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ध्यान दें:

प्रिलिम्स फैक्ट्स

मुख्य परीक्षा

नागरिक-केंद्रित सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

लैंसेट रिपोर्ट ‘भारत के लिये नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली (A Citizen-Centred Health System for India)’ नागरिक-केंद्रित सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने हेतु एक रोडमैप प्रस्तुत करती है, जो विकसित भारत @2047 की दृष्टि के अनुरूप है।

  • रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि जब विश्व स्वास्थ्य संगठन वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है और अमेरिका वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व से पीछे हट रहा है, तब भारत के पास अपने स्वास्थ्य सेवा वितरण को सुधारने तथा ग्लोबल साउथ के लिये एक प्रबल आवाज़ के रूप में उभरने का अवसर है।

भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पर लैंसेट रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?

  • सार्वजनिक व्यय में गतिरोध: नीति प्रतिबद्धताओं के बावजूद, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय GDP के 2% से कम बना हुआ है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के 2.5% लक्ष्य से पीछे है।
  • अव्यवस्थित स्वास्थ्य प्रबंधन: वर्तमान प्रणाली अलग-अलग साइलो में काम करती है (जैसे- टीबी, मलेरिया, मातृ स्वास्थ्य के लिये अलग कार्यक्रम), जिससे उपचार की निरंतरता का अभाव रहता है। रोगियों को अक्सर एक ही रोग के लिये कई सेवा-प्रदाताओं के बीच जाना पड़ता है।
  • इनपुट-आधारित शासन: स्वास्थ्य प्रशासन सख्त ‘लाइन-आइटम बजट’ पर निर्भर करता है (जिसमें वेतन या निर्माण जैसे विशिष्ट मदों के लिये सख्ती से धन आवंटित किया जाता है), जिससे स्थानीय नवाचार और स्थानीय रोग-भार के प्रति उत्तरदायित्व बाधित होता है।
  • आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (OOPE): भारत में कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 50% OOPE है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में शामिल है।
  • प्राथमिक देखभाल की कमी: रिपोर्ट बताती है कि बीमा योजनाएँ ‘अस्पताल-केंद्रित’ हैं, जिससे बाह्य रोगी उपचार (जहाँ अधिकांश गरीब परिवार पैसा व्यय करते हैं) काफी हद तक असुरक्षित रह जाता है।
  • बाधाओं में प्रतिमान परिवर्तन: रिपोर्ट के अनुसार, भारत में UHC के मार्ग में अब राजनीतिक इच्छाशक्ति, वित्तपोषण या अवसंरचना की कमी (जिनमें विस्तार हुआ है) प्रमुख बाधाएँ नहीं रहीं। इसके बजाय मुख्य चुनौतियाँ असमान गुणवत्ता, खंडन (फ्रैगमेंटेशन) और अप्रभावी शासन हैं।
  • ‘मिसिंग मिडिल’: जहाँ गरीबों के लिये सरकारी योजनाएँ हैं और अमीरों के पास निजी बीमा है, वहीं मध्यम वर्ग को अक्सर बहुत अधिक स्वास्थ्य व्यय उठाना पड़ता है, जबकि उसे सीमित सहायता मिलती है।
  • मानव संसाधन का मूल्यांकन: वर्तमान HR नीति ‘योग्यताओं’ (डिग्रियों) की गिनती पर अत्यधिक ज़ोर देती है, बजाय ‘क्षमताओं, प्रेरणाओं और मूल्यों’ के मूल्यांकन के, जिससे ASHA जैसे अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्त्ताओं का पूरा उपयोग नहीं हो पाता।

सिफारिशें

  • UHC (सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज) का प्राथमिक वाहक: इसके लिये यह सिफारिश की गई कि स्वास्थ्य प्रणाली सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित और सार्वजनिक रूप से प्रदान की जानी चाहिये।
    • निजी क्षेत्र को इस प्रकार संरचित और निर्देशित किया जाना चाहिये कि वह पूरक भूमिका निभाए—विशेषकर उन क्षेत्रों में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को पूरा करे जहाँ सार्वजनिक ढाँचा अपर्याप्त है। साथ ही, मरीज़ों के हित की कीमत पर मुनाफा अधिकतम करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिये उस पर कठोर राज्य विनियमन लागू होना आवश्यक है।
  • वैश्विक बजट और विकेंद्रीकरण की ओर परिवर्तन: कठोर मद-आधारित बजट व्यवस्था से आगे बढ़कर ज़िलों के लिये “वैश्विक बजट” अपनाया जाना चाहिये। इससे स्थानीय प्राधिकरणों को वित्तीय स्वायत्तता मिलेगी, ताकि वे केंद्रीय निर्देशों के बजाय स्थानीय आवश्यकताओं और लक्षित स्वास्थ्य परिणामों के आधार पर संसाधनों का आवंटन कर सकें।
    • पंचायती राज संस्थाओं (PRI) और शहरी स्थानीय निकायों (ULB) को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के प्रबंधन के लिये सशक्त बनाना। रिपोर्ट केरल मॉडल का हवाला देती है, जहाँ स्थानीय सरकारों के पास स्वास्थ्य कार्यप्रणाली पर नियंत्रण है, जिससे बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
  • कार्यस्थल पर काम करने वाले कर्मियों को सशक्त बनाना: मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं (ASHA) को केवल "स्वयंसेवकों" के बजाय मुख्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के रूप में माना जाना चाहिये।
    • सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के पदों का विस्तार करना ताकि वे बुनियादी बाह्य रोगी देखभाल सँभाल सकें, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों पर भार कम हो।
  • प्रौद्योगिकी सक्षम ("पूंजी-कुशल" तकनीक): एक केंद्रीकृत डेटाबेस के बजाय जो गोपनीयता को जोखिम में डालता है, रिपोर्ट एक संघीय डेटा संरचना (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के अनुरूप) की सिफारिश करती है।
    • इसके तहत, रोगी का डेटा स्थानीय स्तर पर (अस्पताल/क्लिनिक में) रहता है और केवल रोगी की स्पष्ट सहमति के साथ "सहमति प्रबंधकों" के माध्यम से साझा किया जाता है।
    • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) को प्रभावी ढंग से लागू करके और आवश्यकता के बिंदु पर देखभाल के लिये AI तथा जीनोमिक्स को तैनात करके, समुदायों को उन्नत नैदानिक सेवाएँ उनके नज़दीक प्रदान की जा सकती हैं, जिससे ग्रामीण मरीज़ों को शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम हो जाती है।
  • नागरिक संबद्धता: जन सुनवाई (पब्लिक हियरिंग) और रोगी कल्याण समितियों जैसे सार्वजनिक भागीदारी के लिये औपचारिक तंत्र का निर्माण करना, जिनके पास स्वास्थ्य केंद्रों का ऑडिट करने के वास्तविक अधिकार हो।
    • स्वतंत्र, ज़िला-स्तरीय शिकायत निवारण निकाय स्थापित करना, जहाँ नागरिक बदले की भावना के बगैर सेवा से वंचित किये जाने या भ्रष्टाचार की रिपोर्ट कर सकें।

निष्कर्ष

“वैश्विक बजट” और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का उपयोग करके “मिसिंग मिडिल” की कमी को कम करते हुए, भारत स्वास्थ्य सेवा को एक महँगे विशेषाधिकार से बदलकर एक सुलभ अधिकार में परिवर्तित कर सकता है। यह संरचनात्मक सुधार विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिये आवश्यक स्वस्थ मानव पूंजी सुनिश्चित करने की एक अनिवार्य शर्त है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में बाधाएँ अब संसाधनों से अधिक शासन से जुड़ी हैं। चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का वर्तमान सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय कितना है?
भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अभी भी GDP का 2% से कम है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017) का लक्ष्य इसे 2.5% तक बढ़ाना था।

2. भारत में स्वास्थ्य व्यय का कितना हिस्सा आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (OOPE) होता है?
भारत में स्वास्थ्य व्यय का लगभग 50% भाग आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (OOPE) से होता है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में से एक है।

3. रिपोर्ट के अनुसार भारत के स्वास्थ्य शासन में किस संरचनात्मक समस्या की पहचान करती है?
इस प्रणाली में लाइन-आइटम बजटिंग का पालन किया जाता है, जिससे वित्तीय लचीलापन, स्थानीय      नवाचार और परिणाम आधारित जवाबदेही पर प्रतिबंध लग जाता है।

4. स्वास्थ्य प्रणाली के समन्वय के लिये किस डिजिटल मिशन पर बल दिया गया है?
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) को इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना सक्षम बनाने के लिये हाइलाइट किया गया है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स

प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-से 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के उद्देश्य हैं? (2017)

  1. गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना।  
  2. छोटे बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया के मामलों को कम करना।  
  3. बाजरा, मोटे अनाज और बिना पॉलिश किये चावल की खपत को बढ़ावा देना।  
  4. पोल्ट्री अंडे की खपत को बढ़ावा देना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a)  केवल 1 और 2

(b) केवल 1, 2 और 3

(c) केवल 1, 2 और 4

(d) केवल 3 और 4

उत्तर: A


मेन्स

प्रश्न. "एक कल्याणकारी राज्य की नैतिक अनिवार्यता के अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना धारणीय विकास की एक आवश्यक पूर्व शर्त है।" विश्लेषण कीजिये।  (2021)


प्रारंभिक परीक्षा

DTAA पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है टाइगर ग्लोबल द्वारा 2018 में फ्लिपकार्ट में अपनी 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने से हुई आय भारत में कर योग्य है। न्यायालय ने भारत-मॉरीशस 'दोहरे कराधान बचाव समझौते' (DTAA) के लाभों को देने से इनकार कर दिया और इस सौदे पर 'जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल्स' (GAAR) के तहत कर लगाया है।

टाइगर ग्लोबल मामले से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • मुख्य कानूनी विवाद: एक प्रमुख उद्यम पूंजी निवेशक, टाइगर ग्लोबल ने वर्ष 2018 में फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट को 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर में बेच दी थी। इसके बाद 'पूंजीगत लाभ कर' की देनदारी को लेकर भारतीय कर अधिकारियों के साथ एक कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।
    • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अगस्त 2024 में आए दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय को निरस्त कर दिया, जिसमें DTAA लाभों को खारिज करने वाले अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (AAR) के आदेश को रद्द किया गया था।
      • AAR एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय है, जो विशिष्ट कर संबंधी प्रश्नों पर बाध्यकारी निर्णय देता है। इसका उद्देश्य लेन-देन से पहले करदाताओं को स्पष्टता प्रदान करना, अनिश्चितता कम करना और संभावित मुकदमेबाज़ी को कम करना है।
  • सर्वोच्च न्यायालय की कानूनी तर्कप्रणाली: सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि DTAA के लाभ स्वचालित रूप से नहीं दिये जा सकते और न्यायालय ने केवल टैक्स रेज़िडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) की प्रस्तुति को कर छूट का पर्याप्त आधार मानने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारत–मॉरीशस DTAA तभी लागू होता है जब परिसंपत्तियों का प्रत्यक्ष स्वामित्व मॉरीशस की इकाई के पास हो। निर्णय में आर्थिक वास्तविकता, नियंत्रण और प्रबंधन पर ज़ोर देते हुए यह निष्कर्ष निकाला गया कि संबंधित इकाइयों का “हेड और ब्रेन” मॉरीशस में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से अमेरिका में स्थित था।
    • TRC किसी देश के कर प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया प्रमाण-पत्र होता है, जो किसी निश्चित अवधि के लिये किसी इकाई की कर निवासिता की पुष्टि करता है। यह दोहरे कराधान से बचाव जैसे DTAA लाभों का उपभोग करने के लिये आवश्यक होता है।
  • AAR और उच्च न्यायालय की भूमिका: AAR के वर्ष 2020 के आदेश में DTAA के शुल्क-मुक्ति लाभों को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया गया कि निवेश संरचना प्रथम दृष्टया कर बचाव के लिये बनाई गई थी। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस निष्कर्ष को मनमाना बताते हुए रद्द कर दिया। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बदलते हुए AAR के रूप से अधिक वास्तविकता के दृष्टिकोण को पुनः स्थापित किया।
    • कराधान में शुल्क-मुक्ति एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत नए कर कानूनों से पहले किये गए मौजूदा निवेशों को पुराने और अधिक अनुकूल नियमों के अनुसार कराधान की सुरक्षा दी जाती है। भारत–मॉरीशस DTAA के अंतर्गत, 1 अप्रैल 2017 से पहले किये गए निवेशों से होने वाले पूंजीगत लाभ को शुल्क-मुक्ति संरक्षण प्राप्त था, इन निवेशों पर केवल मॉरीशस में कर लगता था—यानी भारत में 0% कर—भले ही बाद में संधि में संशोधन कर दिया गया हो।
  • निहितार्थ: यह फैसला एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है, क्योंकि अब केवल निवास प्रमाण-पत्र के आधार पर स्वतः DTAA लाभ का दावा स्वीकार्य नहीं रहेगा। निवेशकों को यह सिद्ध करना होगा कि उनके पास वास्तविक आर्थिक उपस्थिति है, निर्णय लेने की स्वतंत्र क्षमता है तथा DTAA लाभ प्राप्त करने के पीछे ठोस और वैध व्यावसायिक औचित्य मौजूद है।
    • निवेशकों को अब बढ़े हुए कर संबंधी विवाद (टैक्स लिटिगेशन) के जोखिम का सामना करना पड़ेगा, हालाँकि इससे टैक्स इंश्योरेंस जैसे उपकरण दुर्लभ और महँगे होने की उम्मीद है।
    • यह निर्णय भारतीय स्टार्टअप फंडिंग में व्यापक गिरावट के बीच आया है। वर्ष 2025 में फंडिंग घटकर 10.5 अरब डॉलर रह गई, जो वर्ष 2024 की तुलना में 17% की कमी को दर्शाता है। इसमें सीड-स्टेज (30% की कमी) और लेट-स्टेज फंडिंग (26% की कमी) में महत्त्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है।

दोहरा कराधान अपवंचन समझौता (DTAA)

  • परिचय: DDTAA दो संप्रभु देशों के बीच (कभी-कभी बहुपक्षीय रूप में) किया गया एक समझौता होता है, जिसका उद्देश्य सीमा पार गतिविधियों से उत्पन्न आय या पूंजीगत लाभ पर दोहरे कराधान को रोकना या उसे कम करना है। ऐसी स्थितियों में, जहाँ किसी व्यक्ति या संस्था पर निवास देश के साथ-साथ उस देश में भी कर लगाया जा सकता है जहाँ से आय उत्पन्न हुई है, DTAA कर बोझ को संतुलित करने का माध्यम प्रदान करता है।
  • मुख्य कर-राहत व्यवस्था: DTAA मुख्य रूप से दो विधियों के माध्यम से राहत प्रदान करता है: छूट विधि (आय पर केवल एक देश में कर) और ऋण संबंधी विधि (निवासी देश, स्रोत देश में भुगतान किये गए करों के लिये ऋण प्रदान करता है)।
  • भारतीय संदर्भ एवं प्रक्रिया: भारत के पास 90 से अधिक देशों के साथ DTAA का व्यापक नेटवर्क है। लाभों का दावा करने के लिये, करदाता को अपने निवास के देश से एक टैक्स रेजीडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) के साथ-साथ अन्य आवश्यक प्रस्तावों को रखना होता है।
  • DTAA का दुरुपयोग और निवारण: भारत को मॉरीशस, सिंगापुर और साइप्रस जैसे क्षेत्राधिकारों में ट्रीटी शॉपिंग, राउंड-ट्रिपिंग और शेल कंपनियों के माध्यम से DTAA के दुरुपयोग का सामना करना पड़ा है।
    • इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिये, सरकार ने महत्त्वपूर्ण DTAA संधियों में संशोधन करते हुए स्रोत-आधारित कराधान को लागू किया तथा लाभ-सीमा (Limitation of Benefits—LOB) संबंधी प्रावधान जोड़े, ताकि कर संबंधी लाभ प्राप्त करने के लिये वास्तविक और ठोस आर्थिक उपस्थिति अनिवार्य हो सके।
    • घरेलू स्तर पर, वर्ष 2017 में सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (GAAR) को लागू किया गया, जिसका उद्देश्य उन व्यवस्थाओं में लाभों को अस्वीकार करना है, जिनका मुख्य उद्देश्य कर से बचाव (टैक्स अवॉयडेंस) करना हो।

DTAA

सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (GAAR)

  • परिचय: GAAR एक कर-चोरी को रोकने हेतु प्रावधान है, जो भारतीय कर प्राधिकरणों को उन व्यवस्थाओं पर कर संबंधी लाभ अस्वीकार करने का अधिकार देता है, जिनका प्रमुख उद्देश्य कर से बचाव करना हो। इसके अंतर्गत ट्रांजेक्शन के कानूनी स्वरूप के बजाय उसकी वास्तविक आर्थिक सार्थकता को प्राथमिकता दी जाती है।
  • उद्देश्य: भारत में GAAR 1 अप्रैल, 2017 से प्रभावी हुआ, जिसका उद्देश्य एग्रेसिव टैक्स प्लानिंग और ट्रीटी शॉपिंग पर अंकुश लगाना है।
  • प्रेरक स्थितियाँ: GAAR तब लागू होता है जब मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना हो और किसी एक परीक्षण को पूरा करता हो:
    • वाणिज्यिक तत्त्व परीक्षण (Commercial Substance Test): जब किसी व्यवस्था में वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों, कर्मियों अथवा निर्णय लेने की प्राधिकृत प्रक्रिया का अभाव हो।
    • अधिकार एवं दायित्व परीक्षण (Rights and Obligations Test): जब कर-लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से कृत्रिम रूप से अधिकारों या दायित्वों का सृजन किया गया हो।
    • विधि का दुरुपयोग या अनुचित उपयोग (Misuse or Abuse of Law): जब संधियों अथवा घरेलू कानून में उपलब्ध कमियों का शोषण किया गया हो।
    • असंबद्ध पक्षों के बीच लेन-देन परीक्षण/आर्म्स-लेंथ सिद्धांत का उल्लंघन (Non-Arm’s-Length Test): जब लेन–देन सामान्य व्यावसायिक प्रथाओं से भिन्न किया गया हो।
  • GAAR लागू होने के परिणाम (Consequences of Invocation): यदि इसे लागू किया जाता है, तो प्राधिकारी संधि-लाभों (जैसे- पूंजीगत लाभ पर छूट) को अस्वीकार कर सकते हैं, मध्यस्थ संस्थाओं (Intermediary Entities) की अनदेखी कर सकते हैं, लेन-देन का पुनः स्वरूपण (Recharacterization) कर सकते हैं, आय को भारत में पुनः आवंटित कर सकते हैं तथा कर, ब्याज और दंड आरोपित कर सकते हैं।
  • संधियों पर वरीयता (Supremacy over Treaties): एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि भारतीय कानून के अंतर्गत GAAR को कर-संधियों (Tax Treaties) पर प्रधानता प्राप्त है। इसका अर्थ है कि यदि GAAR सक्रिय (Trigger) होता है, तो संधि के अंतर्गत मिलने वाले लाभों को अस्वीकार किया जा सकता है और इस स्थिति को अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दृढ़तापूर्वक मान्यता प्रदान की जा चुकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. टाइगर ग्लोबल-फ्लिपकार्ट मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने क्या निर्णय दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि टाइगर ग्लोबल द्वारा 2018 में फ्लिपकार्ट में अपनी 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने से हुई आय भारत में कर योग्य है तथा भारत-मॉरीशस DTAA के अंतर्गत मिलने वाले लाभों को अस्वीकार कर दिया गया।

2. भारत-मॉरीशस DTAA के अंतर्गत ‘ग्रैंडफादरिंग’ का क्या अर्थ है?
इस प्रावधान के तहत 1 अप्रैल, 2017 से पहले किये गए निवेशों से प्राप्त पूंजीगत लाभ को केवल मॉरीशस में कर योग्य माना गया था (भारत में 0%), हालाँकि यह कर-दुरुपयोग विरोधी जाँच (Anti-abuse scrutiny) के अधीन था।

3. भारत में GAAR कर-संधियों को किस प्रकार प्रभावित करता है?
GAAR कर-संधियों पर प्रधानता रखता है और यदि किसी व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य कर-परिहार (Tax Avoidance) पाया जाता है, तो कर प्राधिकारी DTAA के अंतर्गत मिलने वाले लाभों को अस्वीकार कर सकते हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रश्न. भारत में काले धन के सृजन के निम्नलिखित प्रभावों में से कौन-सा भारत सरकार की चिंता का प्रमुख कारण है? (2021)

(a) स्थावर संपदा के क्रय और विलासितायुक्त आवास में निवेश के लिये संसाधनों का अपयोजन

(b) अनुत्पादक गतिविधियों में निवेश और जवाहरात, गहने, सोना इत्यादि का क्रय

(c) राजनीतिक दलों को बड़े चंदे एवं क्षेत्रवाद का विकास

(d) कर अपवंचन के कारण राजकोष में राजस्व की हानि

उत्तर: (d)


प्रश्न. अप्रवासी सत्त्वों द्वारा दी जा रही ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं पर भारत द्वारा 6% समकरण कर लगाए जाने के निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2018)

  1. यह आय कर अधिनियम के भाग के रूप में लागू किया गया है।  
  2. भारत में विज्ञापन सेवाएँ देने वाले अप्रवासी सत्त्व अपने गृह देश में ‘‘दोहरे कराधान से बचाव समझौते’’ के अंतर्गत टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1   

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनाें   

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (d)


प्रारंभिक परीक्षा

सुभाष चंद्र बोस

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाने के लिये पराक्रम दिवस का आयोजन किया गया।

पराक्रम दिवस क्या है?

  • परिचय: पराक्रम दिवस (वीरता दिवस) भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है।
    • पराक्रम दिवस 2026 सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर मनाया जा रहा है।
  • पिछले समारोह:
    • वर्ष 2021: पहला पराक्रम दिवस कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित किया गया था।
    • वर्ष 2022: नई दिल्ली के इंडिया गेट पर नेताजी की एक होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया।
    • वर्ष 2023: अंडमान और निकोबार के 21 द्वीपों का नाम परमवीर चक्र पुरस्कार के विजेताओं जैसे मेजर सोमनाथ शर्मा, नायक जदुनाथ सिंह आदि के नाम पर रखा गया।
    • वर्ष 2024: यह आयोजन दिल्ली के लाल किले में शुरू किया गया, जो INA के मुकदमों का स्थल था।
    • वर्ष 2025: कटक के बाराबती किले में एक देश स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो उनके जन्मस्थान को चिह्नित करता है।
  • महत्त्व: यह दिवस नेताजी सुभाष चंद्र बोस की साहस, वीरता और देशभक्ति का प्रतीक है, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का नेतृत्व किया तथा पूर्ण स्वतंत्रता का समर्थन किया।
    • यह नेताजी के प्रसिद्ध नारे, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" को भी स्मरण कराता है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में लाखों लोगों को प्रेरित किया।

सुभाष चंद्र बोस के संबंध में प्रमुख तथ्य क्या है?

  • प्रारंभिक जीवन: सुभाष चंद्र बोस का जन्म 1897 में कटक (वर्तमान ओडिशा, उस समय बंगाल) में जनकीनाथ और प्रभावती बोस के परिवार में हुआ था। नेताजी का पालन‑पोषण ऐसे परिवार में हुआ जहाँ अंग्रेज़ी शिक्षा और हिंदू रीति‑रिवाज़ों को महत्त्व दिया जाता था।
    • उन्होंने रैवेंशॉ कॉलेजिएट स्कूल में शिक्षा प्राप्त की और बाद में प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता में अध्ययन किया, जहाँ वे ब्रिटिश शासन-विरोधी गतिविधियों में शामिल हुए।
  • वैचारिक आधार: उन्हें रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं से प्रेरणा मिली, साथ ही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ के विचारों ने भी उनके दृष्टिकोण को प्रभावित किया।
    • उन्होंने पश्चिमी और भारतीय संस्कृतियों का एक अनोखा मिश्रण विकसित किया, जो विशेष रूप से भारत की स्वतंत्रता तथा पुनरुत्थान पर केंद्रित था।
  • प्रारंभिक राजनीतिक भागीदारी: सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1920 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (ICS) परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन वर्ष 1921 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिये त्याग-पत्र दे दिया।
    • वर्ष 1921 में नेताजी ने बॉम्बे में महात्मा गांधी से मुलाकात की, लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के उनके तरीके, विशेषकर धैर्य और अहिंसा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, से वे असहमत थे।
  • कांग्रेस से असहमति: वर्ष 1938 में, नेताजी को हरिपुरा सत्र में कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने स्वराज का समर्थन किया और भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत भारतीय संघीय ढाँचे का विरोध किया।
    • वर्ष 1939 में नेताजी को त्रिपुरी सत्र में फिर से कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने गांधी समर्थित डॉ. पत्ताभि सितारामय्या को हराया। इसे गांधी ने व्यक्तिगत पराजय के रूप में देखा, जिसके परिणामस्वरूप कार्यकारी समिति के 15 में से 12 सदस्य, जिनमें जे.एल. नेहरू, पटेल और राजेंद्र प्रसाद शामिल थे, ने त्याग-पत्र दे दिया।
      • बोस ने नई कार्यकारी समिति बनाने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहे, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह राजेंद्र प्रसाद को नियुक्त किया गया।
    • बोस ने 29 अप्रैल, 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र दे दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य क्रांतिकारी-वामपंथी कांग्रेस सदस्यों को एकजुट करना तथा स्वतंत्रता के बाद विरोधी-उपनिवेशवाद एवं समाजवाद पर आधारित वैकल्पिक नेतृत्व प्रदान करना था।
  • मृत्यु: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद जापान ने 16 अगस्त, 1945 को आत्मसमर्पण किया। इसके बाद बोस दक्षिण-पूर्व एशिया से जापानी विमान द्वारा चीन की ओर रवाना हुए। हालाँकि कुछ विवरणों के अनुसार विमान कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे सुभाष चंद्र बोस गंभीर रूप से जल गए, लेकिन अभी भी जीवित थे।
  • विरासत: सुभाष चंद्र बोस का नेतृत्व, उनका वैचारिक दृष्टिकोण और स्वतंत्रता के लिये उनका संकल्प उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक बनाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है?
पराक्रम दिवस 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके साहस, बलिदान तथा नेतृत्व को सम्मानित करता है।

2. नेताजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को कैसे नया स्वरूप दिया?
जब पारंपरिक तरीके अपर्याप्त प्रतीत होने लगे, तब नेताजी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का नेतृत्व करके संघर्ष को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिया।

3. नेताजी को ‘देशनायक’ क्यों कहा जाता है?
राष्ट्रीय संकट के समय साहस, दूरदृष्टि और नैतिक बल के उनके दुर्लभ संयोजन के कारण रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘देशनायक’ कहा था।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न 

प्रिलिम्स 

प्रश्न: गदर क्या था: (2014)

(a) भारतीयों का क्रांतिकारी संघ जिसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में था।

(b) एक राष्ट्रवादी संगठन जो सिंगापुर से संचालित होता था।

(c) उग्रवादी संगठन जिसका मुख्यालय बर्लिन में था।

(d) भारत की स्वतंत्रता के लिये कम्युनिस्ट आंदोलन जिसका मुख्यालय ताशकंद में था।

उत्तर: (a)


प्रश्न: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान निम्नलिखित में से किसने 'फ्री इंडियन लीजन' नामक सेना स्थापित की थी? (2008)

(a) लाला हरदयाल

(b) रासबिहारी बोस

(c) सुभाष चंद्र बोस

(d) वी.डी. सावरकर

उत्तर: c


रैपिड फायर

क्या ED एक ‘विधिक व्यक्ति’ है: सर्वोच्च न्यायालय

स्रोत: द हिंदू

भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने तमिलनाडु और केरल द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के लिये सहमति दी है, जिनमें यह स्पष्टता मांगी गई है कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक ‘विधिक व्यक्ति (Juristic Person)’ है और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों में याचिका दायर करने का अधिकार रखता है।

  • ‘विधिक व्यक्ति’ एक गैर-मानवीय कानूनी इकाई होती है (जैसे- कोई निगम), जिसे कानून द्वारा अधिकार और कर्त्तव्यों वाला माना जाता है, जिसमें मुकदमा दायर करने या मुकदमे का सामना करने की क्षमता भी शामिल है।
  • केरल के तर्क: राज्य ने तर्क दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य द्वारा नियुक्त जाँच आयोग (स्वर्ण तस्करी मामले से संबंधित) को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की, जबकि उसके पास ऐसा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
  • तमिलनाडु की स्थिति: केरल का समर्थन करते हुए तमिलनाडु ने आरोप लगाया कि ED ने अवैध खनन मामलों के संबंध में मद्रास उच्च न्यायालय से परमादेश याचिका मांगकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया और तर्क दिया कि ऐसी रिट याचिकाएँ "भ्रमित और असंगत" हैं।
  • सांविधिक निकाय बनाम कॉर्पोरेट निकाय: दोनों राज्यों का तर्क है कि सांविधिक निकाय केवल वही अधिकार प्रयोग कर सकते हैं जो कानून द्वारा स्पष्ट रूप से प्रदान किये गए हों और ED को न तो FEMA, 1999 और न ही PMLA, 2002 के तहत मुकदमा दायर करने का अधिकार दिया गया है।
    • कॉर्पोरेट निकाय के विपरीत, ED के पास विधिक व्यक्ति (Juristic Person) के रूप में अपना दर्जा पाने का कोई विशिष्ट संवैधानिक अधिकार नहीं है।
  • न्यायिक मिसाल: दोनों राज्यों ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य वन संरक्षक, आंध्र प्रदेश सरकार बनाम कलेक्टर (2003) के निर्णय पर निर्भर किया, जिसमें यह स्थापित किया गया कि किसी कानूनी इकाई के मुकदमा दायर करने या मुकदमे का सामना करने की क्षमता सिर्फ प्रक्रिया का मामला नहीं बल्कि मौलिक विधि का विषय है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 की भूमिका

  • अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मूलभूत अधिकारों के प्रवर्तन के लिये रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण ,अधिकार-पृच्छा) जारी करने का अधिकार प्रदान करता है।
    • अनुच्छेद 32 के विपरीत, अनुच्छेद 226 का दायरा अधिक व्यापक है, क्योंकि उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों के लिये, बल्कि "किसी अन्य उद्देश्य" हेतु भी रिट जारी कर सकते हैं, जिसमें कानूनी और वैधानिक अधिकार भी शामिल हैं।
  • यह कार्यपालिका और प्रशासनिक कार्यों पर संवैधानिक नियंत्रण के रूप में कार्य करता है, जिससे सरकारी प्राधिकारियों की वैधता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
  • अनुच्छेद 226 के अंतर्गत व्यक्ति तथा कानूनी संस्थाएँ दोनों उच्च न्यायालय में जा सकते हैं, यदि उनके पास कानूनी अधिकार/लोकस स्टैंडी और कोई कानूनी रूप से प्रवर्तनीय अधिकार हो।
  • यह केंद्र–राज्य संबंधों में भी अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि इसके माध्यम से राज्य या प्राधिकरण केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को चुनौती दे सकते हैं और उसी तरह केंद्र भी राज्य की कार्रवाइयों पर प्रश्न उठा सकता है।

और पढ़ें: रिट क्षेत्राधिकार और राज्य


रैपिड फायर

वर्ष 2025 में भारत का LFPR रिकॉर्ड 56.1%

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

दिसंबर 2025 में प्रकाशित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, श्रम बल भागीदारी वार्षिक उच्चतम स्तर पर पहुँचने के साथ निरंतर सुधार दर्ज किया गया है, हालाँकि बेरोज़गारी दर सामान्यतः स्थिर बनी हुई है।

  • मासिक आँकड़े वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) के दृष्टिकोण पर आधारित हैं, जो सर्वेक्षण से पूर्व के 7 दिनों में किसी व्यक्ति की गतिविधि की स्थिति (नियोजित, बेरोज़गार, या श्रम बल से परे) का मूल्यांकन करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिये LFPR ने जून 2025 से अपनी ऊर्ध्वगामी प्रवृत्ति जारी रखी, जो दिसंबर 2025 में 56.1% तक पहुँच गई।
    • LFPR कार्यशील आयु वर्ग (15–59 वर्ष) की जनसंख्या का वह प्रतिशत है जो या तो नियोजित है या सक्रिय रूप से रोज़गार की तलाश कर रही है।
  • कार्यशील जनसंख्या अनुपात (WPR): WPR अपने वार्षिक शिखर 53.4% पर पहुँच गया। ग्रामीण पुरुष के कार्यशील जनसंख्या अनुपात ने 76.0% के साथ मज़बूत प्रदर्शन दिखाया और महिलाओं का अनुपात 38.6% रहा, जो ग्रामीण रोज़गार की दृढ़ता को दर्शाता है।
    • WPR कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या का वह प्रतिशत है जो वास्तव में नियोजित है।
  • बेरोज़गारी परिदृश्य: समग्र बेरोज़गारी दर (UR) 4.8% पर स्थिर रही। ग्रामीण UR 3.9% पर स्थिर रही हालाँकि शहरी बेरोज़गारी परिदृश्य मामूली रूप से बढ़कर 6.7% हो गई।
    • शहरी महिला बेरोज़गारी परिदृश्य में अक्तूबर 2025 के वार्षिक शिखर 9.7% की दर से गिरावट आई और यह 9.1% पर पहुँच गई।
  • ग्रामीण-शहरी विभाजन: एक स्पष्ट असमानता बनी हुई है, जहाँ ग्रामीण LFPR (59.0%) शहरी LFPR (50.2%) से काफी अधिक है, शहरी बेरोज़गारी निरंतर रूप से ग्रामीण स्तर से अधिक बनी हुई है।

और पढ़ें: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2024


रैपिड फायर

भारत-स्पेन: आतंकवाद विरोधी सहयोग

स्रोत: द हिंदू 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्पेन के विदेश मंत्री के साथ एक बैठक में वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिये भारत और स्पेन के संसाधनों एवं क्षमताओं को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया।

  • वर्ष 2026 भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष का प्रतीक है, जिसे भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपलक्ष्य में द्विवार्षिकी के रूप में मनाया जाएगा।
  • आतंकवाद-रोधी सहयोग: दोनों देश आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिये एक गंभीर खतरा मानते हुए उसके विरुद्ध कठोर और साझा दृष्टिकोण रखते हैं। 
    • राष्ट्रपति ने आतंकवाद “इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों” के विरुद्ध प्रभावी संघर्ष के लिये संसाधनों के सामूहिक समन्वय एवं साझा उपयोग हेतुआह्वान किया।
    • बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थकों के रूप में, भारत और स्पेन को संयुक्त राष्ट्र एवं G-20 जैसे मंचों पर वैश्विक स्थिरता तथा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिये सहयोग करना चाहिये।
  • भारत-स्पेन आर्थिक संबंध: स्पेन यूरोपीय संघ (EU) में भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 9.32 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जबकि स्पेन 4.29 अरब अमेरिकी डॉलर के संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ भारत में 16वाँ सबसे बड़ा निवेशक है।
    • भारत-स्पेन संयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग (JCEC) और फास्ट-ट्रैक निवेश मैकेनिज्म जैसी संस्थागत व्यवस्था इस विस्तारित आर्थिक संलग्नता को आधार प्रदान करती हैं।
    • भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर से द्विपक्षीय व्यापार को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साथी है, जिसके साथ वित्तीय वर्ष 2023-24 में वस्तुओं का व्यापार 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
  • स्पेन: इसकी स्थल सीमाएँ पुर्तगाल (पश्चिम), फ्राँस और एंडोरा (उत्तर-पूर्व) एवं जिब्राल्टर (दक्षिण) के साथ लगती हैं।
    • इसकी समुद्री सीमाएँ बिस्के की खाड़ी (उत्तर), अटलांटिक महासागर (उत्तर-पश्चिम/दक्षिण-पश्चिम) और भूमध्य सागर (दक्षिण-पूर्व/पूर्व) द्वारा परिभाषित हैं।
    • देश में विविध प्रकार की स्थलाकृति है, जिसमें पिरिनी पर्वत, मेसेटा सेंट्रल पठार और तबरनास रेगिस्तान शामिल हैं, साथ ही इसमें रणनीतिक बेलिएरिक तथा कैनरी द्वीप भी शामिल हैं।

Spain

और पढ़ें: भारत-स्पेन संबंधों को सुदृढ़ करना


रैपिड फायर

शैडो फ्लीट

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान, वेनेज़ुएला और रूस जैसे देशों से प्रतिबंधित कच्चे तेल के परिवहन में शामिल वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ तेल टैंकरों पर अपनी सैन्य-नेतृत्व वाली कार्रवाई तीव्र कर दी है।

शैडो फ्लीट

  • परिचय: यह उस व्यापक नेटवर्क को संदर्भित करता है जिसमें 3,000 से अधिक जहाज़ शामिल हैं, जो पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और प्रतिबंधित देशों से तेल परिवहन करने के लिये धोखाधड़ीपूर्ण शिपिंग प्रथाओं का उपयोग करते हैं, जैसे कि AIS (ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर को निष्क्रिय करना, GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) स्पूफिंग और अस्पष्ट स्वामित्व संरचनाएँ।
  • डार्क बनाम ग्रे फ्लीट: डार्क फ्लीट सबसे उच्च-जोखिम वाले जहाज़ होते हैं; ये जानबूझकर अपनी गतिविधियों को छुपाते हैं, जैसे कि AIS बंद करना, GNSS स्पूफिंग, फाल्स फ्लैग्स और गुप्त शिप-टू-शिप ट्रांसफर।
    • ग्रे फ्लीट ज़रूरी नहीं कि प्रतिबंधित हो, लेकिन इसमें जोखिम संकेत दिखाई देते हैं, जैसे असामान्य मार्ग, तेज़ी से स्वामित्व में बदलाव और संरचनात्मक अस्पष्टता जो इसे अनुपालनशील दिखाने के लिये डिज़ाइन की गई हो। यह रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उभरा।
  • नियामक कमज़ोरियाँ: कई शैडो जहाज़ ऐसे क्षेत्राधिकारों में पंजीकृत हैं जहाँ समुद्री निगरानी अप्रभावी है, जिनमें गैबॉन, मार्शल द्वीप समूह, कुक द्वीप, लाइबेरिया, पनामा और मंगोलिया (भूमि-संबंधित) शामिल हैं।
  • रणनीतिक और पर्यावरणीय जोखिम: यह फ्लीट, जिसमें अक्सर पुराने और कम बीमित जहाज़ शामिल होते हैं, न केवल प्रतिबंधों को कमज़ोर करती है, बल्कि निम्न-स्तरीय संचालन के कारण महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय तथा सुरक्षा जोखिम भी उत्पन्न करती है।
  • भारतीय संबंध: वर्ष 2022-2023 में, मुंबई स्थित गतिक शिप मैनेजमेंट (शैडो फ्लीट ऑपरेटर) रूसी कच्चे तेल का प्रमुख परिवाहक बनकर उभरा, जिसने अपने शिखर पर 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के जहाज़ों का संचालन किया और अगस्त 2023 तक सभी टैंकरों को संबंधित कंपनियों को स्थानांतरित कर दिया, जब इसकी निगरानी बढ़ी।

और पढ़ें: भारत की समुद्री रणनीति


रैपिड फायर

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में वर्ष 2025 के लिये इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार मोज़ाम्बिक की मानवाधिकार कार्यकर्त्ता ग्रासा माशेल को उनके शांति, मानवतावादी कार्य एवं सामाजिक विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिये प्रदान किया गया है।

  • परिचय: इसे इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार के नाम से भी जाना जाता है और यह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की स्मृति में इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा वर्ष 1986 से प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
    • यह पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय शांति, निरस्त्रीकरण और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों या संगठनों को सम्मानित करता है।
  • मुख्य विशेषताएँ: इस पुरस्कार के साथ 1 करोड़ रुपये की नकद राशि, एक प्रशस्ति-पत्र और एक ट्रॉफी प्रदान की जाती है और इसे भारत के प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कारों में से एक माना जाता है।
  • श्रेणियाँ: इसे तीन मुख्य क्षेत्रों- शांति, निरस्त्रीकरण और विकास- में प्रदान किया जाता है।
  • चयन मानदंड: यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर शांति, निरस्त्रीकरण और विकास से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में लगातार तथा उत्कृष्ट प्रयासों, सकारात्मक मानवीय प्रभाव एवं मानव कल्याण में योगदान को सम्मानित करता है।

और पढ़ें: इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार


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