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राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)

  • 02 Jan 2026
  • 14 min read

स्रोत: द हिंदू

वर्ष 2025 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आतंकवाद रोधी मामलों में एक महत्त्वपूर्ण प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें 92% से अधिक सजा दर रही, जो आंतरिक सुरक्षा प्रवर्तन तंत्र के महत्त्वपूर्ण रूप से मज़बूत होने को दर्शाती है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)

  • स्थिति और दायित्व: NIA भारत की संघीय आतंकवाद रोधी एजेंसी है, जो आतंकवाद, विद्रोह और पूरे भारत पर प्रभाव डालने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा अपराधों की जाँच तथा अभियोजन की ज़िम्मेदारी निभाती है।
  • कानूनी अधिकार: यह वर्ष 2009 में NIA अधिनियम, 2008 के तहत स्थापित की गई थी और NIA (संशोधन) अधिनियम, 2019 के द्वारा इसे और सशक्त बनाया गया। NIA राज्यों से मामले अपने अधिकार में ले सकती है, बिना पूर्व अनुमति के राज्य सीमाओं के पार जाँच कर सकती है और क्षेत्रीय अधिकारिता का प्रयोग कर सकती है।
  • मुख्य कार्य: NIA आतंकवाद रोधी खुफिया जानकारी एकत्रित, विश्लेषण और प्रसारित करती है तथा घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करती है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवर्तन को मज़बूत करने के लिये क्षमता-वर्द्धन कार्यक्रम संचालित करती है।
  • जाँच प्रक्रिया आरंभ करना: NIA अधिनियम, 2008 की धारा 6 के तहत, मामले राज्यों द्वारा प्रेषित किये जा सकते हैं या केंद्र द्वारा स्वतः लिया जा सकता है, जिसमें भारत के बाहर किये गए अपराध भी शामिल हैं। विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 और अन्य अनुसूचित अपराधों के तहत अभियोजन के लिये केंद्र सरकार की मंज़ूरी आवश्यक होती है।
  • विशेषीकृत ध्यान और परीक्षण: NIA के पास वामपंथी उग्रवाद (LWE) से जुड़े आतंकवादी वित्तीय मामलों की जाँच के लिये समर्पित तंत्र हैं। जाँच के दौरान संबंधित अपराधों की भी पड़ताल की जा सकती है और मामलों को NIA विशेष न्यायालयों में सुनवाई के लिये प्रस्तुत किया जाता है।

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