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राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026

  • 27 Jan 2026
  • 40 min read

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है। यह भारत की लैंगिक असमानता समाप्त करने और बालिकाओं के समग्र विकास के माध्यम द्वारा उनके सशक्तीकरण को प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि करने का एक महत्त्वपूर्ण मंच है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस क्या है?

  • परिचय: इसे वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा शुरू किया गया था। यह दिवस लैंगिक भेदभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समान अवसरों को बढ़ावा देने तथा बालिकाओं को सशक्त नागरिक बनने के लिये एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने का मंच है।
    • यह दिवस बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को उजागर करता है और लैंगिक भेदभाव, भ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी समस्याओं को संबोधित करता है।

बालिका विकास हेतु पहलें एवं उनके परिणाम:

पहल


मुख्य विशेषताएँ

परिणाम

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP)

इसे वर्ष 2015 में शुरू किया गया। इसका ध्यान लिंग-भेद आधारित लिंग चयन को रोकना, जीवन और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शिक्षा को बढ़ावा देने पर है। मिशन शक्ति की ‘संभल’ उप-योजना का हिस्सा।

जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) ~918 (2014-15) से बढ़कर 930 (2023-24) हो गया है। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं का नामांकन भी बढ़ा है।

मिशन शक्ति

छत्र योजना (2022) जिसमें दो उप-योजनाएँ शामिल हैं: संभल (सुरक्षा) और समर्थ्य (सशक्तीकरण)। इसका उद्देश्य जीवन-चक्र समर्थन प्रदान करना है।

यह BBBP, वन स्टॉप सेंटर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं का समन्वय सुनिश्चित करता है।

समग्र शिक्षा

स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक शिक्षा से कक्षा XII तक) के लिये एक एकीकृत योजना। लिंग/सामाजिक अंतर को पाटना, अलग शौचालय, छात्रवृत्ति, लिंग-संवेदनशील शिक्षण पर मुख्य ध्यान।

माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के लिये सकल नामांकन अनुपात (GER) 2024-25 में 80.2% पहुँच गया। 97.5% स्कूलों में बालिकाओं के लिये शौचालय हैं।

विज्ञान ज्योति (DST)

कक्षा IX-XII की लड़कियों (विशेषतः ग्रामीण) को काउंसलिंग, लैब विज़िट, वर्कशॉप वगैरह के ज़रिये STEM में कॅरियर बनाने के लिये प्रोत्साहित करता है।

35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 300 ज़िलों में 80,000 से अधिक होनहार लड़कियों को सपोर्ट किया।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान

बाल विवाह पर रोक लगाता है; वर्ष 2024 के अभियान का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाना है।

कम उम्र में विवाह रोकने के लिये कानूनी आधार; अभियान का लक्ष्य 2026 तक इसके प्रचलन में 10% की कमी लाना है।

किशोरियों के लिये योजना (SAG)

आकांक्षी ज़िलों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 14-18 वर्ष की लड़कियों के लिये। पोषण (600 kcal/दिन, 18-20g प्रोटीन और 300 दिनों के लिये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) और गैर-पोषण घटक (आयरन-फोलिक एसिड, स्वास्थ्य जाँच, कौशल विकास) प्रदान करती है।

पोषण ट्रैकर पर 24.08 लाख से अधिक किशोरियाँ रजिस्टर्ड हैं (दिसंबर 2024)।

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)

लड़कियों की शिक्षा/विवाह के लिये बचत योजना। BBBP के भाग के तौर पर वर्ष 2015 में शुरू की गई।

4.2 करोड़ से अधिक खाते खोले गए (नवंबर 2024 तक), जिससे फाइनेंशियल इन्क्लूजन और लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी को बढ़ावा मिला है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. राष्ट्रीय बालिका दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 24 जनवरी को भारत में लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को बढ़ावा देने के लिये मनाया जाता है।

2. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
BBBP (2015) का उद्देश्य लिंग-आधारित भ्रूण चयन को रोकना, लड़कियों के जीवित रहने और संरक्षण को सुनिश्चित करना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना है, जिससे लिंगानुपात (SRB) में सुधार लाने में योगदान मिलता है।

3. मिशन शक्ति क्या है और इसकी उप-योजनाएँ क्या हैं?
मिशन शक्ति (2022) एक सर्वांगीण योजना है, जिसमें संबल (सुरक्षा/संरक्षा) और सामर्थ्य (सशक्तीकरण) शामिल हैं, जो BBBP, वन स्टॉप सेंटर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) आदि जैसे हस्तक्षेपों को एकीकृत करती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प विश्व के देशों को 'ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स' की रैंकिंग प्रदान करता है?  (2017)

(a) विश्व आर्थिक मंच

(b) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

(c) UN वुमन

(d) विश्व स्वास्थ्य संगठन

उत्तर: (a)


प्रश्न. भारत सरकार द्वारा महिला विकास के लिये शुरू की गई दो योजनाएँ स्वाधार और स्वयंसिद्ध हैं। इनके बीच अंतर के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:   (2010)

  1. स्वयंसिद्ध योजना उन महिलाओं के लिये है जो कठिन परिस्थितियों में हैं, जैसे– प्राकृतिक आपदाओं या आतंकवाद से पीड़ित महिलाएँ, जेलों से रिहा हुई महिला कैदी, मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण महिलाएँ आदि; जबकि स्वाधार योजना स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के समग्र सशक्तीकरण के लिये है।
  2. स्वयंसिद्ध का कार्यान्वयन स्थानीय स्वशासी निकायों या प्रतिष्ठित स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से किया जाता है, जबकि स्वाधार का कार्यान्वयन राज्यों में स्थापित ICDS इकाइयों के माध्यम से किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (d)

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