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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

तमिलनाडु स्वच्छ ऊर्जा में शीर्ष स्थान की ओर

  • 30 Mar 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तमिलनाडु कुल स्थापित क्षमता के साथ शीर्ष स्थान हासिल करने की ओर अग्रसर है क्योंकि राज्य में आने वाले वर्ष में पवन और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्षमता वृद्धि की अपार संभावनाएँ हैं।

कर्नाटक की क्षमता

  • जनवरी 2019 तक कर्नाटक 13,042 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में शीर्ष राज्य है, जबकि तमिलनाडु की कुल स्थापित क्षमता 12,125 मेगावाट है।
  • तमिलनाडु पवन क्षमता में अग्रणी राज्य है, जबकि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कर्नाटक शीर्ष स्थान पर है।
  • सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ती स्थापित क्षमता और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सुधार के कारण कर्नाटक लगभग चार साल पहले पाँचवे स्थान से शीर्ष स्थान पर पहुँच गया है।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, सितंबर 2015 में तमिलनाडु 8,466 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ अक्षय ऊर्जा में अग्रणी राज्य था, जबकि कर्नाटक की क्षमता 4,606 मेगावाट थी।
  • कर्नाटक की 13,042 मेगावाट की कुल नवीकरणीय क्षमता में से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 5,323 मेगावाट (जिसमें धरातलीय क्षमता में 5,175 मेगावाट तथा रूफटॉप श्रेणी में 154 मेगावाट) शामिल हैI इसके बाद 4,683 मेगावाट क्षमता के साथ पवन ऊर्जा का स्थान आता है तथा शेष छोटे हाइड्रो, को-जेन पावर (Co-gen Power) तथा बायो-पावर हैं।

तमिलनाडु की क्षमता

  • तमिलनाडु में पवन ऊर्जा 8,764 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ प्रमुख बनी हुई है, जबकि सौर श्रेणी में राज्य की कुल स्थापित क्षमता 2,233 मेगावाट (धरातलीय स्तर पर 2,098 मेगावाट तथा रूफटॉप स्तर पर 135 मेगावाट) है।
  • जैव-शक्ति (Bio-power) तथा को-जेन (Co-gen) क्षमता का कुल योगदान क्रमशः 1,004 मेगावाट तथा 941 मेगावाट है तथा छोटे हाइड्रो की कुल क्षमता 123 मेगावाट है।
  • अक्षय ऊर्जा परामर्श फर्म ब्रिज ने उम्मीद जताई है कि 2019 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कुल क्षमता 15,860 मेगावाट हो जाएगी।
  •  तमिलनाडु में 1,872 मेगावाट नई सौर क्षमता के बढ़ने की उम्मीद है, जबकि कर्नाटक में 1,555 मेगावाट की वृद्धि की संभावना है।

पवन ऊर्जा क्षेत्र

  • 2019 में पवन ऊर्जा क्षेत्र में समग्र रूप से क्षमता वृद्धि 2,300 मेगावाट होने की उम्मीद है तथा तमिलनाडु और गुजरात में नई क्षमता स्थापित होने की उम्मीद है।
  • अनुकूल परिस्थिति के कारण तमिलनाडु कर्नाटक की तुलना में काफी अधिक वृद्धि कर सकता है और समस्त राज्यों में शीर्ष स्थान हासिल कर सकता है।

स्रोत : द हिंदू बिज़नेस लाइन

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