प्रारंभिक परीक्षा
BEE मानक और लेबलिंग कार्यक्रम
- 02 Jan 2026
- 62 min read
चर्चा में क्यों?
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने भारत की ऊर्जा दक्षता प्रणाली को और सख्त बना दिया है, जिससे अधिक प्रकार के उपकरणों के लिये स्टार लेबलिंग अनिवार्य हो गई है तथा इस प्रकार मानक और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम के तहत अनिवार्य ऊर्जा प्रदर्शन प्रकटीकरण का दायरा बढ़ गया है।
BEE का मानक और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम क्या है?
- पृष्ठभूमि: यह कार्यक्रम वर्ष 2006 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया और इसे BEE द्वारा लागू किया जाता है।
- उद्देश्य: S&L कार्यक्रम उपभोक्ताओं को सूचित विकल्प चुनने में सक्षम बनाता है, विद्युत की खपत और ऊर्जा बिल कम करता है तथा निर्माता कंपनियों को ऊर्जा-कुशल तकनीकें अपनाने के लिये प्रोत्साहित करता है।
- स्टार लेबलिंग सिस्टम: इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता स्टार लेबलिंग सिस्टम है, जो उपकरणों की ऊर्जा दक्षता के आधार पर 1 से 5 स्टार के पैमाने पर रेटिंग देता है।
- 5 स्टार दर्शाते हैं कि यह किसी दी गई श्रेणी में सबसे अधिक ऊर्जा-कुशल उत्पाद है, जिससे उपभोक्ताओं के लिये दक्षता की तुलना करना सरल और दृश्यात्मक हो जाता है।
- कार्यक्रम के अंतर्गत उपकरणों का परीक्षण निर्धारित भारतीय मानकों के अनुसार किया जाता है तथा उनकी ऊर्जा खपत और प्रदर्शन मापदंडों के आधार पर स्टार रेटिंग दी जाती है। लेबल पर आवश्यक जानकारी जैसे स्टार रेटिंग, वार्षिक ऊर्जा खपत, उत्पाद श्रेणी और ब्रांड प्रदर्शित किये जाते हैं।
- व्यापकता: यह कार्यक्रम घरों में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों और औद्योगिक यंत्रों को शामिल करता है। कुछ उत्पादों पर अनिवार्य स्टार लेबलिंग लागू होती है, जबकि अन्य पर स्वैच्छिक लेबलिंग होती है, जो सरकार के नोटिफिकेशन और बाज़ार की तैयारी पर निर्भर करती है।
- S&L कार्यक्रम के तहत लेबल्स:
- तुलनात्मक लेबल (Comparative Label): यह 1–5 स्टार रेटिंग दिखाता है, जिससे एक ही उत्पाद श्रेणी के विभिन्न मॉडलों की ऊर्जा दक्षता की तुलना की जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं को सबसे ऊर्जा-कुशल उपकरण पहचानना आसान हो जाता है।
- मंज़ूरी लेबल (Endorsement Label): यह उन उत्पादों को प्रमाणित करता है जो BEE द्वारा अधिसूचित न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों को पूरा करते हैं। यह दक्षता मानकों का पालन सुनिश्चित करता है, न कि तुलना प्रदान करता है।
- गतिशील प्रकृति: तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिये BEE समय-समय पर स्टार रेटिंग मानदंडों में संशोधन करता है, जिससे दक्षता के मापदंड प्रासंगिक बने रहें और निर्माता निरंतर अपने उत्पादों की ऊर्जा दक्षता में सुधार करें।
- महत्त्व: यह राष्ट्रीय विद्युत की मांग को कम करने, उपभोक्ताओं का बिजली बिल कम करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उल्लेखनीय है कि मानक और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रमों ने पहले ही लगभग 60 मिलियन टन CO₂ वार्षिक रूप से कम कर दिये हैं, साथ ही भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मज़बूत किया है।
भारत की ऊर्जा दक्षता पहल
- संवर्द्धित ऊर्जा दक्षता पर राष्ट्रीय मिशन (NMEEE): यह जलवायु परिवर्तन पर अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ राष्ट्रीय मिशन में से एक है। NMEEE में ऊर्जा गहन उद्योग में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिये चार पहल शामिल हैं, जो इस प्रकार हैं:
- प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार (PAT) योजना: यह अनिवार्य लक्ष्यों और व्यापार योग्य ऊर्जा बचत प्रमाणपत्रों (ESCerts) के माध्यम से अधिक उर्जा इस्तेमाल करने वाले उद्योगों में दक्षता को बेहतर बनाती है।
- ऊर्जा दक्षता वित्तपोषण मंच (EEFP): यह परियोजना डेवलपर्स को वित्तीय संस्थानों से जोड़कर ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिये वित्त तक पहुँच को आसान बनाता है।
- ऊर्जा दक्षता के लिये बाज़ार परिवर्तन (MTEE): नीति और वित्तीय हस्तक्षेपों के माध्यम से सुपर-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी के अपनाने को बढ़ावा देता है।
- ऊर्जा कुशल आर्थिक विकास प्रारूप (FEEED): यह ऊर्जा दक्षता ऋणों पर डिफॉल्ट जोखिम को कवर करने के लिये आंशिक क्रेडिट गारंटी देता है, जिसमें 5 वर्ष तक की गारंटी और ऋण राशि का 40-75% या प्रति परियोजना 15 करोड़ रुपये तक की गारंटी होती है।
- ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC), 2017: ऊर्जा की खपत को कम करने हेतु वाणिज्यिक भवनों के लिये न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानक तय करता है।
- उन्नत ज्योति बाय एफाॅर्डेबल LED फॉर ऑल (UJALA): घरेलू बिलों और अधिकतम विद्युत मांग को कम करने के लिये LED लाइटिंग और कुशल पंखों को अपनाने में तेज़ी लाता है।
- बचत लैंप योजना (BLY): यह कार्यक्रम अप्रभावी बल्बों को कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप (CFL) से बदलने के लिये विकसित किया गया था।
- स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम: इसके उद्देश्य हैं ऊर्जा खपत को कम करना, नगरपालिकाओं के परिचालन खर्च को घटाना और ऊर्जा-कुशल उपकरणों की दिशा में बाज़ार परिवर्तन को बढ़ावा देना।
- BEE राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक: यह भारतीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ऊर्जा दक्षता प्रदर्शन का मूल्यांकन तथा तुलना करता है, जिससे डेटा-आधारित निगरानी, स्वस्थ राज्य-स्तरीय प्रतिस्पर्द्धा और प्रमुख क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं व नीति अंतराल की पहचान संभव होती है।
- राज्यों को उनकी प्रगति के अनुसार वर्गीकृत किया गया है: फ्रंट रनर्स (>60%), अचीवर्स (50-60%), कॉन्टेंडर्स (30-50%), और एस्पिरेंट्स (<30%)।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)
- विद्युत मंत्रालय के तहत BEE की स्थापना ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत 2002 में हुई थी।
- BEE का दृष्टिकोण सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को तेज़ और निरंतर रूप से अपनाने को बढ़ावा देना है, जिससे भारत के सतत विकास में योगदान दिया जा सके।
- BEE मुख्य नियामक कार्य करता है, जिनमें उपकरणों हेतु न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों और स्टार लेबलिंग का विकास, ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC) का निर्माण तथा निर्धारित उपभोक्ताओं के लिये ऊर्जा उपभोग मानकों का निर्धारण शामिल है।
- यह ऊर्जा प्रबंधकों और ऊर्जा लेखा परीक्षकों को प्रमाणित व मान्यता प्रदान करता है तथा ऊर्जा उपयोग की निगरानी तथा ऑडिट सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिये अनिवार्य ऊर्जा ऑडिट की प्रक्रिया एवं आवृत्ति निर्धारित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. स्टैंडर्ड्स और लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम क्या है?
यह ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत वर्ष 2006 में शुरू किया गया एक ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम है, जिसमें ऊर्जा प्रदर्शन के आधार पर उपकरणों को 1–5 स्टार पैमाने पर रेटिंग दी जाती है।
2. भारत में स्टैंडर्ड्स और लेबलिंग प्रोग्राम को कौन लागू करता है?
यह कार्यक्रम विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा लागू किया जाता है।
3. अनिवार्य स्टार लेबलिंग का विस्तार क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह कार्यक्रम पारदर्शिता में सुधार करता है, विद्युत्त की मांग को कम करता है, उपभोक्ताओं के विद्युत बिल घटाता है और अब तक प्रतिवर्ष लगभग 60 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी ला चुका है।
4. संवर्द्धित ऊर्जा दक्षता पर राष्ट्रीय मिशन (NMEEE) क्या है?
NMEEE, NAPCC के अंतर्गत एक मिशन है जो PAT, MTEE, EEFP और FEEED के माध्यम से औद्योगिक एवं बाज़ार-आधारित ऊर्जा दक्षता पर केंद्रित है।
5. राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक (SEEI) का उद्देश्य क्या है?
यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ऊर्जा दक्षता प्रदर्शन का आकलन और तुलना करता है तथा डेटा-आधारित शासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. सड़क प्रकाश व्यवस्था के संदर्भ में सोडियम बत्तियाँ एल.ई.डी. बत्तियों से किस प्रकार भिन्न हैं? (2021)
- सोडियम बत्तियाँ प्रकाश को 360 डिग्री में उत्पन्न करती हैं लेकिन एल.ई.डी. बत्तियों में ऐसा नहीं होता है।
- सड़क की बत्तियों के रूप में सोडियम बत्तियों की उपयोगिता अवधि अधिक होती है।
- सोडियम बत्ती के दृश्य प्रकाश का स्पेक्ट्रम लगभग एकवर्णी होता है जबकि एल.ई.डी. बत्तियाँ सड़क प्रकाश व्यवस्था में सार्थक वर्ण सुविधाएँ (कलर एडवांटेज) प्रदान करते हैं।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 3
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
प्रश्न. निम्नलिखित में से किसमें आप ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) का स्टार लेबल पाते हैं? (2016)
- छत के (सीलिंग) पंखे
- विद्युत गीज़र
- नलिकारूप प्रतिदीप्ति (ट्यूबुलर फ्लूओरेसेंट) लैंप
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)

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