प्रारंभिक परीक्षा
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम
चर्चा में क्यों?
भारत ने 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया, जिसमें सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) की महत्त्वपूर्ण सफलताओं को रेखांकित किया गया। प्रमुख उपलब्धियों में जनवरी 2026 तक 98.4% पूर्ण टीकाकरण कवरेज हासिल करना, तथा इसी वर्ष देशव्यापी HPV टीकाकरण और एक स्वदेशी टेटनस-डिप्थीरिया वैक्सीन टीका लगाने का कार्यक्रम शुरू किया।
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस
- राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस प्रतिवर्ष 16 मार्च को मनाया जाता है, जो पल्स पोलियो कार्यक्रम के तहत वर्ष 1995 में भारत में ओरल पोलियो वैक्सीन की पहली खुराक दिये जाने की स्मृति में मनाया जाता है।
- इस कार्यक्रम ने भारत में पोलियो के उन्मूलन का मार्ग प्रशस्त किया, जिसका अंतिम मामला 2011 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा में दर्ज किया गया था।
यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम (UIP) क्या है?
- परिचय: यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम (UIP) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके से बचाव योग्य बीमारियों के खिलाफ मुफ्त टीकाकरण प्रदान करना है।
- इसे मूल रूप से वर्ष 1978 में विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के रूप में शुरू किया गया था और बाद में 1985 में इसका विस्तार किया गया और इसका नाम बदलकर UIP कर दिया गया।
- उद्देश्य: UIP का उद्देश्य टीकाकरण कवरेज बढ़ाना, टीकाकरण सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना, स्वास्थ्य सुविधाओं तक एक विश्वसनीय कोल्ड-चेन सिस्टम स्थापित करना, कार्यक्रम के प्रदर्शन की निगरानी करना और टीका उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ एकीकरण: समय के साथ UIP को विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों में एकीकृत किया गया है।
- यह वर्ष 1992 में बाल उत्तरजीविता और सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम का हिस्सा बन गया, 1997 में प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया और वर्ष 2005 से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) का एक अभिन्न अंग रहा है।
- कवरेज और पैमाना: UIP विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक है, जो प्रत्येक वर्ष 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.54 करोड़ नवजात शिशुओं तक मुफ्त में पहुँचता है।
- शामिल बीमारियाँ: UIP के तहत नवजात शिशुओं, बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं को 12 बीमारियों से बचाव के लिये टीके लगाए जाते हैं।
- जबकि अधिकांश टीके संपूर्ण देश में लगाए जाते हैं, जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) का टीका केवल स्थानिक ज़िलों में प्रदान किया जाता है।
- UIP के तहत शुरू किये गए टीके:
- निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (IPV) – 2015: इसे वैश्विक पोलियो उन्मूलन रणनीति के अंतर्गत शुरू की गई थी।
- रोटावायरस वैक्सीन (RVV) – 2016: यह गंभीर डायरिया से बच्चों की मृत्यु दर घटाने हेतु शुरू की गई थी।
- खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन – 2017: 9 माह से 15 वर्ष की आयु के लगभग 41 करोड़ बच्चों को लक्षित करने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान के माध्यम से शुरू की गई थी।
- न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV) – 2017: निमोनिया से होने वाली शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिये शुरू की गई।
- टेटनस और एडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन: किशोरों और वयस्कों में डिफ्थीरिया के खिलाफ घटती प्रतिरोधक क्षमता को दूर करने के लिये TT वैक्सीन का स्थान लिया।
- मिशन इंद्रधनुष: दिसंबर 2014 में शुरू किया गया मिशन इंद्रधनुष का उद्देश्य पूर्ण टीकाकरण कवरेज को 90% से अधिक तक बढ़ाकर UIP को मज़बूत करना है, जिसका लक्ष्य विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले अप्रतिरक्षित और आंशिक रूप से अप्रतिरक्षित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लक्षित करना है।
- गहन इंद्रधनुष मिशन (IMI), जिसे वर्ष 2017 में शुरू किया गया था, का प्राथमिक लक्ष्य दो वर्ष से कम आयु के उन सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करना है जो सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए हैं। इस मिशन के अंतर्गत, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और कम टीकाकरण कवरेज वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- पूर्ण टीकाकरण कवरेज वर्ष 2015 में 62% से बढ़कर जनवरी 2026 में 98.4% हो गया है।
- UIP लागू करने के लिये आवश्यक बुनियादी ढाँचा:
- टीकाकरण वितरण नेटवर्क: UIP के तहत टीके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), सरकारी अस्पतालों, उप-केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों तथा ग्रामीण स्थानों पर आयोजित आउटरीच सत्रों में उपलब्ध कराए जाते हैं।
- वर्ष 2005 से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत UPI को लागू किया गया है, जिसमें शहरी झुग्गी-झोपड़ियों को भी शामिल किया गया है।
- आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता - ASHA), आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता (AWWs) और लिंक वर्कर जैसे अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता, लाभार्थियों को संगठित करने और यह सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला टीकाकरण से वंचित न रहे।
- मॉडल टीकाकरण केंद्र टीकाकरण सेवाओं को सुदृढ़ करते हैं। ऐसे केंद्र उत्तर प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़ और लद्दाख में पहले से ही कार्यरत हैं।
- ‘कोल्ड चेन’ अवसंरचना: टीकों की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिये उन्हें एक निश्चित तापमान सीमा के भीतर संगृहीत किया जाना चाहिये, जिसके लिये एक मज़बूत ‘कोल्ड चेन’ प्रणाली की आवश्यकता होती है।
- भारत में विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन कोल्ड-चेन नेटवर्क में से एक का संचालन होता है , जिसमें 1.06 लाख से अधिक बर्फ से ढके रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीज़र शामिल हैं।
- यह प्रणाली देश भर में प्रतिवर्ष 1.3 करोड़ से अधिक टीकाकरण सत्रों को सहायता प्रदान करती है।
- डिजिटल निगरानी प्रणाली: वैक्सीन लॉजिस्टिक्स को मज़बूत करने के लिये, इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN) पूरे देश में वैक्सीन स्टॉक और भंडारण तापमान को वास्तविक समय में ट्रैक करता है, जिससे कुशल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन सुनिश्चित होता है।
- यू-विन (2024) डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को टीकाकरण केंद्रों का पता लगाने, अपॉइंटमेंट बुक करने और टीकाकरण रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद करता है।
- CoWIN (2021), कोविड-19 टीकाकरण पंजीकरण और ट्रैकिंग के लिये इस्तेमाल किया जाने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से 220 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं।
- टीकाकरण वितरण नेटवर्क: UIP के तहत टीके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), सरकारी अस्पतालों, उप-केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों तथा ग्रामीण स्थानों पर आयोजित आउटरीच सत्रों में उपलब्ध कराए जाते हैं।
भारत के टीकाकरण अभियान में कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण चरण हैं?
- रोग उन्मूलन: भारत ने कई रोगों का सफलतापूर्वक उन्मूलन किया है, जिनमें चेचक शामिल है। इसके अतिरिक्त, देश ने पोलियो (जिसका अंतिम मामला 2011 में दर्ज किया गया था), याव्स और मातृ एवं नवजात टेटनस जैसी बीमारियों को भी समाप्त कर दिया है।
- वंचितों तक पहुँच: 'शून्य-खुराक' (zero-dose) वाले बच्चों (वे शिशु जिन्हें कोई भी नियमित टीकाकरण प्राप्त नहीं हुआ है) के प्रतिशत में लगभग आधे की कमी आई है, यह वर्ष 2023 के 0.11% से गिरकर 2024 में मात्र 0.06% रह गया है।
- वैश्विक मान्यता: शिशु मृत्यु दर को कम करने और प्रमुख संक्रामक रोगों को लक्षित करने में भारत की सफलता को 'शिशु मृत्यु दर अनुमान के लिये संयुक्त राष्ट्र अंतर-एजेंसी समूह' (2024) द्वारा स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है, जिससे यह देश शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक वैश्विक उदाहरण के तौर पर स्थापित हुआ है।
- टीकाकरण और फार्मास्यूटिकल्स में भारत का वैश्विक नेतृत्व: भारत फार्मास्यूटिकल उत्पादन मात्रा के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है और लगभग 200 देशों को दवाओं का निर्यात करता है, जिनमें अमेरिका, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और ब्राज़ील प्रमुख गंतव्य हैं।
- भारत विश्व के टीकों का लगभग 60% उत्पादन करके विश्व का सबसे बड़ा टीका निर्माता है, और दुनिया भर में कम लागत वाले टीकों की आपूर्ति में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह देश जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता भी है, जो मात्रा के हिसाब से वैश्विक आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल के तहत लगभग 100 देशों को 298 मिलियन से अधिक वैक्सीन की आपूर्ति की है।
- घरेलू फार्मास्यूटिकल निर्माण को सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिये सरकार ने निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से बल्क ड्रग्स (2020), चिकित्सा उपकरण (2020) और फार्मास्यूटिकल्स (2021) के लिये प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएँ शुरू कीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम (UIP) क्या है?
UIP स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 1985 में शुरू की गई एक प्रमुख टीकाकरण योजना है, जिसका उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को 12 टीका-निवारक रोगों के विरुद्ध मुफ्त टीके प्रदान करना है।
2. राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस प्रतिवर्ष 16 मार्च को मनाया जाता है, ताकि 1995 में पल्स पोलियो प्रोग्राम के तहत ओरल पोलियो वैक्सीन की पहली खुराक देने की यादगार घटना का सम्मान किया जा सके, जिसने भारत में पोलियो समाप्त करने में सहायता की।
3. मिशन इंद्रधनुष क्या है?
वर्ष 2014 में शुरू किये गए मिशन इंद्रधनुष का उद्देश्य पूरी टीकाकरण कवरेज को 90% से अधिक तक बढ़ाना है। यह योजना विशेष रूप से उन बालकों और गर्भवती महिलाओं को लक्षित करती है जो अप्राप्त या आंशिक रूप से टीकाकृत हैं, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में।
4. भारत की टीकाकरण प्रणाली में eVIN की भूमिका क्या है?
इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN) रियल टाइम में टीके के स्टॉक स्तर और कोल्ड-चेन तापमान को डिजिटल रूप से ट्रैक करता है, जिससे टीका लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति प्रबंध कुशल बनता है।
5. भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ क्यों कहा जाता है?
भारत विश्व के लगभग 60% टीके का उत्पादन करता है और विश्व की लगभग 20% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है, साथ ही लगभग 200 देशों को फार्मास्यूटिकल उत्पाद निर्यात करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. कोविड-19 वैश्विक महामारी को रोकने के लिये बनाई जा रही वैक्सीनों के प्रसंग में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- भारतीय सीरम संस्थान ने mRNA प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर कोविशील्ड नामक कोविड-19 वैक्सीन निर्मित की।
- स्पुतनिक V वैक्सीन रोगवाहक (वेक्टर) आधारित प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर बनाई गई है।
- कोवैक्सीन एक निष्कृत रोगजनक आधारित वैक्सीन है।
उपर्युक्त कथनों में कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न. 'रिकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन' के संबंध में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)
- इन टीकों के विकास में जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग किया जाता है।
- बैक्टीरिया और वायरस का उपयोग वेक्टर के रूप में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
प्रश्न. भारत में न्यूमोकोकल संयुग्मी वैक्सीन (Pneumococcal Conjugate Vaccines) के उपयोग का क्या महत्त्व है? (2020)
- ये वैक्सीन न्यूमोनिया और साथ ही तानिकाशोध और सेप्सिस के विरुद्ध प्रभावी हैं।
- उन प्रतिजैविकीय पर निर्भरता कम की जा सकती है, जो औषधीय-प्रतिरोधी जीवाणुओं के विरुद्ध प्रभावी नहीं हैं।
- इन वैक्सीन के कोई गौण प्रभाव (Side Effects) नहीं है और न ही ये वैक्सीन कोई प्रत्यूर्जता संबंधी अभिक्रियाएँ (Allergic Reactions) करती हैं।
नीचे दिये गए क्रूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही नहीं है? (2019)
(a) यकृतशोथ B विषाणु HIV की तरह ही संचरित होता है।
(b) यकृतशोथ C का टीका होता है, जबकि यकृतशोथ B का कोई टीका नहीं होता।
(c) सार्वभौम रूप से यकृतशोथ B और C विषाणुओं से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या HIV से संक्रमित लोगों की संख्या से कई गुना अधिक है।
(d) यकृतशोथ B और C विषाणुओं से संक्रमित कुछ व्यक्तियों में अनेक वर्षों तक इसके लक्षण दिखाई नहीं देते।
उत्तर: (b)
प्रश्न. भारत सरकार द्वारा चलाया गया 'मिशन इंद्रधनुष' किससे संबंधित है? (2016)
(a) बच्चों और गर्भवती महिलाओं का प्रतिरक्षण
(b) पूरे देश में स्मार्ट सिटी का निर्माण
(c) बाहरी अंतरिक्ष में पृथ्वी सदृश ग्रहों के लिये भारत की स्वयं की खोज
(d) नई शिक्षा नीति
उत्तर: (a)
प्रारंभिक परीक्षा
लाभदायक RRB के लिये IPO
चर्चा में क्यों?
एक संसदीय पैनल ने अत्यधिक लाभदायक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के लिये इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लाने की सिफारिश की है, ताकि उनके मूल्य का सृजन हो सके, बाज़ार पूंजी आकर्षित हो सके और मज़बूत कॉर्पोरेट प्रशासन मानक लागू हो सकें।
- IPO वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक निजी कंपनी पहली बार अपने शेयर जनता के लिये पेश करती है, जिससे वह एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी में परिवर्तित हो जाती है। यह कंपनी को निवेशकों के एक व्यापक आधार से पूंजी जुटाने में सक्षम बनाता है, साथ ही इसके शेयरों को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध और कारोबार करने की अनुमति देता है।
RRB के संबंध में संसदीय पैनल की मुख्य टिप्पणियाँ क्या हैं?
- राजकोषीय प्रदर्शन: RRB ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 7,720 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जिससे सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) 13 वर्ष के निचले स्तर 5.4% पर आ गई।
- सफल समेकन: 'एक राज्य-एक RRB' नीति के तहत RRB समेकन के चौथे चरण के बाद 26 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और पुदुचेरी) में RRB की संख्या 196 के शीर्ष से घटकर वर्ष 2025-26 में 28 हो गई है।
- क्षेत्रीय जोखिम: समग्र वृद्धि के बावज़ूद प्राथमिक क्षेत्र के शिक्षा ऋणों में उच्च GNPA 13.8% है। पैनल इस कमी के लिये AI-संचालित प्रारंभिक चेतावनी संकेत (EWS) और शिक्षा ऋण के लिये ऋण गारंटी कोष योजना (CGFSEL) का उपयोग करने का सुझाव देता है।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक क्या हैं?
- परिचय: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) विशिष्ट अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक हैं जिनकी स्थापना मुख्य रूप से ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में सुलभ बैंकिंग और ऋण सेवाएँ प्रदान करने के लिये की गई थी। इन्हें परिष्कृत वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र और ग्रामीण गरीबों की ऋण आवश्यकताओं के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिये डिज़ाइन किया गया था।
- स्थापना और कानूनी स्थिति: RRB की स्थापना नरसिम्हम कार्य समूह (1975) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। पहला RRB, प्रथमा बैंक, 2 अक्तूबर, 1975 को स्थापित किया गया था। बाद में इसे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत औपचारिक रूप दिया गया।
- उद्देश्य: कृषि, व्यापार, वाणिज्य और उद्योग के लिये ऋण प्रदान करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास करना, विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों, कृषि मज़दूरों और कारीगरों।
- स्वामित्व संरचना: RRB अधिनियम, 1976 (2015 में संशोधित) के तहत वर्तमान शेयरधारिता केंद्र सरकार (50%), प्रायोजक बैंक (एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक 35%) और राज्य सरकारों (15%) के बीच है।
- बाज़ार पूंजी एकत्रित करने के बाद भी केंद्र और प्रायोजक बैंकों की संयुक्त शेयरधारिता 51% से कम नहीं हो सकती है, जो निरंतर सार्वजनिक क्षेत्र के स्वरूप को सुनिश्चित करता है।
- प्रमुख विशेषताएँ और संचालन:
- संचालन क्षेत्र: राष्ट्रीयकृत बैंकों के विपरीत, RRB का संचालन क्षेत्र किसी राज्य में एक या अधिक ज़िलों से युक्त एक विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित होता है।
- प्राथमिक क्षेत्र के ऋण (PSL): ग्रामीण ऋण के लिये RRB का अधिदेश अधिक है। जहाँ वाणिज्यिक बैंकों का आमतौर पर 40% प्राथमिक क्षेत्र ऋण (PSL) का लक्ष्य होता है, वहीं RRB को अपने कुल ऋण का 75% प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (जैसे– कृषि, MSME) में लगाना होता है।
- हाइब्रिड प्रकृति: वे सहकारी बैंकों के स्थानीय स्वरूप को वाणिज्यिक बैंकों की व्यावसायिकता और संसाधन एकत्रीकरण की क्षमता के साथ जोड़ते हैं।
- विनियमन और पर्यवेक्षण: RRB बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित होते हैं और उन्हें कम-से-कम 9% का पूंजी-से-जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (CRAR) बनाए रखना होता है।
- भारतीय राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) पुनर्वित्त सुविधाएँ प्रदान करता है, निरीक्षण करता है और उनके प्रदर्शन की निगरानी करता है।
- कराधान के लिये उन्हें आयकर अधिनियम, 1961 के तहत सहकारी समितियों के रूप में माना जाता है।
एक राज्य-एक RRB नीति क्या है?
- परिचय: ‘एक राज्य-एक RRB’ नीति वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवाओं के विभाग की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य एक ही राज्य में मौजूद कई क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को एकल, समेकित संस्था में बदलना है।
- मुख्य उद्देश्य: इस नीति के मुख्य उद्देश्य हैं पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करना, कई प्रशासनिक संरचनाओं से होने वाले अधिशेष को समाप्त करना, लागतों का तर्कसंगत समायोजन करना, पूंजी आधार और वित्तीय स्थिरता को सुदृढ़ करना तथा विशेष रूप से कृषि जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में क्रेडिट फ्लो को त्वरित करना।
- समेकन की चरणबद्ध प्रक्रिया: समेकन की प्रक्रिया वर्ष 2005 में प्रारंभ हुई, जो पहले की समितियों, विशेषकर व्यास समिति (2001) की अनुशंसाओं पर आधारित थी। वर्ष 2026 की शुरुआत तक सरकार ने समेकन के चार चरण पूरे कर लिये हैं।
- समेकन कार्य RRB अधिनियम, 1976 के अनुच्छेद 23A के तहत केंद्रीय सरकार द्वारा जारी सूचनाओं के माध्यम से किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) क्या हैं?
RRB क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत स्थापित विशेष अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक हैं, जिनका उद्देश्य मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग और ऋण सेवाएँ प्रदान करना है।
2. RRB की स्वामित्व संरचना क्या है?
RRB अधिनियम (संशोधित 2015) के अनुसार, शेयरधारिता केंद्र सरकार (50%), प्रायोजक बैंक (35%) और राज्य सरकार (15%) की है।
3. 'वन स्टेट-वन RRB' नीति क्या है?
यह पहल सरकार द्वारा दक्षता, पूंजीगत मज़बूती और ऋण वितरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई है। इसके अंतर्गत, किसी राज्य में मौजूद कई क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) का एक ही एकीकृत बैंक में विलय कर दिया जाता है।
4. RRB के लिये प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की आवश्यकता क्या है?
RRB को अपने कुल ऋण का कम-से-कम 75% प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आवंटित करना होगा, जो वाणिज्यिक बैंकों के लिये निर्धारित 40% के लक्ष्य से काफी अधिक है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न:
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा/से संस्थान अनुदान/प्रत्यक्ष ऋण सहायता प्रदान करता/करते है/हैं? (2013)
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
- भूमि विकास बैंक
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
रैपिड फायर
नेशनल क्वांटम मिशन
नेशनल क्वांटम मिशन के तहत 23 शैक्षणिक संस्थानों को क्वांटम शिक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है और 100 से अधिक अतिरिक्त प्रस्तावों का मूल्यांकन अभी चल रहा है।
नेशनल क्वांटम मिशन
- परिचय: नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की एक प्रमुख पहल है, जिसका वर्ष 2023-24 से 2030-31 की अवधि के लिये कुल परिव्यय 6,003 करोड़ रुपये है।
- इसे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के लिये एक जीवंत पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देकर क्वांटम प्रौद्योगिकियों में भारत को एक अग्रणी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- उद्देश्य: NQM का उद्देश्य क्वांटम प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को पोषित करना और उसे बढ़ाना है ताकि प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक विकास में तेज़ी लाई जा सके और स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण किया जा सके।
- चार प्रमुख डोमेन: यह मिशन चार मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- क्वांटम कंप्यूटिंग: 8 वर्षों के भीतर 50 से 1,000 भौतिक क्यूबिट वाले मध्यवर्ती-पैमाने के क्वांटम कंप्यूटरों का विकास।
- क्वांटम संचार: भारत में 2,000 किमी. से अधिक के उपग्रह-आधारित सुरक्षित संचार और लंबी दूरी के अंतःशहरीय क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) की स्थापना।
- क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी: नेविगेशन और संचार में अनुप्रयोगों के लिये उच्च-संवेदनशीलता वाले मैग्नेटोमीटर और सटीक परमाणु घड़ियों का निर्माण।
- क्वांटम सामग्री एवं उपकरण: स्वदेशी हार्डवेयर विकास का समर्थन करने के लिये क्वांटम सामग्री के लिये विनिर्माण क्षमताओं में उन्नति।
- कार्यान्वयन संरचना (हब-एंड-स्पोक मॉडल): यह मिशन संपूर्ण भारत में प्रमुख संस्थानों में आयोजित 4 थीमैटिक हब के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है।
- सामरिक संरेखण: NQM डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसी व्यापक राष्ट्रीय पहलों के साथ संरेखित है, जिसमें सुरक्षा और महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में सामरिक अनुप्रयोगों पर बल दिया गया है।
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और पढ़ें: नेशनल क्वांटम मिशन |
चर्चित स्थान
साइलेंट वैली का द्विलिंगी केकड़ा
शोधकर्त्ताओं ने स्वच्छ जल में पाए जाने वाले केकड़ों की एक प्रजाति, वेला कार्ली, में गाइनांड्रोमोर्फी (Gynandromorphy) का दुर्लभ मामला पाया है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें जीव में दोनों लिंगों के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि पुरुष प्रजनन संरचनाओं के साथ महिला गोनोपोर (gonopores) होना।
- प्रजाति और स्थान: वेला कार्ली स्वच्छ जल में पाए जाने वाले केकड़े की एक स्वदेशी प्रजाति है, जो पश्चिमी घाट में स्थित साइलेंट वैली नेशनल पार्क के वृक्ष के खोखले गड्ढों (Tree Holes) में पाई गई है।
- वैज्ञानिक महत्त्व: इस अध्ययन में स्वच्छ जल के केकड़े परिवार गेकार्सिनुसिडे में गाइनांड्रोमोर्फी का पहला मामला दर्ज किया गया है। अन्य क्रस्टेशियनों में यह ज्ञात है, लेकिन इस विशेष परिवार में इससे पहले कभी रिपोर्ट नहीं किया गया था।
- क्रस्टेशियंस जलजीव अधजीवियों (Aquatic Invertebrates) का एक समूह हैं, जो आर्थ्रोपॉड श्रेणी में आते हैं, ये ऐसे जीव हैं जिनके जोड़ वाले पैर और बाहरी कंकाल (External Skeleton) होते हैं। इसमें केकड़े, लॉबस्टर, झींगा, प्रॉन आदि शामिल हैं।
साइलेंट वैली नेशनल पार्क
- परिचय: केरल की नीलगिरि की पहाड़ियों में स्थित साइलेंट वैली नेशनल पार्क एक अछूता उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन है। इसे दक्षिण-पश्चिमी घाट के अंतिम अविकृत क्षेत्रों में से एक माना जाता है और यह नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व (1986), भारत का पहला बायोस्फीयर रिज़र्व, का मुख्य क्षेत्र है।
- भौगोलिक विशेषता: पार्क के भीतर कुंथिपुझा नदी बहती है। ‘साइलेंट वैली’ नाम शोरगुल पैदा करने वाले कीटों की ऐतिहासिक अनुपस्थिति के कारण पड़ा।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: यह पार्क पश्चिमी घाट विश्व धरोहर स्थल (UNESCO, 2012) का हिस्सा है। यह संकटग्रस्त लायन-टेल्ड मेकाक के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण संरक्षित आवास है, जो इसकी प्रमुख प्रजाति है। इसके अलावा यहाँ नीलगिरि लंगूर, मलबार जाइंट स्क्विरल, नीलगिरि तहर और महान भारतीय हॉर्नबिल भी पाए जाते हैं।
- ऐतिहासिक महत्त्व: 1970 के दशक में कुंथिपुझा नदी पर प्रस्तावित बांध के कारण ‘सेव साइलेंट वैली’ आंदोलन (1973) शुरू हुआ। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप परियोजना को रद्द किया गया और क्षेत्र को 1984 में नेशनल पार्क घोषित किया गया।
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रैपिड फायर
भारत के खाद्य सुरक्षा ढाँचे में सुधार
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने खाद्य क्षेत्र में बड़े सुधारों को मंज़ूरी दी है। ये सुधार नीति आयोग की गैर-वित्तीय नियामक सुधारों पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य व्यापार सुगमता और मज़बूत खाद्य सुरक्षा के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करना है।
भारत के खाद्य सुरक्षा ढाँचे में सुधार
- लाइसेंस की शाश्वत वैधता: FSSAI ने समय-समय पर होने वाले नवीनीकरण (periodic renewals) की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है, अब पंजीकरण और लाइसेंस 'शाश्वत वैधता' के होंगे। इससे खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) के लिये अनुपालन लागत और कागज़ी कार्रवाई में उल्लेखनीय कमी आएगी।
- लाइसेंसिंग सीमाओं का युक्तीकरण राज्य अधिकारियों की भूमिका को मज़बूत करने के लिये किया गया है, जिससे वे नियमित नवीनीकरण के बजाय प्रवर्तन, निगरानी और क्षमता निर्माण पर संसाधनों को केंद्रित कर सकें।
- संशोधित कारोबार सीमा: 1 अप्रैल, 2026 से पंजीकरण के लिये कारोबार की सीमा को 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। लाइसेंसिंग के संबंध में 50 करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिये राज्य लाइसेंसिंग लागू होगी। जिन व्यवसायों का कारोबार इस सीमा से अधिक है, उनके लिये केंद्रीय लाइसेंसिंग का प्रावधान किया गया है।
- स्ट्रीट वेंडर्स के लिये डीम्ड रजिस्ट्रेशन: दोहरे अनुपालन को समाप्त करने के लिये स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर्स को अब FSSAI के तहत डीम्ड रजिस्टर्ड माना जाएगा, जिससे 10 लाख से अधिक विक्रेताओं को लाभ होगा।
- सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिये, ये उपाय तत्काल पंजीकरण, पूर्व-निरीक्षण की समाप्ति और लाइसेंसिंग अधिकारियों के साथ बातचीत में पर्याप्त कमी सुनिश्चित करते हैं।
- जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली: खाद्य वस्तुओं की प्रकृति और खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBO) के अनुपालन के पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण को प्राथमिकता देने के लिये एक नए प्रौद्योगिकी-सक्षम और गतिशील जोखिम-आधारित निरीक्षण ढाँचे को लागू किया गया है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
- परिचय: FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण), खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत स्थापित एक सर्वोच्च स्वायत्त वैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य खाद्य संबंधी कानूनों को समेकित करना और एक ही कमान के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है।
- यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अधीन कार्य करता है, जिसके अध्यक्ष का पद भारत सरकार के सचिव के समान होता है।
- नियामक कार्य: इसे खाद्य उत्पादों के लिये नियम और मानक बनाने, लाइसेंस प्रदान करने और खाद्य सुरक्षा पर वैज्ञानिक अनुसंधान और जोखिम मूल्यांकन करने का अधिकार प्राप्त है।
- प्रमुख अभियान: प्रमुख अग्रणी कार्यक्रमों में ईट राइट इंडिया, स्टेट फूड सेफ्टी इंडेक्स, RUCO (रीपर्पज़ यूज़्ड कुकिंग ऑयल) और फूड सेफ्टी मित्र योजना शामिल हैं।
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रैपिड फायर
साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025
साहित्य अकादमी ने 24 भाषाओं में साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा की, जिसमें 8 काव्य संग्रह, 4 उपन्यास, 6 लघु कथा संग्रह, 2 निबंध, 1 साहित्यिक आलोचना, 1 आत्मकथा और 2 संस्मरण को सम्मानित किया।
- उल्लेखनीय विजेताओं में पूर्व राजनयिक नवतेज सरना (अंग्रेज़ी उपन्यास क्रिमसन स्प्रिंग), हिंदी लेखिका ममता कालिया (संस्मरण जीते जी इलाहाबाद) और साहित्यिक आलोचना विधा में तमिल लेखक सा. तमिलसेल्वन (थमिज़ सिरुकाथैयिन थडंगल) शामिल हैं।
- यह पुरस्कार जुलाई 2025 में संस्कृति मंत्रालय और इसके 4 स्वायत्त संस्थानों—राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी और साहित्य अकादमी—के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद दिया गया है, जिसमें मंत्रालय के परामर्श से पुरस्कारों के पुनर्गठन को अनिवार्य किया गया था।
साहित्य अकादमी पुरस्कार
- परिचय: साहित्य अकादमी पुरस्कार, जो वर्ष 1954 में स्थापित किया गया था, भारत में दूसरा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान (ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद) है, जो असाधारण साहित्यिक मूल्यांकन को मान्यता देता है और देश की समृद्ध बहुभाषी विरासत को बढ़ावा देता है।
- यह प्रतिवर्ष साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया जाता है, जो संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है।
- भाषायी कवरेज: यह पुरस्कार 24 भाषाओं में प्रदान किया जाता है, जिसमें संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाएँ, साथ ही अंग्रेज़ी और राजस्थानी शामिल हैं।
- पात्रता: रचना पुरस्कार वर्ष से पहले के 5 वर्षों में प्रकाशित एक मौलिक रचना होनी चाहिये। लेखक भारतीय नागरिक होना चाहिये।
- पुरस्कार की प्रकृति: प्रत्येक भाषा के लिये प्रतिवर्ष एक पुरस्कार दिया जाता है, जो पिछले पाँच वर्षों में प्रकाशित मान्यता प्राप्त विधाओं (जैसे– काव्य, उपन्यास, नाटक या निबंध) में सर्वश्रेष्ठ मौलिक पुस्तक के लिये होता है।
- पुरस्कार विजेता को एक ताम्रपट्ट, एक शॉल, एक प्रशस्ति पत्र और 1,00,000 रुपये (जो वर्ष 1955 में अपने मूल्य 5,000 रुपये से लगातार बढ़ाया गया है) की नकद राशि दी जाती है।
- अन्य उल्लेखनीय साहित्य अकादमी सम्मान: युवा पुरस्कार (युवा लेखकों के लिये), बाल साहित्य पुरस्कार (बाल साहित्य के लिये), साहित्य अकादमी फेलोशिप, भाषा सम्मान आदि।
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