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जैवविविधता और पर्यावरण

जलवायु की वैश्विक स्थिति: WMO

  • 30 Mar 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organisation- WMO) द्वारा जलवायु और सतत् विकास पर एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान वैश्विक जलवायु के संदर्भ में बयान जारी किया गया।

  • इसके अनुसार, साल 2018 में समुद्र के जल स्तर में तीव्र गति से वृद्धि होना दर्शाया गया है। समुद्र में अम्लीयता बरकरार रहने के परिणाम स्वरूप यह समुद्री जैव-विविधता के लिए खतरा बना रहा।

प्रमुख बिंदु

  • पिछले चार वर्षों में समुद्र के स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि के साथ अम्लीकरण अधिक पाया गया। स्थल एवं समुद्र के तापमान में वृद्धि मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन का परिणाम है।
  • पहली बार 1994 में प्रकाशित विवरण में CO2 का स्तर 357 पीपीएम था, जबकि 2017 में यह 405.5 पीपीएम तक पहुँच गया और निरंतर बढ़ता जा रहा है।
  • WMO के अनुसार, 2018 और 2019 के दौरान ग्रीनहाउस गैस की सांद्रता और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।
  • नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (National Oceanic and Atmospheric Administration) से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, ओशिनिया और दक्षिण अमेरिका में वर्ष 2018 को 10 वर्षों में सबसे गर्म वर्ष का दर्जा दिया गया।
  • वैश्विक स्तर पर कई प्रमुख जलवायु संकेतक जैसे- समुद्र के स्तर में वृद्धि और ग्लेशियर के नुकसान ने खतरनाक जलवायु परिवर्तन प्रभाव की एक स्पष्ट तस्वीर चित्रित की है।
  • 2018 में समुद्र की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म पाया गया, जिसमें प्रशांत क्षेत्र भी शामिल था।

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प्रभाव

  • समुद्र में अम्लीकरण बढ़ने के कारण समुद्री जैव विविधता पर गंभीर ख़तरा उत्पन्न हो जाता है।
  • समुद्र में BOD (Biochemical Oxygen Demand) बढ़ रही है साथ ही कम ऑक्सीजन सांद्रता वाले क्षेत्रों का विस्तार हो रहा है।
  • 2018 में वैश्विक औसत समुद्री स्तर 2017 की तुलना में लगभग 3.7 मिमी. की वृद्धि पाई गई।
  • वैश्विक रूप से समुद्रन स्तर की वृद्धि का मुख्य कारण बर्फ की चादरों का तेज़ी से पिघलना है।
  • यद्यपि 2018 की शुरुआत में कमज़ोर ला-नीना की स्थिति देखी गई थी, वर्षा पर इसका प्रभाव अपेक्षित अनुमानों के विपरीत था। उदाहरण के लिये कैलिफोर्निया में ला-नीना के दौरान एक अप्रत्याशित घटना हुई जिससे कई जगहों पर बाढ़ आ गई।

भारत के संदर्भ में

  • WMO ने 2018 में दुनिया भर के मौसम की विषम घटनाओं को भी रेखांकित किया जिसमें अगस्त 2018 में आई केरल की गंभीर बाढ़ भी शामिल है, इसके कारण भारी आर्थिक नुकसान हुआ था।
  • साथ-ही-साथ 2018 में भारत में शीत लहर का भी जिक्र किया गया है कि कैसे देश में सर्दी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गई।
  • भारतीय मानसून ने पश्चिमी घाटों और हिमालय के पूर्वी भागों में सामान्य से कम वर्षा की लेकिन पश्चिमी हिमालय में वर्षा सामान्य से अधिक पाई गई।
  • जून से सितंबर 2018 तक अखिल भारतीय स्तर पर वर्षा दीर्घकालिक औसत से लगभग 9% कम थी।

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2018: चौथा सबसे गर्म वर्ष

  • संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक के दर्ज रिकार्ड में वर्ष 2018 चौथा सबसे गर्म साल था।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization-WMO) के अनुसार, 2018 में औसत वैश्विक तापमान पूर्व औद्योगिक स्तरों से 1°C (1.8 ° F) ऊपर था।
  • 2016 सबसे गर्म वर्ष बना हुआ है जिसकी वज़ह अल-नीनो थी।
  • WMO का कहना है कि इतिहास के 20 सबसे गर्म साल पिछले 22 वर्षों के भीतर रहे हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organisation)

  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसे 23 मार्च, 1950 को मौसम विज्ञान संगठन अभिसमय के अनुमोदन द्वारा स्थापित किया गया है।
  • यह पृथ्वी के वायुमंडल की परिस्थिति और व्यवहार, महासागरों के साथ इसके संबंध, मौसम और परिणामस्वरूप उपलब्ध जल संसाधनों के वितरण के बारे में जानकारी देने के लिये संयुक्त राष्ट्र (UN) की आधिकारिक संस्था है।
  • 191 सदस्यों वाले विश्व मौसम विज्ञान संगठन का मुख्यालय जिनेवा (Geneva) में है।
  • उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम दिवस मनाया जाता है।

स्रोत- हिंदुस्तान टाइम्स

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