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डेली न्यूज़

  • 29 Nov, 2021
  • 44 min read
जैवविविधता और पर्यावरण

सफर

प्रीलिम्स के लिये:

भारत मौसम विज्ञान विभाग, सफर, बायोमास, वायु गुणवत्ता सूचकांक

मेन्स के लिये:

वायु गुणवत्ता का मापन : सफर प्रणाली 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली (The System of Air Quality and Weather Forecasting And Research- SAFAR) ने चार भारतीय शहरों (दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई और पुणे) में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का अध्ययन किया।

  • दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई तीन महानगरीय शहरों में वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में दिवाली की अवधि के दौरान वायु प्रदूषण अधिक था, जबकि इन चार में से पुणे एकमात्र शहर था, जहाँ प्रदूषण का स्तर कम पाया गया।
  • दिवाली के समय दिल्ली में उच्च पीएम दर्ज किया जाता है जो बायोमास जलने के प्रभाव के साथ-साथ उच्च स्थानीय उत्सर्जन के कारण होता है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • सफर (SAFAR) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministery of Earth Science- MoES) द्वारा महानगरों के किसी स्थान-विशिष्ट के समग्र प्रदूषण स्तर और वायु गुणवत्ता को मापने के लिये शुरू की गई एक राष्ट्रीय पहल है।
    • यह दिल्ली में परिचालित भारत की पहली वायु गुणवत्ता पूर्व-चेतावनी प्रणाली (Air Quality Early Warning System) का एक अभिन्न अंग है।
    • यह मौसम के सभी मापदंडों जैसे- तापमान, वर्षा, आर्द्रता, हवा की गति एवं दिशा, पराबैंगनी किरणों और सौर विकिरण आदि की निगरानी करता है।
    • विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने SAFAR को इसके कार्यान्वयन में उच्च गुणवत्ता नियंत्रण और मानकों को बनाए रखने के आधार पर एक प्रोटोटाइप गतिविधि के रूप में मान्यता दी है।
  • प्रदूषकों की निगरानी: 
    • इनमें PM2.5, PM10, ओज़ोन, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), बेंजीन, टोल्यूनि, ज़ाइलीन और मरकरी शामिल हैं।
  • प्रणाली का विकास:
    • यह भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology- IITM) पुणे द्वारा विकसित एक स्वदेशी प्रणाली है तथा  इसका संचालन भारत मौसम विभाग (India Meteorological Department-IMD) द्वारा किया जाता है।
      • IITM में एक विशाल ट्रू कलर लाइट एमिटिंग डायोड ( Light Emitting Diode- LED) डिस्प्ले सुविधा है जो कलर-कोडिंग (72 घंटे के अग्रिम पूर्वानुमान के साथ) के साथ 24x7 आधार पर वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) प्रदान करता है।
  • उद्देश्य:
    • अपने शहर की वायु गुणवत्ता के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना ताकि उचित शमन उपाय और व्यवस्थित कार्रवाई की जा सके।
    • नीति निर्माताओं को देश के आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए शमन रणनीति विकसित करने में मदद करना।
  • महत्त्व:
    • इससे कृषि, विमानन, बुनियादी ढांचे, आपदा प्रबंधन, पर्यटन आदि कई अन्य क्षेत्रों में लागत की बचत होगी, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वायु गुणवत्ता और मौसम से प्रभावित होती है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI):

  • AQI दैनिक वायु गुणवत्ता की रिपोर्टिंग के लिये एक सूचकांक है।
  • यह उन स्वास्थ्य प्रभावों पर केंद्रित है जिन्हें कोई भी व्यक्ति प्रदूषित वायु में साँस लेने के कुछ घंटों या दिनों के भीतर अनुभव कर सकता है।
  • AQI की गणना आठ प्रमुख वायु प्रदूषकों के लिये की जाती है:
    • भू-स्तरीय ओज़ोन
    • PM10
    • PM2.5
    • कार्बन मोनोऑक्साइड
    • सल्फर डाइऑक्साइड
    • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
    • अमोनिया
    • लेड (शीशा)
  • भू-स्तरीय ओज़ोन और एयरबोर्न पार्टिकल्स दो ऐसे प्रदूषक हैं जो भारत में मानव स्वास्थ्य के लिये सबसे बड़ा खतरा उत्पन्न करते हैं।

स्रोत: डाउन टू अर्थ


अंतर्राष्ट्रीय संबंध

9वीं ब्रिक्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रियों की बैठक

प्रिलिम्स के लिये: 

ब्रिक्स समूह, ब्रिक्स नवाचार सहयोग कार्ययोजना

मेन्स के लिये:

ब्रिक्स देशों के बीच विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने 9वीं ‘ब्रिक्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की।

  • इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के वार्षिक शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की जो वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई थी।
  • ‘ब्रिक्स’ सहयोग में वर्ष 2021 एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि इस वर्ष समूह ने अपने 15 वर्ष पूरे कर लिये हैं।

प्रमुख बिंदु

  • भाषा संबंधी मुख्य विशेषताएँ:
    • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स: सदस्य देशों को ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ में ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के लिये एक उचित स्थान प्राप्त करने की दिशा में काम करना चाहिये।
      • इसे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) के क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत करके हासिल किया जा सकता है।
      • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स, 2021 में ब्रिक्स रैंकिंग: भारत (46), चीन (12), रूस (45), ब्राज़ील (57) और दक्षिण अफ्रीका (61)।
    • सहयोग: ब्रिक्स देशों को एक साथ मिलकर लागत प्रभावी, किफायती, सुलभ, सतत् और स्केलेबल वैज्ञानिक समाधानों पर नवाचार करना चाहिये, क्योंकि सभी देश एक ही प्रकार की विशिष्ट चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • ब्रिक्स नवाचार सहयोग कार्ययोजना (2021-24)
    • परिचय
      • ब्रिक्स सदस्य देशों ने समूह की ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचालन समिति’ की 12वीं बैठक के दौरान भारत द्वारा प्रस्तावित विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार (STI) के नेतृत्व वाली ‘ब्रिक्स नवाचार सहयोग कार्ययोजना’ (2021-24) पर सहमति व्यक्त की है।
      • यह एक-दूसरे के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के अनुभवों को साझा करने और नवप्रवर्तकों तथा उद्यमियों को नेटवर्किंग की सुविधा प्रदान करेगा।
    • विषयगत क्षेत्रों में शामिल हैं:
      • ट्रांसिएंट एस्ट्रोनॉमिकल इवेंट्स एंड डीप सर्वे साइंस, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR), बिग डेटा एनालिटिक्स, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप ऑन फोटोनिक, नैनोफोटोनिक्स और मेटामैटेरियल्स फॉर एड्रेसिंग बायोमेडिसिन, एग्रीकल्चर, फूड इंडस्ट्री, एनर्जी हार्वेस्टिंग इश्यूज़ आदि।
    • योजना के अनुसार ब्रिक्स मंत्रियों और उनके प्रतिनिधियों ने 2020-2021 गतिविधियों के लिये ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कैलेंडर का समर्थन किया।

ब्रिक्स:

  • ब्रिक्स दुनिया की पाँच अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्थाओं- ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के लिये एक संक्षिप्त शब्द (Abbreviation) है।
    • BRICS की चर्चा वर्ष 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’ नील द्वारा ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के लिये विकास की संभावनाओं पर एक रिपोर्ट में की गई थी।
    • वर्ष 2006 में चार देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की सामान्य बहस के अंत में विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक के साथ एक नियमित अनौपचारिक राजनयिक समन्वय शुरू किया।
    • दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को BRIC में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया और इसे BRICS कहा जाने लगा।
  • ब्रिक्स विश्व के पाँच सबसे बड़े विकासशील देशों को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का 41%, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 24% और वैश्विक व्यापार के 16% का प्रतिनिधित्व करता है।
  • ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता प्रतिवर्ष B-R-I-C-S के क्रमानुसार सदस्य देशों के सर्वोच्च नेता द्वारा की जाती है।
    • भारत वर्ष 2021 के सम्मलेन का अध्यक्ष है।
  • वर्ष 2014 में ब्राज़ील के फोर्टालेजा में छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान BRICS नेताओं ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना के लिये समझौते पर हस्ताक्षर किये। उन्होंने सदस्यों को अल्पकालिक लिक्विडिटी सहायता प्रदान करने हेतु ब्रिक्स आकस्मिक रिज़र्व व्यवस्था (BRICS Contingent Reserve Arrangement) पर भी हस्ताक्षर किये।

BRICS DRISHTIIAS_HINDI

स्रोत: पीआईबी


भारतीय अर्थव्यवस्था

सीमा पार दिवालियान की कार्यवाही के लिये मसौदा रूपरेखा

प्रिलिम्स के लिये: 

दिवाला और दिवालियापन संहिता, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून पर संयुक्त राष्ट्र आयोग, UNCITRAL मॉडल कानून

मेन्स के लिये:

सीमा पार दिवालियापन की कार्यवाही के लिये मसौदा रूपरेखा

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत UNCITRAL (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून पर संयुक्त राष्ट्र आयोग) मॉडल के आधार पर सीमा पार दिवाला कार्यवाही के लिये एक मसौदा ढाँचा प्रकाशित किया है।

  • इसे कॉर्पोरेट देनदारों के साथ-साथ व्यक्तिगत गारंटर दोनों के लिये लागू करने का प्रस्ताव है।
  • एक व्यक्तिगत गारंटर वह व्यक्ति या संस्था है जो ऋण चुकाने में विफल किसी अन्य व्यक्ति के ऋण के भुगतान का वादा करता है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • सीमा पार दिवाला कार्यवाही:
      • यह कई न्यायालयों में संपत्ति और देनदारियों वाली संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान के लिये प्रासंगिक है।
      • मोटे तौर पर सीमा पार दिवाला प्रक्रिया उन देनदारों से संबंधित है जिनकी विदेशों में संपत्ति और लेनदार हैं।
      • सीमा पार दिवाला कार्यवाही के लिये ढाँचा ऐसी कंपनी की विदेशी संपत्ति के स्थान, लेनदारों और उनके दावों की पहचान तथा दावों के भुगतान के साथ-साथ विभिन्न देशों में अदालतों के बीच समन्वय की प्रक्रिया की अनुमति देता है।
      • पिछले कुछ दशकों के दौरान विशेष रूप से UNCITRAL मॉडल कानून के तत्त्वावधान में विभिन्न न्यायालयों ने सीमा पार दिवाला मुद्दों से निपटने के लिये मज़बूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया है।
    • आईबीसी में वर्तमान स्थिति:
      • जबकि विदेशी लेनदार एक घरेलू कंपनी के खिलाफ दावा कर सकते हैं, आईबीसी वर्तमान में अन्य देशों में किसी भी दिवाला कार्यवाही की स्वत: मान्यता की अनुमति नहीं देती है।
  • महत्त्व:
    • IBC में सीमा पार दिवाला अध्याय को शामिल करना एक बड़ा कदम होगा और यह कानून को परिपक्व क्षेत्राधिकारों के बराबर लाएगा।
    • यह भारतीय फर्मों को विदेशी कंपनियों से अपने बकाया का दावा करने में सक्षम बनाएगा, जबकि विदेशी लेनदारों को भारतीय कंपनियों से ऋण वसूल करने की अनुमति देगा।
    • यह भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को भारत में अपना बकाया वसूल करने में मदद करेगा।
    • यह भारत में दिवाला समाधान के विचार में एक घरेलू कॉर्पोरेट देनदार की विदेशी संपत्ति को भी लाएगा और तनावग्रस्त संपत्तियों के समाधान में होने वाली देरी से बचाएगा।
  • UNCITRAL मॉडल कानून:
    • UNCITRAL मॉडल सीमा पार दिवाला मुद्दों से निपटने के लिये सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत कानूनी ढाँचा है।
      • इसे ब्रिटेन, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर समेत 49 देशों ने अपनाया है।
    • मॉडल कानून सीमा पार दिवाला के चार प्रमुख सिद्धांतों से संबंधित है:
      • डिफॉल्ट करने वाले देनदार के खिलाफ घरेलू दिवाला कार्यवाही में भाग लेने या शुरू करने के लिये विदेशी दिवाला पेशेवरों और विदेशी लेनदारों तक सीधी पहुँच।
      • विदेशी कार्यवाही की मान्यता और उपचार का प्रावधान।
      • घरेलू और विदेशी अदालतों तथा घरेलू व विदेशी दिवाला व्यवसायियों के बीच सहयोग।
      • विभिन्न देशों में दो या दो से अधिक समवर्ती दिवालिया कार्यवाहियों के बीच समन्वय। इस संबंध में मुख्य कार्यवाही ‘सेंटर ऑफ मैन इंटरेस्ट’ (COMI) की अवधारणा द्वारा निर्धारित की जाती है।
        • किसी कंपनी के लिये ‘सेंटर ऑफ मैन इंटरेस्ट’ का निर्धारण इस आधार पर किया जाता है कि कंपनी अपने व्यवसाय को नियमित आधार पर कहाँ संचालित करती है और इसके पंजीकृत कार्यालय का स्थान क्या है।
    • यह राज्यों को मध्यस्थता प्रक्रिया संबंधी कानूनों में सुधार एवं आधुनिकीकरण में सहायता करने के लिये डिज़ाइन किया गया है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा सके।
  • भारतीय फ्रेमवर्क और मॉडल कानून के बीच अंतर:
    • जो देश ‘UNCITRAL’ के मॉडल कानून को अपनाते हैं, वे अपनी घरेलू आवश्यकताओं के अनुरूप कुछ बदलाव करते हैं।
    • ‘भारतीय सीमा पार दिवालिया फ्रेमवर्क वित्तीय सेवा प्रदाताओं को सीमा पार दिवाला कार्यवाही के अधीन होने से बाहर करता है, वहीं कई देश ‘सीमा पार दिवालिया फ्रेमवर्क के प्रावधानों से बैंकों और बीमा जैसी महत्त्वपूर्ण वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने वाली कंपनियों को छूट देते हैं।’
    • प्री-पैक इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस’ (PRIP) से गुज़रने वाली कंपनियों को सीमा पार दिवालिया कार्यवाही से छूट दी जानी चाहिये क्योंकि PIRP के प्रावधान हाल ही में पेश किये गए हैं और ‘प्री-पैक मैकेनिज़्म के तहत न्यायशास्त्र अपने प्रारंभिक चरण में है।
      • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के त्वरित समाधान के लिये PIRP को इस वर्ष की शुरुआत में IBC के तहत पेश किया गया था।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून पर संयुक्त राष्ट्र आयोग:

  • यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का मुख्य कानूनी निकाय है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1966 में इस उद्देश्य से की गई थी कि यह सदस्य देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सहयोग हेतु मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने और इसके परिणामस्वरूप शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने हेतु  एक महत्त्वपूर्ण कारक है।
  • अपने कई मॉडल कानूनों, कन्वेंशनों, और कार्य समूहों के बीच मज़बूत वार्ता के माध्यम से,‘UNCITRAL’ ने सदस्य देशों को उनकी परिस्थितियों के लिये उपयुक्त अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक एवं व्यापार कानून के सिद्धांतों की तुलना, जाँच, वार्ता और उन्हें अपनाने हेतु एक मूल्यवान मंच प्रदान किया है।
  • भारत उन आठ देशों में से एक है, जो ‘UNCITRAL’ की स्थापना से ही उसके सदस्य हैं।

दिवाला और दिवालियापन संहिता:

  • इसे वर्ष 2016 में अधिनियमित किया गया था। यह व्यावसायिक फर्मों के दिवाला समाधान से संबंधित विभिन्न कानूनों को समाहित करता है।
    • इन्सॉल्वेंसी: यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें कोई व्यक्ति या कंपनी अपना बकाया ऋण चुकाने में असमर्थ होती है।
    • बैंकरप्सी: यह एक ऐसी स्थिति है जब किसी सक्षम न्यायालय द्वारा एक व्यक्ति या संस्था को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है और न्यायालय द्वारा इसका समाधान करने तथा लेनदारों के अधिकारों की रक्षा करने के लिये उचित आदेश दिया गया हो। यह किसी कंपनी अथवा व्यक्ति द्वारा ऋणों का भुगतान करने में असमर्थता की कानूनी घोषणा है।
  • यह दिवालियापन की समस्या के समाधान के लिये सभी वर्गों के देनदारों और लेनदारों को एकसमान मंच प्रदान करने के लिये मौजूदा विधायी ढाँचे के प्रावधानों को मज़बूत करता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ओमिक्रॉन : नया कोरोना वेरिएंट

प्रिलिम्स के लिये:

वेरिएंट ऑफ कन्सर्न, विश्व स्वास्थ्य संगठन, डेल्टा प्लस वेरिएंट

मेन्स के लिये:

ओमिक्रॉन वेरिएंट : वेरिएंट ऑफ कन्सर्न

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में खोजे गए कोविड-19 के B.1.1.1.529 स्ट्रेन की ‘वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न’ (Variants of Concern- VOC) के रूप में पहचान की है।

  • इस वायरस का सबसे पहले दक्षिणी अफ्रीका में पता चला था और इसके नाम को परिवर्तित करके  ओमिक्रॉन (Omicron) कर दिया गया।

Omicron-drishtiias_hindi

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • ओमिक्रॉन को विश्व स्तर पर प्रमुख डेल्टा प्लस और इसके कमज़ोर प्रतिद्वंद्वियों अल्फा, बीटा एवं गामा के साथ-साथ कोविड-19 वेरिएंट की सबसे अधिक चिंताजनक श्रेणी में रखा गया है।
    • इस संस्करण में बड़ी संख्या में उत्परिवर्तन/वेरिएंट हैं। उनमें से कुछ गंभीर रूप से  चिंताजनक स्थिति का कारण हैं क्योंकि वे नए संस्करण को पिछले संक्रमण या टीके के माध्यम से प्राप्त प्रतिरक्षा से बचने की अनुमति दे सकते हैं। 
      • हालाँकि इस बात का कोई विश्वसनीय अनुमान नहीं है कि वायरस के पिछले स्ट्रेंन की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट कितना अधिक संक्रामक है।
      • दक्षिण अफ्रीका के अलावा, इज़रायल में मलावी, बोत्सवाना, बेल्जियम और हॉन्गकॉन्ग से आने वाले लोगों में ओमिक्रॉन वेरिएंट की पहचान की गई।
  • नामकरण:
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने उन देशों (जहाँ पहली बार उनकी पहचान की गई) के स्थान पर ग्रीक वर्णमाला के अक्षरों के आधार पर वेरिएंट का नाम देने का फैसला किया है।
    • WHO ने Mu और Omicron के बीच के दो अक्षरों Nu या Xi के बजाय ओमिक्रॉन नाम का चयन किया। क्योंकि यह:
      • शी (Xi) चीन में एक लोकप्रिय उपनाम है (किसी भी सांस्कृतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, पेशेवर या जातीय समूहों के लिये अपराध करने से बचना)।
      • नू (Nu) को 'नया' (New) शब्द से भ्रमित किया जा सकता था।
  • भारत में स्थिति: 
    • सिरोप्रवैलेंस (Seroprevalence) अध्ययनों से पता चलता है कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही वायरस के संपर्क में आ चुका है जो बाद के संक्रमणों के लिये कुछ स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है।
      • साथ ही टीकाकरण/प्रतिरक्षण अभियान ने गति पकड़ ली है।
      • लगभग 44% भारतीय वयस्कों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 82% ने कम-से-कम एक खुराक प्राप्त की है। 
    • वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि टीकाकरण की एक या दो खुराक के बाद पहले संक्रमण का केवल टीकाकरण की दो खुराक की तुलना में अधिक सुरक्षात्मक प्रभाव हो सकता है।

वेरिएंट ऑफ कंसर्न: 

  • वायरस के इस वेरिएंट के परिणामस्वरूप संक्रामकता में वृद्धि, अधिक गंभीर बीमारी (जैसे- अस्पताल में भर्ती या मृत्यु हो जाना), पिछले संक्रमण या टीकाकरण के दौरान उत्पन्न एंटीबॉडी में महत्त्वपूर्ण कमी, उपचार या टीके की प्रभावशीलता में कमी या नैदानिक उपचार की विफलता देखने को मिलती है।
  • नए वेरिएंट महामारी संचरण की नई लहर (s) को शुरू कर सकते हैं।
  • WHO ने वर्तमान में वेरिएंट के 5 प्रकारों को सूचीबद्ध किया है:
    • ओमिक्रॉन (B.1.1.529),नवंबर 2021 में दक्षिणी अफ्रीका में पहचाना गया।
    • डेल्टा  (B.1.617.2), जो 2020 के अंत में भारत में उभरा और दुनिया भर में फैल गया।
    • गामा (P.1), जो 2020 के अंत में ब्राज़ील में उभरा।
    • बीटा (B.1.351), जो 2020 की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में उभरा।
    • अल्फा (B.1.1.7),इसे वर्ष 2020 के अंत में ब्रिटेन में देखा गया ।

वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VOI):

  • यह एक विशिष्ट ‘जेनेटिक मार्कर’ (Genetic Marker) वाला वेरिएंट है जो ‘रिसेप्टर बाइंडिंग’ में परिवर्तन करने, पूर्व में हुए संक्रमण या टीकाकरण के दौरान उत्पन्न एंटीबॉडी द्वारा संक्रमण के प्रभाव को कम करने, नैदानिक प्रभाव तथा संभावित उपचार को कम करने या संक्रमण के प्रसार या बीमारी की गंभीरता में वृद्धि करने से संबंधित है।
  • वर्तमान में इसके दो प्रकार हैं:
    • Mu (B.1.621),जो 2021 की शुरुआत में कोलंबिया में उभरा।
    • Lambda (C.37), जो 2020 के अंत में पेरू में उभरा।

म्यूटेशन, वेरिएंट तथा स्ट्रेन:

Mutation

  • जब कोई वायरस अपनी प्रतिकृति बनाता है तो वह हमेशा अपनी एक सटीक प्रतिकृति नहीं बना पाता है।
  • इसका तात्पर्य यह है कि समय के साथ वायरस अपने आनुवंशिक अनुक्रम के संदर्भ में थोड़ा भिन्न होना शुरू कर सकता है।
  • इस प्रक्रिया के दौरान वायरस के आनुवंशिक अनुक्रम में कोई भी परिवर्तन, उत्परिवर्तन यानी म्यूटेशन के रूप में जाना जाता है।
  • नए म्यूटेशन वाले वायरस को कभी-कभी वेरिएंट कहा जाता है। वेरिएंट एक या कई म्यूटेशन से भिन्न हो सकते हैं।
  • जब एक नए वेरिएंट में मूल वायरस की तुलना में अलग-अलग कार्यात्मक गुण होते हैं और यह जन आबादी के बीच अपना स्थान बना लेता है, तो इसे कभी-कभी वायरस के नए स्ट्रेन के रूप में जाना जाता है।
    • सभी स्ट्रेन, वेरिएंट होते हैं लेकिन सभी वेरिएंट स्ट्रेन नहीं होते।

आगे की राह 

  • यात्रा प्रतिबंध के लिये वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वैरिएंट के चलते में यात्रा प्रतिबंधों पर विचार करते समय भारत को जोखिम-आधारित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिये।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को सुदृढ़ करना: नए उभरते हुए रूप इंगित करते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय अपनाना अभी भी आवश्यक है।
    • उदाहरण के लिये डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचना और उचित निकासी।
  • सीख: भारत में महामारी ने हमें जो एक महत्त्वपूर्ण सबक सिखाया, वह है जीवन बचाने और आर्थिक विकास हेतु जैव चिकित्सा अनुसंधान और क्षमता निर्माण महत्त्वपूर्ण है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 


जैवविविधता और पर्यावरण

गंगा कनेक्ट प्रदर्शनी: यूनाइटेड किंगडम

प्रिलिम्स के लिये:

कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़, गंगा कनेक्ट प्रदर्शनी

मेन्स के लिये:

नदी संरक्षण हेतु भारत-ब्रिटेन साझेदारी

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 25 नवंबर, 2021 को लंदन में गंगा कनेक्ट प्रदर्शनी का समापन हुआ।

  • 12 नवंबर, 2021 को COP-26 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़) की सफल परिणति के बाद स्कॉटलैंड के ग्लासगो में इसका उद्घाटन किया गया।
  • प्रदर्शनी के दौरान 10 प्रमुख रणनीतिक पहलों की घोषणा की गई।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • यह एक वैश्विक प्रदर्शनी है, जो नदी बेसिन के कई पहलुओं को प्रदर्शित करेगी।
    • यह स्वच्छ गंगा हेतु राष्ट्रीय मिशन, भारतीय उच्चायोग और सी-गंगा (गंगा नदी बेसिन प्रबंधन और अध्ययन केंद्र) का एक प्रमुख प्रयास है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, नीति निर्माताओं, उद्योग के अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, निवेशक और वित्त पेशेवरों को जोड़ना है।
  • उद्देश्य:
    • पर्यावरण हितधारकों के वैश्विक समुदाय के लिये गंगा नदी बेसिन में विकास के स्तर को प्रदर्शित करना।
  • महत्त्व:
    • जागरूकता पैदा करना:
      • यह गंगा और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण तथा नदी बेसिन के विषय में व्यापक जागरूकता पैदा करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
      • यह नदी के साथ भारतीयों के गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक जुड़ाव को प्रदर्शित करती है।
    • पारिस्थितिकी तंत्र को समझना:
      • गंगा कनेक्ट प्रदर्शनी गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के आकार, परिमाण और जटिलता की स्पष्ट एवं गहरी समझ प्रदान करती है।
    • सहभागिता हेतु सक्षम बनाना:
      • यह उन इच्छुक पार्टियों और डायस्पोरा के साथ जुड़ाव को सक्षम बनाती है, जो नदी प्रणाली के कायाकल्प, बहाली और संरक्षण में शामिल होना चाहते हैं।
    • पर्यावरणीय समाधानों का विकास:
      • यह वैश्विक प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक समुदाय के लिये अत्याधुनिक पर्यावरणीय समाधान विकसित करने हेतु एक प्रमुख प्रयोगशाला के रूप में गंगा नदी पर ज़ोर देती है।

प्रमुख घोषित पहलें

  • गंगा कनेक्ट यूके कम्युनिटी एंगेजमेंट चैप्टर:
    • स्थापित चैप्टर हैं: स्कॉटलैंड-गंगा कनेक्ट, वेल्स-गंगा कनेक्ट, मिडलैंड्स-गंगा कनेक्ट, लंदन-गंगा कनेक्ट।
    • प्रत्येक चैप्टर में संयोजक होंगे, जो वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, निवेशकों और समुदाय के सदस्यों सहित विभिन्न हित समूहों को नमामि गंगे कार्यक्रम से जोड़ेंगे।
  • नदियों को संलग्न करना:
    • सामुदायिक जुड़ाव कार्यक्रमों सहित नदी बेसिन प्रबंधन के ज्ञान, सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों को साझा करने की घोषणा की गई है।
  • स्कॉटलैंड-भारत जल भागीदारी:
    • यह साझेदारी स्वच्छ गंगा के लिये राष्ट्रीय मिशन और वर्ष 2017 के स्कॉटलैंड सरकार के समझौता ज्ञापन पर आधारित है।
    • यह भारतीय बाज़ार में प्रवेश करने के लिये पानी में विशेषज्ञता वाली स्कॉटिश संस्थाओं के बीच उच्च स्तर की रुचि को प्रसारित करेगा और नमामि गंगे कार्यक्रम स्कॉटिश संस्थाओं के लिये भारतीय बाज़ार में प्रवेश करने हेतु एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करेगा।
  • अर्थ गंगा फ्रेमवर्क के उपयोग हेतु प्रभावी परियोजना:
    • गंगा नदी के किनारे एक चुनिंदा क्षेत्र में प्रमुख आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न करने के लिये एक प्रमुख प्रभावी परियोजना की कल्पना की गई है। इस पहल से आजीविका के महत्त्वपूर्ण अवसर उत्पन्न होंगे और नई आर्थिक गतिविधियाँ  होंगी तथा इस प्रकार से पर्यावरण के दृष्टिकोण से दीर्धकालिक विकास का मॉडल सुनिश्चित होगा। 
    • इस पहल में दीर्धकालिक पर्यटन, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, चिरस्थायी ट्रांसपोर्ट और अन्य गतिविधियों जैसे कई पहलू शामिल होंगे। इस परियोजना को ग्लासगो में क्लाइड नदी के कायाकल्प और आर्थिक विकास के मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसका नेतृत्व सिटी ऑफ ग्लासगो कॉलेज तथा स्ट्रैथक्लाइड यूनिवर्सिटी द्वारा किया जाएगा।
  • गंगा वित्त और निवेश मंच:
    • गंगा वित्त और निवेश मंच (जीएफआईएफ) की स्थापना के लिये कई निवेशक और वित्तीय कंपनियाँ एकजुट हो गई हैं। यह समूह रिवर बॉन्ड, ब्लू बॉन्ड्स, इम्पैक्ट एंड आउटकम बॉन्ड्स, क्रेडिट एन्हांसमेंट और गारंटी इंस्ट्रूमेंट्स जैसे वित्तीय उपकरणों को विकसित करेगा। वे दुनिया भर से नमामि गंगे कार्यक्रम में निवेश को बढ़ाने के लिये विशेषज्ञ व्यवस्था स्थापित करेंगे। 
    • यह समूह इकोसिस्‍टम संरक्षण में दीर्घकालिक निवेश को स्थापित करने के लिये अपनी तरह का पहला नदी जैव विविधता और संरक्षण बॉन्ड विकसित करने पर सहमत हो गया है। यह विभिन्न पहलों के लिये निरंतर वित्तपोषण और परियोजना वित्त के लिये एनएमसीजी व नमामि गंगे कार्यक्रम को सहायता प्रदान करेगा।
  • पर्यावरण प्रौद्योगिकी सत्यापन (ईटीवी) कार्यक्रम में नामांकित प्रौद्योगिकियाँ:
    • ईटीवी कार्यक्रम के निरंतर विस्तार में तीन अभिनव प्रौद्योगिकी कंपनियों का चयन किया गया है और ईटीवी कार्यक्रम पर ऑन-बोर्ड किया गया है।
    • यह ईटीवी कार्यक्रम में कंपनियों की कुल संख्या को बढ़ाकर 40 से ज़्यादा कर देता है जिनमें से 14 कंपनियाँ ब्रिटेन से हैं।
  • टेक एंड इनोवेशन फाइनेंसिंग:
    • सफल उम्मीदवारों को समर्थन प्रदान करने के लिये लंदन स्टॉक एक्सचेंज के एआईएम सेगमेंट में सूचीबद्ध कंपनी ओपीजी पावर वेंचर्स के साथ एक साझेदारी स्थापित की जा रही है जो प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का वित्तपोषण करने के लिये 3 मिलियन GBP (30 करोड़ रुपए) की सुविधा प्रदान करेगी।
  • यूके-इंडिया वैज्ञानिक सहयोग:
    • कई वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थान वैज्ञानिक एवं तकनीकी विचारों का आदान-प्रदान करने के लिये ज्ञान पूल बनाने हेतु एक साथ आने पर सहमत हुए हैं जिससे सहयोगी अनुसंधान का विकास हुआ है। 
  • भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग सेतु:
    • वैज्ञानिकों ने नदी प्रणालियों का कायाकल्प, जैव विविधता का संरक्षण, पारिस्थितिकी प्रणालियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के उपायों और आर्थिक विकास के लिये चिरस्थायी मॉडल बनाने हेतु चल रहे नवाचारों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • ग्लोबल यूथ फॉर गंगा: 
    • यह स्वच्छ गंगा और सभी नदियों के लिये बड़े पैमाने पर ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने के लिये एक साझा अभियान पर आधारित भारत व अन्य देशों के युवाओं का एक संघ होगा। यह संघ अंतःविषयक चर्चाओं में शामिल होगा, पूरी दुनिया में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही स्वच्छ गंगा मिशन में सहयोग को प्रोत्साहित करेगा तथा दुनिया में युवा छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों को एक साथ लाएगा। 
    • इसका उद्देश्य स्वच्छ गंगा को हकीकत बनाना और बाकी दुनिया को भी अपने राज्यों में ज़मीनी स्तर तक इसी प्रकार की पहल करने के लिये प्रेरित करना है। युवाओं द्वारा सशक्त मिशन एक ऐसा अभियान है जो आने वाली भावी पीढ़ियों के विकास में सहायक हो सकता है। 
  • क्लीन गंगा चैरिटी:
    •  चैरिटी स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज़ किया गया है और आने वाले महीनों में गंगा से जुड़े समुदायों और मित्रों को संगठित करने के उद्देश्य से जल्द ही इसकी स्थापना की जाएगी।

स्रोत: पीआईबी


शासन व्यवस्था

राष्ट्रीय कैडेट कॉर्प्स

प्रिलिम्स के लिये:

स्वच्छता अभियान,  कोविड-19, डिजिटल साक्षरता, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय कैडेट कॉर्प्स का महत्त्व 

चर्चा में क्यों?    

हाल ही में 28 नवंबर को राष्ट्रीय कैडेट कॉर्प्स (National Cadet Corps- NCC) द्वारा अपनी स्थापना की 73वीं वर्षगाँठ मनाई गई।

  • अगस्त 2020 में रक्षा मंत्रालय ने सीमा और तटीय ज़िलों में राष्ट्रीय कैडेट कॉर्प्स के विस्तार के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी।
  • मार्च 2021 में केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम, 1948 में संशोधन करने का आदेश दिया, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) में शामिल होने से प्रतिबंधित करता है।

प्रमुख बिंदु

  •  राष्ट्रीय कैडेट कॉर्प्स:
    • NCC का गठन वर्ष 1948 (एच.एन. कुंजरु समिति-1946 की सिफारिश पर) में किया गया था और इसकी जड़ें ब्रिटिश युग में गठित युवा संस्थाओं, जैसे-यूनिवर्सिटी कॉर्प्स या यूनिवर्सिटी ऑफिसर ट्रेनिंग कॉर्प्स (University Corps or University Officer Training Corps) में हैं।
      • इसके इतिहास को  'यूनिवर्सिटी कॉर्प्स' (University Corps) से जाना जा सकता है, जिसे भारतीय सेना में कर्मियों की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से भारतीय रक्षा अधिनियम, 1917 के तहत निर्मित किया गया था।
      • बाद में वर्ष 1949 में NCC का विस्तार गर्ल्स डिवीज़न को शामिल करने हेतु  किया गया ताकि देश की रक्षा के लिये इच्छुक महिलाओं को समान अवसर प्रदान किया जा सके।
      • वर्तमान में इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना विंग के लगभग 14 लाख कैडेट हैं।
    • NCC विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन है। यह हाई स्कूल और कॉलेज स्तर पर कैडेटों का नामांकन करता है तथा विभिन्न चरणों के पूरा होने पर प्रमाण पत्र भी प्रदान करता है।
      • NCC कैडेट विभिन्न स्तरों पर बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और इसमें सशस्त्र बलों तथा उनके कामकाज से संबंधित शैक्षणिक पाठ्यक्रम की बुनियादी बातें भी शामिल हैं।
      • विभिन्न प्रशिक्षण शिविर, साहसिक गतिविधियाँ और सैन्य प्रशिक्षण शिविर NCC प्रशिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है।
  • मंत्रालय:
    • NCC रक्षा मंत्रालय के दायरे में आता है और इसका नेतृत्त्व थ्री स्टार सैन्य रैंक का महानिदेशक करता है।
  • महत्त्व: 
    • NCC कैडेटों ने वर्षों से विभिन्न आपातकालीन स्थितियों के दौरान राहत प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    • चल रही महामारी के दौरान 60,000 से अधिक NCC कैडेटों को देश भर में ज़िला और राज्य प्राधिकरण के साथ समन्वय में स्वैच्छिक राहत कार्य के लिये तैनात किया गया है।
    • कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में विभिन्न पहलों के माध्यम से कैडेटों द्वारा दिये गए योगदान की देश भर के लोगों ने व्यापक रूप से सराहना की है।
    •  कैडेटों ने ‘स्वच्छता अभियान’, ‘मेगा प्रदूषण पखवाड़ा’ में पूरे मनोयोग से भाग लिया और ‘डिजिटल साक्षरता’,‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’,‘वृक्षारोपण’तथा कोविड-19 टीकाकरण अभियान आदि जैसी विभिन्न सरकारी पहलों के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • NCC की बहुमुखी गतिविधियाँ और विविध पाठ्यक्रम, युवाओं को आत्म-विकास के लिये अद्वितीय अवसर प्रदान करते हैं।
    • अनेक कैडेट्स ने खेल और रोमांच (Adventure) के क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों से देश और संगठन को गौरवान्वित किया है।  
    •  NCC वर्तमान युवाओं को कल के ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में ढालने की दिशा में अपने अथक प्रयास जारी रखे हुए है।

स्रोत: पीआईबी


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