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प्रिलिम्स फैक्ट्स

प्रारंभिक परीक्षा

अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ – कानूनी अधिकार पाने वाले विश्व के पहले कीट

स्रोत: DTE

चर्चा में क्यों?

पेरू के सतीपो (Satipo) नगर पालिका ने एक नगरपालिका अध्यादेश के माध्यम से बिना डंक वाली स्थानीय मधुमक्खियों (मेलिपोनिनी जनजाति) के अधिकारों को मान्यता प्रदान की गई है। इसके तहत अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियों को कानूनी अधिकार प्रदान किये गए हैं, ताकि पेरू की जैव-सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सके।

  • यह वैश्विक स्तर पर कीटों के अधिकारों को कानूनी मान्यता देने वाला पहला कदम है। इसके माध्यम से जैव-सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और प्रकृति के अधिकारों पर आधारित शासन मॉडल को एक नई मज़बूती मिलेगी।

अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ क्या हैं?

  • परिचय: अमेज़न वर्षावनों की ये स्थानीय, बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ केवल परागणकर्त्ता ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर हैं। जिनका सदियों से स्वदेशी समुदायों द्वारा परंपरागत रूप से संरक्षण और पालन किया जाता है।
    • ये पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे पुरानी मधुमक्खी प्रजातियों में से हैं, जो अमेज़न के 80% से अधिक वनस्पतियों के परागण के लिये ज़िम्मेदार हैं।
    • इनमें डंक बिल्कुल नहीं होता, बल्कि इनमें एक अवशिष्ट डंक होता है, जो इतना छोटा होता है कि इसका रक्षा के लिये इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अतः ये अपने छत्ते की रक्षा काटने या जलन उत्पन्न करने वाले रेजिन स्रावित करके करते हैं।
  • आवास: ये उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मूल रूप से पाई जाती हैं (गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में विश्व स्तर पर पाए जाते हैं) और इनकी सबसे अधिक विविधता अमेज़न वर्षावन में पाई जाती है।
  • व्यवहार: ये अत्यधिक सामाजिक (यूसोशल) कीट हैं जो वर्ष भर कॉलोनियों में रहते हैं तथा खोखले वृक्षों के तनों में घोंसला बनाते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: डंक रहित मधुमक्खियाँ स्वदेशी अशानिंका तथा कुकामा-कुकामिरिया समुदायों की संस्कृति का अभिन्न अंग है।
  • प्रमुख पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्त्व:
    • जैव-विविधता का संरक्षण: वर्षावन की जैव-विविधता और पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता बनाए रखने में सहायक होती हैं तथा कॉफी, कोको, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसी प्रमुख वैश्विक फसलों के परागण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    • मेलिपोनिकल्चर (Meliponiculture): बिना डंक वाली मधुमक्खियों को शहद एवं औषधीय उपयोग के लिये  पालने और प्रजनन करने की पारंपरिक पद्धति को मेलिपोनिकल्चर कहा जाता है, जिसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्वदेशी समुदायों द्वारा व्यापक रूप से अपनाया जाता है।
    • औषधीय उपयोग: इनका शहद पारंपरिक स्वदेशी चिकित्सा में उपयोग किया जाता है, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘चमत्कारी द्रव’ कहा जाता है। इसमें सूजन-रोधी, जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण पाए गए हैं तथा इसका उपयोग मोतियाबिंद जैसे नेत्र रोगों के उपचार में भी किया जाता है।
      • इस शहद में नमी की मात्रा अधिक होती है, यह हल्का अम्लीय होता है, चिपचिपा नहीं होता और इसका स्वाद मीठा-खट्टा होता है, जिससे यह व्यावसायिक रूप से बेचे जाने वाले शहद से स्पष्ट रूप से भिन्न है।
  • खतरे: वे निर्वनीकरण, अवैध लकड़ी कटान, कृषि विस्तार, पशु चराई, दावानल और बढ़ते तापमान जैसे बढ़ते खतरों का सामना कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके आवास नष्ट हो रहे हैं तथा उन्हें ऊँचाई वाले क्षेत्रों की ओर पलायन के लिये मज़बूर होना पड़ रहा है।

स्थानीय बिना डंक वाली मधुमक्खियों के लिये अधिकारों की घोषणा क्या है?

  • यह प्रकृति के अधिकारों पर आधारित एक ऐतिहासिक कानूनी ढाँचा है, जिसे सैटिपो नगर पालिका ने अपने स्थानीय कानून में सम्मिलित किया है। यह कीट संरक्षण के क्षेत्र में एक वैश्विक मिसाल स्थापित करता है।
  • मान्यता प्राप्त अधिकारों में शामिल हैं:
    • अस्तित्व और पनपने का अधिकार
    • स्वस्थ जनसंख्या बनाए रखने का अधिकार
    • प्रदूषण-मुक्त आवास का अधिकार
    • पारिस्थितिक रूप से स्थिर जलवायु परिस्थितियों का अधिकार
    • प्राकृतिक चक्रों के पुनर्जनन का अधिकार
    • क्षति या खतरे की स्थिति में कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार
  • बिना डंक वाली मधुमक्खियों की ओर से न्यायालय में पक्ष रखने हेतु मानव ‘संरक्षक’, जिनमें स्वदेशी अभिकर्त्ताओं या विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है, प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके हितों की रक्षा के लिये प्रदूषकों पर मुकदमा दायर कर सकते हैं।

भारतीय समानांतर (भारत में प्रकृति के अधिकार)  

  • भारतीय पशु कल्याण बोर्ड बनाम ए. नागराज (2014): इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का विस्तार करते हुए पशुओं को भी शामिल किया। न्यायालय ने यह मान्यता दी कि पशुओं का अपना अंतर्निहित मूल्य, गरिमा है और उन्हें अनावश्यक पीड़ा व कष्ट से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। इस निर्णय ने भारत में पशु कल्याण के लिये  एक संवैधानिक आधार स्थापित किया।
  • मोहम्मद सलीम बनाम उत्तराखंड राज्य (2017): उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गंगा और यमुना नदियों को कानूनी व्यक्तित्व प्रदान करते हुए उन्हें जीवित इकाइयाँ घोषित किया, जिनके अपने कानूनी अधिकार तथा कर्त्तव्य होंगे। यह निर्णय न्यूज़ीलैंड की व्हांगानूई नदी के मामले से प्रेरित था। हालाँकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय पर स्थगन लगा दिया, जिससे नदियों को दिया गया कानूनी व्यक्तित्व का दर्जा फिलहाल स्थगित हो गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ क्या हैं?
वे प्राचीन, बिना डंक वाली परागण करने वाली मधुमक्खियाँ हैं, जो अमेज़न वर्षावन की मूल निवासी हैं। ये पृथ्वी पर मधुमक्खियों के सबसे पुराने समूहों में से एक हैं और उष्णकटिबंधीय वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

2. बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ पारिस्थितिकी रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?
वे अमेज़न की वनस्पतियों का 80% से अधिक परागण करती हैं, वर्षावन के पुनर्जीवन का समर्थन करती हैं और कॉफी, कोको, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे मुख्य फसलों के लिये भी महत्त्वपूर्ण हैं।

3. बिना डंक वाली मधुमक्खियों के लिये मुख्य खतरे क्या हैं?
वे वनों की कटाई, अवैध लकड़ी काटना, कृषि विस्तार, वनाग्नि, बढ़ते तापमान और कीटनाशकों के संपर्क जैसी समस्याओं का सामना करती हैं, जिससे उनके आवास नष्ट होते हैं और जनसंख्या में गिरावट आती है।

4. यह कदम विश्व स्तर पर इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?
यह राइट्स ऑफ नेचर (प्रकृति के अधिकार) ढाँचे के तहत एक वैश्विक मिसाल स्थापित करता है, जो पहली बार कीड़ों को कानूनी मान्यता और संरक्षण प्रदान करता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा जीव अपने सगे-संबंधियों को अपने खाद्य के स्रोत की दिशा और दूरी इंगित करने के लिये दोलन नृत्य (वैगल डांस) करता है? (2023)

(a) तितली  

(b) व्याध पतंग (ड्रैगन फ्लाई )

(c) मधुमक्खी

(d) बर्र


प्रश्न. निम्नलिखित पर विचार कीजिये : (2024)

1. तितली

2. मत्स्य

3. मंडूक (मेढक)

उपर्युक्त में से कितनों में विषाक्त जातियाँ हैं ?

(a) केवल एक

(b) केवल दो

(c) सभी तीन

(d) कोई नहीं


प्रारंभिक परीक्षा

BEE मानक और लेबलिंग कार्यक्रम

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने भारत की ऊर्जा दक्षता प्रणाली को और सख्त बना दिया है, जिससे अधिक प्रकार के उपकरणों के लिये स्टार लेबलिंग अनिवार्य हो गई है तथा इस प्रकार मानक और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम के तहत अनिवार्य ऊर्जा प्रदर्शन प्रकटीकरण का दायरा बढ़ गया है।

BEE का मानक और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम क्या है?

  • पृष्ठभूमि: यह कार्यक्रम वर्ष 2006 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया और इसे BEE द्वारा लागू किया जाता है।
  • उद्देश्य: S&L कार्यक्रम उपभोक्ताओं को सूचित विकल्प चुनने में सक्षम बनाता है, विद्युत की खपत और ऊर्जा बिल कम करता है तथा निर्माता कंपनियों को ऊर्जा-कुशल तकनीकें अपनाने के लिये प्रोत्साहित करता है।
  • स्टार लेबलिंग सिस्टम: इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता स्टार लेबलिंग सिस्टम है, जो उपकरणों की ऊर्जा दक्षता के आधार पर 1 से 5 स्टार के पैमाने पर रेटिंग देता है।
    • 5 स्टार दर्शाते हैं कि यह किसी दी गई श्रेणी में सबसे अधिक ऊर्जा-कुशल उत्पाद है, जिससे उपभोक्ताओं के लिये दक्षता की तुलना करना सरल और दृश्यात्मक हो जाता है।
    • कार्यक्रम के अंतर्गत उपकरणों का परीक्षण निर्धारित भारतीय मानकों के अनुसार किया जाता है तथा उनकी ऊर्जा खपत और प्रदर्शन मापदंडों के आधार पर स्टार रेटिंग दी जाती है। लेबल पर आवश्यक जानकारी जैसे स्टार रेटिंग, वार्षिक ऊर्जा खपत, उत्पाद श्रेणी और ब्रांड प्रदर्शित किये जाते हैं।
  • व्यापकता: यह कार्यक्रम घरों में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों और औद्योगिक यंत्रों को शामिल करता है। कुछ उत्पादों पर अनिवार्य स्टार लेबलिंग लागू होती है, जबकि अन्य पर स्वैच्छिक लेबलिंग होती है, जो सरकार के नोटिफिकेशन और बाज़ार की तैयारी पर निर्भर करती है।
  • S&L कार्यक्रम के तहत लेबल्स:
    • तुलनात्मक लेबल (Comparative Label): यह 1–5 स्टार रेटिंग दिखाता है, जिससे एक ही उत्पाद श्रेणी के विभिन्न मॉडलों की ऊर्जा दक्षता की तुलना की जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं को सबसे ऊर्जा-कुशल उपकरण पहचानना आसान हो जाता है।
    • मंज़ूरी लेबल (Endorsement Label): यह उन उत्पादों को प्रमाणित करता है जो BEE द्वारा अधिसूचित न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों को पूरा करते हैं। यह दक्षता मानकों का पालन सुनिश्चित करता है, न कि तुलना प्रदान करता है।
  • गतिशील प्रकृति: तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिये BEE समय-समय पर स्टार रेटिंग मानदंडों में संशोधन करता है, जिससे दक्षता के मापदंड प्रासंगिक बने रहें और निर्माता निरंतर अपने उत्पादों की ऊर्जा दक्षता में सुधार करें।
  • महत्त्व: यह राष्ट्रीय विद्युत की मांग को कम करने, उपभोक्ताओं का बिजली बिल कम करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उल्लेखनीय है कि मानक और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रमों ने पहले ही लगभग 60 मिलियन टन CO₂ वार्षिक रूप से कम कर दिये हैं, साथ ही भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मज़बूत किया है।

BEE_Star_Labelling

भारत की ऊर्जा दक्षता पहल

  • संवर्द्धित ऊर्जा दक्षता पर राष्ट्रीय मिशन (NMEEE): यह जलवायु परिवर्तन पर अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ राष्ट्रीय मिशन में से एक है। NMEEE में ऊर्जा गहन उद्योग में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिये चार पहल शामिल हैं, जो इस प्रकार हैं:
    • प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार (PAT) योजना: यह अनिवार्य लक्ष्यों और व्यापार योग्य ऊर्जा बचत प्रमाणपत्रों (ESCerts) के माध्यम से अधिक उर्जा इस्तेमाल करने वाले उद्योगों में दक्षता को बेहतर बनाती है।
    • ऊर्जा दक्षता वित्तपोषण मंच (EEFP): यह परियोजना डेवलपर्स को वित्तीय संस्थानों से जोड़कर ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिये वित्त तक पहुँच को आसान बनाता है।
    • ऊर्जा दक्षता के लिये बाज़ार परिवर्तन (MTEE): नीति और वित्तीय हस्तक्षेपों के माध्यम से सुपर-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी के अपनाने को बढ़ावा देता है।
    • ऊर्जा कुशल आर्थिक विकास प्रारूप (FEEED): यह ऊर्जा दक्षता ऋणों पर डिफॉल्ट जोखिम को कवर करने के लिये आंशिक क्रेडिट गारंटी देता है, जिसमें 5 वर्ष तक की गारंटी और ऋण राशि का 40-75% या प्रति परियोजना 15 करोड़ रुपये तक की गारंटी होती है।

  • ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC), 2017: ऊर्जा की खपत को कम करने हेतु वाणिज्यिक भवनों के लिये न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानक तय करता है।
  • उन्नत ज्योति बाय एफाॅर्डेबल LED फॉर ऑल (UJALA): घरेलू बिलों और अधिकतम विद्युत मांग को कम करने के लिये LED लाइटिंग और कुशल पंखों को अपनाने में तेज़ी लाता है।
  • बचत लैंप योजना (BLY): यह कार्यक्रम अप्रभावी बल्बों को कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप (CFL) से बदलने के लिये विकसित किया गया था।
    • स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम: इसके उद्देश्य हैं ऊर्जा खपत को कम करना, नगरपालिकाओं के परिचालन खर्च को घटाना और ऊर्जा-कुशल उपकरणों की दिशा में बाज़ार परिवर्तन को बढ़ावा देना।
  • BEE राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक: यह भारतीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ऊर्जा दक्षता प्रदर्शन का मूल्यांकन तथा तुलना करता है, जिससे डेटा-आधारित निगरानी, स्वस्थ राज्य-स्तरीय प्रतिस्पर्द्धा और प्रमुख क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं व नीति अंतराल की पहचान संभव होती है।
    • राज्यों को उनकी प्रगति के अनुसार वर्गीकृत किया गया है: फ्रंट रनर्स (>60%), अचीवर्स (50-60%), कॉन्टेंडर्स (30-50%), और एस्पिरेंट्स (<30%)

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)

  • विद्युत मंत्रालय के तहत BEE की स्थापना ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत 2002 में हुई थी।
  • BEE का दृष्टिकोण सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को तेज़ और निरंतर रूप से अपनाने को बढ़ावा देना है, जिससे भारत के सतत विकास में योगदान दिया जा सके।
  • BEE मुख्य नियामक कार्य करता है, जिनमें उपकरणों हेतु न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों और स्टार लेबलिंग का विकास, ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC) का निर्माण तथा निर्धारित उपभोक्ताओं के लिये ऊर्जा उपभोग मानकों का निर्धारण शामिल है।
    • यह ऊर्जा प्रबंधकों और ऊर्जा लेखा परीक्षकों को प्रमाणित व मान्यता प्रदान करता है तथा ऊर्जा उपयोग की निगरानी तथा ऑडिट सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिये अनिवार्य ऊर्जा ऑडिट की प्रक्रिया एवं आवृत्ति निर्धारित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. स्टैंडर्ड्स और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम क्या है?
यह ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत वर्ष 2006 में शुरू किया गया एक ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम है, जिसमें ऊर्जा प्रदर्शन के आधार पर उपकरणों को 1–5 स्टार पैमाने पर रेटिंग दी जाती है।

2. भारत में स्टैंडर्ड्स और लेबलिंग प्रोग्राम को कौन लागू करता है?
 यह कार्यक्रम विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा लागू किया जाता है।

3. अनिवार्य स्टार लेबलिंग का विस्तार क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह कार्यक्रम पारदर्शिता में सुधार करता है, विद्युत्त की मांग को कम करता है, उपभोक्ताओं के विद्युत बिल घटाता है और अब तक प्रतिवर्ष लगभग 60 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी ला चुका है।

4. संवर्द्धित ऊर्जा दक्षता पर राष्ट्रीय मिशन (NMEEE) क्या है?
NMEEE, NAPCC के अंतर्गत एक मिशन है जो PAT, MTEE, EEFP और FEEED के माध्यम से औद्योगिक एवं बाज़ार-आधारित ऊर्जा दक्षता पर केंद्रित है।

5. राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक (SEEI) का उद्देश्य क्या है?
यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ऊर्जा दक्षता प्रदर्शन का आकलन और तुलना करता है तथा डेटा-आधारित शासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स

प्रश्न. सड़क प्रकाश व्यवस्था के संदर्भ में सोडियम बत्तियाँ एल.ई.डी. बत्तियों से किस प्रकार भिन्न हैं? (2021)

  1. सोडियम बत्तियाँ प्रकाश को 360 डिग्री में उत्पन्न करती हैं लेकिन एल.ई.डी. बत्तियों में ऐसा नहीं होता है।
  2. सड़क की बत्तियों के रूप में सोडियम बत्तियों की उपयोगिता अवधि अधिक होती है।
  3. सोडियम बत्ती के दृश्य प्रकाश का स्पेक्ट्रम लगभग एकवर्णी होता है जबकि एल.ई.डी. बत्तियाँ सड़क प्रकाश व्यवस्था में सार्थक वर्ण सुविधाएँ (कलर एडवांटेज) प्रदान करते हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 3

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)


प्रश्न. निम्नलिखित में से किसमें आप ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) का स्टार लेबल पाते हैं? (2016) 

  1. छत के (सीलिंग) पंखे 
  2. विद्युत गीज़र 
  3. नलिकारूप प्रतिदीप्ति (ट्यूबुलर फ्लूओरेसेंट) लैंप

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)


रैपिड फायर

बुल्गारिया यूरोज़ोन का 21वाँ सदस्य

स्रोत: द हिंदू

बुल्गारिया ने आधिकारिक रूप से यूरो को अपनाया और यूरोपियन यूनियन में शामिल होने के लगभग 20 वर्ष बाद वह यूरोज़ोन का 21वाँ सदस्य बन गया है। यह कदम आर्थिक, राजनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

  • बुल्गारिया ने लेव को छोड़ दिया, जो 19वीं सदी के अंत से प्रचलन में था और यूरो में पूरी तरह संक्रमण को चिह्नित किया।
  • कारण: यूरो को अपनाने का उद्देश्य बुल्गारिया (EU का सबसे गरीब सदस्य राज्य) में व्यापार को बढ़ावा देना, बाज़ार पारदर्शिता में सुधार करना और निवेश को आकर्षित करना है।
    • यह बुल्गारिया का यूरोपीय यूनियन के साथ एकीकरण गहरा करेगा, इसके पश्चिमी संरेखण को मज़बूत करेगा और रूसी आर्थिक प्रभाव को कम करेगा।
  • यूरोज़ोन: मैस्ट्रिच संधि (1992) ने यूरोपीय संघ की नींव रखी, जिसने सामूहिक आर्थिक और मौद्रिक संघ की दिशा बनाई, यूरो को एकल कानूनी मुद्रा के रूप में अपनाने का रास्ता तैयार किया, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के माध्यम से एकीकृत केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली का निर्माण किया तथा एक सामूहिक आर्थिक क्षेत्र (यूरोज़ोन) की स्थापना की।
    • यूरोज़ोन में वे यूरोपीय संघ के सदस्य राज्य शामिल हैं जिन्होंने यूरो को अपनी साझा मुद्रा के रूप में अपनाया है।
    • यूरोज़ोन की स्थापना 1 जनवरी, 1999 को यूरो के आधिकारिक 9876 लॉन्च के साथ 11 देशों में हुई थी। क्रोएशिया के वर्ष 2023 में शामिल होने और बुल्गारिया के यूरो अपनाने के बाद, अब यूरोप में 350 मिलियन से अधिक लोग यूरो का उपयोग करते हैं।

यूरोपीय यूनियन, यूरोज़ोन और शेंगेन क्षेत्र

पहलू

यूरोपीय यूनियन

यूरोज़ोन

शेंगेन क्षेत्र

परिचय

यूरोपीय देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक संघ।

यूरो का इस्तेमाल करने वाले EU देशों का एक मौद्रिक संघ

एक यूरोपीय वीज़ा-मुक्त यात्रा क्षेत्र, जिसमें कोई आंतरिक सीमा जाँच नहीं होती है।

उद्देश्य

आर्थिक एकीकरण, सामान्य नीतियॉं, राजनीतिक सहयोग।

साझा मुद्रा और एकीकृत मौद्रिक नीति।

सीमाओं के पार लोगों की आज़ाद आवाजाही।

स्थापना संधि/समझौता

मास्ट्रिच संधि (1992)

मास्ट्रिच संधि (1992))

शेंगेन समझौता (1985)

देशों की संख्या (जनवरी 2026 तक)

27 देश.

21 देश। EU देशों- स्वीडन, पोलैंड, चेक रिपब्लिक, हंगरी, रोमानिया और डेनमार्क ने अभी तक यूरो को नहीं अपनाया है।

29 देश: 25 EU सदस्य देश (आयरलैंड, साइप्रस को छोड़कर) और 4 गैर-EU देश (आइसलैंड, नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और लिकटेंस्टीन)।

नोट: एंडोरा, मोनाको, वेटिकन सिटी और सान मरीनो जैसे देश यूरो का उपयोग यूरोपीय संघ के साथ समझौतों के तहत करते हैं, जबकि कोसोवो और मोंटेनेग्रो इसे एकतरफा रूप से उपयोग करते हैं, इनमें से कोई भी यूरोज़ोन सदस्य नहीं माना जाता।

बुल्गारिया

  • बुल्गारिया दक्षिण-पूर्वी यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप में स्थित है। इसके उत्तर में रोमानिया, पश्चिम में सर्बिया और उत्तरी मैसेडोनिया, दक्षिण में ग्रीस और तुर्की हैं और पूर्व में यह काला सागर की तटरेखा से जुड़ा है।
  • बुल्गारिया उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) और यूरोपियन यूनियन (EU) का सदस्य है, जिसमें यूरोपीय यूनियन इसका मुख्य व्यापारिक साझेदार है तथा सोफिया इसका राजनीतिक एवं आर्थिक शहर है।

Bulgaria

और पढ़ें: रोमानिया और बुल्गारिया शेंगेन क्षेत्र में शामिल हुए


रैपिड फायर

EPM के तहत बाज़ार पहुँच संबंधी दिशा-निर्देश अधिसूचित

स्रोत: TH

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने भारतीय निर्यातकों के लिये वैश्विक बाज़ार पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से निर्यात संवर्द्धन मिशन (EPM) के तहत बाज़ार पहुँच दिशा-निर्देशों की पहली शृंखला अधिसूचित की है।

  • वित्तीय सहायता: निर्यातकों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता बैठकों (BSM), मेगा रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठकों (RBSM) और व्यापार प्रतिनिधिमंडलों के लिये वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
  • सहायता पर सीमा: प्रत्येक फर्म से अधिकतम दो प्रतिनिधियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें प्रतिभागियों का न्यूनतम प्रतिनिधिमंडल 50 होना चाहिये, जिनमें से कम-से-कम 35% लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) होने चाहिये।
    • फर्म एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 BSM  और MSME अधिकतम 4 BSM के लिये पात्र हैं।

निर्यात संवर्द्धन मिशन (EPM)

  • परिचय: यह एक एकल, डिजिटल रूप से सक्षम व्यापक ढाँचा है जिसका उद्देश्य भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करना तथा लघु एवं मध्यम उद्यमों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाना है।
  • एकीकृत दृष्टिकोण: EPM दो मुख्य उप-योजनाओं के माध्यम से खंडित योजनाओं को एक एकीकृत ढाँचे में विलय करता है:
    • निर्यात प्रोत्साहन: यह लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को किफायती व्यापार वित्त, ब्याज सब्सिडी, संपार्श्विक सहायता और ऋण संवर्द्धन सहित वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • निर्यात दिशा: यह गुणवत्ता अनुपालन, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स सहायता, व्यापार मेले में भागीदारी और ज़िला स्तरीय क्षमता निर्माण जैसे गैर-वित्तीय सहायक कारकों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • शासन एवं कार्यान्वयन: यह वाणिज्य विभाग, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, DGFT, निर्यात संवर्द्धन परिषदों और राज्य सरकारों को शामिल करते हुए एक समन्वित संस्थागत ढाँचे पर आधारित है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

और पढ़ें: MSMEs क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा


रैपिड फायर

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)

स्रोत: द हिंदू

वर्ष 2025 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आतंकवाद रोधी मामलों में एक महत्त्वपूर्ण प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें 92% से अधिक सजा दर रही, जो आंतरिक सुरक्षा प्रवर्तन तंत्र के महत्त्वपूर्ण रूप से मज़बूत होने को दर्शाती है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)

  • स्थिति और दायित्व: NIA भारत की संघीय आतंकवाद रोधी एजेंसी है, जो आतंकवाद, विद्रोह और पूरे भारत पर प्रभाव डालने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा अपराधों की जाँच तथा अभियोजन की ज़िम्मेदारी निभाती है।
  • कानूनी अधिकार: यह वर्ष 2009 में NIA अधिनियम, 2008 के तहत स्थापित की गई थी और NIA (संशोधन) अधिनियम, 2019 के द्वारा इसे और सशक्त बनाया गया। NIA राज्यों से मामले अपने अधिकार में ले सकती है, बिना पूर्व अनुमति के राज्य सीमाओं के पार जाँच कर सकती है और क्षेत्रीय अधिकारिता का प्रयोग कर सकती है।
  • मुख्य कार्य: NIA आतंकवाद रोधी खुफिया जानकारी एकत्रित, विश्लेषण और प्रसारित करती है तथा घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करती है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवर्तन को मज़बूत करने के लिये क्षमता-वर्द्धन कार्यक्रम संचालित करती है।
  • जाँच प्रक्रिया आरंभ करना: NIA अधिनियम, 2008 की धारा 6 के तहत, मामले राज्यों द्वारा प्रेषित किये जा सकते हैं या केंद्र द्वारा स्वतः लिया जा सकता है, जिसमें भारत के बाहर किये गए अपराध भी शामिल हैं। विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 और अन्य अनुसूचित अपराधों के तहत अभियोजन के लिये केंद्र सरकार की मंज़ूरी आवश्यक होती है।
  • विशेषीकृत ध्यान और परीक्षण: NIA के पास वामपंथी उग्रवाद (LWE) से जुड़े आतंकवादी वित्तीय मामलों की जाँच के लिये समर्पित तंत्र हैं। जाँच के दौरान संबंधित अपराधों की भी पड़ताल की जा सकती है और मामलों को NIA विशेष न्यायालयों में सुनवाई के लिये प्रस्तुत किया जाता है।

और पढ़ें: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)


रैपिड फायर

हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961

स्रोत: TH

हरियाणा विधान सभा ने हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 में संशोधन किया है ताकि अनधिकृत कब्ज़ेदार ग्राम पंचायतों से 'शामलात देह' भूमि की कुछ श्रेणियों को खरीद सकें और इसे निजी स्वामित्व में परिवर्तित कर सकें, जिससे ग्राम साझा भूमि शासन सामाजिक सुरक्षा से भुगतान के माध्यम से स्वामित्व की ओर स्थानांतरित हो गया है।

हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961

  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मुकदमेबाज़ी को कम करना, राजस्व न्यायालयों के बैकलॉग को समाप्त करना, ग्रामीण भूमि विवादों को सुलझाना और ग्राम पंचायतों के लिये राजस्व उत्पन्न करना है।
  • प्रभाव: यह लंबे समय से चले आ रहे अनौपचारिक कब्ज़े को औपचारिक स्वामित्व में परिवर्तित करता है, जिससे भूमि रिकॉर्ड, योजना और सेवा वितरण में सुधार होता है।
    • यह संशोधन ग्राम साझा भूमि (शामलात भूमि) को एक अधिकार-आधारित सुरक्षात्मक ढाँचे से बाज़ार-आधारित स्वामित्व मॉडल की ओर स्थानांतरित करता है, सामाजिक न्याय पर प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता देता है।
  • चुनौतियाँ: भूमिहीन और दलित परिवारों को ग्राम साझा भूमि तक पहुँच कम होने का खतरा है, जिससे चराई, ईंधन और निर्वाह के लिये एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा जाल कमज़ोर होता है।
    • यह लंबे समय से चले आ रहे अवैध कब्जे को वैध बना सकता है, जिससे असमान भूमि नियंत्रण को सही करने के बजाय वास्तविक कब्ज़े को कानूनी स्वामित्व में बदल दिया जाता है।
    • धन, कागज़ी कार्रवाई की क्षमता और राजनीतिक नेटवर्क वाले लोगों को स्वामित्व प्राप्त होने की अधिक संभावना है, जिससे साझा भूमि पर अभिजात्य वर्ग के कब्ज़े को स्थिरता मिलती है।
    • धन, कागजी कार्रवाई की समझ और राजनीतिक पहुँच वाले लोग अक्सर साझा भूमि पर स्वामित्व हासिल करने और उसे बनाए रखने में सफल होते हैं, जिससे अभिजात्य वर्ग (elites) के लिये इन संसाधनों पर कब्ज़ा करना आसान हो जाता है

शामलात देह (Shamilat Deh) 

  • यह पूरे ग्राम समुदाय की साझा भूमि को संदर्भित करता है, जिसका ऐतिहासिक रूप से उपयोग चराई, जल निकायों, रास्तों तथा अन्य सामूहिक प्रयोजनों के लिये किया जाता रहा है।
  • मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में ग्राम की साझा भूमि को क्रमशः चरनोई (चराई) भूमि तथा पंचमी भूमि कहा जाता है, जिन्हें दलित परिवारों को आवंटित किया गया है, ताकि उनकी साझा संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित की जा सके।

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