रैपिड फायर
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग नीति पर निर्देश दिये
भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने सभी राज्य सरकारों को तीन महीने के भीतर पुलिस-मीडिया ब्रीफिंग के लिये एक व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। यह नीति, अमिकस क्यूरी (न्यायालय द्वारा आमंत्रित कानूनी विशेषज्ञ) गोपाल शंकरनारायणन द्वारा तैयार किये गए मैनुअल के आधार पर बनाई जाएगी, ताकि पारदर्शिता और आरोपी के अधिकारों के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
- मामले की पृष्ठभूमि: यह निर्देश 'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़' (PUCL), एक नागरिक अधिकार NGO, के नेतृत्व में दायर याचिकाओं के एक समूह से उत्पन्न हुआ है।
- यही NGO वर्ष 2014 के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले (PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य, 2014) में भी मुख्य भूमिका निभाया, जिसमें पुलिस मुठभेड़ों और न्यायालय के बाहर हत्याओं की जाँच के लिये 16 अनिवार्य दिशा-निर्देश तय किये गए थे।
- गोपाल शंकरनारायणन पुलिस मैनुअल: इसमें अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को शामिल किया गया है।
- यह मैनुअल एक "सिद्धांतपूर्ण, अधिकार-संगत और सुरक्षित जाँच ढाँचा" स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जो पीड़ितों, गवाहों और संदिग्धों की गरिमा, गोपनीयता और निष्पक्ष परीक्षण के अधिकारों की सुरक्षा करता है, साथ ही जनता की सटीक जानकारी की आवश्यकता को भी पूरा करता है।
- मैनुअल में यह कहा गया है कि पुलिस-मीडिया ब्रीफिंग का उद्देश्य स्पष्ट और विशेष होना चाहिये: नुकसान को रोकना, अफवाहों को सही करना, जनता का सहयोग प्राप्त करना और कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।
- भ्रामक सूचना पर नियंत्रण: "सोशल मीडिया युग" को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि पुलिस केवल सही, सत्यापित और आवश्यक जानकारी ही जारी करे, ताकि ऐसे झूठे समाचारों का प्रसार रोका जा सके जो सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित कर सकते हैं।
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और पढ़ें: भारत में उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग का भविष्य-निर्माण |
रैपिड फायर
तमिलनाडु ने तीसरी भाषा पर UGC सर्कुलर का विरोध किया
तमिलनाडु ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उस सर्कुलर का औपचारिक रूप से विरोध किया है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में तीसरी भाषा अनिवार्य करता है, इसे ‘हिंदी लागू करने का अप्रत्यक्ष प्रयास’ करार दिया और राज्य की ऐतिहासिक द्विभाषा नीति के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।
- त्रि-भाषा सूत्र की अस्वीकृति: तमिलनाडु ने केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 में प्रस्तावित त्रि-भाषा सूत्र को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया और हालिया UGC सर्कुलर को राज्य नीति का उल्लंघन मानते हुए विरोध जताया।
- NEP 2020 बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है और छात्रों को तीन भाषाएँ सीखने की आवश्यकता बताती है, जिनमें कम-से-कम दो भाषाएँ भारतीय मूल की (जिसमें एक क्षेत्रीय भाषा शामिल) होनी चाहिये। तीसरी भाषा अंग्रेज़ी या कोई अन्य आधुनिक भारतीय/विदेशी भाषा हो सकती है।
- द्विभाषा नीति का पालन: तमिलनाडु की राज्य शिक्षा नीति अब भी द्विभाषा सूत्र (तमिल और अंग्रेज़ी) को बनाए रखती है, जो मूल रूप से पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई द्वारा 1968 में तैयार की गई थी।
- राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में यह अपनी भाषा नीति में किसी भी परिवर्तन को स्वीकार नहीं करेगी।
- यह मुद्दा शिक्षा पर केंद्र-राज्य तनाव को भी उजागर करता है, जो संविधान की समानवर्ती सूची (Concurrent List) में शामिल है।
- वर्ष 2022 में, विधानसभा ने एकमत से संघ सरकार से अनुरोध किया कि वह संसदीय समिति ऑन ऑफिशियल लैंग्वेज की अनुशंसाएँ लागू न करे, जिनमें केंद्रीय संस्थानों में हिंदी को शिक्षण माध्यम बनाने का प्रस्ताव शामिल था।
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और पढ़ें: त्रि-भाषा फॉर्मूला |
रैपिड फायर
आसियान-भारत डिजिटल मंत्री बैठक
छठी आसियान-भारत डिजिटल मंत्री बैठक (ADGMIN) की सह-अध्यक्षता भारत और वियतनाम द्वारा आभासी रूप से की गई, जिसका विषय था "अनुकूलनशील आसियानः कनेक्टिविटी से संबद्ध बुद्धिमत्ता तक"।
- ADGMIN 11 आसियान के सदस्य देशों और आसियान के संवाद भागीदारों, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, के दूरसंचार और डिजिटल मंत्रियों का एक वार्षिक मंच है।
छठी ADGMIN बैठक के मुख्य बिंदु:
- संयुक्त वक्तव्य: बैठक में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे (DPI), वित्तीय प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्षमता निर्माण और सतत वित्तपोषण पर सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अपनाए गए 'डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाने पर आसियान-भारत संयुक्त वक्तव्य' (2024) को स्वीकृति प्रदान की गई।
- कार्ययोजना एवं वित्तपोषण: ASEAN–भारत 2025 डिजिटल कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा की गई तथा ASEAN–भारत 2026 डिजिटल कार्ययोजना का स्वागत किया गया।
- बैठक में ‘आसियान-भारत फंड फॉर डिजिटल फ्यूचर’ के संचालन की औपचारिक शुरुआत की भी घोषणा की गई। यह फंड भारत और ASEAN के बीच डिजिटल परिवर्तन तथा साइबर सुरक्षा जैसी संबद्ध प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संयुक्त पहलों को समर्थन प्रदान करेगा।
- भारत का डिजिटल प्रदर्शन: भारत ने अपनी तीव्र डिजिटल रूपांतरण यात्रा को उजागर किया, जिसमें लगभग सार्वभौमिक 4G कवरेज, दुनिया में सबसे तेज़ 5G रोलआउट, ग्रामीण क्षेत्रों के लिये भारतनेट और मोबाइल निर्माण पर प्रकाश डाला गया।
- भारत ने अपने DPI (आधार, UPI, डिजिलॉकर) और संचार साथी पहल में विशेषज्ञता साझा करने की पेशकश की।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर ध्यान: भारत ने सुरक्षित और विश्वसनीय AI पर केंद्रित अपने इंडियाAI मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत की और आसियान के साथ AI क्षमता निर्माण, मानक विकास और व्यावहारिक उपयोग के मामलों पर सहयोग करने की तत्परता व्यक्त की।
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और पढ़ें: भारत-आसियान संबंधों का नया युग |
प्रारंभिक परीक्षा
MSDE–WEF इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर
चर्चा में क्यों?
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने भारत के कौशल विकास तथा तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET) व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्व आर्थिक मंच (WEF) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं।
- इस MoU के तहत, साझेदार भारत में कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करेंगे ताकि नवोन्मेषी समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके और उभरते कौशल अंतर को दूर किया जा सके।
MSDE–WEF इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर क्या है?
- परिचय: यह एक बहु-हितधारक मंच है जो सरकार, उद्योग, अकादमिक क्षेत्र और वैश्विक संस्थानों को एक साथ लाता है ताकि भारत के कार्यबल में मौजूदा और उभरते कौशल अंतरालों को दूर किया जा सके।
- उद्देश्य: एक्सेलेरेटर का उद्देश्य कौशल-विकास पहलों को विकसित हो रहे उद्योग और वैश्विक श्रम-बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है, साथ ही नवाचारपूर्ण कौशल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करना और सार्वजनिक-निजी साझेदारियों को सशक्त बनाना भी इसका लक्ष्य है।
- यह पहल लचीले एवं उद्योग-संबद्ध पाठ्यक्रमों को समर्थन प्रदान करेगी, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा संबंधी मार्गों के एकीकरण को बढ़ावा देगी, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को सक्षम बनाएगी तथा कौशल विकास हेतु नवोन्मेषी, परिणाम-आधारित वित्तपोषण को प्रोत्साहित करेगी।
- महत्त्व: TVET पारिस्थितिक तंत्र को मज़बूत करके यह पहल भारतीय युवाओं की वैश्विक रोज़गार-क्षमता को बढ़ाती है और भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त को एक कुशल, भविष्योन्मुख कार्यबल में बदलने में मदद करती है।
- यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 का पूरक है, क्योंकि यह व्यावसायिक शिक्षा को सामान्य शिक्षा के साथ एकीकृत करता है और जीवनपर्यंत शिक्षा को बढ़ावा देता है।
- यह पहल विकसित भारत @2047 के लिये एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित की गई है, जिसका उद्देश्य भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त (25 वर्ष से कम आयु की 500 मिलियन से अधिक जनसंख्या) को आर्थिक नेतृत्व में रूपांतरित करना है।
भारत में TVET क्षेत्र को सशक्त बनाने वाली प्रमुख पहलें कौन-कौन सी हैं?
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योजना/कार्यक्रम |
लक्षित समूह |
मुख्य विशेषताएँ / उद्देश्य |
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देश भर के युवा |
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ग्रामीण आबादी सहित युवा |
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निरक्षर, नवसाक्षर, स्कूल छोड़ने वाले (15-45 वर्ष) |
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शिक्षु और औद्योगिक प्रतिष्ठान |
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दीर्घकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवा |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. ‘इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर’ क्या है?
यह MSDE-WEF साझेदारी के तहत एक बहु-हितधारक मंच है, जिसका उद्देश्य उद्योग-संरेखित कौशल मॉडल के माध्यम से वर्तमान और भविष्य के कौशल-अंतराल को दूर करना है।
2. MSDE-WEF समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
वैश्विक श्रम-बाज़ार आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास को संरेखित करना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुदृढ़ करना तथा नवोन्मेषी TVET समाधानों का विस्तार करना।
3. यह पहल NEP 2020 को कैसे समर्थन देती है?
यह व्यावसायिक शिक्षा को सामान्य एवं उच्च शिक्षा के साथ एकीकृत करती है, अनुकूलनशील पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देती है तथा आजीवन सीखने को प्रोत्साहित करती है।
4. भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिये स्किल्स एक्सेलेरेटर क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह 25 वर्ष से कम आयु के 50 करोड़ से अधिक युवाओं की रोज़गार-क्षमता बढ़ाकर एक भविष्योन्मुख और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्द्धी कार्यबल के निर्माण में सहायक है।
5. भारत के TVET क्षेत्र की मुख्य योजनाएँ कौन-सी हैं?
स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जन शिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) तथा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS)।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
- यह श्रम और रोज़गार मंत्रालय की प्रमुख योजना है।
- यह अन्य बातों के अलावा सॉफ्ट स्किल्स, उद्यमिता, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण भी प्रदान करना।
- इसका उद्देश्य देश के अनियमित कार्यबल की दक्षताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे के अनुरूप बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
रैपिड फायर
ग्रंथ कुटीर
हाल ही में भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में ग्रंथ कुटीर का उद्घाटन किया।
ग्रंथ कुटीर
- परिचय: ग्रंथ कुटीर भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला एक समर्पित पुस्तक गृह है।
- इसमें तमिल, संस्कृत, कन्नड़, मलयालम और मराठी सहित 11 भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के ग्रंथ संगृहीत हैं, जिनमें लगभग 2,300 पुस्तकें और करीब 50 पांडुलिपियाँ शामिल हैं।
- कई पांडुलिपियाँ ताड़पत्र, कागज़, वृक्ष की छाल और वस्त्र जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर हस्तलिखित हैं।
- कवरेज: यह संग्रह महाकाव्यों, दर्शनशास्त्र, भाषाविज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान, भक्ति साहित्य तथा भारत के संविधान से संबंधित कृतियों को समाहित करता है।
- सहयोग: इसका विकास केंद्र और राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों तथा व्यक्तिगत दाताओं के सहयोग से किया गया है।
- इस पहल को शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के विशेषज्ञ मार्गदर्शन का समर्थन प्राप्त है।
- महत्त्व: इसका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा विविधता में एकता को प्रोत्साहित करना है।
- यह ज्ञान भारतम मिशन का समर्थन करता है तथा भारत की शास्त्रीय भाषाओं और ज्ञान परंपराओं के संरक्षण, संवर्द्धन एवं प्रसार के प्रयासों को सुदृढ़ करता है।
प्रारंभिक परीक्षा
पद्म पुरस्कार 2026
77वें गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने 131 लोगों को दिये जाने वाले 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची को अनुमोदित किया, जिसमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं।
पद्म पुरस्कार क्या हैं?
- परिचय: पद्म पुरस्कार, भारत रत्न के साथ, देश के सर्वोच्च पुरस्कार हैं जो सार्वजनिक सेवा और मानव प्रयास के सभी क्षेत्रों में असाधारण योगदान को पहचानने के लिये प्रदान किये जाते हैं।
- ऐतिहासिक विकास: पद्म पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी। शुरुआत में दो नागरिक पुरस्कार- भारत रत्न (सर्वोच्च) और पद्म विभूषण (जिसकी तीन श्रेणियाँ थीं) स्थापित किये थे। वर्ष 1955 में पद्म विभूषण की श्रेणियों को पुनर्गठित कर प्रतिष्ठा के क्रम में तीन अलग-अलग पुरस्कारों में बदल दिया गया।
- पद्म विभूषण: "असाधारण और विशिष्ट सेवा" के लिये; भारत रत्न के बाद दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार।
- पद्म भूषण: "उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा" के लिये।
- पद्म श्री: "किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा" के लिये।
- व्यापक क्षेत्र: ये पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में दिये जाते हैं, जिनमें कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, नागरिक सेवा तथा अन्य शामिल हैं।
- पात्रता: ये पुरस्कार सभी व्यक्तियों के लिये हैं, चाहे उनकी जाति, व्यवसाय, पद या लिंग कुछ भी हो जिसमें भारतीय नागरिक, विदेशी, NRI, PIO और OCI शामिल हैं।
- वर्ष 2014 से सरकार "अपरिचित नायकों" को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित कर रही है, जिससे इन्हें "जनता का पद्म" के रूप में मान्यता मिली है।
- चयन प्रक्रिया: इसे पद्म पुरस्कार समिति के माध्यम से संचालित किया जाता है, जिसका गठन प्रतिवर्ष प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है। इस समिति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करते हैं और इसमें गृह सचिव, राष्ट्रपति के सचिव तथा 4–6 प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होते हैं। समिति की सिफारिशें अंतिम मंज़ूरी के लिये प्रधानमंत्री और भारत के राष्ट्रपति के पास भेजी जाती हैं।
- समिति की सिफारिशों के आधार पर इसे प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर घोषित किया जाता है और मार्च/अप्रैल में भारत के राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से प्रदान किया जाता है। पुरस्कार विजेताओं को एक सनद (प्रमाण पत्र), एक पदक (मेडल) और एक प्रतिकृति दी जाती है।
- मुख्य नियम: सामान्यतः यह पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिया जाता, केवल कुछ अत्यंत योग्य और दुर्लभ मामलों में ही अपवाद बनता है।
- उच्च श्रेणी का पद्म पुरस्कार केवल पिछले पद्म पुरस्कार के कम-से-कम पाँच वर्षों बाद ही दिया जा सकता है।
- यह पुरस्कार कोई उपाधि नहीं है और इसे नाम के पहले या बाद में प्रयोग नहीं किया जा सकता।
- प्रतिवर्ष (मरणोपरांत, NRI, विदेशी और OCI प्राप्तकर्त्ताओं को छोड़कर) अधिकतम 120 पुरस्कारों तक सीमित हैं।
उपाधियों का उन्मूलन (संविधान का अनुच्छेद 18)
- परिचय: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 18(1) सामाजिक समतावादी सिद्धांत को मूर्त रूप देता है। इसके अंतर्गत सभी प्रकार की उपाधियों का उन्मूलन किया गया है तथा राज्य को किसी भी व्यक्ति — चाहे वह नागरिक हो या गैर-नागरिक — को उपाधि प्रदान करने से निषिद्ध किया गया है।
- उपाधि से आशय ऐसे वंशानुगत या स्थायी उपसर्ग/प्रत्यय से है (जैसे—राय बहादुर, नवाब), जो किसी नाम के साथ जुड़कर कृत्रिम सामाजिक भेद और दर्जे का अंतर उत्पन्न करता है।
- मुख्य अपवाद: इस निषेध के दो स्पष्ट अपवाद हैं — सैन्य सम्मान तथा शैक्षणिक उपाधियाँ/सम्मान। अतः विश्वविद्यालय शैक्षणिक सम्मान प्रदान कर सकते हैं और राज्य सैन्य पुरस्कार प्रदान कर सकता है।
- वर्ष 1978, 1979 तथा 1993 से 1997 के बीच पद्म पुरस्कार प्रदान नहीं किये गए।
- न्यायिक व्याख्या:
- बालाजी राघवन बनाम भारत संघ, 1996: सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म श्री जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत उपाधि नहीं माने जाते।
- ये वंशानुगत या व्यक्तिगत दर्जा प्रदान नहीं करते, बल्कि असाधारण कार्य और योग्यता के लिये राज्य द्वारा दी गई मान्यता है।
- इंदिरा जयसिंह बनाम भारत का सर्वोच्च न्यायालय, 2017: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ का पदनाम अनुभव और दक्षता का पेशेवर वर्गीकरण है, न कि कोई उपाधि; अतः यह अनुच्छेद 18 का उल्लंघन नहीं करता।
- बालाजी राघवन बनाम भारत संघ, 1996: सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म श्री जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत उपाधि नहीं माने जाते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. पद्म पुरस्कार क्या हैं?
पद्म पुरस्कार भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान हैं, जिसकी स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी। इनका उद्देश्य लोक सेवा और मानवीय प्रयास के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट और असाधारण सेवा को मान्यता प्रदान करना है।
2. पद्म पुरस्कारों को अनुच्छेद 18 के तहत "उपाधि" क्यों नहीं माना जाता है?
सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि पद्म पुरस्कार योग्यता पर आधारित, गैर-वंशानुगत सम्मान हैं; ये नाम के साथ लगाए जाने वाले उपसर्ग या प्रत्यय नहीं हैं, इसलिये अनुच्छेद 18(1) का उल्लंघन नहीं करते।
3. पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्त्ताओं के चयन की देखरेख कौन करता है?
प्रधानमंत्री द्वारा नामित और कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली पद्म पुरस्कार समिति नामांकनों की समीक्षा करती है और अनुशंसाएँ प्रस्तुत करती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)
- भारत रत्न और पद्म पुरस्कार भारत के संविधान के अनुच्छेद 18 (1) के अंतर्गत उपाधियाँ हैं।
- वर्ष 1954 में प्रारंभ किये गए पद्म पुरस्कारों को केवल एक बार निलंबित किया गया था।
- किसी वर्ष-विशेष में भारत रत्न पुरस्कारों की अधिकतम संख्या पाँच तक सीमित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही नहीं हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
रैपिड फायर
हिमाचल प्रदेश का 56वाँ राज्य स्थापना दिवस
प्रधानमंत्री ने 25 जनवरी, 2026 को हिमाचल प्रदेश के 56वें राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
हिमाचल प्रदेश
- राज्य स्थापना का विकास: हिमाचल प्रदेश पहले 15 अप्रैल, 1948 को एक चीफ कमिश्नर प्रांत बना, और 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने पर यह पार्ट-C राज्य में परिवर्तित हो गया।
- यह वर्ष 1956 तक पार्ट-C राज्य बना रहा, जब राज्यों के पुनर्गठन आयोग (SRC) ने राज्यों की पार्ट A, B और C श्रेणियों को समाप्त कर दिया।
- 1 नवंबर, 1956 को वर्ष 1953 में गठित SRC की सिफारिशों के आधार पर इसे एक केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
- 1 नवंबर, 1966 को एक बड़ा भौगोलिक परिवर्तन हुआ, जब पंजाब के पहाड़ी क्षेत्र (जिनमें काँगड़ा, कुल्लू, लाहुल-स्पीति शामिल हैं) हिमाचल प्रदेश में शामिल किये गए, हालाँकि यह तब भी एक केंद्रशासित प्रदेश ही बना रहा।
- 25 जनवरी, 1971 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और यह भारत का 18वाँ राज्य बना, जिसे हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम, 1970 के माध्यम से स्थापित किया गया।
- भौगोलिक संदर्भ: "हिमाचल" नाम संस्कृत के "हिमा" (हिम) और "आंचल" (गोद) से लिया गया है। यह जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड के साथ सीमाएँ साझा करता है तथा चीन के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा भी रखता है।
नोट: उत्तर प्रदेश दिवस प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है, जो राज्य की स्थापना का प्रतीक है। 24 जनवरी, 1950 को ही पूर्ववर्ती 'यूनाइटेड प्रोविंस' का नाम बदलकर 'उत्तर प्रदेश' रखा गया था।
- राज्य सरकार द्वारा इस दिवस को मनाने की आधिकारिक घोषणा वर्ष 2017 में की गई थी, जबकि इसका उद्घाटन समारोह (पहला आयोजन) वर्ष 2018 में आयोजित किया गया था।
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और पढ़ें: भारत में राज्यों का पुनर्गठन |
प्रारंभिक परीक्षा
राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है। यह भारत की लैंगिक असमानता समाप्त करने और बालिकाओं के समग्र विकास के माध्यम द्वारा उनके सशक्तीकरण को प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि करने का एक महत्त्वपूर्ण मंच है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस क्या है?
- परिचय: इसे वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा शुरू किया गया था। यह दिवस लैंगिक भेदभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समान अवसरों को बढ़ावा देने तथा बालिकाओं को सशक्त नागरिक बनने के लिये एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने का मंच है।
- यह दिवस बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को उजागर करता है और लैंगिक भेदभाव, भ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी समस्याओं को संबोधित करता है।
बालिका विकास हेतु पहलें एवं उनके परिणाम:
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पहल |
मुख्य विशेषताएँ |
परिणाम |
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) |
इसे वर्ष 2015 में शुरू किया गया। इसका ध्यान लिंग-भेद आधारित लिंग चयन को रोकना, जीवन और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शिक्षा को बढ़ावा देने पर है। मिशन शक्ति की ‘संभल’ उप-योजना का हिस्सा। |
जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) ~918 (2014-15) से बढ़कर 930 (2023-24) हो गया है। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं का नामांकन भी बढ़ा है। |
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मिशन शक्ति |
छत्र योजना (2022) जिसमें दो उप-योजनाएँ शामिल हैं: संभल (सुरक्षा) और समर्थ्य (सशक्तीकरण)। इसका उद्देश्य जीवन-चक्र समर्थन प्रदान करना है। |
यह BBBP, वन स्टॉप सेंटर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं का समन्वय सुनिश्चित करता है। |
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समग्र शिक्षा |
स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक शिक्षा से कक्षा XII तक) के लिये एक एकीकृत योजना। लिंग/सामाजिक अंतर को पाटना, अलग शौचालय, छात्रवृत्ति, लिंग-संवेदनशील शिक्षण पर मुख्य ध्यान। |
माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के लिये सकल नामांकन अनुपात (GER) 2024-25 में 80.2% पहुँच गया। 97.5% स्कूलों में बालिकाओं के लिये शौचालय हैं। |
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विज्ञान ज्योति (DST) |
कक्षा IX-XII की लड़कियों (विशेषतः ग्रामीण) को काउंसलिंग, लैब विज़िट, वर्कशॉप वगैरह के ज़रिये STEM में कॅरियर बनाने के लिये प्रोत्साहित करता है। |
35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 300 ज़िलों में 80,000 से अधिक होनहार लड़कियों को सपोर्ट किया। |
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बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान |
बाल विवाह पर रोक लगाता है; वर्ष 2024 के अभियान का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाना है। |
कम उम्र में विवाह रोकने के लिये कानूनी आधार; अभियान का लक्ष्य 2026 तक इसके प्रचलन में 10% की कमी लाना है। |
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किशोरियों के लिये योजना (SAG) |
आकांक्षी ज़िलों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 14-18 वर्ष की लड़कियों के लिये। पोषण (600 kcal/दिन, 18-20g प्रोटीन और 300 दिनों के लिये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) और गैर-पोषण घटक (आयरन-फोलिक एसिड, स्वास्थ्य जाँच, कौशल विकास) प्रदान करती है। |
पोषण ट्रैकर पर 24.08 लाख से अधिक किशोरियाँ रजिस्टर्ड हैं (दिसंबर 2024)। |
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सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) |
लड़कियों की शिक्षा/विवाह के लिये बचत योजना। BBBP के भाग के तौर पर वर्ष 2015 में शुरू की गई। |
4.2 करोड़ से अधिक खाते खोले गए (नवंबर 2024 तक), जिससे फाइनेंशियल इन्क्लूजन और लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी को बढ़ावा मिला है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. राष्ट्रीय बालिका दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 24 जनवरी को भारत में लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को बढ़ावा देने के लिये मनाया जाता है।
2. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
BBBP (2015) का उद्देश्य लिंग-आधारित भ्रूण चयन को रोकना, लड़कियों के जीवित रहने और संरक्षण को सुनिश्चित करना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना है, जिससे लिंगानुपात (SRB) में सुधार लाने में योगदान मिलता है।
3. मिशन शक्ति क्या है और इसकी उप-योजनाएँ क्या हैं?
मिशन शक्ति (2022) एक सर्वांगीण योजना है, जिसमें संबल (सुरक्षा/संरक्षा) और सामर्थ्य (सशक्तीकरण) शामिल हैं, जो BBBP, वन स्टॉप सेंटर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) आदि जैसे हस्तक्षेपों को एकीकृत करती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प विश्व के देशों को 'ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स' की रैंकिंग प्रदान करता है? (2017)
(a) विश्व आर्थिक मंच
(b) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद
(c) UN वुमन
(d) विश्व स्वास्थ्य संगठन
उत्तर: (a)
प्रश्न. भारत सरकार द्वारा महिला विकास के लिये शुरू की गई दो योजनाएँ स्वाधार और स्वयंसिद्ध हैं। इनके बीच अंतर के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2010)
- स्वयंसिद्ध योजना उन महिलाओं के लिये है जो कठिन परिस्थितियों में हैं, जैसे– प्राकृतिक आपदाओं या आतंकवाद से पीड़ित महिलाएँ, जेलों से रिहा हुई महिला कैदी, मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण महिलाएँ आदि; जबकि स्वाधार योजना स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के समग्र सशक्तीकरण के लिये है।
- स्वयंसिद्ध का कार्यान्वयन स्थानीय स्वशासी निकायों या प्रतिष्ठित स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से किया जाता है, जबकि स्वाधार का कार्यान्वयन राज्यों में स्थापित ICDS इकाइयों के माध्यम से किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (d)
रैपिड फायर
सिक्किम सुंदरी
सिक्किम सुंदरी (रह्यूम नोबिल), जो एक दुर्लभ ऊँचाई वाले हिमालयी पौधे के रूप में जानी जाती है, अपनी विशिष्ट जैविक संरचना और आकर्षक स्वरूप के कारण ध्यान का केंद्र बनी हुई है।
सिक्किम सुंदरी
- परिचय: रह्यूम नोबिल, जिसे आमतौर पर पदमचाल या सिक्किम सुंदरी के नाम से जाना जाता है, हिमालय (4,000-4,800 मीटर) के दुर्लभ ऊँचाई वाले अल्पाइन क्षेत्रों का एक विशाल जड़ी-बूटी वाला बहुवर्षीय पौधा है।
- यह पॉलीगोनेसी परिवार से संबंधित पौधा है और उत्तरी सिक्किम (अल्पाइन दर्रों और हिमनद घाटियों के निकट ट्रैकिंग मार्गों), नेपाल, भूटान, तिब्बत और म्याँमार में पाया जाता है। यह आमतौर पर खुले अल्पाइन ढालों, तीक्ष्ण चट्टानों, हिमनद घाटियों और टुंड्रा जैसे क्षेत्रों में उगता है।
- विशिष्ट आकृति (मॉर्फोलॉजी): इसकी ऊँची, पारदर्शी ब्रैक्ट्स एक प्राकृतिक ग्लासहाउस बनाती हैं, जो ऊष्मा को सँजोकर रखती हैं, पुष्पों को शीतल पवनों और तीव्र पराबैंगनी विकिरण से बचाती हैं और इस पौधे को हिमालयी परिदृश्य के बीच एक दीप्तिमान मीनार जैसी आकृति प्रदान करती हैं।
- उल्लेखनीय जीवन चक्र: एक मोनोकार्पिक पौधा (जो अपने जीवन में केवल एक बार खिलता है) होने के कारण यह 7–30 वर्ष तक एक नीची रोसेट के रूप में ऊर्जा संचित करता है, जिसके बाद यह एक ही बार में ऊँची, पैगोडा जैसी पुष्प-मंजरी में खिलता है, बीज बनाता है और फिर सूख जाता है।
- सांस्कृतिक और औषधीय उपयोग: स्थानीय रूप से इसके तनों का उपयोग उनके अम्लीय स्वाद (चुका) के लिये किया जाता है, हिमालयी एवं तिब्बती चिकित्सा में इसका पारंपरिक औषधीय अनुप्रयोग है।
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