोग के सौदे शामिल हैं, एक प्रत्यक्ष चुनौती उत्पन्न करते हैं। चीन की “चेकबुक कूटनीति” भारतीय पहलों की प्रभावशीलता को सीमित करती दिखाई देती है।
- पाकिस्तान नीति को लेकर UAE पर चिंताएँ: पाकिस्तान को UAE द्वारा दी गई महत्त्वपूर्ण वित्तीय सहायता (जैसे– वर्ष 2019 में 3 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता) भारत की चिंताओं को बढ़ाती है, क्योंकि पाकिस्तान का भारत के विरुद्ध सीमा-पार आतंकवाद को प्रायोजित करने का इतिहास रहा है और धन के संभावित दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
- संरचनात्मक व्यापार बाधाएँ: CEPA के बावजूद व्यापार अब भी पारंपरिक क्षेत्रों (रत्न एवं आभूषण, पेट्रोलियम, स्मार्टफोन) तक सीमित है, जिससे विविधीकरण की कमी स्पष्ट होती है। साथ ही, अनिवार्य हलाल प्रमाणन, स्वच्छता एवं पादप-स्वास्थ्य (SPS) उपाय तथा तकनीकी व्यापार बाधाएँ (TBT) जैसी प्रमुख गैर-शुल्क बाधाएँ (NTBs) भारतीय निर्यात में अवरोध उत्पन्न करती हैं।
- आगामी आर्थिक संरेखण: नेट-ज़ीरो लक्ष्यों में अंतर (UAE 2050, भारत 2070) और वर्ष 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा की भारत की पहल पारंपरिक हाइड्रोकार्बन-आधारित संबंधों के लिये चुनौती प्रस्तुत करती है, क्योंकि UAE के तेल निर्यात हित भारत के हरित लक्ष्यों के साथ संभावित संघर्ष में हो सकते हैं।
UAE के साथ सहयोग बढ़ाने हेतु भारत को क्या कदम उठाने चाहिये?
- संयुक्त हरित ऊर्जा एवं स्थिरता कॉरिडोर: संयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा निवेश, ग्रीन हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विलवणीकरण अनुसंधान के लिये भारत–UAE ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर लागू किया जाना चाहिये। इसके पूरक के रूप में मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तथा सतत शहरी विकास पर केंद्रित एक संयुक्त जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जा सकता है, जो भारतीय विशेषज्ञता व UAE की वित्तीय सहायता का लाभ उठाए।
- क्षेत्रीय एकीकरण के प्रवेश-द्वार के रूप में UAE का उपयोग: भारत को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और ग्रेटर अरब फ्री ट्रेड एरिया (GAFTA) में UAE की स्थिति का लाभ उठाते हुए अन्य सदस्य देशों के साथ CEPA जैसे समझौतों का समर्थन करना चाहिये।
- साथ ही री-एक्सपोर्ट हब के रूप में UAE की भूमिका का उपयोग करते हुए हैंडलूम, हस्तशिल्प, वस्त्र और फार्मा जैसे प्रमुख भारतीय उत्पादों को अफ्रीकी तथा व्यापक मध्य-पूर्वी बाज़ारों तक पहुँचने वाली आपूर्ति शृंखलाओं में एकीकृत किया जाना चाहिये।
- निवेश प्रवाह का विस्तार: भारत की प्राथमिक परियोजनाओं (जैसे– GIFT सिटी) में UAE के निवेश को सुगम बनाया जाए, साथ ही UAE के प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निवेश को प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिये उच्च-मूल्य प्रस्तावों की निगरानी और त्वरित क्रियान्वयन हेतु समर्पित द्विपक्षीय निवेश टास्क फोर्स स्थापित की जानी चाहिये।
- रणनीतिक संवाद और संयुक्त समर्थन: भारत को राजनयिक गतिशीलता बनाए रखने के लिये 'संयुक्त आयोग' के माध्यम से स्पष्ट समयसीमा के साथ उच्च-स्तरीय समीक्षाओं को संस्थागत बनाना चाहिये। साथ ही कतर के उदाहरण (2020 में उन्मूलन) का अनुसरण करते हुए भारतीय प्रवासियों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा हेतु 'कफाला सिस्टम' में सुधारों का सशक्त समर्थन करना चाहिये।
निष्कर्ष
UAE के राष्ट्रपति की यात्रा भारत–UAE रणनीतिक साझेदारी के गहराने को रेखांकित करती है, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी तथा जन संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार हो रहा है। जहाँ CEPA-प्रेरित व्यापार, हरित ऊर्जा एवं डिजिटल एकीकरण में अवसर महत्त्वपूर्ण हैं, वहीं दीर्घकालिक सहयोग बनाए रखने के लिये भारत को क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विताओं, चीन के प्रभाव व संरचनात्मक व्यापार बाधाओं के बीच संतुलन साधना होगा।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. “भारत-UAE साझेदारी भारत की विस्तारित पड़ोस नीति की एक आधारशिला है।" विस्तृत वर्णन कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. द्विपक्षीय संबंधों में भारत-UAE CEPA का क्या महत्त्व है?
CEPA ने भारत–UAE के आर्थिक संबंधों को मज़बूत किया है, जिससे वित्तवर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 100 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है और वर्ष 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।
2. भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिये UAE क्यों महत्त्वपूर्ण है?
UAE भारत के लिये कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत और LNG का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता है, जिससे यह भारत की ऊर्जा स्थिरता के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
3. डेटा एंबैसी क्या है?
डेटा एंबैसी एक ऑफशोर डेटा सेंटर होती है, जो आपसी संप्रभुता के अंतर्गत संचालित होती है और डिजिटल निरंतरता तथा डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन 'खाड़ी सहयोग परिषद' का सदस्य नहीं है? ( 2016)
(a) ईरान
(b) ओमान
(c) सऊदी अरब
(d) कुवैत
उत्तर: (a)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2008)
- अजमान UAE के सात अमीरातों में से एक है।
- रास अल-खैमाह UAE में शामिल होने वाला अंतिम शेख-राज्य था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. भारत की ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न भारत की आर्थिक प्रगति का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भाग है। पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के ऊर्जा नीति सहयोग का विश्लेषण कीजिये। (2017)
प्रश्न. परियोजना ‘मौसम’ को भारत सरकार की अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों की सुदृढ़ करने की एक अद्वितीय विदेश नीति पहल माना जाता है। क्या इस परियोजना का एक रणनीतिक आयाम है? चर्चा कीजिये। (2015)
