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जनगणना

  • 09 Jan 2023
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

जनगणना 2011, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, कल्याणकारी योजनाएँ, सरकारी योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली।

मेन्स के लिये:

जनगणना।

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिये प्रशासनिक सीमाओं को अंतिम रूप देने की अवधि जून 2023 तक बढ़ा दी है, जिसके कारण जनगणना 2021 की कवायद में देरी हो सकती है।

  • जनगणना के संचालन के दौरान मकान सूचीकरण के चरण और आबादी की गणना के दौरान राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से ज़िलों, कस्बों, गाँवों तथा तहसीलों की सीमाओं को बदलने की अपेक्षा नहीं की जाती है।

विलंब के निहितार्थ:

  • राजनीतिक प्रतिनिधित्त्व पर प्रभाव:
    • जनगणना का उपयोग संसद, राज्य विधानसभाओं, स्थानीय निकायों और सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षित सीटों की संख्या निर्धारित करने के लिये किया जाता है।
    • इसलिये जनगणना में देरी का अर्थ है कि वर्ष 2011 की जनगणना के डेटा का उपयोग जारी रहेगा। 
    • कई कस्बों और यहाँ तक कि पंचायतों में जहाँ पिछले दशक में उनकी आबादी की संरचना में तेज़ी से बदलाव हुआ है, का अर्थ यह होगा कि या तो बहुत अधिक या बहुत कम सीटें आरक्षित की जाएंगी।
  • निर्वाचन क्षेत्र का परिसीमन:
    • वर्ष 2026 के बाद की जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने तक संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर जारी रहेगा।
  • कल्याणकारी उपायों पर अविश्वसनीय अनुमान:
    • विलंब से सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों पर प्रभाव पड़ेगा तथा इसके परिणामस्वरूप उपभोग, स्वास्थ्य एवं रोज़गार पर अन्य सर्वेक्षणों से अविश्वसनीय अनुमान प्राप्त होंगे जो नीति और कल्याण उपायों को निर्धारित करने के लिये जनगणना के आँकड़ों पर निर्भर करते हैं।
      • सरकार के खाद्य सब्सिडी कार्यक्रम सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से 10 करोड़ लोगों के बाहर हो जाने की संभावना है क्योंकि लाभार्थियों की संख्या की गणना के लिये उपयोग किये जाने वाले जनसंख्या के आँकड़े वर्ष 2011 की जनगणना पर आधारित हैं।
  • मकान-सूचीकरण का प्रभाव:
    • पूरे देश के लिये एक संक्षिप्त मकान सूची तैयार करने में लगभग एक वर्ष का समय लगता है जिसका उपयोग प्रगणक पते को जानने के लिये करता है।
    • मकान-सूचीकरण का मुख्य उद्देश्य उन सभी परिवारों की एक सूची तैयार करना है, जिनका सर्वेक्षण जनगणना से पहले किया जाना है, इसके अलावा आवास स्टॉक सुविधाओं और प्रत्येक परिवार के पास उपलब्ध परिसंपत्तियों पर डेटा प्रदान करना है।
    • जनसंख्या गणना एक वर्ष के बाद हाउसलिस्टिंग/घरों के सूचीकरण के बाद होती है
      • इसलिये जनगणना 2011 हेतु सरकार ने अप्रैल और सितंबर 2010 के बीच हाउसलिस्टिंग एवं फरवरी 2011 में जनसंख्या गणना की।
    • हाउसलिस्टिंग महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका के विपरीत भारत के पास एक मज़बूत एड्रेस सिस्टम नहीं है।
  • प्रवास:
    • पहले कोविड लॉकडाउन के दौरान शहरों से राजमार्गों के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों के अपने गाँवों की ओर जाने की तस्वीरों ने उनकी दुर्दशा को सुर्खियों में ला दिया और प्रवास की संख्या, कारणों तथा प्रतिरूप पर सवाल उठाए गए, जिसका निराकरण वर्ष 2011 की जनगणना के पुराने आँकड़ों का उपयोग करके नहीं किया जा सकता था।
      • उदाहरण के लिये केंद्र के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि प्रत्येक शहर या राज्य में कितने प्रवासियों के फँसे होने की संभावना है और उन्हें भोजन राहत या परिवहन सहायता की आवश्यकता है।
    • नई जनगणना में बड़े महानगरीय केंद्रों के अलावा छोटे द्वि-स्तरीय शहरों की ओर प्रवासन प्रवृत्तियों में देखे गए संचलन के दायरे को शामिल करने की संभावना है।
      • यह इस सवाल का जवाब देने में मदद कर सकता है कि प्रवासियों में किन्हें किस तरह की स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सेवाओं की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

जनगणना: 

  • परिभाषा: 
    • जनसंख्या जनगणना एक देश या किसी देश के एक सुपरिभाषित हिस्से में सभी व्यक्तियों के विशिष्ट समय पर जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक डेटा से संबंधित संग्रह, संकलन, विश्लेषण एवं प्रसार की समग्र प्रक्रिया है।
    • जनगणना पिछले एक दशक में देश की प्रगति की समीक्षा, सरकार की चल रही योजनाओं की निगरानी और भविष्य की योजनाओं का आधार है।
    • यह किसी समुदाय का तात्कालिक फोटोग्राफिक चित्र या स्थिति प्रदान करती है, जो किसी विशेष समय पर मान्य है।
    • जनगणना जनसंख्या विशेषताओं में प्रवृत्ति भी प्रदान करती है।
  • आवृत्ति: 
    • भारत में प्रत्येक 10 वर्ष में जनगणना की जाती है। 
      • भारतीय शहर की पहली पूर्ण जनगणना वर्ष 1830 में ढाका में हेनरी वाल्टर (भारतीय जनगणना के जनक के रूप में जाना जाता है) द्वारा आयोजित की गई थी।
      • गवर्नर-जनरल लॉर्ड मेयो के शासनकाल के दौरान वर्ष 1872 में भारत में पहली गैर-समकालिक जनगणना आयोजित की गई थी। 
      • पहली जनगणना 1881 में भारत के जनगणना आयुक्त डब्ल्यू.सी. प्लोडेन द्वारा संपन्न कराई गई थी। तब से निर्बाध रूप से हर दस साल में एक बार जनगणना की जाती रही है। 
    • अन्य देश:
      • कई देशों में हर 10 साल (उदाहरण के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन) और हर पाँच साल (जैसे कनाडा, जापान) या कुछ देशों में अनियमित अंतराल पर जनगणना कराई जाती है।
  • नोडल मंत्रालय:
  • कानूनी/संवैधानिक स्थिति:
    • जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत जनगणना की जाती है।
      • इस अधिनियम के लिये बिल को भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा निर्देशित किया गया था।
    • जनसंख्या जनगणना भारत के संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत संघ सूची का विषय है।
  • सूचना की गोपनीयता:
    • जनसंख्या की जनगणना के दौरान एकत्र की गई जानकारी इतनी गोपनीय होती है कि यह न्यायिक विषयों हेतु न्यायालय में भी प्रस्तुत नहीं की जा सकती है।
      • जनगणना अधिनियम, 1948 द्वारा गोपनीयता की गारंटी दी गई है। अधिनियम के किसी भी प्रावधान के गैर-अनुपालन या उल्लंघन के लिये कानून सार्वजनिक और जनगणना अधिकारियों दोनों हेतु दंड निर्दिष्ट करता है।

2021 की जनगणना की विगत जनगणना से तुलना:

  • पहली बार डेटा को मोबाइल एप्लीकेशन (गणना करने वाले व्यक्ति के फोन पर स्थापित) के माध्यम से ऑफलाइन मोड में काम करने के प्रावधान के साथ डिजिटल रूप से एकत्र किया जाएगा।
  • जनगणना निगरानी और प्रबंधन पोर्टल जनगणना गतिविधियों में शामिल सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिये बहु-भाषा समर्थन प्रदान करने हेतु एकल स्रोत के रूप में कार्य करेगा।
  • पहली बार ट्रांसजेंडर समुदाय के किसी व्यक्ति और परिवार में रहने वाले सदस्यों की जानकारी जुटाई जाएगी।
    • पुरुष और महिला के लिये पहले केवल एक पंक्ति (कॉलम) था।

जनगणना का महत्त्व:

  • सूचना का स्रोत:
    • भारतीय जनसंख्या के कई पहलुओं पर सांख्यिकीय आँकड़ों का सबसे व्यापक एकल स्रोत भारतीय जनगणना है।
    • जनगणना डेटा का उपयोग शोधकर्त्ताओं और जनसांख्यिकीविदों द्वारा जनसंख्या वृद्धि एवं प्रवृति का पूर्वानुमान लगाने के लिये किया जाता है। 
  • सुशासन:  
    • जनगणना के दौरान एकत्र की गई जानकारी का उपयोग सरकार द्वारा प्रबंधन, योजना और नीति-निर्माण के साथ-साथ कई कार्यक्रमों के प्रबंधन एवं मूल्यांकन के लिये किया जाता है।
  • सीमांकन:  
    • जनगणना के आँकड़ों का उपयोग निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन और संसद, राज्य विधानसभाओं तथा स्थानीय निकायों को प्रतिनिधित्त्व के आवंटन के लिये भी किया जाता है। 
    • संसद, राज्य विधानसभाओं, स्थानीय प्राधिकरणों और सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षित होने वाली सीटों की संख्या भी जनगणना के परिणामों का उपयोग करके निर्धारित की जाती है।  
      • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये सीटें पंचायतों एवं नगरपालिका प्राधिकरणों में जनसंख्या में उनके अनुपात के आधार पर आरक्षित होती हैं।
  • व्यवसायों के लिये बेहतर पहुँच:  
    • जनगणना डेटा व्यवसायों और उद्योगों के लिये योजना बनाने और उनके संचालन को बढ़ाने के लिये महत्त्वपूर्ण है ताकि वे बाज़ारों को विस्तारित कर सकें। 
  • अनुदान की सुविधा:  
    • वित्त आयोग जनगणना के आँकड़ों से उपलब्ध डेटा के आधार पर राज्यों को अनुदान प्रदान करता है।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2009) 

  1. वर्ष 1951 की जनगणना और 2001 की जनगणना के बीच भारत के जनसंख्या घनत्त्व में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
  2. वर्ष 1951 की जनगणना और 2001 की जनगणना के बीच भारत की जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर तीन गुना हो गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 

(a) केवल 1 
(b) केवल 2 
(c) 1 और 2 दोनों 
(d) न तो 1 और न ही 2 

उत्तर: (d)  

स्रोत: द हिंदू

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