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उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 03 Mar 2026
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उत्तर प्रदेश को राज्य-बाह्य MPLADS निधियों का 84% से अधिक प्राप्त हुआ

चर्चा में क्यों?

हालिया आँकड़े दर्शाते हैं कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के अंतर्गत जारी राज्य-बाह्य निधियों का 84 प्रतिशत से अधिक भाग उत्तर प्रदेश में संचालित परियोजनाओं की ओर निर्देशित किया गया है। इससे क्षेत्रीय एकाग्रता, राजनीतिक प्राथमिकताओं तथा संघीय समानता से जुड़े प्रश्न उत्पन्न होते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य से बाहर का वित्तपोषण: MPLADS के अंतर्गत सांसद (विशेषकर राज्यसभा सदस्य और नामित सांसद) निर्धारित प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अपने निर्वाचित राज्य से बाहर भी परियोजनाओं की अनुशंसा कर सकते हैं।
  • संकेंद्रित व्यय: विश्लेषित 530 सांसदों में से केवल 21 सांसदों ने राज्य से बाहर किये गए समस्त व्यय का प्रतिनिधित्व किया।
  • उत्तर प्रदेश का प्रभुत्व: उत्तर प्रदेश, अपने अधिक सांसदों के कारण पूर्ण परियोजनाओं का लगभग 26% और उपयोग की गई कुल निधि का लगभग 20% पहले ही प्राप्त कर चुका है।
    • स्पष्ट असंगति: ‘अन्य क्षेत्रों’ के लिये निर्धारित 84% निधि भी अंततः उसी राज्य में प्रवाहित हो गई।
  • विचलन: अनेक मामलों में अपेक्षाकृत कम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों (जैसे झारखंड या जम्मू-कश्मीर) से निधि उत्तर प्रदेश की ओर स्थानांतरित की गई।
  • हितों का टकराव: सांसदों का कार्यपालिका संबंधी कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से संलग्न होना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को चुनौती देता है।
  • क्षेत्रीय असमानता: अविकसित क्षेत्रों (जैसे जम्मू-कश्मीर, जिसे उपयोग की गई निधि का केवल 0.6% प्राप्त हुआ) से धन का प्रवाह पहले से ही अधिक हिस्सेदारी प्राप्त कर रहे राज्य की ओर होना समतामूलक विकास पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
  • निगरानी में अंतराल: हालाँकि ई-साक्षी (e-SAKSHI) पोर्टल (अप्रैल 2023 में लॉन्च) ने पारदर्शिता में सुधार किया है, लेकिन ‘राज्य के बाहर’ व्यय की प्रवृत्ति यह संकेत देती है कि कुछ मामलों में स्थानीय निर्वाचन क्षेत्र की ज़रूरतों की तुलना में राजनीतिक प्राथमिकताएँ अधिक हावी हो सकती हैं।
और पढ़ें:  MPLADS फंड


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भारत का पहला राज्य नवाचार मिशन त्रिपुरा में लॉन्च हुआ

चर्चा में क्यों?

त्रिपुरा सरकार ने नीति आयोग की प्रमुख नवाचार पहल 'अटल इनोवेशन मिशन' (AIM) के तत्त्वावधान में अपना पहला 'राज्य नवाचार मिशन' (SIM) लॉन्च किया है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: त्रिपुरा के SIM को औपचारिक रूप से नवाचार क्षमता बढ़ाने, उद्यमशील उपक्रमों को समर्थन देने तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाले एक सशक्त पारितंत्र के निर्माण हेतु प्रारंभ किया गया है।
    • यह मिशन त्रिपुरा को नवाचार के एक जीवंत केंद्र में बदलने के 'अटल इनोवेशन मिशन' (AIM) के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसके लिये सहायक बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जाएगा और नवाचारों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स एवं उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • फोकस: यह मिशन युवा नवोन्मेषकों को सशक्त बनाने, इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करने, विचारों के पेटेंट और व्यवसायीकरण को प्रोत्साहित करने तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश आकर्षित करने पर ज़ोर देता है।
  • T-नेस्ट इनक्यूबेटर: इस पहल के हिस्से के रूप में, मौजूदा 'त्रिपुरा नेचुरल एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज' (T-NEST) को 'अटल इनक्यूबेशन सेंटर' (AIC) के रूप में नामित किया गया है। यह स्टार्टअप्स और शुरुआती चरण के उद्यमों को मेंटरशिप (परामर्श), फंडिंग सहायता और कार्यालय स्थान प्रदान करेगा।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी: यह मिशन निजी क्षेत्र की कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों एवं निवेशकों के साथ साझेदारी का लाभ उठाकर तकनीकी विशेषज्ञता और बाज़ार की आवश्यकताओं के बीच अंतर को कम करने का प्रयास करेगा।
  • प्रभाव: इस मिशन से त्रिपुरा में आर्थिक विकास को गति मिलने, रोज़गार के अवसर सृजित होने तथा भारत के नवाचार परिदृश्य में राज्य के योगदान को सुदृढ़ करने की अपेक्षा है।
और पढ़ें: अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग, स्टार्ट-अप्स


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न्यायमूर्ति बलबीर सिंह चौहान को मणिपुर हिंसा की जाँच का अध्यक्ष नियुक्त किया

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बलबीर सिंह चौहान को मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के जाँच आयोग (Commission of Inquiry) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।

मुख्य बिंदु:

  • नियुक्ति: केंद्र सरकार ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा की जाँच के लिये गठित जाँच आयोग के नए अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति बलबीर सिंह चौहान का नाम घोषित किया है।
    • यह नियुक्ति पूर्व में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अजय लांबा के इस्तीफे के पश्चात की गई है।
  • अधिदेश: गृह मंत्रालय द्वारा गठित इस जाँच आयोग का उद्देश्य मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा की जाँच करना, उसके कारणों का विश्लेषण करना, प्रशासनिक तंत्र की भूमिका की समीक्षा करना, संघर्ष के विस्तार को संभव बनाने वाले कारकों की पहचान करना तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाना है।
  • केंद्रित क्षेत्र: आयोग मानवाधिकार उल्लंघन, विस्थापन, संपत्ति की क्षति तथा सांप्रदायिक तनाव से संबंधित आरोपों की भी जाँच करेगा।
  • पृष्ठभूमि: मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और जनजातीय कुकी समुदायों के बीच हुए जातीय संघर्ष में अनेक लोगों की मृत्यु हुई तथा व्यापक विस्थापन हुआ। इन परिस्थितियों में जवाबदेही सुनिश्चित करने और शांति बहाल करने के उद्देश्य से जॉंच पैनल का गठन किया गया।
  • महत्त्व: जाँच आयोग के पुनर्गठन से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार हाल के वर्षों की सबसे गंभीर जातीय हिंसा की घटनाओं में से एक की जाँच को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने के लिये गंभीरता से प्रयासरत है।
और पढ़ें: मणिपुर हिंसा  


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NIELIT स्थापित करेगा भारत का पहला समर्पित क्वांटम और AI विश्वविद्यालय

चर्चा में क्यों?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) ने अमरावती में क्वांटम टेक्नोलॉजीज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विशेष रूप से केंद्रित भारत का पहला विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने के लिये आंध्र प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं।

मुख्य बिंदु:

  • समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर: 20 फरवरी, 2026 को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए, जिसका उद्देश्य अग्रणी प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार को एकीकृत करते हुए एक डीप-टेक शैक्षणिक केंद्र विकसित करना है।
    • अमरावती स्थित यह परिसर क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और संबंधित डीप-टेक क्षेत्रों में अनुसंधान एवं उच्च अध्ययन के लिये  राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
  • शैक्षणिक कार्यक्रम: यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के कार्यक्रम संचालित किये  जाएंगे, जिनमें क्वांटम एल्गोरिद्म, AI एवं मशीन लर्निंग, क्वांटम संचार, साइबर सुरक्षा तथा उच्च-प्रदर्शन संगणन जैसे विशिष्ट क्षेत्र शामिल होंगे।
    • परिसर में उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाएँ, उद्योग-संबद्ध उत्कृष्टता केंद्र (CoEs) तथा वैश्विक सहयोग के साथ डीप-टेक इन्क्यूबेशन और उद्यमिता को समर्थन प्रदान करने की व्यवस्था होगी।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह पहल भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और AI रणनीति के अनुरूप है तथा प्रौद्योगिकी-आधारित विकास पर सरकार के विशेष बल को सुदृढ़ करती है।
  • महत्त्व: अमरावती क्वांटम एवं AI विश्वविद्यालय परिसर भारत का पहला ऐसा संस्थागत रूप से समर्पित शैक्षणिक केंद्र होगा, जो विशेष रूप से क्वांटम प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये समर्पित होगा।
और पढ़े:  इंडिया AI इम्पैक्ट समिट, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अमरावती क्वांटम वैली


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