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झारखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 14 Apr 2026
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आरोग्य वन पहल

चर्चा में क्यों?

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जैव विविधता को बढ़ाने और पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिये 'आरोग्य वन' पहल की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • अवधारणा: इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी भूमि पर औषधीय वृक्षों का थीम-आधारित वृक्षारोपण करना है, जिससे हरित गलियारे विकसित किये जा सकें।
  • उद्देश्य: इसका लक्ष्य ऐसे औषधीय पौधे लगाकर जैव विविधता को बढ़ाना है जो परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों के अनुकूल हों।
  • कार्यान्वयन (प्रथम चरण): वृक्षारोपण के लिये  लगभग 62.8 हेक्टेयर क्षेत्र के 17 भूखंडों की पहचान की गई है।
    • इसके शुरुआती चरण में मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में लगभग 67,462 औषधीय पेड़ लगाए जाएंगे।
    • कृषि-जलवायु उपयुक्तता के आधार पर लगभग 36 औषधीय प्रजातियों जैसे नीम, आँवला, जामुन, इमली, नींबू, गूलर और मौलश्री का चयन किया गया है।
  • पारंपरिक ज्ञान: यह पहल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का समर्थन करती है और स्वदेशी औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण का लक्ष्य रखती है।

और पढ़ें: NHAI, आयुर्वेद


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अमूल रुपे1 ट्रिलियन का आँकड़ा पार करने वाली पहली भारतीय FMCG कंपनी बनी

चर्चा में क्यों?

अमूल ₹1 ट्रिलियन का टर्नओवर पार करने वाली भारत की पहली फास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनी बन गई है, जो देश के सहकारी डेयरी क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: अमूल ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1 ट्रिलियन (₹1 लाख करोड़) से अधिक का ब्रांड टर्नओवर हासिल किया है, जिससे यह इस मुकाम तक पहुँचने वाली पहली भारतीय FMCG कंपनी बन गई है।
    • कंपनी ने पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि दर्ज की, जो इसके उत्पादों की मज़बूत मांग को दर्शाता है।
    • अमूल का विपणन गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) द्वारा किया जाता है, जिसने वित्त वर्ष 2026 में लगभग ₹73,450 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष से 11.4% अधिक है।
    • वैश्विक उपस्थिति: अमूल के उत्पाद वर्तमान में 50 से अधिक देशों में बेचे जाते हैं।
    • सहकारी मॉडल: अमूल नेटवर्क को 3.6 मिलियन से अधिक डेयरी किसानों का समर्थन प्राप्त है, जो भारत के सहकारी डेयरी मॉडल की ताकत को प्रदर्शित करता है।
  • अमूल:
    • अमूल की स्थापना वर्ष 1946 में गुजरात के आणंद में 'कैरा ज़िला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड' के रूप में हुई थी।
    • इस संगठन की स्थापना त्रिभुवनदास पटेल ने की थी।
    • जायेन मेहता अमूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं।

और पढ़ें: अमूल, FMCG 


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कैलाश सत्यार्थी को पुणे में लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2026 मिलेगा

चर्चा में क्यों?

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित 'लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार' के लिये चुना गया है। इसकी घोषणा मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा की गई, जो इस सम्मान के पाँचवें संस्करण का प्रतीक है।

मुख्य बिंदु:

  • तिथि और स्थान: यह समारोह 24 अप्रैल, 2026 को पुणे के गणेश कला क्रीड़ा मंदिर में आयोजित किया जाना तय है।
    • तिथि का महत्त्व: यह कार्यक्रम दिग्गज मंगेशकर भाई-बहनों के पिता, मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की 84वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।
    • संगीतमय श्रद्धांजलि: इस शाम को ‘मी लता दीनानाथ…’ नामक एक विशेष संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका संपादन हृदयनाथ मंगेशकर ने किया है। इसमें विभावरी जोशी और सावनी रवींद्र जैसे प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
  • कैलाश सत्यार्थी (समाज सेवा): उन्हें राष्ट्र के प्रति उनके ‘असाधारण, पथ-प्रदर्शक और अनुकरणीय’ योगदान, विशेष रूप से बाल श्रम के खिलाफ उनके आजीवन संघर्ष तथा बच्चों के अधिकारों के समर्थन के लिये चुना गया है।
  • अन्य प्रमुख पुरस्कार विजेता:
    • सिनेमा: रवीना टंडन और प्राजक्ता माली।
    • संगीत: शास्त्रीय गायक महेश काले।
    • नृत्य: अनुभवी कथक प्रतिपादक शमा भाटे।
    • पत्रकारिता: सुशील कुलकर्णी।
  • पुरस्कार की विरासत: 'लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार' की शुरुआत वर्ष 2022 में भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन के बाद की गई थी। इसका उद्देश्य उन व्यक्तियों को सम्मानित करना है जिन्होंने अपना जीवन भारत और उसके लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया है।
  • पूर्व प्रतिष्ठित प्राप्तकर्त्ता: सत्यार्थी अब उन विशिष्ट हस्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्हें पहले यह पुरस्कार मिल चुका है:
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (2022)
    • आशा भोंसले (2023)
    • अमिताभ बच्चन (2024)
    • कुमार मंगलम बिड़ला (2025)

और पढ़ें: लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार


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सिएटल में स्वामी विवेकानंद की पहली आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया

चर्चा में क्यों?

भारतीय प्रवासियों के लिये एक ऐतिहासिक क्षण में, हाल ही में सिएटल में संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वामी विवेकानंद की पहली आदमकद कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा उस आध्यात्मिक गुरु को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने पश्चिमी विश्व को भारतीय दर्शन और वेदांत से परिचित कराया था।

मुख्य बिंदु:

  • प्रतिमा: स्वामी विवेकानंद की अपनी प्रतिष्ठित खड़ी मुद्रा वाली एक भव्य आदमकद कांस्य प्रतिमा।
  • स्थान: यह प्रतिमा सिएटल महानगरीय क्षेत्र के विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में स्थापित की गई है।
    • महत्त्व: सिएटल को इसके जीवंत भारतीय-अमेरिकी समुदाय और भारत एवं अमेरिका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका के कारण चुना गया था।
  • शिकागो की विरासत: यह अनावरण शिकागो में 1893 के विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की भावना को याद करता है, जिसने अमेरिका में योग और भारतीय आध्यात्मिकता की नींव रखी थी।
    • सांस्कृतिक प्रतीकवाद: आयोजकों ने उल्लेख किया कि यह प्रतिमा केवल एक धार्मिक स्मारक नहीं है, बल्कि विश्व बंधुत्व, शांति और वैश्विक युवाओं के लिये उनके संदेश की कालातीत प्रासंगिकता का प्रतीक है।
  • सॉफ्ट पावर: यह स्थापना भारत की सांस्कृतिक 'सॉफ्ट पावर' को मज़बूत करती है और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) के दर्शन को प्रदर्शित करती है।
  • वैश्विक मान्यता: सिएटल में इस प्रतिमा की स्थापना स्वामी विवेकानंद के बौद्धिक और आध्यात्मिक योगदान की वैश्विक मान्यता में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

और पढ़ें: स्वामी विवेकानंद


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गुजरात पुलिस ने NDPS जाँचों को मज़बूत करने के लिये 'NARIT AI' लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

भारत में अपनी तरह की पहली पहल के रूप में, गुजरात पुलिस ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल, 'NARIT AI' (नारकोटिक्स एनालिसिस एंड RAG-बेस्ड इन्वेस्टिगेशन टूल) लॉन्च किया है।

मुख्य बिंदु:

  • NARIT AI: पश्चिमी रेलवे पुलिस (वडोदरा डिवीज़न) द्वारा मुंबई स्थित एक AI स्टार्टअप के सहयोग से विकसित, इस टूल का उद्देश्य जाँच की गुणवत्ता बढ़ाना और मादक पदार्थों के मामलों में सज़ा की दर में सुधार करना है।
  • रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG): NARIT AI एक बंद और सत्यापित डेटाबेस पर कार्य करता है, जो ‘हैलुसिनेशन’ (गलत परिणामों) को कम करता है और यह सुनिश्चित करता है कि सभी मार्गदर्शन कानूनी वास्तविकता पर आधारित हों।
  • डेटा स्रोत: यह सिस्टम सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों, NDPS अधिनियम, 1985 और नए आपराधिक कानूनों जैसे BNS, BNSS एवं BSA पर प्रशिक्षित है।
  • प्रमुख कार्य और क्षमताएँ: जाँच अधिकारी (IOs) प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) अपलोड करते हैं और यह टूल मामले की ताकत तथा कमज़ोरियों को उजागर करते हुए एक संरचित रिपोर्ट तैयार करता है।
    • प्रक्रियात्मक अनुपालन: यह चरण-दर-चरण मार्गदर्शन, साक्ष्य चेकलिस्ट और ‘क्या करें और क्या न करें’ (Do’s and Don’ts) प्रदान करता है ताकि उन तकनीकी कमियों को रोका जा सके, जिनकी वजह से अक्सर आरोपी बरी हो जाते हैं।
    • अनुमानित अदालती रणनीति: एक अनूठी विशेषता टूल को संभावित बचाव पक्ष के तर्कों का पूर्वानुमान लगाने और पिछले न्यायिक उदाहरणों के आधार पर उनका खंडन सुझाने की अनुमति देती है।
  • रणनीतिक महत्त्व: सभी रैंकों के अधिकारियों को उच्च-स्तरीय कानूनी विशेषज्ञता प्रदान करके, यह टूल विशिष्ट जाँचकर्त्ताओं के एक छोटे समूह पर निर्भरता कम करता है, जिससे पूरी प्रक्रिया तीव्र हो जाती है।
    • जीरो-टॉलरेंस नीति: इसका कार्यान्वयन नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों के खिलाफ गुजरात के कड़े रुख के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य तकनीक-आधारित पुलिसिंग के माध्यम से नार्कोटिक्स नेटवर्क को समाप्त करना है।
    • निजी प्रणाली: गुजरात उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, NARIT AI को आंतरिक पुलिस उपयोग के लिये एक निजी प्रणाली के रूप में वर्गीकृत किया गया है और यह जनता के लिये सुलभ नहीं है।
  • बदलाव का प्रतीक: NARIT AI का लॉन्च भारतीय कानून प्रवर्तन में एक बड़े बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो मैन्युअल प्रक्रिया से तकनीक-संवर्द्धित अभियोजन की ओर बढ़ रहा है।

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