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राष्ट्रीय युवा दिवस 2026

स्रोत: पी.आई.बी.

राष्ट्रीय युवा दिवस प्रतिवर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। चरित्र, साहस, सेवा और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े उनके विचार आज भी भारत की युवा-उन्मुख नीतियों का मार्गदर्शन करते हैं।

  • भारत की 65% से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की होने के कारण, युवा सशक्तीकरण ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण का एक केंद्रीय आधार है।

युवा सशक्तीकरण के लिये सरकार द्वारा कौन-सी मुख्य पहल की गई हैं?

  • मेरा युवा भारत (MY Bharat): एक राष्ट्रीय डिजिटल युवा मंच, जो स्वयंसेवा, नेतृत्व और कौशल निर्माण को AI-आधारित कॅरियर सेवाओं, मार्गदर्शन (मेंटरशिप) और फिट इंडिया पहल के साथ एकीकृत करता है।
  • राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD): राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS) सामुदायिक सेवा के माध्यम से नागरिक सहभागिता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देता है, जबकि VBYLD एक राष्ट्रीय विचार-मंच प्रदान करता है, जिसमें लगभग 3,000 युवा नेता शामिल हैं। साथ ही माय भारत (MY Bharat) और माय गव (MyGov) के माध्यम से इसकी डिजिटल पहुँच 50.42 लाख से अधिक युवाओं तक है।
  • अग्निपथ योजना: 17.5 से 21 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिये चार वर्षीय सैन्य सेवा का मार्ग, जो अनुशासन, तकनीकी कौशल और सेवा उपरांत संरचित पुनर्वास समर्थन के माध्यम से रोज़गार योग्यता को बढ़ावा देता है।
  • प्रधानमंत्री कौशल और रोज़गार योग्यता उन्नयन के माध्यम से परिवर्तन (PM-SETU): एक प्रमुख पहल, जिसके तहत सरकार के स्वामित्व और उद्योग-प्रबंधित हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से 1,000 ITIs को उन्नत किया जाएगा, ताकि व्यावसायिक प्रशिक्षण को वर्तमान और भविष्य की श्रम-बाज़ार आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
  • स्किल इंडिया मिशन: एक समेकित कौशल पारिस्थितिकी तंत्र, जो PMKVY 4.0, PM-NAPS और जन शिक्षण संस्थानों (JSS) को एकीकृत कर भविष्य के लिये तैयार व्यावसायिक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप तथा आजीवन सीखने के अवसर प्रदान करता है।
  • PM विकसित भारत रोज़गार योजना: एक बड़े पैमाने की रोज़गार सृजन योजना, जिसका उद्देश्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियों को समर्थन देना है। इसके तहत नव-नियुक्त युवाओं और नियोक्ताओं दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जाएंगे।
  • स्टार्टअप इंडिया एवं प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 1.97 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता तथा ₹20 लाख तक के बिना संपार्श्विक ऋण की व्यवस्था के माध्यम से युवा उद्यमिता को सुदृढ़ करना; विशेष रूप से प्रथम-पीढ़ी के उद्यमियों, महिलाओं एवं सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लाभ।
  • फिट इंडिया अभियान: दैनिक फिटनेस को प्रोत्साहित करने हेतु एक राष्ट्रव्यापी अभियान, जिसमें संडेज़ ऑन साइकिल, फिट इंडिया स्कूल प्रमाणन, फिटनेस प्लेज़ेस तथा डिजिटल फिटनेस ट्रैकिंग जैसी पहलें शामिल हैं।
  • युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन एवं काशी घोषणा: युवाओं के नेतृत्व में तैयार किया गया राष्ट्रीय रोडमैप, जो मानसिक कल्याण, नशा-मुक्त जीवनशैली तथा मूल्य-आधारित नेतृत्व पर बल देता है; ये विकसित भारत के लिये नशा मुक्त युवा की परिकल्पना के अनुरूप है।
  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK): पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, लैंगिक एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मादक पदार्थों का दुरुपयोग, गैर-संचारी रोगों तथा चोट-निवारण जैसे आयामों को समाहित करने वाला समग्र किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, जो निवारक एवं समुदाय-आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है।

स्वामी विवेकानंद से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?

  • परिचय: स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था, एक संन्यासी और रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्य थे।
    • वर्ष 1893 में, खेतड़ी रियासत के महाराजा अजीत सिंह के अनुरोध पर, उन्होंने अपना नाम 'सच्चिदानंद' से परिवर्तित कर 'विवेकानंद' कर लिया।
  • ज्ञानोदय: वर्ष 1892 में, ऐसी मान्यता है कि स्वामी विवेकानंद ने ध्यान के लिये कन्याकुमारी के तट से हिंद महासागर में एक चट्टान (बाद में विवेकानंद रॉक मेमोरियल नामित) तक तैरकर पहुँचे।
    • उन्होंने वहाँ तीन दिन और तीन रात बिताए, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें ज्ञानोदय हुआ।
  • योगदान:
    • दार्शनिक: उन्होंने दुनिया को वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से परिचित कराया।
      • उन्होंने 'नव-वेदांत' का प्रचार किया, जो पश्चिमी दृष्टिकोण के माध्यम से हिंदू धर्म की एक व्याख्या है। वह आध्यात्मिकता को भौतिक प्रगति के साथ जोड़ने में विश्वास करते थे।
    • आध्यात्मिक: विवेकानंद का मानवीय मूल्यों पर संदेश उपनिषदों, गीता और बुद्ध एवं ईसा मसीह के उदाहरणों से लिया गया है, जो आत्म-साक्षात्कार, करुणा और निस्वार्थ सेवा पर बल देता है।
      • उन्होंने सेवा के सिद्धांत का समर्थन किया। जीव (प्राणियों) की सेवा को शिव की पूजा माना है।
      • उन्होंने अपनी पुस्तकों- राज-योग, कर्म-योग, ज्ञान-योग और भक्ति-योग में सांसारिक सुखों और आसक्तियों से मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त करने के चार मार्ग प्रदान किये।
    • पुनरुत्थानवाद: उन्होंने हमारी मातृभूमि के उत्थान के लिये शिक्षा पर बल दिया। उन्होंने मानव-निर्माण, चरित्र-निर्माण संबंधी शिक्षा का समर्थन किया।
  • संबद्ध संगठन: उन्होंने वर्ष 1897 में सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिक उत्थान के आदर्शों का प्रचार करने के लिये रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।
    • वर्ष 1899 में, उन्होंने बेलूर मठ की स्थापना की, जो उनका स्थायी निवास बन गया।
  • अंतर्राष्ट्रीय उद्बोधन : उन्होंने वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया।
    • जुलाई 1896 में, उन्होंने लंदन में लंदन हिंदू एसोसिएशन के एक सम्मेलन को संबोधित किया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. राष्ट्रीय युवा दिवस क्या है?
स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाने और भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण एवं वर्ष 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने हेतु प्रेरित करने के लिये राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को मनाया जाता है।

2. युवा सशक्तीकरण के लिये सरकार की प्रमुख पहलें क्या हैं?
प्रमुख पहलों में माय भारत, NSS, VBYLD, स्किल इंडिया, PM-SETU, अग्निपथ, स्टार्टअप इंडिया, PM MUDRA, फिट इंडिया, RKSK और काशी घोषणा शामिल हैं, जो नेतृत्व, कौशल विकास, रोज़गार, उद्यमिता और कल्याण को शामिल करते हैं।

3. स्वामी विवेकानंद कौन थे?
स्वामी विवेकानंद 19वीं सदी के एक आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक थे जिन्होंने वेदांत और योग का प्रचार किया, चरित्र निर्माण की शिक्षा का समर्थन किया, रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और युवाओं द्वारा संचालित राष्ट्रीय पुनरुत्थान को प्रेरित किया।



रैपिड फायर

जनगणना 2027

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

गृह मंत्रालय (MHA) ने वर्ष 2027 की जनगणना के लिये हाउस-लिस्टिंग (घरों की सूची बनाना) की शुरुआत को अधिसूचित किया है। यह भारत की 16वीं जनगणना की दिशा में पहला आधिकारिक कदम है, जो वर्ष 2011 के पश्चात होने वाली देश की पहली दशकीय (Decadal) जनगणना की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ है।

जनगणना 2027 के प्रमुख बिंदु

  • चरणबद्ध समय-सीमा: यह दो चरणों में आयोजित की जाएगी—चरण I (2026) में हाउस लिस्टिंग और आवास संगणना (House-listing and Housing Census) तथा चरण II (2027) में जनसंख्या गणना की जाएगी।
    • हाउस लिस्टिंग का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 तक किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसे 30 दिनों की अवधि के भीतर पूरा करेंगे।
    • जनसंख्या गणना की संदर्भ तिथि देश के अधिकांश हिस्सों के लिये 1 मार्च, 2027 होगी, जबकि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिमाच्छादित एवं दूरस्थ क्षेत्रों हेतु यह 1 अक्तूबर, 2026 निर्धारित की गई है।
  • कानूनी आधार: जनगणना, जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 और 17A के तहत भारत के महापंजीयक (RGI) कार्यालय द्वारा संचालित की जा रही है, साथ ही यह अधिसूचना वर्ष 2021 की स्थगित जनगणना हेतु जारी 2020 की पिछली अधिसूचना को प्रभावी रूप से निरस्त करती है।
  • डिजिटल और स्व-गणना: यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें 15 दिनों की औपचारिक स्व-गणना अवधि का प्रावधान होगा। इस दौरान परिवार गणनाकर्त्ता के आने से पहले ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
    • इसमें GPS टैगिंग, कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के लिये ऑफलाइन डेटा संग्रह, क्लाउड पर डेटा संग्रहण तथा लगभग वास्तविक समय की निगरानी हेतु जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली जैसे डिजिटल उपकरण शामिल होंगे।
  • विस्तारित डेटा बिंदु: हाउस लिस्टिंग में 34 विवरण शामिल होंगे, जिनमें नए मापदंड, जैसे—इंटरनेट की उपलब्धता, स्मार्टफोन स्वामित्व, गैस कनेक्शन का प्रकार (PNG/LPG), वाहनों का वर्गीकरण, पेयजल का स्रोत और अनाज की खपत शामिल हैं।
  • ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्त्व: इसमें 1931 के बाद पहली बार (अनुसूचित जाति/जनजाति से आगे) राष्ट्रव्यापी जाति जनगणना शामिल होगी और यह संवैधानिक रोक हटने के बाद भविष्य में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का आधार बनेगी।

और पढ़ें: भारत में जाति जनगणना: आवश्यकता और चुनौतियाँ


रैपिड फायर

पेट्रोडॉलर प्रणाली

स्रोत: द हिंदू

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिका द्वारा गिरफ्तारी ने बदलती वैश्विक तेल व्यापार परिस्थितियों के बीच पेट्रोडॉलर (Petrodollar) के घटते प्रभाव पर फिर से ध्यान केंद्रित कर दिया है।

  • वेनेज़ुएला के पास विश्व के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं (लगभग 300 अरब बैरल, जो ग्लोबल स्टॉक का लगभग 17–18% है), लेकिन यह वर्तमान में प्रतिदिन केवल लगभग 1 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है, जिससे विशाल अप्रयुक्त संभावना बनी हुई है।
    • ट्रंप प्रशासन वेनेज़ुएला के तेल उद्योग को फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रहा है, जिसमें अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को शामिल किया जाएगा, ताकि भविष्य के तेल उत्पादन को फिर से अमेरिकी आर्थिक क्षेत्र से जोड़ा जा सके।
  • पेट्रोडॉलर प्रणाली: यह वह वैश्विक व्यवस्था है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, जिससे डॉलर की लगातार वैश्विक मांग बनी रहती है और अमेरिका की आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक शक्ति मज़बूत होती है।
  • पेट्रोडॉलर प्रभाव की चरम सीमा: वर्ष 2002 से 2008 के बीच तेल की उच्च कीमतों और अमेरिका की तेल आयात पर निर्भरता के कारण, तेल निर्यातक देशों ने अपने बड़े अधिशेष को अमेरिकी ट्रेज़री बाज़ार में निवेश किया, जिससे अमेरिकी बाॅण्ड की ब्याज दरें कम हुईं और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में भी गिरावट आई।
  • शेल क्रांति के बाद संरचनात्मक बदलाव: शेल तेल क्रांति के बाद अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बन गया और वर्ष 2021 से शुद्ध तेल निर्यातक बन चुका है, जिससे पारंपरिक पेट्रोडॉलर प्रणाली की गतिशीलता में महत्त्वपूर्ण बदलाव आया।
  • तेल राजस्व के उपयोग में परिवर्तन: सऊदी अरब जैसे तेल उत्पादक देश अब अपने तेल राजस्व का उपयोग अमेरिकी वित्तीय परिसंपत्तियों में बड़े पैमाने पर निवेश करने के बजाय घरेलू बजट घाटों के वित्तपोषण के लिये अधिक कर रहे हैं, जिससे पहले से विद्यमान पूंजी प्रवाह के प्रतिरूप अप्रभावी हो रहे हैं।
  • डी-डॉलराइज़ेशन की प्रवृत्ति: अनुमानतः अब वैश्विक कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा यूरो और चीनी युआन जैसी गैर-डॉलर मुद्राओं में मूल्यांकित किया जा रहा है, जो तेल व्यापार में डॉलर के घटते प्रभुत्व को दर्शाता है।
    • डॉलर और तेल कीमतों के बीच ऐतिहासिक रूप से विद्यमान विलोम (Inverse) संबंध में हाल के वर्षों में तीव्र कमज़ोरी आई है, जो पेट्रोडॉलर प्रणाली के घटते वित्तीय प्रभाव और प्रभुत्व की ओर संकेत करता है।

और पढ़ें: वेनेज़ुएला में अमेरिकी दखल और पुनः प्रतिपादित मुनरो सिद्धांत


रैपिड फायर

कैटास्ट्रॉफ बॉण्ड्स

स्रोत: द हिंदू 

लगातार होने वाली जलवायु-प्रेरित आपदाओं के परिप्रेक्ष्य में केरल ने केंद्रीय बजट 2026-27 की पूर्व-बजट परामर्श प्रक्रिया के दौरान आपदाजनित क्षतियों से निपटने हेतु वित्तीय सुरक्षा तंत्र के रूप में कैटास्ट्रॉफ (CAT) बॉण्ड्स शुरू करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया है।

  • केरल में लगातार आने वाली आपदाओं ने सार्वजनिक वित्त पर गंभीर दबाव डाला है, जिससे CAT बॉण्ड्स जैसे जलवायु-प्रत्यास्थ वित्तीय साधनों की आवश्यकता स्पष्ट होती है। इस आवश्यकता को केरल के रिस्क-इन्फॉर्म्ड मास्टर प्लान (2022) में भी मान्यता दी गई है। इसके साथ ही, 590 किमी. लंबी तटरेखा पर हो रहे गंभीर तटीय कटाव से निपटने हेतु कोस्टल रेज़िलिएंस फंड की मांग भी की गई है।
  • CAT बॉण्ड्स: ये बीमा-संबद्ध प्रतिभूतियाँ (Insurance-Linked Securities) होती हैं, जिनके माध्यम से चक्रवात, भूकंप जैसी बड़ी आपदाओं से जुड़े वित्तीय जोखिम को बीमाकर्त्ताओं या सरकारों (प्रायोजकों) से निवेशकों तक स्थानांतरित किया जाता है।
    • CAT बॉण्ड्स के अंतर्गत सरकारें प्रायोजक (Sponsors) की भूमिका निभाती हैं और प्रीमियम का भुगतान करती हैं, जबकि निवेशकों की मूलधन राशि बीमित धनराशि के रूप में कार्य करती है। यदि कोई आपदा घटित होती है, तो यह मूलधन पुनर्वास एवं राहत कार्यों हेतु स्थानांतरित कर दिया जाता है; जबकि यदि कोई आपदा नहीं होती, तो निवेशकों को उच्च ब्याज प्राप्त होता है।
    • CAT बॉण्ड्स निवेशकों को उच्च प्रतिफल और पोर्टफोलियो विविधीकरण प्रदान करते हैं, क्योंकि इनके प्रतिफल प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय बाज़ारों से जुड़े नहीं होते। वहीं सरकारों और बीमाकर्त्ताओं के लिये ये त्वरित भुगतान सुनिश्चित करते हैं, बजटीय आवंटनों पर निर्भरता घटाते हैं तथा आपदा जोखिम को वैश्विक पूंजी बाज़ारों में स्थानांतरित करते हैं।
    • वर्तमान में भारत में आपदा राहत का संपूर्ण राजकोषीय बोझ राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है।
  • वैश्विक उपयोग: मेक्सिको और फिलीपींस जैसे देश प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जोखिमों के विरुद्ध हेजिंग के लिये CAT बॉण्ड्स का उपयोग करते हैं।
  • भारत के लिये महत्त्व: CAT बॉण्ड्स आपदा-प्रवण राज्यों को राजकोषीय रूप से सतत, पूर्वानुमेय तथा त्वरित वित्तपोषण साधन उपलब्ध करा सकते हैं। इससे सार्वजनिक/पब्लिक बजट पर दबाव कम होता है और आपातकालीन उधारी (Emergency Borrowing) की आवश्यकता घटती है।

और पढ़ें: प्राकृतिक आपदाओं के लिये कटैस्ट्रफी बॉण्ड


रैपिड फायर

भारत की पर्यटन अवसंरचना पहलें

स्रोत: पीआईबी 

पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन अवसंरचना विकास, गंतव्य-आधारित योजनाओं, कौशल संबंधी पहलों और वैश्विक प्रचार में महत्त्वपूर्ण प्रगति की सूचना दी है, जो स्वदेश दर्शन 2.0 एवं तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान (प्रशाद) योजना जैसी प्रमुख योजनाओं के मिशन-मोड कार्यान्वयन को दर्शाती है।

  • पर्यटन प्रदर्शन (2024): भारत ने 20 मिलियन से अधिक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन दर्ज किये, विदेशी मुद्रा आय में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए प्राप्त किये और लगभग 3 बिलियन घरेलू पर्यटकों को दर्ज किया, जो आर्थिक विकास और सेवा निर्यात में पर्यटन के बढ़ते योगदान को रेखांकित करता है।
    • भारत ने लगभग 0.64 मिलियन विदेशी चिकित्सा पर्यटकों का आगमन दर्ज किया, जिसमें 171 देशों के लिये ई-मेडिकल और ई-आयुष वीज़ा उपलब्ध हैं, जो सस्ती तृतीयक स्वास्थ्य सेवा और आयुष-आधारित कल्याण सेवाओं के केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है।
  • स्वदेश दर्शन 2.0: स्वदेश दर्शन योजना (2014–15) विषयगत पर्यटन सर्किट विकसित करने के लिये शुरू की गई थी, जिसने राज्यों में पर्यटन अवसंरचना को महत्त्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ किया।
    • स्वदेश दर्शन 2.0 (2023) एक नवीनीकृत, गंतव्य-आधारित पर्यटन मिशन है, जो सतत और ज़िम्मेदार विकास पर केंद्रित होने के साथ ही स्थानीय के लिये वोकल और आत्मनिर्भर भारत के साथ संरेखित है तथा अवसंरचना, सेवाओं, कौशल, गंतव्य प्रबंधन और नीति सुधारों को एकीकृत करता है।
    • स्वदेश दर्शन 2.0 में चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट और प्रधानमंत्री-जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान जैसी उप-योजनाएँ भी शामिल हैं।
    • चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट: यह संपूर्ण पर्यटन मूल्य शृंखला में सुधार हेतु एक प्रतिस्पर्द्धी, परिणाम-आधारित दृष्टिकोण का पालन करता है। यह योजना आध्यात्मिक पर्यटन, संस्कृति और विरासत, जीवंत गाँव और पारिस्थितिक पर्यटन/अमृत धरोहर स्थल जैसे विषयों को कवर करती है।
    • प्रधानमंत्री-जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान: इसका उद्देश्य पर्यटन के माध्यम से जनजातीय आजीविका में सुधार करना, जनजातीय होमस्टे, सांस्कृतिक पर्यटन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • PRASHAD योजना: पहचाने गए तीर्थस्थलों पर पर्यटन अवसंरचना के समेकित विकास के लिये राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • माइस पर्यटन को बढ़ावा: भारत ने MICE (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्ज़ीबिशन) के लिये एक राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप शुरू किया है, साथ ही मीट इन इंडिया उप-ब्रांड के माध्यम से भारत को वैश्विक सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
    • G20 मेज़बान शहरों सहित 60+ शहरों को कवर करने वाला एक डिजिटल माइस कैटलॉगमीट इन इंडिया कॉन्क्लेव 2025 (जयपुर) ने माइस क्षेत्र में भारत की वैश्विक दृश्यता को और मज़बूत किया।

और पढ़ें: भारत के विकास इंजन के रूप में पर्यटन


रैपिड फायर

प्रवासी भारतीय दिवस (PBD)

स्रोत: पी.आई.बी. 

9 जनवरी, 2025 को प्रवासी भारतीय दिवस (PBD) के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने वैश्विक भारतीय प्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और विश्व के साथ भारत को जोड़ने वाले एक महत्त्वपूर्ण सेतु के रूप में इस दिवस की भूमिका पर प्रकाश डाला।

  • परिचय: PBD विदेश मंत्रालय का प्रमुख आउटरीच कार्यक्रम है, जिसे भारतीय प्रवासियों को जोड़ने और भारत की क्षेत्रीय विविधता एवं विकास को प्रदर्शित करने के लिये आयोजित किया जाता है।
    • वर्ष 2015 से, इसे एक द्विवार्षिक, थीम-आधारित सम्मेलन के रूप में आयोजित किया जाता है, जो केंद्रित प्रवासी समन्वय, संवाद और नेटवर्किंग को सक्षम बनाता है।
  • महत्त्व: यह दिवस महात्मा गांधी के वर्ष 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने की स्मृति में मनाया जाता है, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में भारतीय प्रवासियों की ऐतिहासिक भूमिका का प्रतीक है।
  • विकास: PBD सम्मेलन की स्थापना वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री-काल के दौरान भारतीय प्रवासियों के साथ संरचित और निरंतर जुड़ाव को संस्थागत बनाने के लिये की गई थी।
  • उद्देश्य: इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के विकास में प्रवासियों के योगदान को मान्यता देना, विदेशों में भारत की छवि को बेहतर करना, राष्ट्रीय कारणों और विदेशी भारतीय कल्याण का समर्थन करना तथा प्रवासियों एवं भारत सरकार के बीच संवाद हेतु एक मंच प्रदान करना है।
  • PBD 2025: 18वाँ PBD सम्मेलन (2025) भुवनेश्वर, ओडिशा में आयोजित किया गया था। इसमें प्रमुख रूप से प्रवासी तीर्थ दर्शन योजना के तहत प्रवासी भारतीय एक्सप्रेस का शुभारंभ, मांडवी–मस्कट प्रवास पर एक प्रदर्शनी और एक व्यापक गिरमिटिया डेटाबेस के प्रस्ताव सहित गिरमिटियों की विरासत पर नवीन पहचान शामिल थे।
  • सम्मान: प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार NRI, OCI और प्रवासी संगठनों को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है, जो भारत की वैश्विक छवि, राष्ट्रीय कारणों और सामुदायिक कल्याण में उनके उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।

और पढ़ें: प्रवासी भारतीय दिवस (PBD)


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