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UNSC और ब्रेटन वुड्स में सुधार

  • 24 May 2023
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

UNSC, ब्रेटन वुड्स, संयुक्त राष्ट्र, द्वितीय विश्व युद्ध, IMF, विश्व बैंक, SDR, WTO, IGN

मेन्स के लिये:

UNSC और ब्रेटन वुड्स में सुधार 

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में जापान के हिरोशिमा में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) और ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधारों का आह्वान किया है जिसमें कहा गया है कि वर्तमान आदेश पुराना, बेकार और अनुचित है।

  • कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से आर्थिक अस्थिरता के कारण उक्त संस्थान वैश्विक सुरक्षा तंत्र के रूप में अपने मूल कार्य को पूरा करने में विफल रहे हैं।

ब्रेटन वुड्स प्रणाली: 

  • परिचय: 
    • ब्रेटन वुड्स प्रणाली वर्ष 1944 में न्यू हैम्पशायर, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में 44 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा बनाया गया एक मौद्रिक ढाँचा था। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा में स्थिरता और सहयोग स्थापित करना था।
    • ब्रेटन वुड्स समझौते ने दो महत्त्वपूर्ण संगठन बनाए- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक
      • वर्ष 1970 के दशक में ब्रेटन वुड्स प्रणाली को भंग कर दिया गया था। इसके बाद IMF और विश्व बैंक (ब्रेटन वुड्स संस्थान) दोनों ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं के आदान-प्रदान के लिये सुदृढ़ स्तंभ बने हुए हैं। 

  • ब्रेटन-वुड्स संस्थानों में सुधार की आवश्यकता:
    • इन संस्थानों ने अपने पहले 50 वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि हाल के दिनों में वे बढ़ती समस्याओं से संघर्ष कर रहे हैं
    • असमानता, वित्तीय अस्थिरता और संरक्षणवाद के मामले फिर से उभर कर सामने आए हैं।
    • जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक तनाव, बढ़ती आपदाएँ और साइबर सुरक्षा तथा  महामारी जैसे नए खतरों के बीच विश्व को एक नए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे की आवश्यकता है। 
    • निधि आवंटन और अनियमित विशेष आहरण अधिकार (SDR) में पक्षपात किया गया, IMF ने महामारी के दौरान SDR में 650 बिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित किये।
      • 77.2 करोड़ लोगों की आबादी वाले G-7 देशों को 280 अरब डॉलर, जबकि 1.3 अरब लोगों की आबादी वाले अफ्रीकी महाद्वीप को केवल 34 अरब डॉलर दिये गए।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC): 

  • परिचय: 
    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा की गई थी और यह संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंगों में से एक है।
    • UNSC में 15 सदस्य हैं: 5 स्थायी सदस्य (P5) और 10 गैर-स्थायी सदस्य 2 वर्ष के लिये चुने जाते हैं।
      • 5 स्थायी सदस्य (P5) हैं: अमेरिका, रूस, फ्राँस, चीन और यूके।
    • भारत जो कि वर्ष 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 की अवधि में परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रहा ने 8वीं बार वर्ष 2021 में UNSC में प्रवेश किया तथा वर्ष 2021-22 की अवधि के लिये परिषद में गैर-स्थायी सदस्य बना।
  • UNSC से संबद्ध मुद्दे: 
    • विकासशील देशों के लिये समस्याएँ उत्पन्न करना:
      • विकासशील देश नैतिक, शक्ति संबंधी और व्यावहारिक जैसे तीन आयामों में समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
      • अमीर देशों के पक्ष में वैश्विक आर्थिक और वित्तीय ढाँचे में एक प्रणालीगत और अनुचित पूर्वाग्रह "विकासशील विश्व के देशों में निराशा" का भाव उत्पन्न कर रहा है।
    • प्रतिनिधित्व को सीमित करना:
      • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता से अफ्रीका, साथ ही भारत, जर्मनी, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की अनुपस्थिति को एक महत्त्वपूर्ण कमी के रूप में देखा जाता है।
      • यह महत्त्वपूर्ण राष्ट्रों के प्रतिनिधित्व और वैश्विक मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण को सीमित करता है तथा जटिल एवं परस्पर संबंधित समस्याओं पर प्रभावी निर्णय लेने में बाधा उत्पन्न करता है।
    • वीटो पावर का दुरुपयोग: 
      • P5 के पास UNSC में कालानुक्रमिक वीटो पावर है, जिसे अलोकतांत्रिक होने और P5 में से किसी के असहमत होने पर महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने की परिषद की क्षमता को सीमित करने के लिये आलोचना का सामना करना पड़ा है।
      • कई लोगों का तर्क है कि इस तरह के कुलीन निर्णय लेने वाले ढाँचे मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के लिये उपयुक्त नहीं हैं।

इन मुद्दों के समाधान के उपाय:

  • ब्रेटन वुड्स: 
    • तीन वैश्विक संस्थानों- IMF, WBG और विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization- WTO) को फिर से आकार देने एवं पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है जहाँ:
      • IMF उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की सख्त निगरानी और वैश्विक संकटों पर उनके प्रभाव के साथ व्यापक आर्थिक नीति और वित्तीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करेगा।
      • पुनर्गठित विश्व बैंक समूह स्थिरता, साझा समृद्धि और प्रभावी रूप से निजी पूंजी से लाभ की प्राप्ति को प्राथमिकता देगा। वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने एवं वित्त के वैश्विक आपूर्तिकर्त्ता के रूप में कार्य करने के लिये इसे मिलकर कार्य करने की आवश्यकता।
      • निष्पक्ष व्यापार, त्वरित विवाद समाधान और आपात स्थिति में तीव्र प्रतिक्रिया क्षमता के लिये एक सशक्त WTO की आवश्यकता है। 
    • व्यवधानों और राजनीतिक प्रभावों से बचने के लिये प्रणाली में अधिक स्वचालित और नियम-आधारित वित्तपोषण तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
    • SDR, वैश्विक प्रदूषण करों और वित्तीय लेन-देन आधारित करों से संबंधित मुद्दों का नियमित आकलन करने की आवश्यकता है।
      • यह उचित रूप से संरचित G-20 ब्रेटन वुड्स प्रणाली और अन्य संस्थानों के साथ इसके संबंधों को व्यापक मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC): 
    • शक्ति और अधिकार के विकेंद्रीकरण के साथ-साथ अफ्रीका सहित सभी क्षेत्रों के लिये समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता है,यह सभी राष्ट्रों को अपने देशों में शांति एवं लोकतंत्र से संबंधित मुद्दों को उठाने की अनुमति देगा जो कि निर्णयन को अधिक भागीदारीपूर्ण और लोकतांत्रिक बनाएगा। 
    • P5 देशों के विशेषाधिकारों को संरक्षित करने के बजाय वैश्विक मुद्दों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिये UNSC के अधिक लोकतांत्रिक एवं वैध शासन को सुनिश्चित करने हेतु P5 तथा शेष विश्व के मध्य शक्ति को संतुलित करने के लिये तत्काल सुधार की आवश्यकता है। 
    • अंतर-सरकारी वार्ता (Intergovernmental Negotiation- IGN) प्रक्रिया, जो UNSC में सुधार पर चर्चा करती है, को संशोधित किया जाना चाहिये और प्रगति में बाधा डालने वाली प्रक्रियात्मक रणनीति से बचना चाहिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक और वित्तीय सम्मेलन जिसमें IBRD, GATT और IMF की स्थापना के लिये समझौते किये गए थे, को किस रूप में जाना जाता है? (2008)

(a) बांडुंग सम्मेलन
(b) ब्रेटन वुड्स सम्मेलन
(c) वर्साय सम्मेलन
(d) याल्टा सम्मेलन

उत्तर: (b)


प्रश्न. अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक एवं वित्तीय समिति (International Monetary and Financial Committee- IMFC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

  1. IMFC विश्व अर्थव्यवस्था से सरोकार रखने वाले विषयों पर चर्चा करता है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को उसके कार्य की दिशा पर सलाह देता है।
  2. IMFC की बैठकों में विश्व बैंक प्रेक्षक की भाँति भाग लेता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)


प्रश्न. "स्वर्ण ट्रांश" (रिज़र्व ट्रांश) निर्दिष्ट करता है: (2020)

(a) विश्व बैंक की ऋण व्यवस्था
(b) केंद्रीय बैंक की किसी एक क्रिया को 
(c) WTO द्वारा इसके सदस्यों को प्रदत्त एक साख प्रणाली को
(d) IMF द्वारा इसके सदस्यों को प्रदत्त एक साख प्रणाली को

उत्तर: (d)


प्रश्न: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य हैं और बाकी 10 सदस्य महासभा द्वारा निम्नलिखित में से किस अवधि के लिये चुने जाते हैं। (2009)

(a) 1 वर्ष 
(b) 2 वर्ष 
(c) 3 वर्ष 
(d) 5 वर्ष 

उत्तर: (b) 


प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की खोज में भारत के समक्ष आने वाली बाधाओं पर चर्चा कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2015)

प्रश्न. विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, सयुंक्त रूप से ब्रेटन वुड्स के नाम से जानी जाने वाली संस्थाएँ, विश्व की आर्थिक व वित्तीय व्यवस्था की संरचना का संभरण करने वाले दो अंत: सरकारी स्तंभ हैं। पृष्ठीय रूप में विश्व बैंक व अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष दोनों की अनेक समान विशिष्टताएँ हैं, तथापि उनकी भूमिका, कार्य तथा अधिशेष स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। व्याख्या कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2013)

स्रोत: डाउन टू अर्थ  

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