रैपिड फायर
विश्व का पहला ग्रैविटॉन डिटेक्टर बनाने की योजना
- 24 Jan 2026
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स्टीवंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्त्ता एक एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य ग्रेविटॉन का पता लगाना है। ये काल्पनिक क्वांटम कण माने जाते हैं जो गुरुत्वाकर्षण को वहन करते हैं और क्वांटम यांत्रिकी तथा सामान्य सापेक्षता के बीच के अंतर को समाप्त करते हैं।
ग्रेविटॉन
- परिचय: ग्रैविटॉन एक काल्पनिक प्राथमिक कण है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह गुरुत्वाकर्षण बल को वहन करता है, ठीक वैसे ही जैसे फोटॉन विद्युतचुंबकीय बल को वहन करते हैं। ग्रैविटॉन का पता चलना गुरुत्वाकर्षण को एक क्वांटम बल के रूप में प्रमाणित करेगा, जो भौतिकी में एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।
- पता लगाने की विधि: प्रस्तावित डिटेक्टर एक सुपरफ्लूइड हीलियम रेज़ोनेटर है, जिसे शोर को समाप्त करने के लिये इसके क्वांटम ग्राउंड स्टेट तक ठंडा किया जाता है। जब एक गुरुत्वाकर्षण तरंग इसमें से गुजरती है, तो यह ऊर्जा की एक क्वांटम (एक ग्रेविटॉन) स्थानांतरित कर सकती है, जिससे एक फोनोन (कंपन) उत्पन्न होता है जिसे लेजर द्वारा पता लगाया जा सकता है।
- पता लगाने में आने वाली चुनौतियाँ: गुरुत्वाकर्षण चार बलों (गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुम्बकीय बल, प्रबल और दुर्बल नाभिकीय बल) में सबसे कमज़ोर है, जिससे पदार्थ के साथ ग्रेविटॉन की अंतःक्रिया अत्यंत दुर्लभ हो जाती है। एक ग्रेविटॉन लगभग बिना अंतःक्रिया के पदार्थ से गुजर सकता है, जिससे इसका पता लगाने की संभावना अत्यंत सूक्ष्म हो जाती है।
- सीमाएँ: यदि कोई कंपन भी पता चलता है, तब भी इसे पारंपरिक गुरुत्वाकर्षण द्वारा समझाया जा सकता है। पिछले अध्ययनों से पता चलता है कि एक ग्रेविटॉन को कैच करने में सक्षम डिटेक्टर का निर्माण व्यावहारिक रूप से असंभव है।
- महत्त्व: ग्रेविटॉन का पता लगाना एक ऐतिहासिक सफलता होगी, जो भौतिकी के एकीकृत सिद्धांत की ओर मार्ग प्रशस्त करेगा और ब्रह्मांड की गहरी समझ विकसित करेगा।
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