रैपिड फायर
कोडागु की जम्मा बने भूमि
- 24 Jan 2026
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कर्नाटक ने कोडागु (कूर्ग) में विशिष्ट जम्मा बने भूमि के लिये शताब्दी पुरानी भूमि रिकॉर्ड प्रणाली को आधुनिक बनाने हेतु कर्नाटक भूमि राजस्व (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किया है।
- यह अधिनियम जम्मा बने भूमि पर विरासत संबंधी विवादों का समाधान करने का प्रयास करता है, इसके लिये इनके रिकॉर्ड को कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 के अनुरूप बनाया गया है, ताकि वर्तमान धारकों, निवासियों और मालिकों का सही दस्तावेज़ीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
जम्मा बने भूमि
- परिचय: जम्मा बने एक विशिष्ट, वंशानुगत भूमि स्वामित्व प्रणाली है, जो कोडागु ज़िले (कूर्ग) में प्रचलित है। ये भूमि मूल रूप से कोर्ग के पूर्व राजा और ब्रिटिशों द्वारा स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से कोडावा समुदाय को सैनिक सेवा के बदले 1600-1800 के बीच प्रदान की गई थी।
- भूमि का स्वरूप: इन भूखंडों में दोनों प्रकार की भूमि शामिल है- आर्द्रभूमि (धान की खेती के लिये उपयोग की जाती है) और वनयुक्त ऊँचाई वाली भूमि, जिन्हें अधिकांशतः क्षेत्र के प्रसिद्ध कॉफी बागानों में बदल दिया गया है।
- पारंपरिक अभिलेख प्रणाली: स्वामित्व मूल अनुदानकर्त्ता (पैटेदार) के नाम पर पंजीकृत होता है और पीढ़ियों तक हस्तांतरण के बावजूद, नए मालिकों के नाम केवल पैटेदार के नाम के साथ जोड़ दिये जाते थे, उन्हें प्रतिस्थापित नहीं किया जाता था।
- इस प्रणाली के कारण गंभीर कानूनी और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हुईं, जिनमें बिक्री, खरीद, विरासत, म्यूटेशन और बैंक ऋण तक पहुँच में कठिनाइयाँ शामिल हैं, क्योंकि स्पष्ट शीर्षक का अभाव था।
कोडागु (कूर्ग)
- परिचय: कोडागु, जिसे आमतौर पर कूर्ग के नाम से जाना जाता है, कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्थित एक खूबसूरत, उच्च-ऊँचाई वाला ज़िला है। यह अपनी कोहरे वाली पहाड़ियों और हरे-भरे कॉफी बागानों के लिये विश्वविख्यात है तथा इसे ‘भारत का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है। यहाँ कावेरी नदी (तालकावेरी) का उद्गम स्थल है, जो प्रायद्वीपीय भारत के लिये महत्त्वपूर्ण नदी है।
- अर्थव्यवस्था: कोडागु की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, जिसमें मुख्यतः कॉफी का उत्पादन होता है (यह भारत का प्रमुख रोबस्टा/अरबिका कॉफी क्षेत्र है)। अन्य प्रमुख फसलें काली मिर्च, इलायची और रबर हैं।
- संस्कृति: यह कोडावा लोगों का आवास है, जो अपनी योद्धा परंपरा, विशिष्ट उत्सवों (जैसे- कैलपोध, पुथारी) और अलग-अलग परिधान व रीति-रिवाज़ों के लिये जाने जाते हैं।
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