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अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ – कानूनी अधिकार पाने वाले विश्व के पहले कीट
- 02 Jan 2026
- 50 min read
चर्चा में क्यों?
पेरू के सतीपो (Satipo) नगर पालिका ने एक नगरपालिका अध्यादेश के माध्यम से बिना डंक वाली स्थानीय मधुमक्खियों (मेलिपोनिनी जनजाति) के अधिकारों को मान्यता प्रदान की गई है। इसके तहत अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियों को कानूनी अधिकार प्रदान किये गए हैं, ताकि पेरू की जैव-सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सके।
- यह वैश्विक स्तर पर कीटों के अधिकारों को कानूनी मान्यता देने वाला पहला कदम है। इसके माध्यम से जैव-सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और प्रकृति के अधिकारों पर आधारित शासन मॉडल को एक नई मज़बूती मिलेगी।
अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ क्या हैं?
- परिचय: अमेज़न वर्षावनों की ये स्थानीय, बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ केवल परागणकर्त्ता ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर हैं। जिनका सदियों से स्वदेशी समुदायों द्वारा परंपरागत रूप से संरक्षण और पालन किया जाता है।
- ये पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे पुरानी मधुमक्खी प्रजातियों में से हैं, जो अमेज़न के 80% से अधिक वनस्पतियों के परागण के लिये ज़िम्मेदार हैं।
- इनमें डंक बिल्कुल नहीं होता, बल्कि इनमें एक अवशिष्ट डंक होता है, जो इतना छोटा होता है कि इसका रक्षा के लिये इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अतः ये अपने छत्ते की रक्षा काटने या जलन उत्पन्न करने वाले रेजिन स्रावित करके करते हैं।
- आवास: ये उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मूल रूप से पाई जाती हैं (गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में विश्व स्तर पर पाए जाते हैं) और इनकी सबसे अधिक विविधता अमेज़न वर्षावन में पाई जाती है।
- व्यवहार: ये अत्यधिक सामाजिक (यूसोशल) कीट हैं जो वर्ष भर कॉलोनियों में रहते हैं तथा खोखले वृक्षों के तनों में घोंसला बनाते हैं।
- सांस्कृतिक महत्त्व: डंक रहित मधुमक्खियाँ स्वदेशी अशानिंका तथा कुकामा-कुकामिरिया समुदायों की संस्कृति का अभिन्न अंग है।
- प्रमुख पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्त्व:
- जैव-विविधता का संरक्षण: वर्षावन की जैव-विविधता और पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता बनाए रखने में सहायक होती हैं तथा कॉफी, कोको, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसी प्रमुख वैश्विक फसलों के परागण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- मेलिपोनिकल्चर (Meliponiculture): बिना डंक वाली मधुमक्खियों को शहद एवं औषधीय उपयोग के लिये पालने और प्रजनन करने की पारंपरिक पद्धति को मेलिपोनिकल्चर कहा जाता है, जिसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्वदेशी समुदायों द्वारा व्यापक रूप से अपनाया जाता है।
- औषधीय उपयोग: इनका शहद पारंपरिक स्वदेशी चिकित्सा में उपयोग किया जाता है, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘चमत्कारी द्रव’ कहा जाता है। इसमें सूजन-रोधी, जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी गुण पाए गए हैं तथा इसका उपयोग मोतियाबिंद जैसे नेत्र रोगों के उपचार में भी किया जाता है।
- इस शहद में नमी की मात्रा अधिक होती है, यह हल्का अम्लीय होता है, चिपचिपा नहीं होता और इसका स्वाद मीठा-खट्टा होता है, जिससे यह व्यावसायिक रूप से बेचे जाने वाले शहद से स्पष्ट रूप से भिन्न है।
- खतरे: वे निर्वनीकरण, अवैध लकड़ी कटान, कृषि विस्तार, पशु चराई, दावानल और बढ़ते तापमान जैसे बढ़ते खतरों का सामना कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके आवास नष्ट हो रहे हैं तथा उन्हें ऊँचाई वाले क्षेत्रों की ओर पलायन के लिये मज़बूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय बिना डंक वाली मधुमक्खियों के लिये अधिकारों की घोषणा क्या है?
- यह प्रकृति के अधिकारों पर आधारित एक ऐतिहासिक कानूनी ढाँचा है, जिसे सैटिपो नगर पालिका ने अपने स्थानीय कानून में सम्मिलित किया है। यह कीट संरक्षण के क्षेत्र में एक वैश्विक मिसाल स्थापित करता है।
- मान्यता प्राप्त अधिकारों में शामिल हैं:
- अस्तित्व और पनपने का अधिकार
- स्वस्थ जनसंख्या बनाए रखने का अधिकार
- प्रदूषण-मुक्त आवास का अधिकार
- पारिस्थितिक रूप से स्थिर जलवायु परिस्थितियों का अधिकार
- प्राकृतिक चक्रों के पुनर्जनन का अधिकार
- क्षति या खतरे की स्थिति में कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार
- बिना डंक वाली मधुमक्खियों की ओर से न्यायालय में पक्ष रखने हेतु मानव ‘संरक्षक’, जिनमें स्वदेशी अभिकर्त्ताओं या विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है, प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके हितों की रक्षा के लिये प्रदूषकों पर मुकदमा दायर कर सकते हैं।
भारतीय समानांतर (भारत में प्रकृति के अधिकार)
- भारतीय पशु कल्याण बोर्ड बनाम ए. नागराज (2014): इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का विस्तार करते हुए पशुओं को भी शामिल किया। न्यायालय ने यह मान्यता दी कि पशुओं का अपना अंतर्निहित मूल्य, गरिमा है और उन्हें अनावश्यक पीड़ा व कष्ट से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। इस निर्णय ने भारत में पशु कल्याण के लिये एक संवैधानिक आधार स्थापित किया।
- मोहम्मद सलीम बनाम उत्तराखंड राज्य (2017): उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गंगा और यमुना नदियों को कानूनी व्यक्तित्व प्रदान करते हुए उन्हें जीवित इकाइयाँ घोषित किया, जिनके अपने कानूनी अधिकार तथा कर्त्तव्य होंगे। यह निर्णय न्यूज़ीलैंड की व्हांगानूई नदी के मामले से प्रेरित था। हालाँकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय पर स्थगन लगा दिया, जिससे नदियों को दिया गया कानूनी व्यक्तित्व का दर्जा फिलहाल स्थगित हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अमेज़न की बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ क्या हैं?
वे प्राचीन, बिना डंक वाली परागण करने वाली मधुमक्खियाँ हैं, जो अमेज़न वर्षावन की मूल निवासी हैं। ये पृथ्वी पर मधुमक्खियों के सबसे पुराने समूहों में से एक हैं और उष्णकटिबंधीय वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
2. बिना डंक वाली मधुमक्खियाँ पारिस्थितिकी रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?
वे अमेज़न की वनस्पतियों का 80% से अधिक परागण करती हैं, वर्षावन के पुनर्जीवन का समर्थन करती हैं और कॉफी, कोको, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे मुख्य फसलों के लिये भी महत्त्वपूर्ण हैं।
3. बिना डंक वाली मधुमक्खियों के लिये मुख्य खतरे क्या हैं?
वे वनों की कटाई, अवैध लकड़ी काटना, कृषि विस्तार, वनाग्नि, बढ़ते तापमान और कीटनाशकों के संपर्क जैसी समस्याओं का सामना करती हैं, जिससे उनके आवास नष्ट होते हैं और जनसंख्या में गिरावट आती है।
4. यह कदम विश्व स्तर पर इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?
यह राइट्स ऑफ नेचर (प्रकृति के अधिकार) ढाँचे के तहत एक वैश्विक मिसाल स्थापित करता है, जो पहली बार कीड़ों को कानूनी मान्यता और संरक्षण प्रदान करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा जीव अपने सगे-संबंधियों को अपने खाद्य के स्रोत की दिशा और दूरी इंगित करने के लिये दोलन नृत्य (वैगल डांस) करता है? (2023)
(a) तितली
(b) व्याध पतंग (ड्रैगन फ्लाई )
(c) मधुमक्खी
(d) बर्र
प्रश्न. निम्नलिखित पर विचार कीजिये : (2024)
1. तितली
2. मत्स्य
3. मंडूक (मेढक)
उपर्युक्त में से कितनों में विषाक्त जातियाँ हैं ?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीन
(d) कोई नहीं
